मुर्गी पालन का बिजनेस कैसे करें | Murgi Palan Business In Hindi

मुर्गी पालन का बिजनेस कैसे करें: कम लागत और ज्यादा मुनाफा का व्यवसाय अगर आप करना चाहते हैं। तो आपके लिए मुर्गी पालन का व्यवसाय सबसे उत्तम रहेगा। आज के समय में दूध और अंडा, रोटी के बाद सबसे ज्यादा सेवन किए जाने वाले पदार्थ हैं।

अंडा प्रोटीन से भरपूर होता है, इसलिए आधुनिक समय में डॉक्टर सबसे ज्यादा अंडा खाने की सलाह देते हैं। बाज़ार में बढ़ती हुई अंडों की मांग को देखकर अब पढ़े-लिखे लोग भी इस व्यवसाय में अपना हाथ आजमाने की कोशिश कर रहे हैं।

मुर्गी से सिर्फ आप अंडे ही नहीं बेच सकते, अपितु इनका माँस भी बाज़ार में बहुत अच्छी कीमत पर बिकता है। इसी कारण आपके लिए यह व्यापार एक अच्छा मौका साबित हो सकती है। शुरू में बस आपको थोड़ी सी मेहनत करनी होगी।

एक बार मुर्गी पालन का व्यवसाय अच्छे से शुरू होने के बाद यह आपके लिए एक मोटी रकम कमा सकती है। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल है कि मुर्गी पालन का व्यवसाय कैसे शुरू करें?

मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू करने के लिए हम आपको सभी कदम क्रम से बताने जा रहे हैं। अगर आप ध्यान से एक-एक कदम को रखते हैं तो आप इस व्यवसाय में कभी भी मात नहीं खाएँगे। तो चलिए शुरू करते हैं।

मुर्गी पालन का बिजनेस कैसे करें

Murgi Palan Business In Hindi

murgi palan ka business kaise kare

1. अच्छे से जाँच-पड़ताल करना

व्यापार का सबसे बड़ा नियम जाँच-पड़ताल करना होता है। बिना नॉलेज और योजना के व्यापार घाटे का सौदा बन सकता है। इसलिए सबसे पहले मुर्गी पालन व्यवसाय की अच्छी तरह से जानकारी लेनी होगी।

तथा आपको पशुपालन का थोड़ा बहुत अनुभव होना भी बहुत जरूरी है। क्योंकि इसके बिना हम उनके व्यवहार को अच्छे तरह से नहीं समझ पाएंगे।

इसके अलावा आप अपने आस-पास के मुर्गीपालकों से मिलकर जानकारी ले सकते हैं। तथा साथ ही आप उन लोगों से भी मिलिए जो बाजार में मुर्गियों और अंडों की सप्लाइ करते हैं।

वो आपको बाज़ार में इसकी माँग को लेकर बढ़िया जानकारी दे सकते हैं। फिर आप सही तरीके से विश्लेषण कर पाएंगे की आपके क्षेत्र में आप कितना मुनाफा कमा सकते हैं।

2. मांग कितनी है?

व्यापार में उत्पादित वस्तु की कितनी अहमियत है, इस बात का हमें एक दम स्टिक पता होना चाहिए। एक अनुमान के मुताबिक भारत में अंडों और चिकन की खपत में प्रतिवर्ष 10% की वृद्धि हो रही है।

जिस कारण इसका बाजार हर दिन फैलता जा रहा है। भारत दुनिया में अंडा उत्पादन करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है। तकरीबन 880 करोड़ अंडे हर साल भारत में उत्पादित किए जाते हैं और इसके साथ 42 लाख टन चीकन का भी उत्पादन किया जाता है।

देश में मुर्गी पालन व्यवसाय का कुल कारोबार 90,000 करोड़ रुपए का है, जिसमें से 65% हिस्सा चिकन और 35% हिस्सा अंडो का हैं। पिछले कुछ समय में इन्हीं आंकड़ों को देखते है इस इंडस्ट्री का बहुत तेजी से विस्तार हुआ है। सरकारें भी इसके लिए जागरूक हो चुकी है, और वो अपने स्तर पर हर एक सहायता प्रदान करना चाहती है।

3. पंजीकरण करना

पॉल्ट्री फार्म को शुरू करने से पहले आपको अपने बिजनेस का पंजीकरण करना बहुत जरूरी है। क्योंकि सरकार ने इसी वर्ष इसे सभी के लिए अनिवार्य कर दिया था। पॉल्ट्री फार्म का पंजीकरण एक बार 5 साल के लिए होगा।

5 वर्ष पूरे होने के बाद आपको दोबारा से पंजीकृत करना होगा। अलग-अलग राज्यों के लिए इसके स्टेप अलग-अलग होते हैं। आप अपने राज्य के अनुसार इसको पंजीकृत कर ले।

पंजीकरण करवाना मुश्किल का काम नहीं है। आप आसानी से अपने पॉल्ट्री फार्म को पंजीकृत करवा सकते हैं। पंजीकरण का सबसे बड़ा लाभ हमें लोन लेने में होता है।

4. पैसों का इंतजाम करना

बिजनेस की दूसरी कड़ी फंड (पैसे) होती है। फंड के बिना किसी भी व्यापार को शुरू करना मुश्किल होता है। लेकिन मुर्गी पालन का व्यवसाय कम लागत में शुरू होने वाला व्यवसाय है।

इसे आप सिर्फ 5 मुर्गियों से शुरू कर सकते हैं। लेकिन अगर आपको अपनी काबिलियत पर विश्वास है और आपकी सोच बड़ी है, तो आप इसे बड़े स्तर से भी शुरू कर सकते हैं।

बड़े स्तर पर इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए आपको एक अच्छे फंड की आवश्यकता होगी। सरकार मुर्गी पालन व्यवसाय के लिए ऋण की सुविधा भी प्रदान करती है।

इसके अलावा सरकार आपको 25% की सब्सिडी भी प्रदान करती हैं। आप 50,000 मुर्गियों के साथ अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो आपको 3,00,000 रुपए तक लोन मिल सकता है।

जिसे आपको अगले 5 सालों में चुकाना होगा, अगर आप 5 वर्षों में इसे नहीं चुका पाते हो तो आपको अतिरिक्त 6 मास का वक्त भी दिया जाता है।

आप किसी भी नजदीकी बैंक शाखा में जाकर इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। भारतीय स्टेट बैंक आपको कुल लागत का 75% ऋण प्रदान करता हैं। यानी अगर आपने अपने बिजनेस को 4,00,000 से शुरू करना चाहते हैं, तो आपको एसबीआई 3 लाख रुपए का ऋण देगा। जो वाकई में एक अच्छा खासा फंड है।

5. अच्छी जगह की व्यवस्था होना

अब बारी आती है अच्छी जगह की व्यवस्था करना। जहां हमें मुर्गियों को रखना है और उनके लिए खाने-पीने, रहने की व्यवस्था करनी है। इसके लिए जगह आबादी वाले क्षेत्र से दूर होनी चाहिए, ताकि मुर्गियों से निकलने वाली दुर्गंध का किसी पर कोई असर न पड़े। तथा साथ ही मुर्गियों पर भी प्रदूषण का कोई प्रभाव न पड़े।

इसके अलावा फार्म के लिए जगह समतल और जमीन से ऊँची होनी चाहिए। ताकि बारिश के मौसम में फार्म में पानी की निकासी बढ़िया तरीके से हो। इसके अलावा उसके आस-पास पानी और बिजली की उत्तम व्यवस्था होनी चाहिए।

ताकि मुर्गियों के लिए पीने के पानी की कोई कमी न हो। साथ ही फार्म सड़क के नजदीक होना चाहिए, जिससे किसी भी वाहन को आने में कोई दिक्कत न हो।

इसके बाद मुर्गियों की संख्या के अनुसार जमीन का इंतजाम करना होगा। एक मुर्गी के लिए 2X2 फीट की जगह बढ़िया रहती है। अब इनके लिए एक शेड का निर्माण करना होगा। जिसमें यह मौसम की मार से बचे रहें।

एक शेड में 3 से 4 मंज़िला फर्श बन सकते हैं, इसे आप एक फ्रिज की तरह समझ सकते है। जिसमें समान रखने के लिए 4-5 लेयर होती है। फर्श पक्का होना चाहिए, क्योंकि कच्ची जगह पर अंडों को मिट्टी लगने का खतरा रहता है।

शेड को ऐसी दिशा में बनाना चाहिए, जिसमें हवा की क्रॉसिंग बढ़िया तरीके से हो। ताकि वो मौसमी बीमारियों से बची रहे। एक बात का विशेष ध्यान रखना, मुर्गियों के रहने का स्थान बिल्कुल सूखा होना चाहिए।

शेड तैयार होने के बाद एक गैरज या बड़ा हॉल बनाना होगा, जिसमें अंडे रखे जा सके। हॉल ऐसा होना चाहिए की उसमें अंडों के खराब होने की कोई परेशानी न हो।

6. बढ़िया नस्ल का चयन करना

मुर्गी पालन हो या पशुपालन, आपको अच्छी नस्ल के जीव ही पालने चाहिए। ताकि वो हमें कम लागत में ज्यादा लाभ दे सकें। भारत में मुर्गियों की अनेक प्रकार की नस्लें पाई जाती है।

मुर्गियाँ तीन प्रकार की होती है – लेयर, ब्रायलर और देशी मुर्गी। आपको अपने व्यापार के लिए देशी मुर्गी का चयन करना चाहिए, क्योंकि देशी मुर्गियाँ अधीक लाभ देती है। तथा इनकी देखभाल भी बहुत कम करनी पड़ती है। इसके अलावा देशी मुर्गी से आप अंडे और मीट दोनों का उत्पादन कर सकते है।

भारत में पाई जाने वाली देशी मुर्गी की नस्लें इस प्रकार है- असेल, कड़कनाथ, ग्रामप्रिया, स्वरनाथ, कामरूप, चिटागोंग, केरी श्यामा, झारसीम, देवेंद्र, श्रीनिधि, वनराजा, कारी प्रिया लेयर, कारी देवेंद्र, कारी सोनाली लेयर आदि।

  • कड़कनाथ नस्ल

कड़कनाथ नस्ल की मुर्गी के मीट में 25% प्रोटीन पाया जाता है। इसलिए मीट उत्पादन के लिए यह सबसे उत्तम नस्ल है। लेकिन इनके अंडे देने की क्षमता काफी कम होती है, यह एक साल में सिर्फ 80 अंडे देती है।

  • ग्रामप्रिया नस्ल

ग्रामप्रिया नस्ल भारत के ग्रामीण क्षेत्र में सबसे ज्यादा पाई जाती हैं। यह प्रतिवर्ष 200-250 अंडे देती हैं, तथा 10-12 सप्ताहों में इनका वजन भी 2-5 किलो तक हो जाता है।

  • चिटागोंग नस्ल

चिटागोंग नस्ल मीट के मामले में सबसे अच्छी नस्ल मानी जाती है। इनके मुर्गों का वजन 4-5 किलोग्राम तक होता है। लेकिन इनके अंडे देने की क्षमता सिर्फ 70-120 होती है।

  • श्रीनिधि नस्ल

श्रीनिधि नस्ल एक वर्ष में तकरीबन 300 तक अंडे देती है और इनका वजन भी 5 किलोग्राम तक चला जाता है।

  • वनराजा नस्ल

भारत में वनराजा नस्ल को सबसे ज्यादा अहमियत दी जाती है। क्योंकि यह औसतन रोजाना एक अंडा देती है, और इसका वजन भी 5 किलोग्राम तक होता है।

अगर मुर्गी पालन सिर्फ और सिर्फ अंडा उत्पादन के लिए शुरू करना चाहते है तो इसके लिए कारी प्रिया लेयर, कारी देवेंद्र और कारी सोनाली लेयर प्रमुख नस्लें है।

आप उपरोक्त में से किसी भी नस्ल का चयन कर सकते हैं। इसके अलावा आप अपने आस-पास के मुर्गीपालकों से भी पता कर लीजिए की आपके क्षेत्र में कौनसी नस्ल की मुर्गी उत्तम रहेगी।

7. चूजे खरीदना

इन सब के बाद बारी आती है चूजे खरीदने की। चूजा खरीदने के लिए सावधानी रखने की आवश्यकता होती है। क्योंकि अगर हमने गलत चूजों को खरीद लिया तो वो हमारे लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। जैसे अगर उनमें से एक भी चूजा बीमार निकला तो वो अन्य चूजों को बीमार कर सकता है।

इसके लिए हम किसी मुर्गी विशेषज्ञ की सहायता ले सकते है। इसके अलावा मार्केट में चूजों की कीमत के बारे में भी पता करना चाहिए, क्योंकि हमें कम कीमत पर ज्यादा लाभ कमाना है।

अगर दो चूजे विक्रेताओं की कीमत में अंतर हो, तो हमें बढ़िया गुणवता वाले चूजे खरीदने चाहिए। ज़्यादातर बाज़ार में 30-35 रुपए के बीच चूजे मिल जाते है।लेकिन आप अपने बाज़ार के अनुसार इनकी कीमत दे सकते हैं।

8. पालन-पोषण अच्छे से करना

चूजे खरीदने के बाद इनका पालन-पोषण अच्छे तरीके से करना चाहिए। बार-बार इनके पास जाने या इनको छूने से यह डर सकते है। आपको इस बात का खास ध्यान रखना होगा की चूजे हवादार खिड़की में ही हो।

इनके खाने-पीने की व्यवस्था अच्छी हो। ताकि इनमें किसी भी प्रकार की कोई बीमारी न लगें। इसका प्रभाव इनके वजन या अंडे उत्पादन पर पड़ सकता है। चूजों के लिए समय-समय पर शुद्ध पानी की व्यवस्था करनी होगी।

चूजे को सर्वप्रथम स्टार्टर राशन देना पड़ता है, जो 8 सप्ताहों तक दिया जाता है। यह राशन मक्का, सोयाबीन, खली, मछली चूरा, चावल, नमक, खनिज लवण आदि शामिल है। जिनकी मात्र नस्ल के अनुसार अलग-अलग होती है। 8-10 सप्ताहों के मध्य चूजे अपने परिपक्व रूप में आ जाते हैं। लेकिन कुछ नस्लों में यह समय ज्यादा लेते हैं।

इसके बाद में वर्धक और फिनिशर राशन दिया जाता है। जो क्रमशः 8-20 सप्ताह और 20 सप्ताह के बाद का समय है। इनमें भी उपरोक्त आहार शामिल है। जिसमें इनकी मात्रा अलग-अलग होती है।

यह आहार अगर समय-समय पर अच्छे ढंग से दिया जाए तो महज कुछ ही समय में इनसे लाभ प्राप्त होना शुरू हो जाएगा। अच्छी सेवा होने पर चूजे 10-12 सप्ताहों में वयस्क बन जाते हैं।

पूरे बजट का लगभग 70% हिस्सा सिर्फ मुर्गियों के आहार के लिए काम आता है। इसके अलावा उन्हें खाना दिन में देना चाहिए क्योंकि वो रात में खाना नहीं खाते। रात में दिये हुए खाने पर चींटियाँ लगने का भय बना रहता है।

जो चूजों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। इसके साथ ही मुर्गियों का मल-मूत्र साफ करना बहुत जरूरी है। बजट के अनुसार ऐसी व्यवस्था करनी होगी कि उनका अपशिष्ट एक जगह एकत्रित न हो।

किसी भी मुर्गी या चूजे के बीमार होने पर एक अच्छे पशु डॉक्टर की सलाह लें। इनको समय-समय पर मौसमी बीमारियों से बचने के लिए टीके भी लगाए जाते हैं। इसलिए बेहतर होगा की एक डॉक्टर को इस काम के लिए निश्चित तौर पर रख लेना चाहिए। यह तभी करना चाहिए जब फार्म में कम से कम 50,000 मुर्गियाँ हो।

9. नियमों का पालन करना

हाल ही में सरकार ने मुर्गी पालन के लिए कई नियम बनाए है। जिनका पालन करना बहुत जरूरी है, अन्यथा इससे पॉल्ट्री फार्म का लाइसेंस रद्द हो सकता है। इसके अलावा चूजे का 8 सप्ताह के बाद ही मीट के लिए उपयोग किया जाएगा।

यह नियम सबसे सख्त नियम हैं। क्योंकि कम समय में इनका मीट के लिए उपयोग करना, पशु हत्या की श्रेणी में आता है। जिस कारण पशु हत्या अधिनियम के तहत जुर्माना वसूल किया जाएगा।

मुर्गियों के रहने का स्थान भी उचित होना बहुत जरूरी है। सरकार के अधिकारी समय-समय पर फार्म का निरीक्षण करने आते है। वहाँ पर अगर उन्हें थोड़ी सी भी लापरवाही दिखाई दी तो वो इसकी शिकायत कर सकते हैं। इसके अलावा पॉल्ट्री फार्म से किसी को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।

ज्यादा संख्या में मुर्गियाँ होने पर एक पशु डॉक्टर की नियुक्ति करनी भी आवश्यक होती है। जो कुछ भी दवाइयाँ, एंटीबायोटिक मुर्गियों को दी जाती हैं। उनका हिसाब रखना भी बहुत जरूरी है।

मुर्गी को मार्केट में कैसे बेचें?

सबसे पहले नजदीकी मार्केट में मीट और अंडे कि खपत और आपूर्ति का पता लगाना चाहिए। अगर खपत कम और आपूर्ति ज्यादा है तो वहाँ माल बेचने का कोई फायदा नहीं है।

लेकिन अगर आपूर्ति कम और खपत ज्यादा है तो वहाँ इनकी अच्छी कीमत मिल सकती है। सामान्य तौर पर बाज़ार में एक अंडा 4-5 रुपए का बिकता है और इसका मीट 70-80 रुपए/किलो।

अगर नजदीकी मार्केट में यह कीमत या इससे अच्छी कीमत मिल रही है तो वहाँ माल को बेचा जा सकता है। अब बाजार में आप उन अंडे और मीट विक्रेताओं से संपर्क कीजिए जिनका कारोबार अच्छा चलता है।

आप उन्हें किफ़ायती औफ़र देकर उनसे माल खरीदने की बात कर सकते है। अगर वो आपकी बात से सहमत हो जाते हैं तो नजदीकी मार्केट होने के कारण आपके लिए यह थोड़ा और आसान हो जाएगा।

लेकिन अगर आपको लोकल मार्केट में कोई मुनाफा नहीं दिखाई दे रहा है तो आप इसे बड़े शहरों में बेच सकते है। जहां इनकी भारी मात्रा में मांग हो। इसके लिए एक ट्रक या पिक-अप की व्यवस्था करनी होगी, जो माल को बड़े शहरों में ले जा सकें। बड़ा बाजार होने के कारण वहाँ इनकी अच्छी कीमत भी मिलेगी।

आपकी और दोस्तों

दोस्तों यह था मुर्गी पालन का बिजनेस कैसे करें, हम उम्मीद करते हैं कि इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपको मुर्गी पालन का व्यवसाय करने के बारे में पूरी जानकारी मिल गई होगी.

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क्योंकि हम चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोग मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू करें और ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाए. धन्यवाद दोस्तों

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