महानगर की समस्या पर निबंध Essay in Hindi



महानगर की समस्या पर निबंध – नमस्कार दोस्तों एक फिर से हम आपके साथ एक नया निबंध शेयर करने जा रहे है और आज का हमारा टॉपिक है महानगर की समस्या. ये टॉपिक भी बच्चो को एग्जाम में बहुत बार पूछा जा चूका है.

लेकिन बच्चो को इस टॉपिक में एस्से लिखने में बहुत ही ज्यादा प्रॉब्लम होती है क्यूंकि हर कोई महानगरो में नहीं रहता है तो उन बच्चो को कैसे पता चलेगा की बड़े बड़े शहरों में क्या प्रॉब्लम होती होती और इसी वजह से बच्चे एग्जाम में अच्छे से इस टॉपिक पर निबंध नहीं लिख पाते है.

लेकिन आप लोगो को चिंता करने की कोई भी जरुरत नहीं है क्यूंकि आज हम आज के इस लेख में आपके साथ महानगर की समस्या पर हिंदी निबंध शेयर कर रहे है और आप इस हिंदी एस्से को इस्तमाल कर सकते हो.

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तो चलो दोस्तों अब हम सीधे बिना टाइम बर्बाद करते हुए आज के इस पोस्ट की शुरुवात करते है.

महानगर की समस्या पर निबंध Essay

छोटी बस्तियां खेलकर गांव, गांव फैलकर कस्बे, कस्बे नगर तथा नगर महानगर में बदल जाया करते हैं. ऐसा प्रकृति का नियम है. परंतु जब से देश के ग्रामीण उद्योग धंधे नष्टप्राय होने लगे तो नगरों तथा महानगरों का विकास प्रारंभ होने लगा.

तभी से वास्तव में महानगरीय जीवन समस्या प्रधान बनने लगा. ग्राम व्यवस्था के चरमराने के उपरांत नगरों महानगरों पर सबसे पहले तो आबादी का दबाव पढ़ना प्रारंभ हो गया. एक तो नगरों महानगरों की जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार पहले ही तेज थी,

उस पर काम धंधे की खोज में देहातो से पलायन कर आने वाले लोगों ने दबाव और भी बढ़ा दिया निरंतर बढ़ती जनसंख्या का दबाव महानगरों की एक भयंकर समस्या है. दूसरी समस्या आवास की, जो बढ़ती जनसंख्या का परिणाम है.

जनसंख्या वृद्धि के अनुपात में आवास की व्यवस्था नहीं हो पाने के कारण, महानगरों के आलीशान भवनों की बगल में झोपड़पट्टियों का निर्माण होने लगा. धीरे-धीरे इसने एक विकट समस्या का रूप धारण कर लिया है.

फलस्वरुप महानगरों में गंदगी बढ़ती गई, जिसका इलाज आज तक भी संभव न हो सका. इनके अतिरिक्त निरंतर हो रहे औद्योगिकरण ने भी महानगरीय जीवन को कई तरह से प्रदूषित एवं समस्याग्रस्त बना रखा है.

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इन उद्योगों, कारखानों वह छोटी-छोटी फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं, कचरे, गंदे पानी आदि के फैलने से वातावरण दूषित हो जा रहा है. उस पर तरह-तरह के बढ़ते वाहनों का दबाव, उन से निकलता धुआ और जहरीली गैसों में महानगरों के वातावरण को विषाक्त एवं दमघोटू बना दिया है.

परिणाम स्वरुप पर्यावरण दूषित होता जा रहा है.वहां के नागरिक उस दमघोटू माहौल में रहने को विवश है. उनके साथ साथ ध्वनि प्रदूषण की समस्या भी बड़ी गंभीर है. महानगरों की एक अन्य समस्या है उनके आकार का बेतरतीबी से लगातार बढ़ते जाना जिसके फलस्वरुप वहां शुद्ध हवा,पानी का न मिल पाना.

बिजली की समस्या तो वहां सदा से ही फैला हुआ है.वहां के लोगों का आधा जीवन घर से कार्यालय जाने तथा आने में व्यतीत हो जाता है. वहां की जनसंख्या के अनुपात में यातायात के साधनों के के अभाव के कारण लोगों को बसों में धक्के मुक्के खाकर आना जाना पड़ता है.

महानगर निवासियों को ताजे फल, दूध तथा सब्जियों के लिए प्राय तरस जाना पड़ता है. राशन तक भी अच्छा और समय बदल देते नहीं मिल पाता है महानगरों को इन समस्याओं से कैसे छुटकारा दिलाया जा सकता है?

इसका उत्तम उपाय है बिखेरना. सरकारी कार्यालयों फोन महानगरों से बाहर रखा जाए तथा उद्योग-धंधों को भी देहातो में बेकार पड़ी बंजर जमीन पर लगाया जाए. इससे महानगरों पर जनसंख्या का दबाव भी कम होगा तथा पर्यावरण भी दूषित होने से बचेगा.

आपकी ओर दोस्तों

तो दोस्तों ये था महानगर की समस्या पर निबंध हम उम्मीद करते है की आज के इस हिंदी एस्से को पढने के बाद आपको किसी भी तरीके की प्रॉब्लम नहीं होगी और आप इस आर्टिकल को इस्तमाल कर सकते हो एजुकेशनल पर्पस के लिए.

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