Steve Jobs Biography in Hindi | स्टीव जॉब्स बायोग्राफी हिंदी

Steve Jobs Biography in Hindi: स्टीव जॉब्स आधुनिक समय के वो इंसान है, जिनकी जीवनी हमारे लिए प्रेरणा का समुन्द्र है। जीवन में मुश्किलें इंसान को इस कदर घेर लेती है, कि उनसे निकलना मनुष्य के लिए मुश्किल हो जाता है।

फिर वो ऐसे अंधेरे में चला जाता है, जहां उसे प्रकाश की कोई किरण नजर नहीं आती है। जहां वो अपने आप को उस घनघोर अंधेरे में हमेशा के लिए खो देता है। लेकिन स्टीव जॉब्स की बायोग्राफ़ि हमारे लिए प्रकाश की वो किरण है जो हमें उस अंधेरे में सही रास्ता दिखाती है।

Apple कंपनी के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स वर्तमान समय में हमारे बीच तो नहीं है लेकिन उनका संघर्ष और उनकी मेहनत हमें कई वर्षों तक याद रहेगी।

उन्होने इतिहास में अपना नाम उन लोगों के साथ दर्ज करवा लिया, जिन्होंने जीवन के मुश्किल समय को अपनी सफलता का रास्ता बना लिया। स्टीव जॉब्स कहा करते थे कि “वो अपने हर एक दिन को ऐसे जीते है, जैसे की वो उनका आखिरी दिन हो।” तो आइए जानते हैं उनके जीवन संघर्ष और उनकी कामयाबी के बारे में।

Steve Jobs Biography in Hindi

स्टीव जॉब्स बायोग्राफी हिंदी

Steve Jobs Biography in hindi

1.जन्म

स्टीव जॉब्स का जन्म 24 फरवरी, 1955 को कैलिफोर्निया के सेन फ्रांसिस्को में हुआ। स्टीव के बचपन का नाम “स्टीव पॉल जॉब्स” था। इनके बचपन की कहानी बहुत दिलचस्प है। इनके जन्म के समय इनके माता-पिता (Joanne Schieble और Abdulfattah Jandali) अविवाहित थे।

Schieble के पिता इस रिश्ते से खुश नहीं थे। इस कारण Schieble और Jandali ने स्टीव को जन्म देने से पहले ही गोद देने का निर्णय कर लिया। वो अपनी संतान को एक ऐसे दंपति को गोद देना चाहते थे, जो खुद एक वकील हो।

लेकिन जिन्हें वो गोद देना चाहते थे, उन्हें बेटी चाहिए थी। परंतु किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। उन्हें बेटी नहीं बल्कि बेटा हुआ। इसलिए उन्होने स्टीव को गोद लेने से माना कर दिया।

फिर स्टीव की माँ Schieble ने किसी और दंपति को अपना बच्चा गोद दे दिया। स्टीव को Clara और Paul Jobs ने गोद लिया। स्टीव के असली माता-पिता यह चाहते थे कि उनका बेटा पढ़-लिखकर अपना नाम कमाएं।

हालांकि Clara और Paul इतने पढ़े-लिखे नहीं थे, इसलिए उन्होने स्टीव के माता-पिता को आश्वासन दिया कि वो इसे पढ़ा-लिखकर बड़ा इंसान बनाएँगे। धीरे-धीरे स्टीव Clara और Paul का प्यारा होता गया। लेकिन Clara को इस बात का डर था, कहीं वो स्टीव को वापिस न ले जाए।

2. बचपन

स्टीव जॉब्स का बचपन भी आम बच्चे की तरह बीता था। 1957 में पॉल और क्लारा ने एक लड़की को गोद लिया जिसका नाम पेट्रीसिया था। अब वो अपने दो बच्चों के साथ Monta Loma (California) में जाकर रहने लगे।

स्टीव के नए परिवार के पास इतने पैसे नहीं थे कि वो आराम से अपनी ज़िंदगी गुजार सके। उनके माता-पिता बहुत मेहनती और समझदार इंसान थे। पॉल पैसे से एक Mechanic थे, जो एक कंपनी में नौकरी करते थे।

लेकिन उन्होने अपनी पत्नी के कहने पर अपना एक गैराज खोल लिया। जिसमें वो दिन-रात मेहनत करने लगे। अपने पिता पॉल की तरह स्टीव को बचपन से ही मशीनरी का बहुत शौक था, वो पूरा दिन किसी न किसी मशीन को खोला रखते थे।

जब पॉल ने यह सब देखा तो वो हैरान रह गए। अपने बेटे के इस शौक को पूरा करने के लिए उन्होने अपने गैराज में एक Workbench का निर्माण करवाया। ताकि स्टीव मशीनरी के साथ अपने प्यार को समय दे पाए।

गैराज में काम करते समय स्टीव अपने पिता की काफी तरफ करते थे। क्योंकि उनके पिता एक बहुत अच्छे मैकेनिक थे। जो किसी भी वस्तु को बनाने में माहिर थे।

एक दिन उनके पिता ने उन्हें एक हथौड़ा दिया ताकि वो कार में “टी” की फिक्सिंग करे। लेकिन स्टीव जानते थे की वो ऐसा नहीं कर सकते। क्योंकि उनका शरीर इतना मजबूत नहीं था।

महज 10 साल की छोटी सी उम्र में ही स्टीव ने इलेक्ट्रॉनिक्स में महारत हासिल कर ली। उनकी दोस्ती भी ऐसे लड़कों से हुई जो पैसे से इंजीनियर थे।

3. पढ़ाई

स्टीव को बचपन से ही घर में रहकर पढ़ने का शौक था। उन्होने कभी भी अपने आपको स्कूल में सुरक्षित महसूस नहीं किया। उन्होने शुरुआत में एक लोकल स्कूल Monta Loma Elementary School में एड्मिशन लिया।

जहां उन्हें कई बार स्कूल से निकाल दिया गया। क्योंकि वो अपने अधिकार के लिए अध्यापकों के साथ बहस कर लेते थे। उन्हें तीसरी कक्षा में सबसे ज्यादा स्कूल से निकाला गया। स्टीव के साथ यह सब होना अब आम हो गया था।

तभी उस स्कूल की एक अध्यापक Imogene Teddy Hill ने स्टीव को इस हालत में देखा तो उसे समझने में ज्यादा समय नहीं लगा। Teddy ने स्टीव को पढ़ने में सक्षम बनाने का जिम्मा ले लिया और वो जॉब्स पर जमकर मेहनत करने लगे।

वो स्टीव को कहती थी कि तुम जब अपना काम पूरा कर लोगे तो मैं तुम्हें 5 डॉलर दूँगी। यह सुनकर विद्यार्थी स्टीव के मन में उस काम को लेकर एक जुनून पैदा हो जाता था और वो ज्यादा लगन और मेहनत से कार्य करता। Teddy चाहती थी कि स्टीव जल्दी से जूनियर हाइ स्कूल में जाकर पढे और वहाँ से विदेशी भाषाओं को सीखे।

इसलिए उन्होने कहा कि स्टीव तुम अपनी अगली 2 क्लास छोड़कर सीधे 6th क्लास में एड्मिशन ले लो। स्टीव ने किसी तरह अपने माता-पिता को समझाकर Crittenden Middle School में 6वीं कक्षा में प्रवेश ले लिया।

लेकिन वहाँ स्टीव को तंग किया जाने लगा। क्योंकि वो वहाँ पर सबसे अलग थे। 7वीं के मध्य तक आते-आते स्कूल वालों ने स्टीव के माता-पिता को चेतावनी दी कि वो इसे स्कूल से ले जाएँ। नहीं तो उसे जबरन स्कूल से निकालना पड़ेगा।

1967 में पॉल ने एक नया घर खरीदा जो Crist Drive, Los Altos (California) में था। जिसे साल 2013 में Historic Site घोषित किया गया क्योंकि वो Apple Computer की पहली साइट थी।

4. Homestead High School

यही वो स्कूल है जिसने स्टीव को अपने पार्टनर Steve Wozniak से मिलवाया जो आगे जाकर एप्पल के पहले कर्मचारी बने। Homestead High School स्टीव के नए घर के नजदीक था। इसलिए उन्होने वहाँ अपना एड्मिशन ले लिया।

साल 1970 जॉब्स की जिंदगी बदलने वाला साल था। उन्होने विलियम शेक्सपियर (William Shakespeare), डायलन थॉमस (Dylan Thomas) और मोबि डिक (Moby Dick) के बारे में पढ़ा और उनके पुराने समान की खोज की।

स्टीव धीरे-धीरे इन महान हस्तियों की कहानियों में खोने लगे। जिनसे स्टीव को काफी कुछ सीखने को मिला। Homestead के आखिरी दो साल में स्टीव को इलेक्ट्रॉनिक्स और साहित्य से गहरा लगाव हो गया।

1971 में Wozniak ने कैलिफोर्निया के एक विश्वविद्यालय में दाखिला ले लिया। स्टीव समय निकालकर अपने दोस्त Wozniak से मिलने जाने लगे। स्टीव अपने सहपाठियों में सबसे ज्यादा बुद्धिमान थे।

इस कारण किसी की भी इनके साथ नहीं बनती थी। इन्हें सब बाहरी व्यक्ति कहकर बुलाते थे। जॉब्स एक आजाद परिंदा था, जिसे किसी का दबाव सहना पसंद नहीं था।

इसी साल Wozniak ने एक ऐसे यंत्र (ब्लू बॉक्स) को डिज़ाइन किया, जो मुफ्त में लंबी दूरी की टेलीफ़ोन कॉल करने में सहायक था। स्टीव ने Wozniak के साथ मिलकर इस ब्लू बॉक्स को बाज़ार में बेचा।

हालांकि ऐसा करना गैरकानूनी था। ब्लू बॉक्स की शानदार कमाई को देखकर स्टीव जॉब्स का दिमाग इलेक्ट्रॉनिक्स से कमाई करने का तरीका ढूँढने लगा। 1972 के मध्य में स्टीव को पढ़ाई के लिए Reed College जाना पड़ा।

5. Reed College

Reed College पोर्टलंड में था और इसकी फीस भी बहुत ज्यादा थी। इस कारण Clara और Paul के लिए कॉलेज की फीस जमा करना मुश्किल हो गया। इसी दौरान जॉब्स की रोबर्ट फ्रेंडलैंड के साथ दोस्ती हो गई, जो उस समय वहाँ का विद्यार्थी अध्यक्ष था।

लेकिन सिर्फ एक सेमेस्टर के बाद ही जॉब्स को कॉलेज से निकाल दिया गया, बिना उनके माता-पिता को बताए। बाद में उन्होने बताया की वो जानबूझकर ऐसी जगह छोडना चाहते थे, जहां उनके माता-पिता का पैसा व्यर्थ में ही खर्च हो रहा है। वो ऐसी पढ़ाई नहीं करना चाहते थे जो उनके लिए व्यर्थ थी।

स्टीव के जीवन का यह समय बहुत ही मुश्किल था। उन्होने 2005 के एक साक्षात्कार में बताया कि उन्हें अपने दोस्तों के कमरे में जमीन पर सोना पड़ता था। पेट की आग मिटाने के लिए वो कॉक की बोतलें इकठ्ठा करके बेचा करते थे। वहाँ पास में ही भगवान श्री कृष्ण का मंदिर था, जहां वे सप्ताह में एक बार मुफ्त खाना खाने के लिए जाते थे। ताकि उनके पास पैसा बचा रहे।

6. नौकरी की तलाश

फरवरी 1974 में जॉब्स पढ़ाई छोड़कर अपने माता-पिता के पास आ गए। यहाँ आकार वो नौकरी की तलाश करने लगे। जल्द ही उनकी यह तलाश खत्म हो गई और एक कंपनी (Atari Inc.) ने उन्हें Technician की जॉब पर रख लिया।

वो जिस कंपनी में नौकरी लगे, उसके मालिक ने यह सोचकर नौकरी दी कि उन्होने एक वीडियो गेम बनाया। और आगे हमारे लिए और भी नए गेम बना सकता है।

लेकिन जिस गेम की वो सोच रहे थे, असल में उसे स्टीव के दोस्त Wozniak ने बनाया था और उसका बोर्ड स्टीव को दिया था। लेकिन बाद में इसका पता चलने पर स्टीव ने वो जॉब छोड़ दी।

कुछ वर्षों के बाद Atari Inc. के को-फाउंडर ने कहा की स्टीव सबसे मुश्किल लोगों में से एक था, लेकिन वो हर किसी के लिए कीमती हीरे से कम नहीं था। अपने रूम में वो सबसे अलग और स्मार्ट था।

7. भारत में आना

स्टीव को भारत आने की बहुत इच्छा थी, क्योंकि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक ज्ञान दुनिया में इससे अच्छा कहीं नहीं था। वो 1974 में आध्यात्मिक ज्ञान की तलाश में अपने मित्र Daniel Kottke के साथ “नीम करोली बाबा” के कैंची आश्रम में आ गए।

लेकिन उन्हें यह जानकार बहुत दुःख हुआ कि करोली बाबा की 6 महीने पहले ही मौत हो गई। फिर वो एक लंबी पैदल यात्रा पर निकल गए।
इसके बाद उन्होने दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में अपना समय बिताया। वो अपने आप को सिर्फ एक आध्यात्मिक व्यक्ति बनाने लगे। स्टीव भारत में जैन, बौद्ध धर्म की अच्छे से शिक्षा लेने लगे। जो उनके भटकते मन को शांत और एकाग्र कर रहा था।

7 महीने बाद स्टीव भारत से अमेरिका चले गए। लेकिन उस समय वो एक अलग ही इंसान थे। भारतीय संस्कृति ने उन्हें इस तरह प्रभावित किया की उनका रहन-सहन, खाना-पीना, कपड़े पहनना सब बदल गया। अमेरिका जाकर जॉब्स ने सबसे पहले अपना सिर मुंडवाया।

स्टीव भारत से आने के बाद ध्यान लगाने में माहिर हो गए। अब वो लंबे समय तक Meditation करने लगे। जिससे उनके व्यक्तित्व में काफी परिवर्तन आया।

8.एप्पल कम्प्युटर की खोज

1975 में Steve और Wozniak ने Homebrew Computer Club की एक बैठक में हिस्सा लिया। उनकी यह बैठक एप्पल कम्प्युटर की खोज के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम थी।

क्योंकि इसी के बाद ही स्टीव के मन में कम्प्युटर बनाने की जिद्द ने जन्म लिया। मार्च 1976 में Wozniak ने Apple-I कम्प्युटर का डिज़ाइन तैयार किया और उसे स्टीव को दिखाया। स्टीव ने खुश होकर कहा कि तुम इसे बाज़ार में बेच दो। Wozniak को जॉब्स का यह विचार पसंद नहीं आया, लेकिन बाद में वो सहमत हो गए।

इसके बाद Steve Jobs, Wozniak और Ronald Wayne तीनों ने मिलकर Apple Company की शुरुआत की। उनकी कंपनी की शुरुआत स्टीव जॉब्स के घर से हुई। उनका ऑफिस स्टीव का कमरा था, जिसमें वो बचपन में रहते थे।

धीरे-धीरे इनका काम गैराज में चला गया। थोड़े समय बाद Ronald Wayne कंपनी को छोडकर चले गए। अब Apple के सिर्फ दो ही को-फाउंडर बचे थे।

अब Jobs ने Apple-I के प्रिंटेड सर्किट बोर्ड बनाने की योजना बनाई। इसके लिए उन दोनों के पास पर्याप्त पैसा नहीं था। पैसों की नौबत ऐसी आ गई कि उन्हें अपना कीमती सामान बेचना पड़ा।

कुछ समय बाद एक कम्प्युटर विक्रेता ने जॉब्स को 50 Apple-I कम्प्युटर का ऑर्डर दिया। जिसके लिए प्रत्येक की कीमत 500$ थी। यह स्टीव के लिए बहुत बड़ी कामयाबी थी, अब उनको अपना काम चलाने के लिए पैसों की नौबत नहीं आने वाली थी। इतने पैसों से स्टीव ने 200 नए कम्प्युटरस का निर्माण किया।

Apple को अब धीरे-धीरे फंड मिलने लग गया था। Mike Markkula ने Apple में 60,000 डॉलर का निवेश करके अपने आप को Apple Board का मुख्य सदस्य बना लिया। लेकिन Markkula के मन में कुछ और ही था।

Markkula ने 1977 में Mike Scott को Apple का पहला अध्यक्ष और CEO बनाया। जॉब्स को यह बिल्कुल भी पसंद नहीं आया। लेकिन उनके हाथ में कुछ नहीं था, और वो अपनी ही कंपनी में नौकर की जिंदगी जीने लगे।

अप्रैल 1977 में Wozniak और Steve ने मिलकर Apple-II को डिज़ाइन किया। इस कम्प्युटर को बनाते समय स्टीव ने जॉब्स से कहा कि दो Expansion स्लोट्स होने चाहिए। लेकिन Wozniak का मानना था की इसके लिए 8 सही रहेंगे।

स्टीव ने बार-बार जब इस बात पर ज़ोर दिया तो Wozniak ने गुस्से होकर कहा कि तुम अपना एक नया कम्प्युटर बना लो। Apple-II कम्प्युटर दुनिया में सबसे ज्यादा उत्पादित होने वाला माइक्रोकम्प्युटर था।

धीरे-धीरे उनकी कंपनी में साख बढ़ती गई, और वो अब आगे से ज्यादा कामयाब होने लगे। महज 23 साल की उम्र में ही स्टीव की नेटवर्थ लगभग 1 मिलियन डॉलर के आस-पास पहुँच गई, और 25 साल की उम्र में उनकी कुल संपति तकरीबन 250 मिलियन डॉलर थी।

इस समय वो अमेरिका में सबसे अमीर लोगों की सूची में शामिल हो गए जिन्होंने कम उम्र में यह मुकाम हासिल किया था।
साल 1981 में जॉब्स ने Macintosh कम्प्युटर को बनाने का निर्णय लिया। लेकिन इस बार उनका दोस्त Wozniak उनके साथ नहीं था।

इसलिए जॉब्स ने यह काम Jef Raskin को सौंपा। 24 जनवरी, 1984 में Macintosh को पहली बार एप्पल के द्वारा पेश किया गया। शुरुआत में यह कम्प्युटर बहुत तेजी से बिका, लेकिन कम प्रोसेसिंग स्पीड और लिमिटेड सॉफ्टवेर होने के कारण इसकी बिक्री में तेजी से गिरावट आई।

Macintosh का इस तरह से अचानक फ्लॉप होना, स्टीव को काफी कुछ सीखा गया। उन्हें पता लगने लगा की अब जमाना IBM PC का है। इसलिए उन्होने कंपनी से इस पर ध्यान देने की बात कही। लेकिन धीरे-धीरे कंपनी के ही सदस्य स्टीव के खिलाफ षड्यंत्र रचने लगे।

जब स्टीव को इस बात का पता चला तो उन्होने इनके खिलाफ एक योजना बनाई। लेकिन उनकी वो योजना किसी कारण लीक हो गई, और उन्होने कंपनी को अपना त्यागपत्र दे दिया।

लेकिन कंपनी ने सूझबूझ से स्टीव का त्यागपत्र स्वीकार नहीं किया और उसे एक नए प्रोजेक्ट पर लगा दिया। लेकिन कुछ महीने बाद 17 सितंबर, 1985 को स्टीव ने Apple कंपनी से इस्तीफा दे दिया। और एप्पल के 5 अन्य वरिष्ठ कर्मचारियों ने भी कंपनी को अपना इस्तीफा सौंप दिया।

9. NeXT कि खोज

Apple से इस्तीफा देने के बाद स्टीव ने NeXT Inc. की स्थापना की। अब इनके पास काफी पैसा था तो इन्होने शुरुआत में ही कंपनी में तकरीबन 7 मिलियन डॉलर का निवेश किया। लेकिन मात्र एक वर्ष में ही NeXT Inc. का खर्चा इतना बढ़ गया कि वो घाटे में जाने लगी।

परंतु जॉब्स ने अरबपति रॉस पेरोट को अपनी कंपनी में निवेश करने के लिए आकर्षित किया। जिन्होंने कंपनी में भारी निवेश किया और यह स्टीव की धमाकेदार वापसी सिद्ध हुई।

सबसे पहले NeXT Workstations को 1990 में बाज़ार में उतारा गया, जहां इनकी कीमत 9999 डॉलर थी। NeXT तकनीकी रूप से सक्षम और आधुनिक शिक्षा के लिए बनाया गया था। फिर इसी साल इसी का एक नया रूप लॉंच किया गया। जिसमें आज के आधुनिक कम्प्युटर जैसे गुण थे। मात्र 4 वर्ष में ही कंपनी की वार्षिक आय तकरीबन 1 मिलियन डॉलर के पार चली गई।

10. एप्पल में धमाकेदार वापसी

स्टीव के जॉब छोड़ने के बाद से ही Apple के बुरे दिन शुरू हो गए। अब कंपनी अपने में बदलाव मांग रही थी। इसीलिए साल 1996 में Apple Inc. ने NeXT Inc. को 427 मिलियन डॉलर में खरीद लिया।

साथ ही स्टीव को कंपनी में CEO भी बनाया गया। अब एप्पल की पूरी शक्ति जॉब्स के हाथों में थी। जिसे वो एक नई ऊंचाई पर ले जाना चाहते थे। इसके बाद 2007 में Apple Inc. ने Apple Phone यानी iPhone को लॉंच कर एक क्रांति ला दी। जिससे एप्पल बुलंदियों पर अपना कदम तेजी से रखती गई।

11. शादी

स्टीव 1989 में Laurene Powell नाम की एक लड़की से मिले। जब स्टीव ने Powell को देखा, उस समय Powell एक बिजनेस स्कूल में अपना भाषण दे रही थी। स्टीव को पॉवेल इतनी अच्छी और सुंदर लगी कि वो उस पर से अपनी नजर नहीं हटा पा रहे थे।

भाषण खत्म होने के बाद जॉब्स ने बाहर पार्किंग में Powell से मुलाक़ात की और उसे रात के खाने के लिए आमंत्रित किया। इसके बाद वो ज़्यादातर एक-दूसरे के साथ समय बिताने लगे।

जॉब्स ने नए साल (1990) पर Powell को पर्पोज किया, जिसे पॉवेल ने खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया। दोनों ने 18 मार्च, 1991 को एक-दूसरे से शादी कर ली। इस शादी में स्टीव का पूरा परिवार शामिल था। हालांकि जॉब्स ने शादी एक बौद्ध समारोह में की। वहाँ सिर्फ शाकाहारी खाना ही था। स्टीव और उसकी पत्नी पॉवेल के तीन बच्चे हुए।

स्टीव की शादी के दो साल बाद ही उनके पिता पॉल जॉब्स का देहांत हो गया। स्टीव ने अपने बच्चों को कभी भी फोन नहीं दिया और न ही कभी किसी कम्प्युटर में शिक्षा के अलावा कोई काम करने दिया। वो हमेशा इस बात पर ज़ोर देते थे कि जब तक यह इन वस्तुओं से दूर रहेंगे तब तक इनके कामयाब होने की ज्यादा संभावना रहेगी।

12. मौत

स्टीव जॉब्स की मौत 5 अक्टूबर, 2011 को Pallo Alto, कैलिफोर्निया में हुई। उनकी मौत का कारण कैंसर थी। स्टीव ने एक दिन पहले ही अपना होश खो दिया था।

उन्होने अंतिम बार अपनी बहन पैटी को देखा, फिर एक लंबे समय तक अपने बच्चों को देखा, इसके बाद अपने जीवनसाथी को और अंत में अपने कंधों को मजबूती देने वालों की तरफ देखा। इसके बाद वो अपना होश खो बैठे और हमेशा-हमेशा के लिए इस संसार को अलविदा कह गए।

पूरे संसार के लिए यह एक सदमे से कम नहीं था। उनके समान में एप्पल और माइक्रोसॉफ़्ट ने 2 सप्ताह तक अपने आधे कर्मचारियों को स्टीव की याद में झण्डा फहराने का फरमान जारी किया।

तथा Apple ने पूरे दो सप्ताह तक अपनी कॉर्पोरेट वैबसाइट के मैन पेज पर स्टीव जॉब्स के जीवन परिचय के बारे में प्रदर्शित किया। साथ में उनकी एक फोटो भी साइड में लगी हुई थी। उनका अंतिम संस्कार का कार्यक्रम बहुत ही छोटा रखा गया।

आपकी और दोस्तों:

तो यह थी Steve Jobs Biography in Hindi. जिससे हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। कैसे स्टीव ने जिंदगी की मुश्किलों को दूर किया? और कभी हार न मानकर अपना नाम इतिहास में दर्ज करवा लिया।

हम उम्मीद करते है की उनकी ये जीवनी पढ़कर आपको बहुत मोटिवेशन मिली होगी और उनकी बायोग्राफी पढ़ने के बाद हम सभी को ये सिख मिलती है की हमको लाइफ में वही काम करना चाहिए जो की हमको दिल से अच्छा लगता है.

यदि आप ऐसा काम करते हो तो आपको उसमे महारत हासिल जरुर होती है. दोस्तों यदि आपको स्टीव जॉब्स की ये बायोग्राफी अच्छी लगी हो तो प्लीज इस पोस्ट को १ लिखे अवश्य करे और अपने दोस्तों के साथ फेसबुक और whatsapp पर भी शेयर करना ना भूले ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगो को उनकी लाइफ से प्रेरणा मिल पाए धन्येवाद दोस्तों|

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