NRC Fullform in Hindi | NRC क्या है

NRC Fullform in Hindi: आज के इस आर्टिकल में हम आपको NRC के फुल फॉर्म के बारे में जानकारी देने वाले हैं। इसके साथ ही हम NRC के बारे में अन्य जानकारी भी प्राप्त करेंगे।

पिछले 1 साल से आपने समाचार चैनल,समाचार अख़बारों और रेडियो में NRC का जिक्र अवश्य सुना होगा और ऐसे में आप यह सोचते होंगे कि आखिर ये NRC होता क्या है।

सबसे पहले NRC का नाम साल 1951 में अस्तित्व में आया और इसके अस्तित्व में आते ही हमारे भारत देश में कई जगह इसका विरोध भी होने लगा।

जैसा कि आप जानते हैं कि हमारा भारत देश साल 1947 में 15 अगस्त के दिन अंग्रेजों की कैद से आजाद हुआ था और उसके बाद मुस्लिम लीग की मांग पर हमारे भारत देश के दो टुकड़े हुए थे। इसमें एक देश का नाम पाकिस्तान पड़ा और दूसरे का नाम भारत।

भारत का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था और इस विभाजन में यह बात हुई थी कि भारत में रहने वाले मुस्लिम लोग पाकिस्तान चले जाएंगे और पाकिस्तान में रहने वाले गैर मुस्लिम धर्म के लोग जैसे कि हिंदू सिख ईसाई भारत आ जाएंगे और इसीलिए भारत और पाकिस्तान के विभाजन के समय दोनों धर्म से काफी बड़ी संख्या में शरणार्थियों का आदान-प्रदान हुआ था।

हालांकि शरणार्थियों के आदान-प्रदान में कई जगह हिंसक घटनाएं भी हुई थी और बहुत से लोगों की हत्याएं भी हुई थी। विभाजन के समय हमारे भारत देश के आसाम राज्य से काफी लोग पूर्वी पाकिस्तान चले गए थे

परंतु उनकी जायदाद और संपत्ति असम में ही रह गई थी, जिसके कारण बहुत से लोग विभाजन के बाद भी असम में आते जाते थे जिसका परिणाम यह हुआ कि भारत के मूल नागरिकों और अवैध शरणार्थियों के बीच यह पहचान करना मुश्किल हो गया कि, कौन सा व्यक्ति भारतीय नागरिक है और कौन सा व्यक्ति अवैध घुसपैठिया या फिर अवैध शरणार्थी है।

जिसके कारण हमारी भारतीय सरकार और असम की सरकार को कई प्रकार की समस्याएं होने लगी और सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए साल 1951 में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी की एनआरसी का गठन किया।

अगर आप भी इंटरनेट पर यह खोजते रहते हैं कि, आखिर एनआरसी क्या है? एनआरसी का फुल फॉर्म क्या है? एनआरसी किसके लिए है? एनआरसी पर विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहा है|

तो आज के इस आर्टिकल में आपको आपके सारे सवालों के जवाब मिलेंगे तो आइए जानते हैं कि एनआरसी क्या है तथा एनआरसी का फुल फॉर्म क्या है।

NRC Fullform in Hindi

NRC क्या है

NRC Full Form in Hindi

1. एनआरसी का फुल फॉर्म

बहुत से लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर एनआरसी का फुल फॉर्म क्या होता है तो हम वैसे लोगों की जानकारी के लिए बता दें कि एनआरसी का फुल फॉर्म होता है नेशनल रजिस्टर आफ सिटीजंस। नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन को हिंदी में भारतीय राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर कहा जाता है।

2.  एनआरसी क्या है

एनआरसी यानी कि नेशनल सिटीजन रजिस्टर का निर्माण हमारे भारत देश के असम राज्य में रहने वाले भारतीय नागरिकों की पहचान के लिए किया गया है। इसके तहत भारत सरकार ने असम के मूल निवासियों की एक सूची बनाने का आदेश दिया गया है।

ताकि यह पता किया जा सके कि असम का मूल निवासी कौन है और कितने लोग असम में अवैध घुसपैठिये के तौर पर रह रहे हैं। सरकार को यह शक है कि भारत के पड़ोसी देश जैसे कि बांग्लादेश और पाकिस्तान के कई लोग असम में अवैध घुसपैठ करके वहां पर रह रहे हैं और इसीलिए सरकार एनआरसी का गठन कर रही है, ताकि वैसे अवैध घुसपैठियों का पता लगाया जा सके और उन्हें असम से डिपोर्ट यानी कि बाहर किया जा सके।

इस प्रक्रिया के लिए साल 1986 में सिटीजनशिप कानून में संशोधन करके असम के लिए विशेष तौर पर प्रावधान किया गया था, जिसके अंतर्गत एनआरसी रजिस्टर में वैसे लोगों के नाम शामिल किए गए थे, जो साल 1971 में 25 मार्च के पहले असम के नागरिक है या फिर उनके पूर्वज 1971 मे 25 मार्च के पहले असम में आकर बसे थे।

एक अंदाज के अनुसार हमारे भारत देश में 2 करोड़ से अधिक अवैध घुसपैठिये है।इसमें से 55 लाख अवैध घुसपैठिए पश्चिम बंगाल और 15 लाख अवैध घुसपैठिए असम में रह रहे हैं। इनमें से अधिकतर लोग मुस्लिम समुदाय से संबंध रखते हैं, इसलिए मुस्लिम समुदाय एनआरसी का पुरजोर विरोध कर रहा है।

साल 1985 में भी असम में अवैध घुसपैठियों को असम से बाहर निकालने की मांग हुई थी और उस समय हमारे भारत देश के प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे।इसके बाद साल 2010 में पायलट प्रोजेक्ट के तहत असम के 2 जिलों में एनआरसी अपडेशन की प्रक्रिया शुरू हुई।

जिसके बाद असम के बारपेटा जिले में इसका उग्र विरोध हुआ और हिंसा तथा आगजनी हुई। इस आगजनी में 4 लोगों की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद गणना के काम को रोक दिया गया था। इसके बाद साल 2014 में हमारे भारत देश के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एनआरसी अपडेशन का काम फिर से चालू हुआ।

हमारे भारत देश का असम में सिर्फ इकलौता ऐसा राज्य है, जहां पर नेशनल सिटीजन रजिस्टर यानी कि एनआरसी लागू है। असम राज्य में सबसे पहले साल 1951 में नेशनल सिटीजन रजिस्टर बना था और उस समय की गणना में असम में रहने वाले सभी नागरिकों को असम का मूल नागरिक माना गया था।

परंतु कुछ ही साल बीतने के बाद फिर से असम में एनआरसी के तहत नेशनल सिटीजन रजिस्टर को अपडेट करने की मांग होने लगी, क्योंकि असम के मूल निवासियों को और वहां की सरकारों को यह अंदेशा हो गया था कि साल 1951 के बाद भी बांग्लादेश के कई अवैध लोग असम में आकर बस रहे हैं और वहां की डेमोग्राफी को बदलने का प्रयास कर रहे हैं।

जिसके कारण सरकार ने वैसे लोगों की पहचान करके उन्हें असम से बाहर करने के लिए फिर से एनआरसी अपडेशन की प्रक्रिया को चालू करने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह किया।

3. एनआरसी से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रम

– साल 1951 में पहली बार नेशनल सिटीजन रजिस्टर तैयार किया गया।

– साल 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ और उसी समय बड़ी मात्रा में बांग्लादेश के मुस्लिम समुदाय के लोग अवैध घुसपैठ करके असम में प्रवेश हुए। इसके अलावा बहुत से लोग बंगाल में भी प्रवेश किए।

– साल 1980 में असम के स्थानीय मूल निवासियों और अवैध शरणार्थियों के बीच सामाजिक और जातीय हिंसा हुई, जिसमें दोनों तरफ के कई लोगों की हत्या हुई और काफी बड़ी संख्या में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया।

– साल 1979-85- ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) के नेतृत्व में असम विद्रोह शुरू और इसको ऑल असम गण संग्राम परिषद का भी समर्थन मिला।

– साल 1985 में असम समझौते पर हस्ताक्षर हुए और साल 1951 में प्रकाशित राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर का अपडेशन किया गया।

– साल 2012 में भारत के सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और भारत की केंद्र सरकार को एनआरसी को अपडेट करने के लिए निर्देश दिया।

– साल 2019 में 21 अगस्त को एनआरसी की अंतिम लिस्ट जारी की गई, जिसमें करीब 19 लाख लोगों को असम से बाहर जाने के लिए कहा गया। हालांकि बहुत से नेताओं ने इस लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप भी लगाया।

4. एनआरसी लागू करने की आवश्यकता क्यो है

भारत की केंद्र सरकार ने और असम सरकार ने असम में रह रहे अवैध लोगों को असम से बाहर निकालने के लिए नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन यानी कि एनआरसी अभियान चलाया।एनआरसी का अभियान दुनिया के सबसे बड़े अभियानों में से एक है और एनआरसी अभियान के अंतर्गत असम में रह रहे अवैध लोगों की पहचान की जाएगी और उन्हें वापस जहां से वह आए हैं वहां पर भेजा जाएगा।

जैसे कि वर्तमान के समय में असम में लगभग 50 लाख से अधिक बांग्लादेश के लोग गैर कानूनी रूप से रह रहे हैं, जिसके कारण हमेशा असम के मूल निवासियों और बांग्लादेशी घुसपैठियों के बीच टकराव की खबरें मीडिया में आती रहती है।

क्योंकि असम के मूल निवासियों को लगता है, कि अवैध लोगों के कारण उनकी रोजी-रोटी, साथ ही उनकी अस्मत पर संकट खड़ा हो रहा है और एक तरह से अवैध घुसपैठिये असम की डेमोग्राफी और जनसांख्यिकी संतुलन को बदलने के लिए प्रयास कर रहे हैं जिससे उनकी नस्ल पर खतरा उत्पन्न हो सकता है और इसीलिए असम के मूलनिवासी अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों का विरोध कर रहे हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एनआरसी उन्हीं राज्यों में लागू होती है, जिस राज्य में किसी अन्य देश के नागरिक अवैध रूप से आकर रह रहे होते हैं और एनआरसी की रिपोर्ट के अनुसार यह पता लगाया जा सकता है कि कौन सा व्यक्ति भारत का नागरिक है तथा कौन सा व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं है

और अगर कोई व्यक्ति भारत का नागरिक है, तो उसे वह सभी अधिकार प्राप्त होंगे, जो एक भारतीय नागरिक को प्राप्त होते हैं तथा जो लोग अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं, उन्हें वापस उनके देश भेजा जाएगा।

5. नागरिकता की समाप्ति से उत्पन्न होने वाली समस्याएँ

जब से भारत सरकार ने एनआरसी के अपडेशन की प्रक्रिया चालू करने के लिए निर्देश दिए हैं, तब से ही समय-समय पर इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी हो रहा है|

जिसके कारण असम के साथ भारत के अन्य राज्यों में भी हिंसक घटनाएं होती रही हैं और इसी कारण कभी भी एनआरसी के कारण किसी भी राज्य में हिंसा का खतरा बना हुआ है।

इसके अलावा ऐसे बहुत से लोग काफी समय से असम में निवास कर रहे हैं, जो पहले वोट देते थे परंतु एनआरसी की लिस्ट में उनका नाम होने पर वह अब वोट नहीं दे सकेंगे और सरकार की किसी भी कल्याणकारी योजना का फायदा नहीं उठा पाएंगे।

ऐसे में उन लोगों को काफी तकलीफ होगी, जो असम में काफी प्रॉपर्टी खरीद चुके हैं। इसके अलावा जो लोग असम में खुद की प्रॉपर्टी खरीद चुके हैं, उन्हें उस प्रॉपर्टी का कोई भी मुआवजा नहीं दिया जाएगा क्योंकि वैसे लोग अवैध गिने जाएंगे

6. नेशनल रजिस्टर सिटिजनशीप बनाम नागरिकता संशोधन बिल

भारत में नागरिकता संशोधन बिल के सामने आने के बाद विभिन्न प्रकार की बहस चालू हो गई थी। इसमें कुछ लोग यह कह रहे थे कि यह एनआरसी का उल्टा है, वही बंगाल की सीएम ममता बनर्जी कह रही थी कि इस कानून को इसीलिए लाया गया है।

ताकि एनआरसी को जल्द से जल्द लागू किया जा सके और यह दोनों कानून एक ही सिक्के के दो पहलू है परंतु अब सवाल यह उठता है कि आखिर सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल और एनआरसी में क्या अंतर है।

हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत की नागरिकता संशोधन कानून में एक विदेशी व्यक्ति को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है।

वहीं एनआरसी का मकसद है, ऐसे लोगों की पहचान करना है, जो हमारे भारत देश के नागरिक नहीं है, परंतु अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं और भारत के संसाधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

सिटिजनशीप अमेंडमेंट बिल के अंतर्गत 31 दिसंबर साल 2014 को या 31 दिसंबर साल 2014 से पहले भारत में आए हुए हिंदू, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी धर्म के लोगों को भारत की नागरिकता देने के नियमों में ढील दी गई है।

वही एनआरसी के अंतर्गत 25 मार्च 1971 या उससे पहले भारत में रहने वाले लोगों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है।

7. क्या एनआरसी का भारत के मुसलमानों पर फर्क पड़ेगा

हमारे भारत देश के गृह मंत्रालय ने पहले ही यह बात साफ कर दी है कि नेशनल रजिस्टर सिटिजनशीप का भारत के किसी भी धर्म के किसी भी नागरिक से कोई भी लेना देना नहीं है।

इस प्रक्रिया के लिए साल 1986 में सिटीजनशिप कानून में संशोधन करके असम के लिए विशेष तौर पर प्रावधान किया गया था, जिसके अंतर्गत एनआरसी रजिस्टर में वैसे लोगों के नाम शामिल किए गए थे, जो साल 1971 में 25 मार्च के पहले असम के नागरिक है या फिर उनके पूर्वज 1971 मे 25 मार्च के पहले असम में आकर बसे थे।

8. एनआरसी के अन्य फुल फॉर्म

  • Never Really Confirmed
  • New Royal Calendar
  • Nike Run Club Community
  • Nineveh Reconstruction Committee Community
  • Nantahala Racing Club
  • National Racing Calendar
  • National Racquetball Club
  • National Reconveyance Center
  • National Records Centers
  • National Recycling Coalition
  • National Reformation Council
  • National Registration Card
  • National Remarketing Conference Community
  • National Research Center
  • National Research Company
  • National Research Corporation
  • National Research Council
  • National Resource Center
  • National Resource Centers
  • National Response Corporation
  • National Resuscitation Council
  • National Revenue Center
  • National Rifle Committee
  • NATO Russia Council
  • NATO Russian Council
  • Natural Resource Commission
  • Natural Resource Committee
  • Natural Resources Commission
  • Naval Recruiting Center
  • Neighbourhood Recycling
  • Network Reliability Center
  • No Radiation Catastrophies
  • No Regulatory Criteria
  • No Right Click
  • Nobody Really Cares
  • Noise Reduction Coefficient
  • Non Recurring Charge
  • Non-Recurring Charge
  • Non-Reusable Container
  • Non-Unit-related Cargo
  • Normal Rational Curve
  • Normalized Read Counts
  • Norwegian Refugee Council
  • Nuclear Regulatory Commission’s
  • Nuclear Rubberstamp Commission
  • Nutritional Research Committee
  • Not Really Competent
  • Not Really Concerned
  • Nuclear Regulatory Commission

9. भारत में एनआरसी का इतिहास

हमारा भारत देश सन 1947 में 15 अगस्त के दिन आजाद हुआ था और आजादी के बाद साल 1951 में हमारे भारत देश में पहली बार एनआरसी लाई गई थी। एनआरसी का उद्देश्य, जो लोग असम में 25 मार्च साल 1971 के पहले आए हैं, केवल उन्हें ही भारतीय नागरिक माना जाए, था।

साल 1979 में असम राज्य में अवैध घुसपैठियों के खिलाफ असम के एक संगठन ने आंदोलन शुरू किया, जिसका नाम था असम स्टूडेंट यूनियन।इसके बाद साल 1985 में जब भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे,

तब उन्होंने असम गण परिषद से समझौता किया और उस समझौते के तहत, जो लोग साल 1971 से पहले असम में आ चुके थे, उन्हें भारतीय नागरिक माने जाने का प्रावधान किया गया। साल 2015 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद में इस काम मे तेजी आई और असम में नागरिकों के सत्यापन का काम चालू हुआ।

इसके बाद साल 2017 में 31 दिसंबर को नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन का पहला ड्राफ्ट प्रकाशित किया गया, जिसमें भारत में कानूनी तौर पर नागरिकता प्राप्त करने के लिए असम में से लगभग 3.29 करोड लोगों ने आवेदन किया था, जिसमें से टोटल 1.9 करोड लोगों को ही इसमें शामिल किया गया।

10. एनआरसी के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत है

हालांकि अभी एनआरसी हमारे पूरे भारत देश में लागू नहीं हुआ है और सरकार की तरफ से एनआरसी को लेकर कोई गाइडलाइन भी जारी नहीं की गई है, तो इसीलिए सभी कुछ संभावित ही है

परंतु फिर भी आमतौर पर किसी भी व्यक्ति को भारत का वैद्य नागरिक साबित होने के लिए एक वैलिड आईडी प्रूफ, वैलिड रिफ्यूजी कार्ड, सिटीजनशिप सर्टिफिकेट पासपोर्ट, सरकार के द्वारा जारी किया गया कोई पासपोर्ट,

किसी भी सरकारी संस्थान के द्वारा जारी किया गया लाइसेंस, प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, जन्म का सर्टिफिकेट, एलआईसी की पॉलिसी, बैंक खाता, पोस्ट ऑफिस खाता, पान कार्ड, राशन कार्ड, 10वीं 12वीं की मार्कशीट, लाइट बिल, इत्यादि मान्य है।

11. एनआरसी के तहत नागरिकता साबित नहीं होने पर क्या होगा?

अगर किसी व्यक्ति के पास भारत का नागरिक साबित होने के लिए कोई भी वैलिड आईडी प्रूफ नहीं है,तो सरकारी आदेश के अनुसार उस व्यक्ति को पकड़कर डिटेंशन सेंटर में ले जाया जाएगा।

जैसा कि असम में होता है और इसके बाद सरकार उन देशों से संपर्क करेगी, जहां के डिटेंशन सेंटर में रहने वाले लोग नागरिक हैं और इसके बाद हमारे भारतीय सरकार के द्वारा उपलब्ध कराए गए डॉक्यूमेंट को अगर दूसरे देश की सरकार मान लेती है तो वैसे अवैध प्रवासियों को वापस उनके देश भेज दिया जाएगा और जो लोग अपने देश नहीं जा पाएंगे, उन्हें पूरी जिंदगी डिटेंशन सेंटर में ही गुजारनी पड़ेगी।

आपकी और दोस्तों:

तो दोस्तों ये था NRC का फुल फॉर्म क्या है, हम उम्मीद करते है की इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपको NRC के बारे में पूरी जानकारी मिल गयी होगी|

अगर आपको हमारा ये पोस्ट हेल्पफुल लगा तो प्लीज इस पोस्ट को १ लाइक जरुर करे और अपने दोस्तों के साथ शेयर भी करे ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगो को NRC का फुल फॉर्म पता चल पाए धन्येवाद दोस्तों|

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