परिश्रम ही सफलता की कुंजी है पर कहानी – मेहनत का फल मीठा होता है स्टोरी



परिश्रम ही सफलता की कुंजी है कहानी – हेलो दोस्तों आज की यह कहानी आप लोगों के लिए बहुत ही ज्यादा शिक्षा प्रदान करने वाली है और आज की यह कहानी में हम आपको बताएंगे कि परिश्रम का फल हमेशा अच्छा होता है. बहुत लोग मेहनत करने से पीछे हटते हैं और वह लोग यह सोचते हैं कि मेहनत करने से कुछ भी नहीं मिलता है और केवल समय बर्बाद होता है.

लेकिन यदि आप लोगों ने आज की इस कहानी को पूरा पड़ा सब आप लोगों को पता चल जाएगा कि आप लोगों का परिश्रम कभी भी व्यर्थ नहीं होता है और इसका हमेशा आपको अच्छा ही फल मिलता है.

चलिए दोस्तों ज्यादा समय ना लेते हुए हम आज की यह कहानी की शुरुआत करते हैं.

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परिश्रम ही सफलता की कुंजी है पर कहानी स्टोरी

मेहनत का फल मीठा होता है

Parishram Hi Safalta Ki Kunji Hai Kahani Story

एक गांव में एक बूढ़े किसान के चार बेटे थे. वह बूढ़ा किसान बहुत ही ज्यादा मेहनती था. बूढ़े किसान के चार बेटे थे और वह लोग बहुत ज्यादा हट्टे-कट्टे थे लेकिन वह लोग बहुत ज्यादा आलसी थे और मेहनत करने पर विश्वास नहीं करते थे.

उसके चारों बेटे हमेशा इधर उधर घूमते रहते और आवारा गिरी करते रहते लेकिन कभी भी खेत में जाकर काम नहीं करते थे. जब कभी भी बूढ़ा किसान अपने बेटों से यह कहता है कि थोड़ा सा खेतों में जाकर भी काम कर लिया करो लेकिन उसके बेटे अपने पिता की कोई भी बात नहीं मानते हो और केवल अपने मन की करते थे.

बूढ़ा किसान अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने की हमेशा कोशिश करता था और उनको पता था कि मेहनत करो लेकिन वह लोग अपने बूढ़े बाप की एक नहीं सुनते थे और दिन भर आराम करते रहते हैं.

1 दिन किसान के दिमाग में एक उपाय आया और उसने सोचा कि मेरे लाख कहने पर भी यह लड़के सुधर नहीं रहे हैं इसलिए इन लोगों को समझाना बहुत आवश्यक है. उसने अपने चारों बेटों को अपने कमरे में बुलाया और कहा कि मेरा अंतिम समय निकट आने वाला है और मेरी जल्दी मृत्यु हो जाएगी.

मैंने अपनी जीवन भर की सारी कमाई खेत में दबा रखी है. जब मेरी मृत्यु हो जाए उसके बाद तुम चारों भाई खेत को खोदकर सभी पुंगी निकाल लेना और उसे आपस में बांट लेना. कुछ महीने बाद में बूढ़े किसान की मृत्यु हो जाती है.

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चारों भाइयों ने यह निर्णय लिया कि खेत में दबी हुई पूरी पूंजी को बाहर निकालते हैं और आपस में बांट लेते हैं. बस फिर क्या था चारों भाइयों ने मिलकर खुदाई करनी शुरू कर दी परंतु उन्हें वहां वह संपत्ति नहीं मिली.

यह देख कर चारों भाई बहुत ज्यादा उदास हो गए और उनको बहुत खराब लगने लगा. उन्होंने सोचा कि खेत की खुदाई दो हो चुकी है तो उसमें बीज बो दिया जाए. सभी भाइयों ने सोचा कि यह ठीक रहेगा और उन्होंने जमीन में बीज बोना शुरु कर दिया.

क्योंकि चारों भाइयों ने खेत में बहुत गहरी खुदाई करी थी जिसकी वजह से जमीन की उपजाऊ शक्ति बहुत ज्यादा बढ़ गई थी और उसमें बीच तथा पानी समय पर देने के कारण खेत में बहुत अच्छी फसल होनी शुरू हो गई.

जिसकी वजह से चारों भाइयों को बहुत ज्यादा फायदा और लाभ हुआ. अब चारों भाइयों को अपने पिता का आशय समझ आ गया कि उनकी संपत्ति जो भूमि में दबी पड़ी है वह यही है, जो चारों भाइयों को परिश्रम करने पर ही प्राप्त हो पाई है. उसके बाद चारों भाइयों ने हमेशा परिश्रम पर विश्वास करना सीख लिया और वह जो अपने जीवन भर मेहनत और परिश्रम करके बहुत तरक्की करने लग गए.

शिक्षा- दोस्तों इस कहानी से हम लोगों को यह सीख मिलती है कि परिश्रम का फल हमेशा मीठा होता है और हमको कभी भी मेहनत करने से पीछे नहीं हटना चाहिए और आलस नहीं करना चाहिए. अगर हम मेहनत करेंगे तो हमको कल जरूर अच्छा फल मिलता है.

आपकी और दोस्तों

दोस्तों यह था परिश्रम ही सफलता की कुंजी होती है पर कहानी ( मेहनत का फल मीठा होता है ). हम उम्मीद करते हैं कि आज की हिंदी स्टोरी पढ़ने के बाद आप लोगों को पता चल गया होगा कि मेहनत और परिश्रम करने से आप जीवन में बहुत कुछ हासिल कर पाते हो और यह कभी भी व्यर्थ नहीं जाता है.

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