TRP Full Form in Hindi | TRP का फुल फॉर्म क्या है

TRP Full Form in Hindi: आज के इस आर्टिकल में हम आपको टीआरपी के बारे में जानकारी देने वाले हैं। आज के इस आर्टिकल में आप जानेंगे कि, टीआरपी का फुल फॉर्म क्या होता है।अगर आप इंटरनेट पर यह सर्च करते रहते हैं कि टीआरपी क्या है या फिर टीआरपी का मतलब क्या होता है, तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं, क्योंकि आज के इस आर्टिकल में आपको इसके बारे में जानकारी प्राप्त होगी।

दोस्तों हमारे भारत देश की जनसंख्या बहुत ही ज्यादा है और हमारे भारत में विभिन्न धर्मों तथा मजहब के लोग रहते हैं, जिनकी अपनी अलग अलग बोली भाषा और पहनावा है। हमारे भारत में टोटल 29 राज्य हैं, जिनमें से सात केंद्र शासित प्रदेश हैं और हर राज्य की अपनी अलग भाषा है।

हर राज्य को अपने भाषा पर गर्व है और हर राज्य अपनी भाषा के संरक्षण के लिए काम करता है। जैसे गुजरात में गुजराती भाषा अधिक बोली जाती है, पंजाब में पंजाबी भाषा अधिक बोली जाती है, तमिलनाडु में तमिल भाषा अधिक बोली जाती है।

बिहार में भोजपुरी भाषा अधिक बोली जाती है, कर्नाटक में तेलुगु भाषा अधिक बोली जाती है, हरियाणा में हरियाणवी भाषा अधिक बोली जाती है।

हर राज्य का आदमी अपनी भाषा से अथाह प्रेम करता है और इसीलिए लोगों को उनकी लोकल भाषा में ही जानकारियां प्राप्त हो, इसलिए हमारे भारत देश में असंख्य टीवी चैनल समय-समय पर लॉन्च होते रहते हैं।

हमारे भारत में ऐसे कई चैनल है, जो लोकल भाषा में लोगों को जानकारी देने का काम करते हैं। हालांकि हम सभी दूरदर्शन से तो परिचित ही होंगे, वैसे अधिकतर लोग यही जानते हैं कि दूरदर्शन सिर्फ हिंदी में ही आता है परंतु यह गलत जानकारी है। दूरदर्शन हिंदी भाषा के अलावा उर्दू भाषा तथा अन्य भारत की लोकल भाषाओं में भी आता है।

दोस्तों कभी ना कभी आपने टीवी चैनल या समाचार पत्रों में यह अवश्य सुना होगा कि किसी एक खास टेलीविजन के शो की टीआरपी बढ़ गई है या फिर घट गई है। आज के समय में लगभग सभी चैनल अधिक टीआरपी पाने की होड़ में लगे हुए हैं

परंतु क्या आप जानते हैं कि आखिर टीआरपी की मीनिंग हिंदी में क्या होती है या फिर टीवी चैनलों के लिए टीआरपी क्यों जरूरी होता है, अगर आसान भाषा में कहा जाए तो टीआरपी एक ऐसा टूल होता है, जिससे किसी भी चैनल या उसके प्रोग्राम की पब्लिसिटी को मापा जाता है

और जिस चैनल या उसके किसी शो की टीआरपी ज्यादा होती है, उस चैनल को अधिक टीआरपी होने के कारण कई फायदे मिलते हैं, जिसके बारे में हम आगे जानेंगे।

अगर हम आज की बात करें तो वर्तमान के समय में आपने टीवी में देखा होगा कि अर्नब गोस्वामी के रिपब्लिक भारत सबसे ज्यादा है। हालांकि ये न्यूज़ कैटेगरी में है।पहले न्यूज़ कैटेगरी में सबसे अधिक टीआरपी आज तक चैनल की होती थी

परंतु जब से अर्णब गोस्वामी ने रिपब्लिक भारत चैनल लांच किया है, तब से ही लगातार इसकी टीआरपी में बढ़ोतरी हो रही है और रिपब्लिक भारत चैनल ने टीआरपी के सारे आंकड़े ध्वस्त कर दिए हैं। आइए टीआरपी के बारे में अधिक बातें जानते हैं।

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■ टीआरपी का अंग्रेजी में फुल फॉर्म क्या होता है

TRP full form in hindi

सबसे पहले तो आइए जानते हैं, कि टीआरपी का अंग्रेजी में फुल फॉर्म क्या होता है। टीआरपी का अंग्रेजी में फुल फॉर्म होता है “टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट”

■ TRP क्या है

टीआरपी का फुल फॉर्म होता है “टेलीविजन रेटिंग पॉइंट” और इसके द्वारा यह पता लगाया जाता है कि किस चैनल को और किस कार्यक्रम को दर्शक सबसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं या फिर किस कार्यक्रम को सबसे ज्यादा टीवी पर देखा जा रहा है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सभी चैनलों की टीआरपी को जानने के लिए लगभग सभी बड़े शहरों में एक खास जगह पर एक डिवाइस लगा दिया जाता है, जिसे पीपल मीटर कहा जाता है

परंतु यह मीटर हर किसी के घर में नहीं लगाया जाता है, इसके लिए कोई विशेष जगह ही चुनी जाती है और वहां इस डिवाइस को लगाया जाता है।

खासकर यह डिवाइस भारत के बड़े-बड़े शहरों जैसे कि दिल्ली चेन्नई मुंबई कोलकाता अहमदाबाद विशाखापट्टम नोएडा गुड़गांव चंडीगढ़ पुणे नागपुर असम मेघालय इंदौर रायपुर कानपुर भोपाल जयपुर दिल्ली एनसीआर पटना तथा अन्य बड़े शहरों में लगाया गया है।

■ TRP का कैसे पता लगाया जाता है

टीआरपी का फुल फॉर्म क्या होता है, इसके बारे में आपको जानकारी मिल गई होगी। इसके अलावा आपने यह भी जान लिया कि टीआरपी क्या होती है, आइए अब यह जानते हैं कि आखिर टीआरपी का पता कैसे लगाया जाता है।

टीआरपी का पता लगाने के लिए भारत के लगभग सभी बड़े शहरों में किसी खास जगह पर टीआरपी मीटर जिसे पीपल मीटर भी कहा जाता है, को लगा दिया जाता है और यह डिवाइस उस एरिया में चलने वाले सभी सेट टॉप बॉक्स जुड़ा हुआ होता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सही टीआरपी जानने के लिए केबल टीवी की जगह सेटअप बॉक्स लगाने पर जोर दिया जाता है।इससे सभी चैनलों की सही टीआरपी का पता लगाया जा सकता है।

किसी विशेष जगह पर लगाए गए पीपल मीटर अपने आसपास के एरिया में चलने वाले सभी सेट टॉप बॉक्स की जानकारी मॉनिटर करके उसे मॉनिटरिंग टीम के पास भेज देता है और फिर वह टीम टीआरपी का कैलकुलेशन करने वाली संस्था के पास उन जानकारियों को भेज देती है और फिर वह संस्था टीआरपी का कैलकुलेशन करके सभी चैनलों की टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट जारी करती है।

टेलीविजन रेटिंग पॉइंट में यह जानकारी बताई जाती है कि, दर्शक किस चैनल को सबसे ज्यादा देख रहे हैं और वह जिस चैनल को देख रहे हैं उसमें वह सबसे अधिक किस कार्यक्रम को देख रहे हैं।

यह सभी बातें रेटिंग के हिसाब से बताई जाती है, इसीलिए इसे टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट कहा जाता है। पीपल मीटर के द्वारा भेजी गई इंफॉर्मेशन को मॉनिटरिंग टीम एनालिसिस करती है और अपने एनालिसिस के आधार पर वह यह जानकारी सार्वजनिक करती है कि किस चैनल की और कौन से शो की टीआरपी सबसे ज्यादा है।

■ TRP से टीवी चैनल की इनकम कैसे होती है

अभी तक आपने यह जाना कि टीआरपी का फुल फॉर्म क्या होता है, टीआरपी क्या होता है और किसी भी चैनल की टीआरपी कैसे नापी जाती है।

आइए अब आपको जानकारी देते हैं कि आखिर टीआरपी अधिक होने के कारण चैनल को कौन से फायदे होते हैं और अधिक टीआरपी होने से चैनल की इनकम कैसे होती है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें किसी भी चैनल की 80 परसेंट कमाई विज्ञापन यानी की एडवर्टाइजमेंट के द्वारा ही होती है और एडवर्टाइजमेंट हर कार्यक्रम के 1 या 2 मिनट के ब्रेक में आते ही रहते हैं।

इन एडवर्टाइजमेंट में कभी किसी घड़ी का विज्ञापन आता है, तो कभी किसी पेंट का तो, कभी किसी ब्रश का तो कभी किसी टूथपेस्ट का तो कभी किसी भी प्रोडक्ट का विज्ञापन आता रहता है।ऐसे में जो लोग इसके बारे में नहीं जानते वह यह सोचते हैं कि, आखिर टीवी चैनलों को इन विज्ञापन दिखाने से कौन से फायदे होते हैं

तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि टीवी चैनल अपने चैनल पर विज्ञापन दिखाने के लिए विज्ञापन देने वाले व्यक्ति या फिर कंपनी से अच्छी खासी रकम वसूल करती हैं और सभी कंपनियां तथा व्यक्ति ऐसे चैनल को ही अपना विज्ञापन देना पसंद करते हैं जिसे अधिक दर्शक देखते हैं

क्योंकि जिस टीवी चैनल को अधिक लोग देखते हैं, उस पर दिखाए गए विज्ञापन पर भी उन सभी लोगों की नजर जाती है और ऐसा होने से जिस कंपनी ने टीवी चैनल पर अपना विज्ञापन दिया होता है उसकी मार्केट वैल्यू बढ़ती है और लोग उसके प्रोडक्ट को खरीदते हैं। इससे उस कंपनी के प्रोडक्ट की बिक्री होती है और उस कंपनी की भी कमाई होती है।

उदाहरण के तौर पर इस समय अर्णब गोस्वामी के न्यूज़ चैनल रिपब्लिक भारत की टीआरपी सबसे ज्यादा है और आपने यह ध्यान दिया होगा कि इस समय अर्नब गोस्वामी के न्यूज़ चैनल पर जो भी विज्ञापन दिखाए जा रहे हैं वह काफी बड़ी कंपनियों के विज्ञापन दिखाए जा रहे हैं

और यह कंपनियां अपने विज्ञापन रिपब्लिक भारत टीवी चैनल पर दिखाने के लिए अरनव गोस्वामी को काफी बड़ी रकम भी दे रही है। इससे इन कंपनियों की यही कोशिश रहती है कि उनके विज्ञापन को अधिक से अधिक लोग देखे

साथ ही उनके प्रोडक्ट की बिक्री हो और जो चैनल यह विज्ञापन दिखाते हैं वह विज्ञापन देने वाले व्यक्ति या कंपनी से अपने चैनल पर विज्ञापन दिखाने के लिए अच्छी रकम चार्ज करते हैं।

इस तरह से उनकी कमाई होती है और वह अपने न्यूज़ चैनल में काम करने लोगों की तनख्वाह देने के बाद तथा अन्य खर्च निकालने के बाद शुद्ध रकम की बचत करते हैं।

टेलीविजन रेटिंग पॉइंट का टीवी चैनल से काफी गहरा संबंध है और इसीलिए आपने ध्यान दिया होगा कि पिछले कुछ सालों से सरकार लगातार केबल टीवी के जगह लोगों से सेट टॉप बॉक्स लगाने की अपील कर रही है और जो सेट टॉप बॉक्स निर्माता कंपनियां है वह भी सेट टॉप बॉक्स के अनेक फायदे ग्राहकों को बता रहे हैं ताकि लोग सेटअप बॉक्स लगाने के प्रति आकर्षित हो।

■ टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट का पता कौन सी संस्था लगाती है

हर चीज के पीछे कोई ना कोई संस्था होती है और उसी तरह टीआरपी का पता लगाने के लिए भी हमारे भारत में एक संस्था है। हमारे भारत में किसी भी चैनल की टीआरपी का अनुमान लगाने के लिए जो संस्था कार्यरत है उसे “टेलीविजन ऑडियंस मेजरमेंट इंडिया” कहा जाता है।यह संस्था भारत के सभी टीवी चैनल की टीआरपी का अनुमान लगाने का काम करती है।

टेलीविजन ऑडियंस मेजरमेंट इंडिया एजेंसी विभिन्न प्रकार की फ्रीक्वेंसी की जांच करके यह पता लगाने का काम करती है कि कौन सा टीवी चैनल किस समय सबसे अधिक देखा जा रहा है।

इसी तरह यह कंपनी कई हजार फ्रीक्वेंसी की जानकारी इकट्ठा करके पूरे देश के प्रसिद्ध टीवी चैनल और फेमस टीवी कार्यक्रम की रेटिंग का पता लगाने का काम करती है।

टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट के कारण किसी भी टीवी चैनल या फिर प्रोग्राम की प्रसिद्धि को समझने में आसानी होती है और सामान्य दर्शकों को तथा अन्य लोगों को यह जानकारी आसानी से प्राप्त हो जाती है कि किस चैनल को सबसे ज्यादा देखा जा रहा है।

जिस चैनल को जितने लोग जितने ज्यादा समय तक देखते हैं, उस चैनल की टीआरपी उतनी ही अधिक होती है।टीआरपी अधिक होने से एडवरटाइजर को अपने विज्ञापन देने में आसानी होती है। हाई टीआरपी वाले चैनल को अधिक विज्ञापन मिलते हैं।

टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट के अनुसार सबसे प्रसिद्ध चैनलों की लिस्ट बनाई जाती है
और फिर सप्ताह में या फिर महीने के हिसाब से टॉप टेन टेलीविजन रेटिंग पॉइंट टीवी सीरियल और टीवी चैनलों की लिस्ट बनायी जाती है।

वर्तमान के समय में हमारे भारत देश में इंडियन टेलीविजन ऑडियंस मेजरमेंट ही एक ऐसी संस्था है, जो टीआरपी का अनुमान लगाने का काम करती है।

■ टीआरपी का क्या महत्व है

टीआरपी का इतना महत्व इसीलिए है कि इसका सीधा संबंध चैनलों से होता है और जिस चैनल को कम दर्शक देखते हैं, उसकी टीआरपी गिर जाती है और जिस चैनल को कम लोग देखते हैं उस पर विज्ञापन भी कम ही आते हैं

या फिर कंपनियां उस चैनल को विज्ञापन कम देती हैं। इससे उसकी कमाई घट जाती है। बाकी ऐसे कई चैनल भी है जो टीआरपी के मामले मे बहुत आगे हैं और उनकी कमाई भी बहुत अधिक है।

टेलीविजन रेटिंग पॉइंट सबसे ज्यादा विज्ञापनदाता के लिए महत्वपूर्ण रखती है, क्योंकि इससे उन्हें बड़ी आसानी से यह पता लग जाता है कि किस चैनल पर अपना विज्ञापन देने से उनके विज्ञापन को अधिक से अधिक लोग देखेंगे।

इसमें विज्ञापन देने वाले और विज्ञापन लेने वाले दोनों का फायदा होता है। जो विज्ञापन देता है वह अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग करता है और जो विज्ञापन लेता है उसे विज्ञापन देने वाले से अच्छी खासी रकम मिलती है, विज्ञापन को अपने टीवी चैनल पर दिखाने के लिए।

टीआरपी विज्ञापन देने वाले लोगों के लिए बहुत ही उपयोगी साबित होती है, क्योंकि हर विज्ञापन देने वाला व्यक्ति या फिर कंपनी यही चाहते हैं कि उनके विज्ञापन को अधिक से अधिक लोग देखें

और इसीलिए वह टेलीविजन रेटिंग पॉइंट के हिसाब से जिस चैनल की रेटिंग सबसे ज्यादा होती है, उस पर ही अपना विज्ञापन देना पसंद करते हैं, क्योंकि जिस चैनल की टीआरपी जितनी ज्यादा होगी उसे उतने ही ज्यादा कॉन्ट्रैक्ट मिलेंगे और उसकी कमाई भी अधिक होगी।

इसके अलावा जो कंपनी अपना विज्ञापन ऐसे टीवी चैनल पर देती है, उसे भी इससे काफी फायदा होता है और उसके प्रोडक्ट का प्रचार अधिक से अधिक होता है, क्योंकि आपने वह कहावत तो सुनी ही होगी कि जो दिखता है वही बिकता है।

अधिक विज्ञापन पाने के लिए आज के समय मे सभी टीवी चैनल अपने चैनल की टीआरपी बढ़ाने की कोशिश में लगातार लगे रहते हैं।

■ टीवी चैनल टीआरपी कम ज्यादा होने से क्या प्रभाव पड़ता है

किसी भी चैनल की टीआरपी कम या ज्यादा होने से इसका सीधा असर उसकी कमाई पर होता है। अगर हम इसे उदाहरण के तौर पर समझे तो अगर किसी चैनल की टीआरपी कम है तो उसे कम एडवर्टाइजमेंट मिलेंगे और कम एडवर्टाइजमेंट मिलने के कारण उस चैनल को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

जैसे कि उस चैनल में काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी देने में दिक्कत आ सकती है या फिर कभी-कभी तो कई टीवी चैनल बंद भी हो जाते हैं, इसके अलावा उन्हें अपने अन्य खर्चे संभाले में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

वही जिस चैनल की टीआरपी ज्यादा होती है उसे अधिक विज्ञापन मिलते हैं और अधिक विज्ञापन मिलने के कारण उसकी कमाई भी अधिक होती है, जिससे वह चैनल अपने चैनल में काम करने वाले सभी कर्मचारियों की सैलरी समय पर दे देते हैं तथा अन्य खर्च निकालने के बाद जो रकम बचती है, वह उसे शुद्ध मुनाफा समझते हैं।

हमारे भारत देश में आज तक ऐसे कई चैनल हुए हैं, जिन्होंने सफलता की ऊंचाइयों को छुआ है और कई ऐसे चैनल पर हुए हैं जिन्हें कम टीआरपी मिलने के कारण उनके मालिकों ने बंद कर दिया है।

■ किस प्रकार मिलते है विज्ञापन

जैसा कि हमने आपको बताया कि किसी चैनल या फिर कार्यक्रम को मिलने वाले एडवर्टाइजमेंट में उसकी टीआरपी काफी अहम भूमिका निभाती है, परंतु यह कैसे होता हैं, उसके बारे में आइए हम आपको जानकारी दे देते हैं।

दरअसल जब टीआरपी की मॉनिटरिंग करने वाली टीम को किसी चैनल या फिर किसी कार्यक्रम की टीआरपी टॉप पर होने की जानकारी मिलती है, तब वह उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करती है और विज्ञापन देने वाली कंपनियां लगातार उस रिपोर्ट पर नजर बनाए रखती हैं

और जिस कार्यक्रम या फिर चैनल की टीआरपी अधिक होती है, विज्ञापन देने वाली कंपनियां उस चैनल पर अपना विज्ञापन देने के लिए उस चैनल के मालिक से संपर्क करती हैं।

इस तरह उस चैनल का मालिक उस कंपनी के विज्ञापन को अपनी टीवी पर दिखाने के लिए राजी हो जाता है, तो फिर विज्ञापन देने वाले और विज्ञापन लेने वाले के बीच एक एग्रीमेंट होता है, जिसके अनुसार कंपनी के विज्ञापन को किस समय और दिन में कितनी बार दिखाना है यह तय होता है

और इसके लिए टीवी चैनल विज्ञापन देने वाली कंपनियां से अपनी रकम वसूल कर करते हैं। इस तरह से टीवी चैनल की कमाई होती है और जो कंपनियां टीवी चैनल पर अपना विज्ञापन देती है, उनके भी प्रोडक्ट का प्रचार आसानी से हो जाता है।

■ TRP का दर्शकों के लिए क्या महत्व है

वैसे तो किसी भी कार्यक्रम की टीआरपी से दर्शकों का कोई भी सीधा संबंध नहीं होता है क्योंकि किसी भी कार्यक्रम को देखना है या नहीं देखना है यह दर्शकों के मन के ऊपर आधारित होता है

परंतु अगर किसी कार्यक्रम या फिर चैनल की टीआरपी बहुत ज्यादा है, तो इसका मतलब यह है कि लोग उस चैनल या फिर उस कार्यक्रम को पसंद कर रहे हैं।

इस तरह से दर्शक किसी भी चैनल की या फिर किसी भी कार्यक्रम की टीआरपी को चेक करके यह पता लगा सकता है कि, उस टीवी चैनल या फिर उस कार्यक्रम को देखना चाहिए या नहीं।

■ Online TRP क्या है

आजकल अधिकतर टीवी शो ऑनलाइन स्ट्रीमिंग एप्लीकेशन और अन्य सोशल मीडिया प्लीकेशन पर भी दिखाई जाते हैं, बल्कि कई टीवी चैनल तो अपना लाइव चैनल फेसबुक पर भी दिखाते हैं

और ऑनलाइन टीआरपी किसी भी टीवी कार्यक्रम की लोकप्रियता को मापने का तरीका है। इसके लिए टीआरपी ट्रैक करने वाली एजेंसी टि्वटर फेसबुक जैसी एप्लीकेशन पर पोस्ट किए गए वीडियो को मिलने वाले डिस्कशन और Views की संख्या के आधार पर मॉनिटर करती हैं और उसी आधार पर समय-समय पर ऑनलाइन टीआरपी जारी की जाती है।

■ टीआरपी से जुड़े इम्पोर्टेन्ट क्वेश्चन

– टीआरपी का फुल फॉर्म क्या होता है

टीआरपी का फुल फॉर्म होता है टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट

– टीआरपी कैसे मापी जाती है

भारत के सभी बड़े शहरों में एक गुप्त जगह पर मीटर फिट किया जाता है जिसे पीपल मीटर कहा जाता है, यह सेट टॉप बॉक्स से जानकारी लेकर टीआरपी मॉनिटरिंग टीम को भेजता है और फिर वह मॉनिटरिंग टीम उस डाटा का एनालिसिस करके सभी चैनलों की टीआरपी सार्वजनिक करती है।

– ज्यादा टीआरपी से चैनल को क्या फायदा होता है

जिस चैनल की टीआरपी ज्यादा होती है, उसे अधिक रेट वाले और ज्यादा मात्रा में विज्ञापन मिलते हैं। टीआरपी अधिक होना मतलब कि उस चैनल को अधिक लोग देख रहे हैं और सभी विज्ञापनदाता कंपनी यही चाहती है कि उनके विज्ञापन को अधिक से अधिक लोग देखें, ताकि उनके प्रोडक्ट के बारे में अधिक से अधिक लोग जान पाए और उनका उत्पाद बिके।

– कम टीआरपी से चैनल को क्या नुकसान होता है

जिस चैनल की टीआरपी कम होती है, उसे कम मात्रा में और कम रेट वाले विज्ञापन मिलते हैं। ऐसे में कभी-कभी टीआरपी ना मिलने के कारण कुछ चैनल मालिक अपने चैनल को बंद भी कर देते हैं, क्योंकि चैनल में काम करने वाले कर्मचारी पगार पर काम करते हैं और जब चैनल को विज्ञापन ही नहीं मिलेंगे, तो चैनल की कमाई कहां से होगी और जब चैनल की कमाई नहीं होगी तो वह अपनी कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों को तनख्वाह कहां से देगी।

– टीवी चैनल पैसे कैसे कमाते हैं

सभी टीवी चैनल विज्ञापन के द्वारा पैसे कमाते हैं और हाई रेट वाले विज्ञापन पाने के लिए अधिक टीआरपी होना जरूरी है, इसलिए हर चैनल अधिक टीआरपी प्राप्त करने के लिए विभिन्न नए-नए और इंटरटेनमेंट वाले कार्यक्रम लोगों को दिखाते हैं।

आपकी और दोस्तों:

तो दोस्तों ये था TRP का फुल फॉर्म क्या होता है, हम उम्मीद करते है की इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आप सभी को ये पता चल गया होगा की TRP का मतलब क्या होता है|

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