MLA Full Form in Hindi | MLA का फुल फॉर्म क्या है

MLA Full Form in Hindi: हमारा भारत देश जनसंख्या के मामले में विश्व में दूसरा सबसे बड़ा देश है। हमारे देश के पहले जनसंख्या के मामले में चीन का नंबर आता है। वर्तमान में हमारे भारत देश की जनसंख्या 130 करोड़ के पार पहुंच गई है और इतनी बड़ी जनसंख्या होने के कारण अपराध दर भी हमारे भारत में बहुत ज्यादा है

और अपराध को कम करने के लिए तथा लोग कानून का पालन करे, इसके लिए हमारी भारतीय सरकार ने भारतीय पुलिस विभाग की स्थापना की है, जो भारत के हर जिले में रहकर कानूनों का पालन करवाती है और जो अपराधी होते हैं उन्हें पकड़कर कोर्ट के सामने पेश करती है और फिर कोर्ट उस अपराधी को सजा सुनाती है।

इसके अलावा हमारे देश की सीमा की सुरक्षा के लिए हमारी भारतीय सरकार ने विभिन्न आर्मी को तैनात किया हुआ है,जिसमें जल, थल और वायु सेना शामिल है। इसके अलावा हमारे भारत के जंगलों में तथा ऐसे इलाकों में जो नक्सली से प्रभावित है, वहां पर भारतीय सरकार ने सीआईएसएफ और सीआरपीएफ की स्थापना की है।

जो नक्सली हमलों से आम लोगों को बचाते हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि किसी भी सिस्टम को चलाने के लिए बहुत से लोगों की आवश्यकता होती है, अगर इसे उदाहरण के तौर पर समझा जाए पुलिस को अपराधी को गिरफ्तार करने का अधिकार है ना कि उसे सजा देने का।

जिस तरह अदालत का जज अपराधी को सजा देने का काम करती है। उसी तरह हमारे भारत देश की केंद्र सरकार का काम नीति योजना और कानून को बनाना है और हमारे भारतीय सरकार के द्वारा बनाए गए कानून का पालन करवाना राज्यों की जिम्मेदारी होती है।

अगर कोई राज्य कानून का पालन सही ढंग से नहीं करवा पाता, तो वहां पर हमारे भारत देश की केंद्र सरकार चाहे तो राष्ट्रपति शासन लगा कर उस राज्य को अपने अधिकार में ले सकती है और जब तक वहां पर कोई चुनाव संपन्न नहीं हो जाते या फिर कोई नया मुख्यमंत्री नहीं बन जाता तब तक केंद्र सरकार उस राज्य में कानून व्यवस्था देती है।

हमारे भारत में हर जिले में दो तीन सांसद और एमएलए अवश्य होते हैं, इनका काम आम जनताओं की समस्या को सुनना होता है और जो सांसद या फिर एमएलए जिस जगह से चुना जाता है उसका यह पहला कर्तव्य होता है कि वह अपने क्षेत्र का विकास करें।

हमारी भारतीय सरकार हर साल एमएलए और सांसद को उसके क्षेत्र के विकास के लिए एक निश्चित फंड देती है, जिसका इस्तेमाल एमएलए अपने क्षेत्र के विकास के लिए करता है।एमएलए अपने क्षेत्र में होने वाले सभी कामों के बारे में उस राज्य के मुख्यमंत्री को जानकारी देता है, जहां से वह एमएलए बना हुआ होता है।

दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम आपको एमएलए की फुल फॉर्म के बारे में बताने वाले हैं। अगर आप इंटरनेट पर यह सर्च करते रहते हैं कि एमएलए का फुल फॉर्म क्या होता है या फिर एमएलए का अर्थ क्या होता है तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं।

क्योंकि आज के हमारे इस आर्टिकल में आपको इसके बारे में पूरी जानकारी मिलने वाली है, तो आइए जानते हैं कि एमएलए क्या है तथा एमएलए का फुल फॉर्म क्या होता है

MLA Full Form in Hindi

MLA का फुल फॉर्म क्या है

MLA full form in hindi

■ एमएलए का अंग्रेजी में फुल फॉर्म क्या होता है

सबसे पहले तो आइए जान लेते हैं कि एमएलए का अंग्रेजी में फुल फॉर्म क्या होता है।आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एमएलए का अंग्रेजी में फुल फॉर्म होता है “मेंबर ऑफ लेजिसलेटिव असेंबली” इसे हिंदी में लेजिसलेटिव असेंबली का सदस्य कहा जाता है।

■ एमएलए को हिंदी में क्या कहा जाता है

एमएलए को हिंदी में विधानसभा सदस्य कहा जाता है और आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एमएलए का चुनाव हम और आप जैसी सामान्य जनता करती है।जब एमएलए का चुनाव होता है, तब एमएलए घर-घर जाकर लोगों से वोट देने की अपील करते हैं।

एमएलए 1 सीट से ही चुनाव लड़ सकता है। इसके अलावा एमएलए का चुनाव लड़ने के लिए चुनाव आयोग में विभिन्न प्रकार की जानकारी देनी होती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 1 विधानसभा में बहुत से विधायक होते हैं और उन्हीं विधायकों में से कोई विधायक एक दिन राज्य का मुख्यमंत्री बनता है।

हालांकि राज्य का मुख्यमंत्री बनने के लिए उसकी पार्टी की जीत उस राज्य में होनी चाहिए और उसकी पार्टी के सभी सदस्य जब उसके नाम पर मुहर लगाएंगे तभी वह मुख्यमंत्री बन सकता है।

एमएलए किसी पार्टी के झंडे के तले चुनाव लड़ सकता है या फिर वह चाहे तो निर्दलीय भी चुनाव लड़ सकता है, निर्दलीय अर्थात जो किसी दल से ना हो।

■ MLA का मतलब क्या होता है

एमएलए विधानसभा का सदस्य होता है और विधानसभा सदस्य को ही एमएलए याने की मेंबर ऑफ लेजिसलेटिव असेंबली कहां जाता है। हमारे भारत देश में हर राज्य में अलग-अलग समय में 5 सालों में चुनाव होते रहते हैं।

आपने टीवी चैनल में भी यह देखा होगा कि हर 5 साल में भारत के सभी राज्यों में मुख्यमंत्री के चुनाव होते हैं और फिर जो पार्टी उस चुनाव में जीत हासिल करती है, उस पार्टी का मुख्यमंत्री उस राज्य में बनाया जाता है।

यह जरूरी नहीं है कि कोई एक पार्टी का मुख्यमंत्री लगातार किसी राज्य का मुख्यमंत्री हो, यह जनता के ऊपर आधारित रहता है कि वह किस पार्टी को जिताए या फिर किस पार्टी को हराए। हमारे भारत देश में जनसंख्या के आधार पर सभी क्षेत्रों को अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्र में बांटा जाता है और हर निर्वाचन क्षेत्र में से एक व्यक्ति को चुना जाता है।

हालांकि निर्वाचन क्षेत्र से बहुत से व्यक्ति चुनाव लड़ सकते हैं, परंतु उनमें से जीत किसी एक की ही होती है और उसे ही एमएलए के तौर पर चुना जाता है।किसी एक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलए बनने की योग्यता रखने वाले बहुत से अभ्यर्थी चुनाव लड़ने के लिए खड़े हो सकते हैं, परंतु उसमें से जीत किसी एक की ही होगी और एमएलए भी कोई एक ही बनेगा।

इसके अलावा एमएलए का चुनाव लड़ने के लिए यह जरूरी नहीं है कि, उम्मीदवार किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़ा हुआ हो। एमएलए का चुनाव ऐसा हर वह व्यक्ति लड़ सकता है जो एमएलए बनने की योग्यता रखता हो फिर चाहे वह किसी पार्टी से संबंध रखता हो या फिर ना रखता हो।

जो व्यक्ति किसी पार्टी से जुड़ा हुआ नहीं है और वह एमएलए का चुनाव लड़ना चाहता है तो उसे निर्दलीय चुनाव लड़ना पड़ेगा और जो उम्मीदवार बिना किसी पार्टी के एमएलए का चुनाव लड़ते हैं उसे निर्दलीय उम्मीदवार कहा जाता है।

ऐसा नहीं है कि अगर कोई व्यक्ति किसी पार्टी के झंडे के तले चुनाव लड़ रहा है तो जीत उसकी ही होगी। हमारे भारत में ऐसे कई नेता है जो निर्दलीय चुनाव लड़ते हैं और उनकी जीत भी होती है, जो उम्मीदवार बिना किसी पार्टी के चुनाव लड़ता है उसे स्वतंत्र उम्मीदवार या निर्दलीय उम्मीदवार कहा जाता है।

■ एमएलए बनने के लिए क्या योग्यताएं होनी चाहिए

अगर आप भारत में एमएलए का चुनाव लड़ कर एमएलए बनना चाहते हैं, तो इसके लिए सबसे पहली शर्त यह है कि आप भारतीय नागरिक होने चाहिए तथा आपके पास वैलिड आईडी प्रूफ होना चाहिए।अगर आपने किसी अन्य देश की सदस्यता ले रखी है तो आप भारत में एमएलए का चुनाव नहीं लड़ सकते।

इसके अलावा जो व्यक्ति एमएलए का चुनाव लड़ना चाहता है, उसकी कम से कम उम्र 25 साल होनी चाहिए।इसके साथ ही वह जिस राज्य में रहता है, उसका नाम उस राज्य की मतदाता सूची में होना चाहिए।

साथ ही उम्मीदवार को मानसिक और शारीरिक तौर पर बिल्कुल फिट होना चाहिए। उसके ऊपर कोई भी आपराधिक मुकदमे नहीं होने चाहिए।

■ मेंबर ऑफ लेजिसलेटिव असेंबली का काम क्या होता है

हमारी भारतीय सरकार हर साल एमएलए और सांसद को उसके क्षेत्र के विकास के लिए एक निश्चित फंड देती है, जिसका इस्तेमाल एमएलए अपने क्षेत्र के विकास के लिए करता है।एमएलए अपने क्षेत्र में होने वाले सभी कामों के बारे में उस राज्य के मुख्यमंत्री को जानकारी देता है, जहां से वह एमएलए बना हुआ होता है।

मेंबर ऑफ लेजिसलेटिव असेंबली जनता की ओर से विधानसभा में अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है और अपने क्षेत्र में पलने वाली समस्याओं के बारे में विधानसभा को अवगत कराता है।

इसके अलावा मेंबर ऑफ लेजिसलेटिव असेंबली लोगों की शिकायत सुनता है और उनकी शिकायत का निराकरण करने का प्रयास करता है। इसके अलावा एमएलए अपने क्षेत्र के लोगों की इच्छाओं को राज्य सरकार तक पहुंचाने का काम करता है।

जैसे आपने देखा होगा कि कई बार लोग अपने क्षेत्र के एमएलए से किसी रोड का निर्माण, किसी ब्रिज के निर्माण, सब्जी मंडी का निर्माण, पानी की सुविधा, रोजगार की सुविधा इत्यादि के बारे में शिकायत करते हैं तो ऐसी शिकायतें एमएलए राज्य के मुख्यमंत्री को पहुंचाता है, ताकि वह अपने क्षेत्र की जनता की समस्याओं का निराकरण कर सके।

एमएलए जिस सीट से चुनाव जीता हुआ होता है, उस सीट की जनता का सीधा एमएलए से संपर्क होता है और एमएलए भी अपनी जनता का भरपूर साथ देता है।

एमएलए सरकार द्वारा दी जाने वाली सभी सुविधाओं का भरपूर लाभ प्राप्त करता है। इसके अलावा एक एमएलए की हमेशा यह कोशिश रहती है कि सरकार द्वारा दी जाने वाली सभी सरकारी योजना का लाभ उसके क्षेत्र के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे।

इसके अलावा एमएलए अपने क्षेत्र के मुद्दों को विधानसभा में उठाता है जिसका हल सरकार द्वारा किया जाता है। इसके अलावा हर साल सरकार एमएलए को अपने क्षेत्र के विकास के लिए फंड मुहैया करवाती है और एमएलए उस फंड का इस्तेमाल करके अपने क्षेत्र के जरूरी विकास कार्यों को करवाता है।

इसके अलावा एमएलए आपातकाल में अपने क्षेत्र में हुई अनहोनी के बाद पीड़ित परिवारों को सरकार द्वारा दिए गए फंड में से सहायता राशि मुहैया करवाता है। एमएलए अपने क्षेत्र के विकास के लिए उत्तरदाई होता है।

■ मेंबर ऑफ लेजिसलेटिव असेंबली की अवधि

जैसा कि आप जानते हैं कि कोई भी पद परमानेंट नहीं होता है, उसी तरह एमएलए का पद भी परमानेंट नहीं होता है।हर 5 सालों में एमएलए के पद के लिए चुनाव होते रहते हैं।

यह आवश्यक नहीं है कि, जो व्यक्ति वर्तमान के समय में जिस विधानसभा से एमएलए है अगली बार भी वही उस विधानसभा से एमएलए के पद पर रहेगा, क्योंकि जनता जब चाहे जिसे जिता सकती है और जब चाहे जिसे हरा सकती है।

एक मेंबर ऑफ लेजिसलेटिव असेंबली का कार्यकाल 5 साल का होता है और विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने के साथ ही मेंबर ऑफ लेजिसलेटिव असेंबली का कार्यकाल भी खत्म हो जाता है।

विधानसभा का कार्यकाल 5 साल का ही होता है, परंतु अगर राज्य का मुख्यमंत्री चाहे तो वह अपने राज्यपाल से अनुरोध करके 5 साल के कार्यकाल को पहले भी भंग कर सकता है।

हालांकि इसके लिए राज्यपाल की परमिशन लेनी जरूरी है, वहीं मुख्यमंत्री चाहे तो आपातकाल के समय में विधानसभा का कार्यकाल बढ़ा भी सकता है, परंतु एक बार में विधानसभा का कार्यकाल 6 महीने से ज्यादा नहीं बढ़ाया जा सकता है।

■ एमएलए को मिलने वाली सरकारी सुविधाएं

एमएलए का पद एक सरकारी पद होता है। परंतु यह परमानेंट पद नहीं होता है,परंतु जो व्यक्ति एमएलए के पद पर होता है, उसे कई सरकारी सुविधाएं प्राप्त होती है।

एक एमएलए को उस राज्य की सरकार द्वारा बहुत सी सरकारी सुविधाएं दी जाती है, जिस राज्य से वह एमएलए के पद पर विराजमान होता है, हालांकि यह सुविधा भारत के हर राज्य में अलग-अलग हो सकती है।

जैसे अगर हम तेलंगाना की बात करें तो तेलंगाना राज्य में एमएलए को हर महीने लगभग ढाई लाख रुपए तक का वेतन दिया जाता है, परंतु उत्तर प्रदेश में यही वेतन ₹200000 प्रति महीने हैं। इसके अलावा एमएलए को सरकार की तरफ से आवागमन के लिए मुफ्त गाड़ी, महीने के डीजल की सुविधा, रहने के लिए सरकारी घर तथा सुरक्षा के लिए अंगरक्षक भी दिए जाते हैं।

इसके अलावा जब एमएलए अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा कर लेता है, तब उसे हर महीने ₹30000 की पेंशन भी सरकार द्वारा दी जाती है। इसके अलावा एमएलए को भारतीय रेलवे में पूरी जिंदगी फ्री में यात्रा करने के लिए परमिशन दी जाती है।

साथ ही इन्हें फ्री में पूरी जिंदगी भर मेडिकल ट्रीटमेंट की सुविधा भी दी जाती है। इसके अलावा एमएलए को सरकार की तरफ से उसके क्षेत्र के विकास के लिए हर साल करोड़ों में रकम दी जाती है, जिसका इस्तेमाल एमएलए अपने क्षेत्र में विकास कार्य को करवाने के लिए करता है।

■ मेंबर ऑफ लेजिसलेटिव असेंबली कैसे बनते हैं

जो व्यक्ति मेंबर ऑफ लेजिसलेटिव असेंबली यानी कि एमएलए बनना चाहता है, उसे सबसे पहले विधानसभा के चुनावों में भाग लेना होता है और इसके लिए उसे किसी राजनीतिक दल से जुड़ना होता है।

हालांकि यह उसकी मर्जी है, कि वह किसी दल से जुड़े या ना जुड़े। व्यक्ति चाहे तो निर्दलीय भी विधानसभा का चुनाव लड़ सकता है, परंतु निर्दलीय चुनाव लड़ कर विजय प्राप्त करने के लिए आपकी जनता के बीच अच्छी पकड़ होनी चाहिए।

अगर आपकी जनता के बीच अच्छी पकड़ है तो आप एमएलए के चुनाव में विजय प्राप्त कर सकते हैं और अगर आपकी जनता के बीच अच्छी पकड़ नहीं है, तो आपको चुनावों में हार का सामना करना पड़ सकता है।

अगर आपने पहले से ही अपने क्षेत्र में अपनी छवि एक सामाजिक व्यक्ति के तौर पर बनाई है तो आप को चुनाव जीतने में आसानी हो सकती है। इसके अलावा एमएलए के चुनाव जीतने के लिए लोगों के नजर में आना बहुत ही जरूरी होता है।

इसलिए चुनाव लड़ने से पहले आप अपने क्षेत्र के लोगों के बीच मे अपने आप को एक ईमानदार, निष्पक्ष और दयालु व्यक्ति के तौर पर स्थापित करें। इसके अलावा अपने क्षेत्र में प्रसिद्ध होने के लिए आप समय-समय पर धार्मिक काम करते रहे, जैसे कि कोई सामूहिक भंडारा करवाते रहें इत्यादि।

क्योंकि जब आप कोई काम करवाएंगे, तभी लोग आपके बारे में जानेंगे और आपकी प्रसिद्धि होगी, क्योंकि एमएलए के चुनाव में ऐसा तो है, नहीं कि आपके घर के आसपास के लोग वोट देंगे बल्कि आपके एरिया में जितने भी लोग होते हैं वह सभी एमएलए के चुनाव में वोट देते हैं।

इसलिए आपका चेहरा लोगों की नजर में आए ऐसा काम अवश्य करें, साथ ही जब आप चुनाव लड़े तो गली में सभा अवश्य करें और उस सभा में आप चुनाव जीतने के बाद अपने क्षेत्र के लिए तथा अपने क्षेत्र की जनता के लिए कौन-कौन से काम करेंगे, इसके बारे में अवश्य बताएं, ताकि लोग आप से प्रभावित हो और आपको चुनाव में वोट देने के बारे में सोचें।

■ एमएलए बनने की योग्यता संक्षेप में

– वह व्यक्ति भारत का नागरिक हो।

– जो व्यक्ति विधान सभा चुनाव में भाग लेना चाहते है, उनकी आयु 25 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए।

– उम्मीदवार को उस राज्य में किसी भी निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता होना आवश्यक है।

– उम्मीदवार को मानसिक रूप से स्वस्थ होना आवश्यक है।

■ मेंबर ऑफ लेजिसलेटिव असेंबली का काम संक्षेप में

– एक एमएलए के द्वारा लोगों की शिकायतों और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व किया जाता है।

– एमएलए के द्वारा लोगों की इच्छा को राज्य सरकार तक पहुँचाया जाता है।

– एक विधायक के द्वारा अपने क्षेत्र के लोगों के साथ सीधे जुड़ाव होता है।

– वह सरकार द्वारा प्रदान की गयी सभी सुविधाओं का लाभ प्राप्त करता है।

– उसके द्वारा सरकारी योजनाओं का लाभ अपने क्षेत्र के लोगों को अधिक से अधिक प्रदान करने का प्रयास किया जाता है।

– वह अपने क्षेत्र के मुद्दों को विधान सभा में उठाता है, जिनका हल सरकार के द्वारा किया जाता है।

– वह अपने क्षेत्र की जनता का प्रतिनिधि होता है।

– उसे अपने निर्वाचन क्षेत्र को विकसित करने के लिए स्थानीय क्षेत्र विकास फंड का सही से उपयोग करना होता है।

– वह अपने क्षेत्र का विकास करने के लिए उत्तरदायी होता है।

■ एमएलए का चुनाव कैसे होता हैं

भारत के हर राज्य की अपनी एक विधानसभा होती है और उस विधानसभा में सीटों की संख्या निश्चित होती है। जैसे उदाहरण के तौर पर राजस्थान राज्य की विधानसभा में 200 सीट है, इसका मतलब यह होता है कि पूरे राजस्थान से 200 एमएलए चुने जाएंगे।

एमएलए का चुनाव करने के लिए चुनाव आयोग द्वारा हर 5 साल में चुनाव करवाए जाते हैं और चुनाव आयोग द्वारा विधानसभा की सीट जनता द्वारा वोटिंग करने के लिए पोलिंग बूथ की व्यवस्था की जाती है

और उस सीट पर हर पार्टी अलग-अलग उम्मीदवार खड़े करती है, साथ ही जो निर्दलीय उम्मीदवार होते हैं, वह भी उस सीट पर एमएलए का चुनाव लड़ने के लिए खड़े होते हैं। इस चुनाव में राज्य के सभी मतदाता भाग लेते हैं और अपने अपने कैंडिडेट को वोट देकर जिताने का प्रयास करते हैं।

परंतु ऐसा नहीं है कि जिस उम्मीदवार को वोट प्राप्त हो वह विधानसभा के चुनाव जीतेगा ही, क्योंकि वोट तो सभी लोग प्राप्त कर लेते हैं, परंतु जो उम्मीदवार सबसे ज्यादा वोट प्राप्त करता है, उसे ही उस विधानसभा से विजेता घोषित किया जाता है और इस तरह वह उस विधानसभा से जीतकर एमएलए का पद प्राप्त करता है, जिसे हम विधायक कहते हैं।

इस तरह पूरे राज्य की विधानसभा से विजई एमएलए राज्य की विधानसभा में पहुंचते हैं और यह एमएलए विधानसभा में अपने अपने क्षेत्र के प्रतिनिधि के रूप में काम करते हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जिस राजनीतिक पार्टी के सबसे ज्यादा विधायक जीतते हैं, वह पार्टी उस राज्य में अपनी सरकार बनाती है। जैसे उदाहरण के तौर पर अगर उत्तर प्रदेश में विधायक के चुनाव हुए और उसमें सबसे अधिक विधायक भारतीय जनता पार्टी के जीते तो भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार बनाएगी।

और इसके बाद भारतीय जनता पार्टी एक दिन अपने जीते हुए सभी विधायकों की बैठक बुलाएगी और उसमें विधायक दल द्वारा जिस व्यक्ति के नाम पर पर मोहर लगाई जाएगी, उसे उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया जाएगा तथा जो अन्य विधायक बचेंगे उन्हें उस मुख्यमंत्री के मंत्रिमंडल में अन्य पद दिए जाएंगे।

इस तरह अगर किसी एमएलए को अन्य एमएलए का समर्थन प्राप्त होता है, तो वह किसी भी राज्य का मुख्यमंत्री बन सकता है। एमएलए अपने क्षेत्र की समस्याओं को विधानसभा में उठाता है और राज्य के मुख्यमंत्री के सामने प्रकट करता है।

इसके बाद मुख्यमंत्री उस समस्या का निराकरण करने का आदेश देते हैं।आमतौर पर जो निर्दलीय विधायक होते हैं, वह बहुत कम ही मुख्यमंत्री बन पाते हैं क्योंकि उनके पास ज्यादा विधायकों का सपोर्ट नहीं होता है।

भारत में आज तक जितने मुख्यमंत्री हुए है वह किसी ना किसी पार्टी से संबंध रखते हैं क्योंकि निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले बहुत कम लोग होते हैं और पार्टी के झंडे तले चुनाव लड़ने वाले लोग अधिक होते हैं।

■ भारत के विभिन्न राज्यों में एमएलए की सैलरी

भारत के हर राज्य में एमएलए का वेतन अलग अलग होता है और यह वेतन उन्हें विद्यायक निधि के अंतर्गत प्राप्त होता है। भारत के हर राज्य में हर एमएलए को हर साल एक करोड़ से लेकर 4 करोड रुपए तक प्रतिवर्ष दिए जाते हैं। इससे ही विधायकों का वेतन दिया जाता है। नीचे हमने भारत के कुछ राज्यों के विधायकों को मासिक तौर पर मिलने वाली सैलरी की जानकारी दी है।

– तेलंगाना 2.5 लाख रु.

– दिल्ली 2.10 लाख रु.

– उत्तर प्रदेश 1.87 लाख रु.

-महाराष्ट्र 1.70 लाख रु.

-जम्मू और कश्मीर 1.60 लाख रु.

-उत्तराखंड 1.60 लाख रु.

-आंध्र प्रदेश 1.30 लाख रु.

-हिमाचल प्रदेश 1.25 लाख रु.

-राजस्थान 1.25 लाख रु.

-गोवा 1.17 लाख रु.

-हरियाणा 1.15 लाख रु.

-पंजाब 1.14 लाख रु.

-झारखंड 1.11 लाख रु.

-मध्य प्रदेश 1.10 लाख रु.

-छत्तीसगढ़ 1.10 लाख रु.

-बिहार 1.14 लाख रु.

-पश्चिम बंगाल 1.13 लाख रु.

-तमिलनाडु 1.05 लाख रु.

-कर्नाटक 98 हजार रु.

-सिक्किम 86.5 हजार रु.

-केरल 70 हजार रु.

-गुजरात 65 हजार रु.

-ओडिशा 62 हजार रु

-मेघालय 59 हजार रु.

-पुडुचेरी 50 हजार रु.

-अरुणाचल प्रदेश 49 हजार रु.

-मिजोरम 47 हजार रु.

-असम 42 हजार रु.

-मणिपुर 37 हजार रु.

-नागालैंड 36 हजार रु.

-त्रिपुरा 34 हजार रु.

आपकी और दोस्तों:

तो दोस्तों ये था MLA का फुल फॉर्म क्या है, हम उम्मीद करते है की इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आप सभी को ये पता चल गया होगा की mla का फुल फॉर्म क्या होता है|

अगर आपको हमारी ये पोस्ट अच्छी लगी तो प्लीज पोस्ट को लाइक और शेयर जरुर करे ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगो को mla के फुल फॉर्म के बारे में पूरी जानकारी मिल पाए धन्येवाद दोस्तों|

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