करवा चौथ व्रत कथा डाउनलोड 2021

करवा चौथ व्रत कथा डाउनलोड – प्रणाम मित्रो आज हम इस लेख में आपके साथ करवा चौथ की व्रत कथा और कहानी शेयर कर रहे है ताकि ज्यादा से ज्यादा शादीशुदा महिला करवा चौथ के दिन इस व्रत कथा को पढ़ पाए. मित्रो करवा चौथ हर पत्नी के लिए एक बहुत ही बड़ा त्यौहार होता है और इस दिन हर बीवी अपने पति की लम्बी उम्र के लिए बिना कुछ खाए पिए व्रत रखती है.

जो महिलाए करवा चौथ का व्रत रखती है तो उनको उस दिन पति की पूजा और व्रत तोड़ने से पहले इस व्रत कथा को पढ़ते है. लेकिन ऐसी बहुत महिलाए होती है जिनको ये कथा पता नहीं होती है. तो उन सभी की मद्दद करने के लिए हम आज के पोस्ट में पूरी व्रत कथा ( कहानी ) को शेयर कर रहे है ताकि किसी भी पत्नी को प्रॉब्लम ना हो. तो चलो दोस्तों इस कहानी को देखते है.

करवा चौथ व्रत कथा डाउनलोड 2021

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बहुत समय पहले इन्द्रप्रस्थपुर के एक शहर में वेदशर्मा नाम का एक ब्राह्मण रहता था। वेदशर्मा का विवाह लीलावती से हुआ था जिससे उसके सात महान पुत्र और वीरावती नाम की एक गुणवान पुत्री थी। क्योंकि सात भाईयों की वह केवल एक अकेली बहन थी जिसके कारण वह अपने माता-पिता के साथ-साथ अपने भाईयों की भी लाड़ली थी।

जब वह विवाह के लायक हो गयी तब उसकी शादी एक उचित ब्राह्मण युवक से हुई। शादी के बाद वीरावती जब अपने माता-पिता के यहाँ थी तब उसने अपनी भाभियों के साथ पति की लम्बी आयु के लिए करवा चौथ का व्रत रखा। करवा चौथ के व्रत के दौरान वीरावती को भूख सहन नहीं हुई और कमजोरी के कारण वह मूर्छित होकर जमीन पर गिर गई।

सभी भाईयों से उनकी प्यारी बहन की दयनीय स्थिति सहन नहीं हो पा रही थी। वे जानते थे वीरावती जो कि एक पतिव्रता नारी है चन्द्रमा के दर्शन किये बिना भोजन ग्रहण नहीं करेगी चाहे उसके प्राण ही क्यों ना निकल जायें।

सभी भाईयों ने मिलकर एक योजना बनाई जिससे उनकी बहन भोजन ग्रहण कर ले। उनमें से एक भाई कुछ दूर वट के वृक्ष पर हाथ में छलनी और दीपक लेकर चढ़ गया। जब वीरावती मूर्छित अवस्था से जागी तो उसके बाकी सभी भाईयों ने उससे कहा कि चन्द्रोदय हो गया है और उसे छत पर चन्द्रमा के दर्शन कराने ले आये।

वीरावती ने कुछ दूर वट के वृक्ष पर छलनी के पीछे दीपक को देख विश्वास कर लिया कि चन्द्रमा वृक्ष के पीछे निकल आया है। अपनी भूख से व्याकुल वीरावती ने शीघ्र ही दीपक को चन्द्रमा समझ अर्घ अर्पण कर अपने व्रत को तोड़ा।

वीरावती ने जब भोजन करना प्रारम्भ किया तो उसे अशुभ संकेत मिलने लगे। पहले कौर में उसे बाल मिला, दुसरें में उसे छींक आई और तीसरे कौर में उसे अपने ससुराल वालों से निमंत्रण मिला। पहली बार अपने ससुराल पहुँचने के बाद उसने अपने पति के मृत शरीर को पाया।

अपने पति के मृत शरीर को देखकर वीरावती रोने लगी और करवा चौथ के व्रत के दौरान अपनी किसी भूल के लिए खुद को दोषी ठहराने लगी। वह विलाप करने लगी। उसका विलाप सुनकर देवी इन्द्राणी जो कि इन्द्र देवता की पत्नी है, वीरावती को सान्त्वना देने के लिए पहुँची।

वीरावती ने देवी इन्द्राणी से पूछा कि करवा चौथ के दिन ही उसके पति की मृत्यु क्यों हुई और अपने पति को जीवित करने की वह देवी इन्द्राणी से विनती करने लगी। वीरावती का दुःख देखकर देवी इन्द्राणी ने उससे कहा कि उसने चन्द्रमा को अर्घ अर्पण किये बिना ही व्रत को तोड़ा था जिसके कारण उसके पति की असामयिक मृत्यु हो गई।

देवी इन्द्राणी ने वीरावती को करवा चौथ के व्रत के साथ-साथ पूरे साल में हर माह की चौथ को व्रत करने की सलाह दी और उसे आश्वासित किया कि ऐसा करने से उसका पति जीवित लौट आएगा।

इसके बाद वीरावती सभी धार्मिक कृत्यों और मासिक उपवास को पूरे विश्वास के साथ करती। अन्त में उन सभी व्रतों से मिले पुण्य के कारण वीरावती को उसका पति पुनः प्राप्त हो गया।

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आपकी और दोस्तों

तो दोस्तों ये था करवा चौथ की व्रत कथा, हम उम्मीद करते है की अब किसी भी पत्नी को कथा पढने में कोई भी प्रॉब्लम नहीं होगी. दोस्तों यदि इस शुभ त्यौहार के दिन आप इस कथा को फेसबुक और whatsapp पर अपने दोस्तों और घर परिवारवालों के साथ जरुर शेयर करे ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाओ की हेल्प हो पाए. Happy Karwa chauth

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