Sad & Romantic Short Love Stories in Hindi

नमस्कार दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम आपके साथ बहुत ही अच्छी अच्छी लव स्टोरीज शेयर करने वाले है. हमको पूरा विश्वाश है की यदि आपने हमारे ये सभी स्टोरी को पढ़ा तो आपको बहुत अच्छा लगेगा.

हमको बहुत दिनों से ये रिक्वेस्ट आ रही थी की प्लीज कोई सेड या रोमांटिक लव स्टोरी शेयर करे तो इसकी वजह से आज ये स्टोरीज हम आपके साथ शेयर करने वाले है|

Love Stories in Hindi

1. तेरा सजदा(a beautiful romantic love story)

Romantic love story in hindi

तेरा सजदा!

जयपुर, राजस्थान!

“है राम ये लड़की कब सुधरेगी ..अभी तक सो रही है और सूरज देवता सर पे आ गए ..कॉलेज तो जैसे उठ ही गया है जयपुर से!” मीना जी ये कहते हुए अपने घर की छत की तरफ बढ़ी ।

ऊपर आयी तो पूरा शहर दिख रहा था ,भले ही जयपुर मेट्रो सिटी बन गया पर इसकी रजवाड़ी चमक आज भी ऐसी ही थी ।

मीना ऊपर आयी और खाट के ऊपर रजाई ओढ़ के सो रही लड़की से रजाई हटायी तो उसने वापिश रजाई मुँह पे खींच ली । मीना ने गुस्से में पूरी रजाई ही खींच ली और बोली,” महारानी दिशा आप उठेंगे या ढोल नगाड़े बजवाये जाएं।”

दिशा अँगड़ाई लेते हए बोली,” बजवा दो ..रॉयल फीलिंग आ जायेगी!”

ये कहना था कि मीना बिफर पड़ी,” महारानी कॉलेज में तू फर्स्ट आ कैसे जाती है ,उठ जा वरना झाड़ू से मरूँगी।”

दिशा अपने कमर तक आ रहे बालों को समेटते हुए उठी , हल्की भूरी आँखे ,नाजुक होठ और 5’6″ हाइट और सबसे प्यारी उसकी मुस्कान ,जो कोई देखे तो बस देखता रहे।

दिशा ने बालों का जुड़ा बनाया और मीना के गले में बाहें डालती हुई बोली, ” अरे माँ चिल करो ,महारानी दूर नहीं है और आपकी बेटी भी सुपरस्टार से कम नहीं”

मीना की माँ बोली,” ज्यादा मस्का मत लगा जा तैयार हो जा।”

मीना जल्दी से रेडी हुई और बाहर स्कूटी की तरफ बढ़ गयी । उसकी दोस्त डिंपी भी आ गयी । दोनों बैठ के चौराहे की तरफ बढ़ी , ट्रैफिक होने की वजह से उन्हें रुकना पड़ा ,तभी पास दो गुंडे जैसे दिखने वाले दो लड़के खड़े थे । दिशा ने देख के इग्नोर किया लेकिन वो दोनो कुछ ना कुछ बोल रहे थे ,अब दिशा से बर्दास्त नहीं हुआ ,वो कुछ कहती उससे पहले ही ट्रैफिक हट गया और वो दोनों लड़के सिटी बजाते हुए निकल गए ।

दिशा ने डिंपी से कहा,” कस के पकड़ ले वरना गिर गयी तो मेरी गारंटी नहीं हैं ,कुछ मजनुओं को लैला के दर्शन करवाने है ” ये सुन के डिम्पी ने उसे कस के पकड़ लिया ।

अगले सिग्नल पे वो दोनों लड़के खड़े थे , दिशा स्कूटी से उतरी और उनके पास जाके पीछे से उन दोनो की शर्ट पकड़ बाइक से गिरा दिया । ये देख वहाँ खड़े सब लोग हँसने लगें । उन दोनों लड़को को गुस्सा आया ।

दोनो लड़के हाथों से धूल झाड़ते हुए खड़े हुए और बोले ,” तेरी इतनी हिम्मत ,तुझे पता नहीं हम कौन है!”

दिशा कमर पे दुप्पटा बांधते हुए बोली,” जानना जरूरी भी नहीं समझती की तुम दोनो कौन हो ,पर जैसी हरकत कर रहे थे पता चलता है कि मवाली हो!”

एक लड़का उसे मारने के लिए आगे बढ़ा इतने में दिशा ने एक हाथ पकड़ा और दूसरे हाथ से मुक्का जमा दिया ,वो अपना मुँह पकड़ते हुए पीछे जाने लगा ,तभी दूसरा लड़का भी ग़ुस्से में उसके पास आ गया ,पर दिशा कँहा कम थी उसने उन दोनों की धुंआधार पिटाई कर दी ।

तभी किसी ने दिशा के कंधे पे हाथ रखा तो वो गुस्से में मुड़ी और अगले इंसान पे भी मुक्का तान दिया ,लेकिन सामने 6 फुट लंबा ,थ्री पीस सूट में एक लड़का खड़ा था , बॉडी और फेस से साफ पता चल रहा था कि कोई बड़ा आदमी है । उसने दिशा को देख आँखों से चश्मा हटाया ..

काली आँखे ,गेंहुआ रंग , हल्के गुलाबी होंठ कुल मिला के कमाल की पर्सनलिटी ! दिशा के चेहरे पे बाल हल्के हल्के से उड़ के आ रहे थे वो इतने करीब थे कि हवा को भी गुजरने के लिए टाइम लगता .. इस परिस्थिति को बयाँ करना मुश्किल था ,बस लम्हा ठहर गया ।

बैकग्राउंड म्यूजिक-

रोम रोम तेरा नाम पुकारे ..एक हुए रे दिन रे हमारे..
हमसे हम ही छीन गए हैं ..जबसे देखे हैं नैन तिहारे..

सजदा..!!!!!!

तेरी काली अंखियों से जींद मेरी जागे ..
धड़कन से तेज भागूँ सपनों से आगे..
ये जान लूट जाए ,ये जहाँ छूट जाए ..
संग प्यार रहे ,मैं रहूँ ना रहूँ ..

सजदा तेरा सजदा ..दिन रहन करूँ ना ही चैन करूँ !!
सजदा तेरा सजदा ..लखवार करूँ मेरी जान करूँ !!

रांझणा नैनों के तीर चल गए..सजना सांसों से दिल सील गए !
पलकों में छुपा लू तेरा सजदा करूँ !
सीने में समा लूं , दिन रहण करूँ!!
पलकों में समा लूँ सीने में समा लूँ
तेरा अंग अंग रंग मेरा बोले..

अब जहाँ लूट जाए ,ये जहाँ छूट जाए !
संग प्यार रहे ,मैं रहूँ या ना रहूँ !

सजदा तेरा सजदा दिन रहण करूँ ..लखवार करूँ!

तभी गाड़ियों की आवाज़ आने लगी तो दिशा ने नजरें हटाई और खुद को संभालते हुए पीछे हटी तो वो सख्श बोला,” बीच चौराहे पे ऐसी बेदर्दी से किसी को कौन पिटता है!”

दिशा उसे घूरते हुए बोली,” मैं पिटती हूँ! लड़कियों को छेड़ेगा तो ऐसे ही होगा ना”

दिशा ने एक हाथ ऊपर किया और दूसरे हाथ से उसे पकड़ते हुए बोली,” मैंने हाथों में चूड़ियां नहीं पहन रखी है सब लोगों के जैसे”

वो लड़का उसका हाथ देख मुस्कुराने लगा तो दिशा ने अपना हाथ देखा तो उसमें उसने चूड़ियाँ पहन रखी थी ।
उसने जल्दी से हाथ नीचे किया और नजरें चुराती हुई बोली,” मेरा मतलब वैसी वाली नहीं पहन रखी है!”

वो सख्श अपनी हँसी दबाए खड़ा था ,और दिशा को खुनस हो रही थी तभी डिम्पी आयी और उसे पकड़ के ले जाते हुए बोली,” चल मेरी माँ लेट हो जाएगा !” दिशा का हाथ डिम्पी पकड़ के ले जा रही थी ,लेकिन दिशा वापिश उस लड़के को देखने के लिए मुड़ी और उसके बाल उसके चेहरे पे आ गए । वो अभी भी हँस रहा था ,दिशा ने मन में कहा,” हूँ खड़ूस कहीं का!”

दिशा शाम को अपने घर की छत पे हैडफोन लगा के टहल रही थी तभी डोर बेल बजी तो उसकी मम्मी ने उसे दरवाजा खोलने के लिए पुकारा! वो नीचे आयी और दरवाजा खोला और सामने वो ही लड़का खड़ा था ,फिर से उनकी नजरे मिली और बस थम सी गयी ,दिशा के हैडफ़ोन में “सजदा ” सांग की बज रहा था ।उसने हेडफोन हटाया और बोली,” आप !! यहाँ तक आ गए ,क्या लेने आये हो !”

वो नॉनस्टॉप बोले जा रही थी ,तभी उसकी मम्मी आयी और उसे दरवाजे से दूर करते हुए बोली ,” अरे दिवेश बेटा आ गए , तुम्हारी मम्मी ने बताया था कि आने वाले हो ! अंदर आओ ना बाहर क्यों खड़े हो !”

दिशा अभी भी उसे घूरे जा रही थी ,वो मुस्कुराते हुए बोला,” लगता है आंटी किसी को मेरा आना पसंद नही है !”

दिशा की मम्मी दिशा को आँखे दिखाते हुए बोली,” मेहमानों को ऐसे घूरते है क्या जाओ अपने रूम में और दिवेश को भी उसका रूम दिखा देना ये भी आराम कर लेगा !”

दिशा उसे गुस्से में घूरते हुए बोली,” जी मम्मी !”

दिशा जल्दी से ऊपर गयी और और डिम्पी को फोन किया,” देख डिम्पी बिना सवाल किया जल्दी से आ जा ,वो कबूतर घर में ही घुस गया है , उसे सबक सिखाना जरूरी है!”

डिम्पी- अरे कौनसा कबूतर ,किसकी बात कर रही हैं?

दिशा – अरे वही चौराहे वाला!

डिम्पी – हाय वो ,कितना हॉट बन्दा है वो मैं तो अभी आयी ।

दिशा फोन को बेड पे फेंकते हुए बोली,” देखा मैं बुलाती हूँ तब तो कभी इतनी जल्दी नहीं आती ,आज दौड़ी चली आ रही ,बेवफा कहीं की!”

पीछे से दिवेश आते हुए बोला,” पर मैं बेवफा नहीं हूं”
दिशा मुँह बनाते हुए बोली – आपसे पूछा भी नहीं मैंने !”
दिवेश – तो पूछ लीजिए शायद आपके काम आ जाये !”

उन दोनों की आँखे फिर से मिली ,लेकिन तभी दिशा की मम्मी की आवाज़ आयी तो वो उससे बचते हुए नीचे चली गयी , उसकी मम्मी बोली,” जाओ दिवेश को जयपुर घुमा लाओ “

दिशा मन मसोस के दिवेश के साथ चल पड़ी , दोनो कार के पास जाने लगे तो दिशा बोली ,” बाइक से चले !” दिवेश भी राजी हो गया ।

दिशा बाइक पे बैठते हुए बोली,” जौहरी बाजार चलेंगे , वहाँ पे हेंडीक्राफ्ट ,जेव्वेलेरी सब बहुत अच्छा मिलता है!”

दिवेश – हम शॉपिंग पे नहीं जा रहे घूमने जा रहे है !”

दिशा मुँह बनाते हुए बैठ गयी,फिर जयपुर की सड़कों पे दोनों बाइक पे थे, दिशा उसे इशारे से बता रही थी कि क्या क्या है,दोनो राइड इंजॉय कर रहे थे ,थोड़ि देर बाद दोनों जौहरी बाजार के बाहर थे ।

दिशा दिवेश को आश्यर्य से देखते हुए बोली,” आपको तो यहाँ नहीं आना था ना!”
दिवेश : फिर किसी का दिल रखने के लिए आ गए !

दिशा उसे जाते हुए देख रही थी ,” इतना भी सडु नहीं है !”

दोनो काफी देर तक घूमते रहे दिशा थक के जयपुरी पान वाले के पास बैठ गयी । और दिवेश बोली,” पान खाना हैं !”

दिवेश- तुम खाती हो!
दिशा आँखे बंद करते हुए बोली – हाँ कभी कभी !
दिवेश इस हरकत पे हँस पड़ा और दोनो पान खाने के बाद चल पड़े तो दिशा अपनी जीभ बाहर निकाल के बोली,” देखो मेरी जीभ इतनी लाल!”

दिवेश पेट पकड़ के हँसने लगा , तो दिशा मुँह फुलाते हुए चली गयी वो उसे हँसते हुए पुकारने लगा ।

दोनों घर आ गए अब वो दोनों एक दूसरे की कंपनी एन्जॉय कर रहे थे ,पेड़ से आम तोड़ना ,सड़कों पे रात में अकेले भागना ,मंदिर से पैसे लेके गरीबो को खाना खिलाना ,बातें शेयर करना और रात में छत पे बैठ के तारे गिनना ,और जोर जोर से गाने गाना । कपल डांस करना और थक के एक बेड पे सो जाना ।

लेकिन दिशा ने कभी भी दिवेश से नहीं पूछा कि वो क्या करता है।पर दिशा पुलिस को बहुत बुरा समझती थी क्योंकि उसे लगता था कि पुलिस लोगों का फायदा उठाती है ।

एक शाम डिम्पी के कहने पे उन्हें कपल डांस की प्रैक्टिस करनी थी ,इसलिए उन दोनों ने दिवेश को पकड़ा ,अब शाम हो गयी , वो दोनों छत पे थे आस पास जुगनू घूम रहे थे जिसकी वजह से शाम और भी खूबसूरत थी ।

हमेशा की तरह आज भी “सजदा ” सांग ही बज रहा था ,दिवेश ने दिशा को कमर से पकड़ा और पास खींचते हुए डांस करने लगे ,आज वो डांस कम बातें ज्यादा कर रहे थे ।

दिवेश- मैं तुम्हें प्रपोज़ कर दूं तो?
दिशा हँसते हुए बोली – हार्ट अटैक आ जायेगा मुझे!
दिवेश गुस्से में बोला – क्या बकवास बात थी ये !
दिशा – अच्छा अच्छा सॉरी , हम्म पता नहीं क्या रियेक्ट करूँगी क्योंकि सबसे अच्छा दोस्त मुझे ये कहेगा तो अच्छा ही फील होगा न!”

थोड़ि देर बाद दिवेश और दिशा वही पड़े तख्त पे पैरों को मोड़ के बैठ गए और चांद तारों को देखने लगे , दिवेश ने बोला,” देखो तुम्हारा जो भी रिएक्शन हो बट मुझे तुमसे कुछ कहना हैं !”

दिशा चाँद को देखते हुए बोली,” हाँ बोलो ना !”
दिवेश – आई लव यू!”
दिशा ने एक झटके से दिवेश का हाथ छोड़ दिया ,” मजाक कर रहे हो ना , देखो ऐसा मजाक नहीं करते !
दिवेश – मैं मजाक नहीं कर रहा !
दिशा – पर मैं प्यार नहीं करती ,देखो थोड़ा टाइम दो हम बाद में बात करते हैं!”

ये कहके वो नीचे चली आयी औऱ दिवेश ने रोका भी नहीं पर उसे बुरा फील हुआ । वक़्त गुजर रहा था और एकदिन शाम को वो चौपाटी पे घूमने गयी और तभी वहां भीड़ इखट्टा हो गयी , एक लड़की दिवेश को परपोज़ कर रही थी और वो वर्दी में खड़ा था । इससे आगे दिशा ने ना देखा ना उसे देखा गया ।

वो घर आ गयी ,शाम को इतने दिनों बाद वो दिवेश के पास खड़ी थी और दिवेश कुछ नहीं बोला तो वो बोली,” अच्छा तो परपोसल एक्सेप्ट कर लिया क्या ?

दिवेश शहर को देखते हुए बोला, ” नहीं!
दिशा – क्यों ?
दिवेश – मैं उससे प्यार नहीं करता !
दिशा – अच्छा तो किससे करते हो?
दिवेश – बार बार बताऊँ तुम्हें!
दिशा – अच्छा तो गुस्सा क्यों कर रहे ,औऱ बताया भी नहीं तुम पुलिस ऑफिसर हो!”
दिवेश – बस ऐसे ही !

अब दिशा को गुस्सा आ गया उसने दिवेश की कॉलर पकड़ी और अपनी तरफ खींच के कहा,” क्या लगा रखा है ये , हाँ एक दिन भी नही पूछा कैसी हो ,उस चम्पाकली के साथ गुलछर्रे उड़ा रहे थे , मैं बात भी नहीं करूँ तुमसे”

दिवेश – मैं किसी के भी साथ रहूँ तुमसे मतलब!

दिशा – हाँ है मतलब , क्योंकि हमें भी आपसे इश्क हो गया वो कहते हैं ना इश्क वाला लव !.

दिवेश -व्हाट!! तुम सच बोल रही हो!
दिशा मुँह फुलाते हुए बोली,” हम झूठ नहीं बोलते!”
दिवेश ने उसे गले लगा लिया और उसके सर को चूम लिया ।काफी देर तक वो ऐसे ही रहे और अपनी नादानियों पे हँस रहे थे।

समाप्त

2. अजनबी साथी

sad love story in hindi

(कहानी काल्पनिक है)

कोचिंग की छुट्टी हो चुकी थी और आज घर भी जा रहा था तो बहुत खुश था इसलिए जल्दी से दोस्तो को बाय बोलो अपना बैग लिया और बस स्टैंड की तरफ चल दिया। मौसम खराब हो रहा था ऐसा लग रहा था जैसे आंधी आने वाली वो इसलिए जल्दी से बस में चढ़ गया।

आगे से लेकर पीछे तक बस भारी हुई थी लेकिन सोचा चलकर देखता हूं शायद जगह मिल जाए क्युकी जिस से भी पूछो वो यही बोलता है यह कोई आ रहा है साले सब ठरकी होते है।कोई लड़की आते ही बोलते है हा हा आइए बैठ जाइए कोई नहीं आ रहा है ।

फिर भी में गया पीछे क्युकी थक तो चुका था और सोच रहा था सीट मिल जाए तो आराम से जाऊंगा गाने सुनता हुआ क्युकी घर का रास्ता 3 घंटे का था और भगवान ने सुन ली शायद एक अंकल जी ने कहा बेटा यह बैठ जाओ सीट खाली है। और खिड़की वाली सीट मिल गई फिर क्या आराम से बैठा और बाहर का नज़ारा देखने लगा। तभी बारिश भी शुरू हो गई थी ।

तभी बस में एक लड़की भागती हुई आती है क्युकी बारिश हो रही थी तो वो भीग गई थी और जैसा की आपको बताया बस पूरी तरह से भरी हुई थी वो लड़की पीछे आ गई और मै जहा बैठा था वहां सीट के पास आकर खड़ी हो गई।
उसके बाल भीग चुके थे तो बालों को खोल दिया उसने और वो दिखने मै बहुत खूबसूरत थी और खुले बालों में और भी अच्छी लग रही थी।

तभी पास वाले अंकल को पता नहीं क्या काम आ गया कि वो उतर गए और उस लड़की को वह पर बिठा गए।
में कान में हेड फोन लगाकर गाने सुनने में मस्त था तभी लगा कि वो कुछ बोल रही है । तो हेडफोन निकलें मैने।
जी हा बोलिए?

ये बस कहा जाएगी आपको पता है? जी ये बस रोड पर जाएगी ,अरे मतलब कोनसी जगह पर जाएगी ऐसा पूछ रही हूं। जी ये तो हर जगह जाएगी आप बताओ आप कहा जाओगे।

सीधे तरीके से कोई जवाब देना नहीं आता क्या तुम्हे ,
अरे आप बात ही ऐसी पूछ रहे हो जब आप बस में बैठे हो तो आपको पता होना चाहिए ना की बस कहा जा रही है।
या फिर मेरे से बात करने का बहाना ढूंढ रहे हो आप।

ज्यादा स्मार्ट मत बनो नहीं बताना मत बताओ मैने जल्दी में किसी से पूछा नहीं और सीधा बैठ गई।
अरे कोई बात नहीं ये बस सीधा हमारे घर जा रही है आप भी चलना और फिर सुबह अपने घर चले जाना।
इस बार वो भी हस गई और शायद उसे हसी जोर से ही आ गई आसपास वाले भी देखने लग गए।

ये हुई ना बात ऐसे ही रहा करो मै हमेशा बोलता हूं लाइफ है मजे से जियो और क्या रखा है।

हा सही कहा मेरा आज थोड़ा मूड खराब था यार इसलिए लेकिन अब ठीक है वैसे तुम बंदे बड़े अच्छे हो जो भी तुम्हारे साथ रहेगी बड़ी खुश रहेगी वो।

जी हा बस अब ज्यादा तारीफ हज़म नहीं होती मेरे से वैसे आप यहां स्टडी करते हो क्या।
नहीं बस यहां पर कुछ काम था इसलिए आयी थी शायद तुम यहां ही पढ़ते हो ryt

जी हा सही पकड़े हो यही जी रहे है अपनी जिंदगी घर से दूर पढ़ाई कर रहे है।

यार मुझे खिड़की की तरफ बैठने दो ना मुझे चक्कर आ रहे है
अरे हा क्यू नही आप आ जाओ और में दूसरी साइड बैठ गया सीठ दो वाली ही थी और शायद उसके सर मै भी दर्द था तो वो मेरे कंधे पर सर रखकर सो गई

मैने भी कुछ नहीं कहा फिर उसने बाद मै पूछा क्या मै सर रख सकती हूं।
हा क्यू नहीं क्या हुआ सर में दर्द है क्या।

हा सर बहुत तेज दर्द कर रहा है मैने उसे पानी की बॉटल दी और वो पानी पीकर अपना सर मेरे कंधे पर रखकर सो गई

और वो बार बार मेरी तरफ देख रही थी शायद कुछ बोलना चाहती हो पर उसने कुछ नहीं कहा।
लेकिन सही है कुछ लोगो को पंचायती होती है मेरी साइड वाली सीट पर एक आदमी बैठा था घुर तो ऐसे रहा था जैसे मैने कोई मर्डर कर दिया हो और साला मुझे अब सीधी उम्र कैद करवा देगा।

शाम को वक्त था और बाहर अब अंधेरा हो चुका था।बस थोड़ी देर के लिए रुकी और मै उसे वहीं पर बैठाकर उसके लिए बारिश में भी कुछ खाने को लेने बाहर गया

कुछ देर बाद…..

बस चलने वाली है जल्दी से बैठ जाओ आप सब ओर में भागकर बस में चढ़ गया 2 पेटीज और कुछ खाने के लिए स्नैक्स और कोल्ड ड्रिंक ले आया था l।

अब सर दर्द ठीक है तुम्हारा।?
हा अब अच्छा है।
ओके ये लो कुछ खा लो क्युकी अभी घर बहुत दूर है और मै तो पहले ही उतर जाऊंगा तुम लेट घर पहुचोगी

और हम दोनों ने साथ में खाया और बस तो चल चुकी थी और उसे नीद कब आ गई पता ही नहीं चला और वो वापस मेरे कंधे पर सर रखकर सो गई। वो आदमी झंडू अभी भी मुझे घुर रहा था और उसको देखकर मुझे हसी आ गई ।

बस के ब्रेक लगने के साथ ही उसकी नीद भी खुल गई
और मेरा घर अब आने ही वाला था तो मैने कहा जी अब मै चलता हूं। हमारी मंजिल आ गई आपसे मिलकर अच्छा लगा मुझे कभी फिर मुलाकात हुई तो मिलते है…मैने उसकी आंखो मै देखा जैसे वो कुछ कह रही हो ओर वो लड़की मेरे गले लग गई…मैने कुछ देर तो देखा फिर मैने भी उसको बांहों में भर लिया….मैने उसे अपने से अलग किया और बस के गेट कि तरफ चल दिया… वो अभी भी मुझे ही देखे जा रही थी…जैसे कोई बात कहना चाहती हो पर कह नहीं पा रही।।

मै बस के गेट पर खड़ा होकर बस के रुकने का वेट कर रहा था और वो मुझे देख रही थी बस रुकी ओर में उतर गया नीचे उतरकर देखा तो वो खिड़की से मेरी तरफ ही देख रही थी मैने अपना हाथ दिखाकर उसे बाय बोल दिया।

(कहानी काल्पनिक थी)

! समाप्त !

3. ये है मोहब्बतें (प्यार कि अनोखी दास्तां)

 

लव स्टोरी
(कहानी काल्पनिक है)

शाम का समय और हल्की फुल्की ठंड पड़ रही थी एक लड़का पार्क मै बैठा हुआ था और अपने मै ही खोया हुआ था तभी उसके कुछ दोस्त वहां पर आते है अरे आशु तू ऐसे क्यों बैठा हुआ है यहां पर,, अरे कुछ नहीं तुम बताओ और क्या हुआ आज ,,अरे कुछ नहीं हुआ वो लड़की देखी आज जो नई थी कितनी अच्छी थी यार( अजय कहता है )

मैने नहीं देखी तुम लोग ही देखो फालतू के सारे काम शशांक से करवा लिया कर,, अरे हमने तो देखी यार पर उसने भाव ही नहीं दिया ,, और आशु जोर से हंसता है देख अजय इसकी लैला ने इसको भाव नहीं दिया ,, अबे ज्यादा दांत ना फाड़ अब ये बता कल एक लड़की ने तुझे नंबर दिया था ना क्या हुआ उसका ,, मैने तो नहीं किया कॉल भाई तू कर ले ऐसा कर तुझे ज्यादा जरूरत है ( आशु कहता है ) और सब हंसने लग जाते है ,, चल मै चलता हूं अब कल मिलते है सिंगिंग की क्लास है ना। हा ठीक है भाई लोग टाइम पर आ जाना और सब अपने घर की ओर निकल जाते है !

सुबह का टाइम… यार इतनी जल्दी बुलाने की क्या जरूरत थी उठा भी नहीं जाता उपर से ठंड और वो जल्दी उठा और निकला कहीं देर हो गई तो फिर सर का फालतू का नाटक।

और वो क्लास मै पहुँच गया शशांक और अजय भी आ गए थे,, कितना लेट आता है यार तू ,, क्या करू ठंड लग रही थी तो नहाने मै लेट हो गया,, हा चल अब जल्दी अंदर चले और जैसे ही अन्दर गए,, इतना लेट टाइम को कोई पता नहीं है तुम्हे चलो बाहर ही रहो अब ,, सर आगे से टाइम पर आ जाएंगे,, हर बार यही बोलते है आज बाहर ही रहो!

और तीनों बाहर आ जाते है ,, किस्मत ही खराब है एक तो सुबह आया इतनी जल्दी उपर से सर का नाटक ,, तो अब क्या करे,, करना क्या है घूमने चलते है (आशु कहता है)

तभी एक लड़की के गाने की आवज आती है और आशु वहीं थम सा जाता है,, अरे चलना ना अब यार ,, ये कोन्न गा रहा है तुझे पता है ,, हा कोई नई लड़की आयी है नंदनी नाम है उसका,, आज ही वो एक लड़के को थपड़ मारा है उसने बहुत खतरनाक है,, और आशु हसंता है अच्छी बात है तुम लोग जाओ में यही रहूंगा मेरा मन नहीं जाने का।

और वो उस आवाज के पीछे जाता है ,, और सामने जैसे ही नंदनी को देखता है ,, बड़ी – बड़ी आंखें लंबे बाल मासूम सा चेहरा और प्यारी सी मुस्कान तो आशु उसी क्लास में जाकर बैठ जाता है।

शशांक कहता है आज के पहले तो लड़कियां तुझे ले जाती थी पर तू नहीं गया और आज अपने आप क्या हुआ जो यहां आकर बैठ गया ,, अरे कुछ नहीं हुआ और सबके जाने पर वो नंदनी से बात करता है वो भी उससे बात करती है और मुझे कुछ काम है बोलकर वहां से चली जाती है।

शशांक – यार कभी आज के पहले तो तूने बात नहीं की लड़की से फिर आज क्या हुआ।

,, अबे तू जाना तभी एक लड़की वहां आती है और बोलती है आशु मैने कल तुम्हे मेसेज किया था ना ,, ओह तो वो तुम थी मुझे कल पता होता तो तभी ब्लॉक कर देता पर कोई ना आज कर दूंगा और नंदनी दूर खड़ी ये सब देख रही थी।

शशांक चल घर चलते है और वो दोनों घर चले जाते है,, बहुत टाइम बित जाता है नंदनी और आशु का रोजाना मिलना होता है और वो अच्छे दोस्त भी बन जाते है ।

After 3 months…

यार शशांक आज उसका बर्थडे है चल उसको विश करना है,, अरे यार सुबह कर देना अभी 12 बजे है और उसके पापा ने देख लिया तो,, अबे फट्रू चलना कुछ नहीं होगा वरना मै अकेला जा रहा ,, अच्छा ठीक है चलते है और वो दोनों उसके घर के बाहर पहुँच जाते है,, आशु नंदनी को कॉल करता है जल्दी से बाहर आ जाओ ,, पर बाहर क्यों आना है

कितने सवाल करती हो ना यार बाहर आ जाओ ,, ओक बाबा आती हूं,, और वो बाहर जाती है तो इशारे में कहती है तुम यहां क्यों आए किसी ने देख लिया तो,, अरे शशांक तू यहीं रुक मैं उससे मिलने उपर जा रहा,, अरे पर जाएगा कैसे,, हा यार ये भी है चल चलते है उसको देख लिया ये ही बहुत है,,कल मिलते है नंदनी और वो उसको बाय बोलकर वहां से चला जाता है।

ठंड बढ़ चुकी थी और आधी रात हो चुकी थी चल शशांक चाय पी लेते है फिर चलते है और वो चाय पीने के लिए एक चाय की टपरी पर रुक जाते है ,, भईया 2 चाय लान।

यार क्यू करता है उसके लिए इतना जबकि उसके मन में क्या है तुझे कुछ पता नहीं,, मुझे सब पता है उसके मन मै क्या है,,, ये मंजिल तुझे कहां ले जाएगी तुझे क्या मिलेगा,,मुझे कुछ चाहिए भी नहीं अब जो है जब तक है बस वही है।

तभी अजय भी वांहा आ जाता है यार रात को यहां क्या चाय पीने आए थे,, भाई एक चाय मेरे लिए भी लाना ,, जी भिया लाता है।

अरे नहीं नंदनी का बर्थडे था आज तो आशु उसके घर गया था (शशांक कहता है )

यार आशु तो पागल है, उसका इसको कुछ पता नहीं मैं तो कहता हूं भाई किसी वो मोनिशा है ना कल तेरा नंबर मांग रही थी तू उससे कर ले ।

देख पहली और आखिर बार कह रहा हूं नंदनी के लिए एक वर्ड भी नहीं सुन लू दुबारा नहीं तो याद रखना जा रहा हूं ,, अरे भाई रुक सॉरी,, इससे क्या होगा और वो अजय की कॉलर पकड़कर कहता है वो तुम्हारे लिए सिर्फ एक लड़की होगी पर मेरे लिए वो मेरी जान है समझा और उससे बढ़कर कुछ नहीं मेरे लिए और आगे से कुछ भी बोलने के पहले सोच लेना,, लो चाय भी आ गई और वो तीनो चाय पीकर वांहा से चले जाते है।

अगले दिन क्लास मै नंदनी आती है और आशु उसको सबके सामने बर्थडे विश करता है,, तो सारी लड़कियां देख रही थी पता नहीं इसमें ऐसा क्या है कि हमारी तरफ देखता भी नहीं ,, शशांक कहता है वो उसके लिए बहुत ख़ास है जो तुम नहीं हो!

नंदनी भी बहुत खुश होती है और उसको थैंक यू बोलती है और कहती है शाम को मिलना है तुमसे तो आशु कहता है ठीक है!

और शाम को नंदनी उससे मिलने जाती है आशु कहता है बोलो क्यूं बुलाया है आज यहां,,मै मुंबई जा रही हूं कल तो बस आज की रात ही आखिरी है यहां मुझे सिंगिंग का एक बहुत बड़ा ऑफर मिला है।

ओह ये तो बहुत अच्छी बात है मै तो आज बहुत खुश हूं तुम चली जाओगी कल और वो दूसरी तरक मुड़कर खड़ा हो जाता है ,, नंदनी उसको गले से लगा लेती है मुझे पता है सब
मेरे जाने से के नाम से ही दुखी हो गए तो अब झूठा खुश होने का नाटक मत करो ।

आशु भी उसको गले से लगा लेता है और कहता है ,, मुंबई जाकर मुझे भूल तो नहीं जाओगी ना ,, कुछ लोग हमेशा याद रहते है और मै तुम्हे कभी नहीं भुला सकती।

और मुझे रोकना मत क्युकी तुम्हे दुःखी करके जाऊंगी तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा,, हा नहीं रोकता जाओ कामयाबी तुम्हरा इंतजार कर रही है ,, अपना ख्याल रखना क्युकी अब मै तुम्हारे साथ नहीं रहूंगा उस भीड़ में कहीं खो मत जाना

तुम तो हमेशा मेरे साथ रहोगे उस भीड़ में खो जाऊंगी तो मुझे दुंढने आओगे ना आशु ,, हा जरूर आऊंगा और दोनों की आंखों मै नमी आ जाती है और दोनों फिर से गले लग जाते है!

नंदिनी मुंबई चली जाती है,बहुत दिन बीत जाते है पर वो नहीं आती ओर आशु बस उसका इंतज़ार करता रह जाता है।।

समाप्त!

4. आशिकी (heart touching love story)

heart touching love story in hindi

ट्रेन के चलने का टाइम हो रहा था। रात का वक्त करीब 9 बज रहे थे और एक ऐसा रेलवे स्टेशन जहां सिर्फ अंधेरा था और एक लड़का आशीष जो ट्रेन को पकड़ने के लिए उसके तरफ भाग रहा था,, ओर वो भागकर ट्रेन मै चढ़ जाता है।

ट्रेन मै भी थोड़ा अंधेरा था पर वो अपनी सीट देख लेता है और वहां जाकर बैठ जाता है,, उसे थोड़ी बेचैनी होती है और वो अपना बैग वहीं छोड़कर ट्रेन के दरवाजे पर खड़ा होकर बाहर देखता है। बारिश हो रही थी ,,और बरसात का पानी उसके दरवाजे से अन्दर आकर उसके उपर गिर रहा था पर वो ऐसे खड़ा था जैसे उसे कोई फर्क ही ना पड़ रहा हो पर उसकी आंखो मे आंसू आ जाते है जो बारिश के साथ ही बह गए आज भी हर दिन की तरह,, ओर वो कुछ देर सोचता है ओर एक तस्वीर निकालता है जो एक लड़की की थी ओर उसे चूम लेता है….ओर थोड़ी देर बाद अंदर चला जाता है।।

पर जैसे ही अपनी सीट पर जाकर देखता है तो एक लड़की बैठी हुई थी और उसके हाथ में आशीष की डायरी थी जो वो पढ़ रही थी ,,तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरी डायरी को हाथ लगाने की कोई तमीज नहीं है मुझे जानती नहीं हो तुम मै कौन हूं ,, अरे अरे इतना गुस्सा मत कीजिए आपकी डायरी नीचे गिरी हुई थी मैने उठाई ओर एक पेज खुला हुआ था तो पढ़ने लगी और जैसे खो गई पढ़ती पढ़ती।

आशीष उससे अपनी डायरी ले लेता है और कहता है कोई बात नहीं और वो पास ही बैठ जाता है,, मेरा नाम शिवानी है ,,पर वो कुछ जवाब नहीं देता है,, आपने शायद किसी से बेइंतहा मोहब्बत की थी,, हा सही कहा आपने।

तो आप बताओ ना वो आपको मिली या नहीं क्युकी मै आधा ही पढ़ पाईं आपने डायरी ले ली अब अगर पूरा नहीं जान पाई तो हमेशा के लिए ये बात दिल में रह जाएगी।

हा की थी मैने मोहब्बत किसी सी,, अच्छा क्या नाम था उनका,, उसका नाम रूही था,, हा तो बताओ कैसे मुलाकात हुई आपकी।

आज की तरह ही बारिश हो रही थी उस दिन रात का वक्त था और मै गाड़ी से जा रहा था तभी एक लड़की अचानक कार के सामने आ जाती है। मैने अचानक से ब्रेक मारा ओर पूरी गाड़ी दूसरी तरफ मोड़ थी तब मैने उसे पहली बार देखा था,, पानी भी भीगी हुई उसकी जुल्फे,, बड़ी बड़ी आंखें,, गुलाबी होंठ और प्यारी सी भोली शक्ल।

मै गाड़ी उसे उतरा ओर उसके पास गया पागल हो गई हो तुम ऐसे कौन आता है सामने मरना है क्या,, चुप रहो बोलो मत ओर वो मेरा हाथ पकड़कर ले जाती है,,अरे कहां ले जा रही बोलो तो सही,, अरे कितना बोलते हो वहां एक लेडी प्रेगनेंट है ओर कोई गाड़ी रुक नहीं रही थी इसी लिए तुम्हारी हेल्प ले ऐसे अब कोई सवाल मत करना चलो चुपचाप,, हा ठीक है चलो।

वो दोनो वहां जाते है,, अब देख क्या रहे हो उठाओ इनको ओर गाड़ी में बिठाओ,, हा हा उठा रहा हूं और वो उसे उठाकर गाड़ी में में ले जाता है,, रूही भी गाड़ी में बैठ जाती है,, जल्दी चलाना यार इनको बहुत दर्द हो रहा है,, हा बस हॉस्पिटल पहुचनें ही वाले है और थोड़ी देर में हॉस्पिटल आ जाता है,, तभी उस लेडी के घर वाले भी वहां आ जाते है रूही उनके पास जाती है और कहती है। कैसे लोग हो आप आपको इनकी बिल्कुल चिंता नहीं है ऐसे कोई अकेला छोड़ कर जाता है,, सॉरी मैडम जी गलती हो गई,, क्या ग़लती हो गई अब अच्छे से ध्यान रखना इनका ओर वो आशीष को देखती है,, अरे ये कहां पर चला गया और वो भागकर बाहर जाती है पर वो जा चुका था।

ओह यार ये तो चला गया पर अच्छा लड़का था बिना कोई सवाल किए हेल्प कर दी चलो अब मै भी घर चलती हूं ,,कल कॉलेज भी जाना है नहीं तो फिर मम्मा की डांट पड़ेगी।

अगला दिन आईआईटी कॉलेज –

अरे आज भी लेट हो गया लेक्चर मै फिर से डांट पड़ेगी अब और वो जल्दी – जल्दी मै एक लड़के से टकरा जाती है,,अरे दिखता नहीं है क्या इतनी बटन जैसी आंखे दी है भगवान ने रूही उस लड़के की तरफ देखती है ,,, अरे तुम यहां सॉरी वो जल्दी मै थी तो देखा नहीं और तुम्हे इतना बोल दिया ।

आशीष:: तुम हमेशा ऐसा ही करती हो सामने वाले को बोलने का मौका ही नहीं देती हो।

रूही:: सॉरी बोला ना अब मैने बाय द वे मेरा नाम रूही है और मै यही पढ़ती हूं।

आशीष:: हाय मेरा नाम आशीष है और यहां हूं तो पढ़ने ही आया हूं खेलने तो नहीं आया वो हंसते हुए कहता है।

रूही:: अच्छा इस साल के टॉपर तुम ही हो अच्छा मै चलती हूं बाद मै मिलते है अभी क्लास है ।

मै बस उसे देखे जा रहा था आज दूसरी बार देखा था उस पर उसे देखकर लगा जैसे मेरी तालश खत्म हो गई हो और मुझे मेरी राधा मिल गई हो ।

थोड़ी देर बाद सब क्लास मै मिलते है,, रूही सबको बोलती है मिलिए हमारे टॉपर साहब से,,सभी लड़कियां कहती है अरे ये तो बड़ा हैंडसम है,, तभी सर आ जाते है।

टीचर अपना लेक्चर दे रहे थे,, ओर आशीष बस रूही को देखे जा रहा था तभी टीचर का ध्यान उसपर पड़ता है,,इस पूरे कॉलेज के टॉपर हो तुम ध्यान कहां है तुम्हारा,,चलो क्लास से बाहर ओर पूरी क्लास उसकी तरफ देख रही थी।

थोड़ी देर बाद क्लास खत्म होती है और रूही बाहर आती है ,, कहां ध्यान था तुम्हारा जब टीचर पढ़ा रहे थे,,तुम्हारे ऊपर ,, मतलब मै समझी नहीं ,, अरे कुछ नहीं बस ऐसे ही ओर वो चला गया ।

अगले दिन कॉलेज आया तो रूही नहीं मिली,, पता नहीं कहां गई होगी अब तक तो आ जाती थी ये,, ओर वो सब से पूछता है रूही को कहीं देखा क्या तो एक लड़की कहती है तुम्हे नहीं पता कल क्या हुआ ,,,हा बताओ क्या हुआ,,कल रूही के साथ कुछ लड़कों ने बदतमीजी की इसलिए शायद वो आज नहीं आयी,, पर ऐसा नहीं हो सकता वो कॉलेज आना नहीं छोड़ सकती मुझे पता है वो कहां मिलेगी।

और वो कॉलेज के पार्क में जाता है और देखता है तो रूही पर बैठी हुई थी,, क्या हुआ रूही तुम कॉलेज नहीं आयी,, मुझे अभी किसी से बात नहीं करनी है तुम जाओ यहां से मेरा जब मन होगा तब मै आ जाऊंगी।

आशीष वहां से सीधा उन लड़को के पास जाता है ,,तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई रूही के साथ बदतमीजी करने कि,, हा की है बदतमीजी तू क्या कर लेगा बोल और वो तेरी लगती कौन है,, जान से मार दूंगा अगर अगली बार उसकी तरफ आंख पर उठाई तो ओर जान है वो मेरी अब सीधे तरीके से उसके पैरो मे गिरकर माफी मांग लेना समझे।

थोड़ी देर बाद रूही कॉलेज के कैंपस में आती है और वो सारे लड़के नीचे बैठकर उसको सॉरी बोल रहे थे रूही सोच रही थी ये सब क्या हुआ ओर आशीष दूर खड़ा मुस्कुरा रहा था रूही उसके आयी ओर बोली तुमने क्या किया इनके साथ,,, अरे हमने तो कहां कुछ किया है,, ये क्या है जब तुम्हारी मर्जी आयगी तुम वही करोगे तुमने मुझे समझ क्या रखा है ,, अपनी जान,, रुही ये सुनते ही वहां से चली जाती है।

पर आशीष उसके पीछे – पीछे जाता है और रूही का हाथ पकड़ लेता है और कहता है हमे आपसे इश्क हो गया है ,,पर मै तुमसे प्यार नहीं करती हूं पर हा तुम बहुत अच्छे लड़के हो,, कोई बात नहीं तुम नहीं करती तो क्या हुआ मै तो करता हूं ना ,, हा पर मेरे पास सिर्फ एक महीना बचा है उसके बाद मै अपनी आगे के पढ़ाई के किए यूएस चली जाऊंगी और मै चाहती हूं ये वक्त मै तुम्हारे साथ बिताऊ,,अच्छा ठीक है कम से कम ये वक्त याद के तौर पर मेरे साथ तो रहेगा।

थोड़ी देर बाद आशीष का दोस्त वहां आता है,,भाई क्यों कर रहा है तू उसके लिए ये सब क्या मिलेगा तुझे वो तेरे से प्यार नहीं करती है,, वो नहीं करती तो क्या हुआ मै तो करता हूं ना ओर प्यार मै कुछ चाहिए नहीं होता है प्यार मैं तो बस देना होता है बिना किसी उम्मीद के,, हा पर बाद में तुझे ही तकलीफ होगी कह रहा हूं,, पर बाद का अभी से सोचकर उसे तकलीफ क्यों दू जब तक साथ हूं उसको खुश ही रखना चाहूंगा।

एक महीना उसके साथ कब बीत गया मुझे पता ही नहीं चला और वो दिन आ गया जिस दिन वो जाने वाली थी,,
आशीष मै जा रही हूं पर तुम मेरे दिल में हमेशा रहोगे,,रुक जाओ ना रूही मत जाओ,, मेरे पास यहां रुकने की कोई वजह नहीं है इसलिए जाना ही पड़ेगा और भगवान करे हम जिंदगी मै कभी दुबारा नहीं मिले क्युकी मेने सिर्फ तुम्हे तकलीफ ही दी है ,, जाने से पहले एक बार गले भी नहीं लगोगी क्या ,, रूही भागकर उसके गले से लग जाती है।

बस वो आखिर मुलाकात थी हमारी

शिवानी:: पर तुम इतने हैंडसम हो कोई दूसरी लड़की नहीं मिली क्या।

आशीष:: मैने उससे प्यार किया था और उस जैसा कोई नहीं है।

शिवानी:: पर वो आपके साथ तो नहीं है ना।

आशीष:: प्यार में साथ रहना जरूरी नहीं होता बल्कि उसकी सलामती के लिए दुआ करना जरूरी होता है,,प्यार तो खूबसूरत अहसास होता है जिसे बस महसूस किया जा सकता है।

शिवानी:: पर आपको तकलीफ नहीं हुई दर्द नहीं हुआ।

आशीष:: हुई ना बहुत ज्यादा हुई पर जब तक प्यार मैं दर्द ना मिले वो प्यार किस काम का ओर एकतरफा मोहब्बत और के लिए तकलीफ होती है पर मेरे लिए ये एक खूबसूरत अहसास था।

शिवानी:: आप भी उससे प्यार करते हो?

आशीष:: हा अब भी मै उससे बेइंतहा मोहब्बत करता हूं और करता रहूंगा और उसका इंतजार तो हमेशा रहेगा

शिवानी:: उनके लिए कुछ कहना हो तो क्या कहोगे आप

आशीष:: कभी तुम भी मेरी,
तरह इंतजार करके देखना..

फिर पता चलेगा मेरा प्यार,
कितना इंतजार ओं में था..

ना दिन ना रात में चैन,
ना आंखों में नींद अगर कुछ था..

तो बस तेरा इंतजार था,
कभी तुम भी इंतजार करके देखना..!

शायद फिर समझोगे मेरा प्यार क्या था🦋🕊️

अच्छा अब मेरा स्टेशन आ गया अब मै चलता हूं ।

समाप्त!

5. टशन-ए-इश्क

हिंदी-लव-स्टोरी

विश्व हिंदू बनारस यूनिवर्सिटी एक ऐसा नाम जो शिक्षा के लिए प्रसिद्ध है…दूर दूर से बच्चे यहां पर पढ़ने आते है और वो दिन भी कुछ ऐसा ही था… छात्रसंघ चुनाव होने वाले थे और सब प्रत्याशी अपने नामांकन भरने के लिए जा रहे थे और उसी कॉलेज का एक छात्र नेता जय सिंघानिया भी उन दिनों छात्रसंघ चुनाव में खड़ा हो रहा था जो कॉलेज का सबसे बड़ा गुंडा ओर बदमाश आदमी था….हर ओर उसके चर्चे थे कि वो ही जीतेगा…ओर वो इसी उम्मीद से प्रिंसिपल के ऑफिस में नामांकन भरने के लिए गया।।

दूसरी तरफ एक लड़की जिसका नाम सिया चौधरी था जो दिखने में सुंदर बड़ी बड़ी आंखें लंबे बाल ओर मासूम सा भोला चहेरा जो भी उसे देखे बस देखता ही रह जाएं… जिसे इन सबसे कोई मतलब नहीं था वो तो बस कॉलेज मै पढ़ने के लिए आयी थी उसका आज पहला दिन था…चल सिया लेट हो जाएंगे तू हमेशा ही लेट करती है…हा तो चल ही रही हूं ना ओर यार तू क्यों इतना हायपर हो रही है… ये सिया की दोस्त है दीपिका।।

अच्छा सुन वो कॉलेज का गुंडा आ रहा है जय कुछ कहे तो सुन लेना लड़ना नहीं इस बार ये ही जीतेगा यहां पर… हा तो कोई कलेक्टर है क्या जो कुछ भी कर लेगा सिया कहती है…इतने में ही जय वहां आ जाता है नमस्कार मैडम जी वोट हमको ही देना है नहीं तो अच्छा नहीं होगा…. क्यो तुम्हे ही क्यों वोट दे जो सही कैंडिडेट होगा हम तो उसे वोट देंगे…ओर जय इसी बात पर सिया का हाथ का पकड़ लेता है और सिया को गुस्सा आ जाता है और वो जय को एक जोरदार थप्पड़ मार देती है….तुम्हारी इतनी हिम्मत की तुम जय सिंघानिया पर हाथ उठाओ ओर वो वापस सिया को थप्पड़ मारने के लिए अपना हाथ उठाता है….सिया थोड़ी दूर होती है और उसकी आंखे बंद हो जाती है पर वो जैसे ही आंखे खोलती है एक लड़का उसका सामने खड़ा था अच्छी हाइट गोरा रंग और दिखने में हैंडसम।।

तेरी हिम्मत कैसे हुई जय सिंघानिया का हाथ पकड़ने की जानता है मै कौन हूं…मै जानना चाहता भी नहीं कि तू कौन है ओर अहिंदा से किसी लड़की पर हाथ उठाया तो हाथ तोड़ दूंगा याद रखना अभी सिर्फ वार्निंग देकर छोड़ रहा हूं…देखू लूंगा तुझे साले ओर जय वहां से चला जाता है… थैंक्यू आपका आपने मेरी हेल्प की मेरा नाम सिया चौधरी है…ओर मेरा नाम कबीर रावत है वैसे कहना पड़ेगा आप बहुत बहादुर हो…. अरे ऐसा कुछ नहीं है बस हम गलत को सहन नहीं करते है इसलिए….तो आप क्यों नहीं खड़े हो जाते है इस चुनाव मै इसके खिलाफ ये भी बड़ा उड़ रहा है क्युकी इसके खिलाफ किसी ने नामांकन भरा ही नहीं….पर कबीर हम कैसे हम नहीं कर सकते है ये…. आप कर सकती हो ओर आपने कहा ना कि गलत को सहन नहीं करती हूं तो ये भी गलत ही है ओर फिर मै हू आपके साथ पूरा कॉलेज है आपके साथ….वो तो ठीक है कबीर पर उसके डर से हमे कोई क्यों वोट देगा…जी आपकी तारीफ…मै दीपिका हू सिया की दोस्त….वो आप मुझ पर छोड़ दीजिए बस आप नामांकन की तैयारी कीजिए ओर कबीर ये कहकर वहां से चला जाता है।।

उसके जाने के बाद दीपिका कहती है यार बड़ा सोना मुंडा था कितना हैंडसम था ओर उसने खुद कहा कि वो तेरा साथ देगा…. हा तो क्या हुआ हमे कोई फर्क नहीं पड़ता है… कैसी बात कर रही है यार लड़कियां पागल है उसके पीछे ओर तू कह रही की तुझे कोई फर्क नहीं पड़ता…हा नहीं पड़ता बस उसने हमारी मदद की तो हमने भी थैंक्यू बोल दिया अब चल यहां से….पर तू नामांकन भर रही है क्या…हा भर रही हू क्युकी उसको उसकी ओकात दिखाना है सिया चौधरी पर हाथ उठाने की गलती की है ना उसने अब देखना ओंधे मुंह गिरेगा वो।।

अरे कबीर तू कहां रह गया था अब जाकर आया…अरे वो कुछ नहीं यार एक लड़की मिल गई थी…अरे तेरे पीछे तो इतनी लड़कियां है आज कौनसी मिल गई नाम तो बता जरा…अरे वो सब जैसी नहीं है वो अलग है…अच्छा क्या नाम है उसका दुष्यंत कहता है….ये दोनों दोस्त है।।

तभी प्रिंसिपल ऑफिस से अनाउंसमेंट होती है कि… जय सिंघानिया के खिलाफ सिया चौधरी चुनाव मैदान मै खड़ी हो रही….ओर ये सुनते ही सब चोक जाते है कि ये कौन आ गई जो उस गुंडे से पंगा ले रही है…यही है सिया जिसकी मै बात कर रहा हूं मैने ही कहा था उसको की नामांकन भरे…कबीर तू तो जानता है ना उसकी जान को खतरा हो सकता है वो जय यहां का बहुत बड़ा गुंडा है….हा तो क्या हुआ जब तक मै है कुछ नहीं होगा सिया को मैने उससे वादा किया है मै उसको ये चुनाव जीतवाकर ही रहूंगा चाहे कुछ भी हो जाए।।

थोड़ी देर बाद सिया बाहर आती है ओर जय उसके पास जाता है…बहुत अच्छा किया आपने जो नामांकन भर दिया …तभी जय वहां आ जाता है अरे अच्छा तो किया इसने पर क्या ये चुनाव जीत पाएगी ओर जीत गई तो क्या जिंदा रह पाएगी….तभी सिया कहती है वो तो वक्त बताएगा जय सिंघानिया की होता है क्या है… हा ओर वक्त तेरी मौत बता रहा है…तभी कबीर कहता है,, सिया को कुछ हुआ ना जान से मार दूंगा तुझे मै याद रखना अब जा अपना काम कर ओर हमे भी करने से… हा जा रहा हूं पर देखना तुम्हारे साथ क्या करता हूं।।

जय के जाने के बाद कबीर सिया को बोलता है….सिया चुनाव प्रचार के लिए बस आज का ही दिन बाकी है कल तो चुनाव है इसलिए आज ही पूरे कॉलेज मै वोट मांगने जाना पड़ेगा…तभी दुष्यंत कहता है भाई तू वोट मांगने जाएगा यार तू किसी से बात तक नहीं करता ओर वोट मांगेगा… हा तो क्या हो गाय वोट ही तो मांगना है ओर तू गाड़ी तैयार रखना ठीक है मुझे कहीं जाना है… हा भाई ठीक है।।

पूरा दिन सिया ओर कबीर दोनों कॉलेज मै वोट मांगते है ओर सब उनको पूरा सपोर्ट करते है क्युकी उसे सब वहां पर जानते थे…वो दोनो सीढ़ियों से नीचे ही उतर रहे थे कि सिया को चक्कर आ जाता है ओर वो कबीर की बांहों में गिर जाती है….वो उसे संभाल लेता है पर उसके चोट लग जाती है तो उससे चला नहीं जा रहा था पर वो जबरस्ती चलने को कोशिश कर रही तो कबीर जाकर उसे अपनी गोद में उठा लेता है तो सिया कहती है ये क्या कर रहे हो आप सब देख रहे है क्या सोचेंगे वो लोग…..जिसे जो समझना है समझने दो ओर तुम चुप रहो कोई बात नहीं मानती हो मेरी चोट लगी है फिर भी बोल रही हो ओर वो उसे चुप करा देता है सिया मासूम सी शक्ल बनाकर उसके चेहरे को देख रही थी ओर सारा कॉलेज खड़ा होकर उन्हें देख रहा था जो लड़का इतनी लड़कियों को इग्नोर करता है वो एक लड़की को गोद मै उठाकर ले जा रहा था।।

कबीर उसे बाहर ले आता है ओर नीचे उतार देता है…ओर दुष्यंत को बोलता है मुझे पापा ने किसी जरुरी काम के लिए बाहर जाने को कहा है मै शाम तक आ जाऊंगा तब तक सिया का ध्यान रखना अगर इसे कुछ हुआ तो जानता है ना फिर…हा भाई ठीक है तू जा टेंशन मत ले यहां हम सब संभाल लेंगे ओर वो चला जाता है।।

उधर जय ओर उसके गुंडे पार्टी ऑफिस मै बात कर रहे थे कि भाई उस लड़की का कुछ करना पड़ेगा बहुत उड़ रही है ओर वो कबीर उसके साथ है तो पूरा कॉलेज उसको ही वोट देगा… हा वो उसके साथ है तभी तो नहीं तो वो लड़की बचती नहीं है अब तक कब का मर चुकी होती…तभी एक आदमी आकर सूचना देता है कि भाई कबीर तो गाड़ी लेकर निकल गया है अभी अभी….अब आयगा ना मजा अपने कुछ आदमी लोगो को लेकर जाओ ओर उस लड़की को हमारे पुराने फर्महाउस पर ले आना ओर उसके दोस्तों को इतना मारना की सब भूल जाए… ऐसा ही होगा बॉस ओर वो सब जाते है ओर दुष्यंत ओर बाकी सबको मारकर सिया को वहां से ले जाते है।।

शाम के 6 बज चुके थे कबीर कॉलेज मै आता है पर जब सिया उसको नहीं मिलती तो वो दुष्यंत को पूछता है पर उसकी हालत बहुत खराब थी ओर वो कहता है भाई वो जय के आदमी हमे मारकर सिया को ले गए है….मै सब समझ गया हू तेरी ओर सिया की ये हालत करने वाले को छोड़ूंगा नहीं मै तू टेंशन ना ले…..पर भाई तू सिया को ढूंढने कहां जाएगा…उसकी टेंशन तू मत ले मुझे सब पता है वो उसे कहां ले गया होगा।। ओर वो गाड़ी को वहीं छोड़कर बाइक से तुरंत निकाल जाता है सिया को ढूंढने निकल जाता है।।

रात का वक्त हो चुका था पर सिया अभी भी नहीं मिल रही थी तभी कबीर को याद आता है कि जय का एक फर्महाउस
भी है शायद वो उसे वहां ले गया होगा ओर वो उस तरफ चल देता है।।

वहीं दूसरी तरफ सिया को जय ने बांध कर रखा हुआ था…तुझे क्या लगा तू बच जाएगी आज तक जिसने भी जय सिंघानिया के सामने खड़ा होने की हिम्मत की है वो मारा गया है ओर तू मारी जायगी पर तू है बड़ी खूबसूरत तुझे मारने का दिल नहीं कर रहा ओर वो दीक्षा को छूने के लिए आगे बढ़ता है…. पर कबीर वहां पहुंच चुका था..जय सिया के कंधे पर हाथ रख देता है….तभी कबीर वहां आ जाता है ओर लात मारकर जय को गिरा देता है… मैने तुझे कहा था ना कि सिया से दूर रहना पर तू नहीं माना।।

अच्छा हुआ कबीर रावत तू भी आ गया यहां पर मरने पुराना हिसाब भी कर लेंगे ओर जय अपने गुंडों को कहता है कि मार दो दोनों को तभी कुछ लोग कबीर को मारने के लिए उसकी तरफ बढ़ते है पर कबीर एक को मुक्का मारता है ओर दूसरे की गर्दन पकड़कर उसे गिरा देता है पर जय तभी गन चला देता है ओर गोली कबीर के कंधे पर जाकर लगती है …..वो सब लोग वहां से भाग जाते है जय जमीन पर गिर गया था वो अपने आप को संभालकर खड़ा होता है सिया की बंधी हुई रस्सियां खोलता है….जय के कंधे से खून बह रहा था और सिया ये देखकर बहुत परेशान हो जाती है।

आपको अपना बिल्कुल भी ख्याल नहीं है ना खून बह रहा है क्या जरुरत थी हमें बचाने की देखो लग गई ना… कबीर उसकी इस बच्चो वाली हरकत पर हंस पड़ता है….अब आप हंस क्यों रहे है और वो अपना दुप्पटा फाड़कर कबीर के कंधे पर बांध देती है…कबीर उसे कमर से पकड़कर अपनी ओर खीच लेता है अब सिया उसकी बांहों में थी दोनों एक दूसरे की आंखो में देख रहे थे उसकी सांसे तेज हो गई…सिया की जुल्फे उड़कर कबीर के चहरे पर आ रही थी।।

तभी कॉल आता है और वो दोनों अलग होते है… हेलो भाई दुष्यंत बोल रहा हूं सिया मिल गई ना…. हा मिल गई और हम दोनों आ रहे है…कबीर कॉल कट कर देता है और सिया को बोलता है चले अब… हा चलिए ओर वो बाइक स्टार्ट करता है तभी उसे ख्याल आत है ओर वो सिया से पूछता है तुम्हे डर नहीं लगा…नहीं मै नहीं डरती ओर फिर आप हो ना मेरे साथ ये कहकर वो पीछे से जय को बांहों मै भर लेती है वो ठंडी हवा ओर चांदनी रात उन दोनों के प्यार कि गवाही दे रही थी।।

कबीर सिया को कहता है कल तो चुनाव होंगे ओर देखना तुम ही जीतेगी….आप है ना हमारे साथ…. हा मै तो हमेशा तुम्हारे साथ हूं…ओर सिया का घर भी आ जाता है कबीर सिया को उसके घर छोड़ देता है ओर कहता है शाम को इंताजर रहेगा तुम्हरा कॉलेज में जरुर आना…सिया उसकी आंखो मै देखती है ओर कहती है हा जरुर आऊंगी।।

अगले दिन शाम हो चुकी थी ओर आज कॉलेज कैंपस का माहौल कुछ अलग ही था सारा कॉलेज अपने नए छात्रसंघ अध्यक्ष का वैट करता रहा था तभी सिया वहां आ जाती है ओर सीधा कबीर के पास जाती है जो उसका वहां बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था…अच्छा हुआ तुम आ गई बस अनाउंसमेंट होने ही वाली है कि कौन जीतेगा।।

तभी अनाउंसमेंट होती है कि सिया चौधरी अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी से भारी मतो से विजयी हुई है ये पता चलता ही सब खुश हो जाते है पूरे कैंपस मै पटाखे चलाए जाते है ओर ढोल नगाड़े बजाए जाते है कबीर सिया को उठा लेता ओर उसे चारों तरफ घुमा देता है ओए सिया मै आज बहुत बहुत खुश हूं देखो तुम जीत गई…. हा पर कबीर सब लोग देख रहे है ….हा तो देखने दो पर कबीर सिया को तभी नीचे उतार देता है ओर अपने घुटनों पर बैठकर उसे प्रपोज करता है सिया मै तुमसे प्यार करता हूं i love you…. ये सुनते ही सब जोर ही सिया सिया करने लगते है ओर सिया भी कबीर को I love you too Kabir …. हर तरह खुशी का माहौल था दो दिल एक हो गए थे ओर जय को पुलिस पकड़कर। ले जाती है।।

समाप्त!

6. वो पहला – पहला प्यार

True love story in hindi

वो पहला पहला प्यार ओर उसमे मिली शिकस्त सबको याद होती है ओर सबका प्यार भी होता है ये पल सबको लाइफ मै आता है जब हम अपनी खुशियां छोड़कर दूसरे के बारे मै सोचने लग जाते है ये कहानी भी ऐसे ही दो दिलों कि है जो मिले थे तो अनजाने मै पर कब दोनों एक दूसरे के करीब आ गए पता ही नहीं चला।।

जयपुर रेलवे स्टेशन जहां पर एक लड़का ट्रेन के पीछे भाग रहा है ताकि उसे पकड़ पाए…क्युकी वो आज लेट हो चुका था और आज अगर नहीं जाता तो शायद उसे वो नहीं मिलता जो मिलने वाला था।।

तो वो ट्रेन के तरफ दौड़ता है,, ओर एक लड़की मीरा ट्रेन में दरवाजे पर खड़ी होकर बाहर का नजारा देख रही थी ,, और तभी देखती है कि एक लड़का भागता हुआ आ रहा था ,, और वो उसकी तरफ हाथ बढ़ाता है ,,मीरा भी अपना हाथ उसकी तरफ कर देती है और जैसे ही वो पकड़ने वाला होता है वो हाथ छोड़ देती है ।

पर माहिर जैसे तैसे करके ट्रेन मै चढ़ ही जाता है….सबसे पहले तो उस लड़की को देखता हूं कि कहां है वो ओर मीरा उसे दिख जाती है ओर माहिर उसके पास जाता है…….
मीरा दिखने मै सुंदर बड़ी बड़ी आंखें, घुंघराले बाल, कानों में झुमके ,सुन्दर नाक नक्श, और ब्लैक ड्रेस में वो कमाल की लग रही थी कोई देखे तो बस देखता ही रह जाए ..शर्म नहीं आती क्या अगर पकड़ना नहीं था तो हाथ ही क्यों दिया अपना तुमने… हा नहीं आती शर्म बोलो क्या कर लोगे ओर मीरा हंसने लग जाती है।।

माहिर भी एक हैंडसम बंदा था रंग गोरा अच्छी हाइट ओर दिल का साफ मजाक करने वाला अपने मै रहने वाला एक खुशमिजाज लड़का था।।

माहिर वही सामने वाली सीट पर बैठ जाता है… केसी लड़की है यार इसको तो शर्म ही नहीं आती है हंसे जा रही है बस….तभी मीरा कहती है चलो अच्छा नहीं हसंती हूं अब ये बताओ ऐसे भाग क्यों रहे थे चोरी की है क्या…क्या कह रही हो यार मै तुम्हे चोर दिख रहा हूं क्या थोड़ा सा सोच लिया करो यार…अरे मजाक कर रही हूं अच्छा कहा जा रहे हो तुम…मै तो बनारस जा रहा है और तुम…मै भी वही जा रही हूं पर अब पता नहीं कहा जाऊंगी तुम जो मिल गए हो… हा मै भी वही सोच रहा हूं ऐसी लड़की से मिल लिया अब कहा जाऊंगा पता नहीं है भगवान बचा लेना…ओर इस बार वो दोनो हसने लग जाते है।।

मीरा ट्रेन की खिड़की से बाहर देखने लग जाती है एक हंसती खेलती वाली लड़की जिसके मन मै बहुत कुछ था पर वो किसी से कह नहीं पा रही थी… माहिर उसको पूछता है अरे उदास क्यों हो गई हंसती हुई ज्यादा अच्छी लगती हो…ये बात सभी कहते है पर ये हंसी सिर्फ आज की है कुछ दिनों मै मेरी शादी कर देंगे जो मुझे नहीं करनी है मुझे मेरे सपने पूरे करना है कुछ बनना है…ओर इसी लिए मै बनारस जा रही हूं शादी करने।।

तो तुम शादी करना जब नहीं चाहती तो मना कर दो ना कि नहीं करना शादी ऐसे उदास ना होव प्लीज…नहीं कर सकती मना मै पापा को दुखी नहीं कर सकती हूं….तभी मीरा को कॉल आता है जो उसके पापा का था…हा बेटा तुम आ रही हो ना …. हा पापा मै आ रही हूं आप बताईए ना आपने क्यों कॉल किया है….बेटा एक हमारे दूर के रिश्तेदार का लड़का है वो भी आ रहा है उसका नाम माहिर है तुम्हारे साथ ही आयगा…हा पापा सामने ही बैठा हुआ है मीरा मन मै कहती है।।

ओर वो फोन रख देती है ओर माहिर को कहती है अच्छा तो तुम भी मेरी बर्बादी देखने जा रहे हो चलो अच्छा हुआ…क्या मतलब है तुम्हारा कहने का मै तुम्हारी बर्बादी क्यों….पापा का कॉल आया था तुम माहिर हो ना ओर शादी के लिए जा रहे हो तो मेरी ही शादी मै जा रहे हो तुम ….अच्छा हा वो तो सही कहा पर अगर तुम्हे शादी करनी तो तुम्हारी शादी नहीं होगी मै नहीं होने दूंगा…पर तुम क्या कर लोगे…वो तुम मेरे उपर छोड़ दो ये बताओ तुम्हे लड़का पसंद नहीं या फिर शादी ही नहीं करनी…मुझे लड़का भी पसंद नहीं है ओर शादी भी नहीं करनी है…माहिर उसकी बात सुनकर हसने लग जाता है ओर इन्हीं बातो मै वक्त का पता नहीं चलता ओर बनारस आ जाता है।।

एक ऐसा शहर जहां के गंगा को घाट पर शाम का वो नजारा जो दिल को बड़ा सुकून देता है ओर वो दोनो एक साथ ट्रेन से उतर जाते है पूरे रास्ते माहिर मीरा को हसाता हुआ आ रहा था पर मीरा की चहरे पर अभी भी मायूसी छाई हुई थी।।

माहिर उसको कहता है मुझ पर यकीन करो सब ठीक होगा अब चलो या फिर यही रहना है रात भर याद रखना मच्छर बहुत है सारा खून पी जाएंगे तुम्हारा फिर तुम ऐसे कैसे लड़ पाओगी सब से….इस बार मीरा हसं जाती है तभी कोई उसे आवाज से रहा था जो उसके पापा थे ओर वो उन दोनों को लेने आए थे मीरा अपने पापा के गले लग जाती है…ओर माहिर भी उनसे मिलता है…अच्छा हुआ तुम दोनो आ गए अब चले जल्दी से घर वहा सब तुम्हारी राह देख रहे है।।

हा पापा चलिए ओर वो सब थोड़ी देर मै घर पहंच जाते है… वहा तो शादी की सारी तैयारी हो चुकी थी…ओर मीरा उनसे बिल्कुल भी खुश नहीं थी वो माहिर से पहली बार मिली थी पर नहीं क्यों उसकी बातों पर यकीन करने का दिल कर रहा था कि वो सब ठीक कर देगा…मीरा के आ जाने से सब वहा खुश हो जाते है।।।

माहिर भी मीरा से पहली बार मिला था.. उसके तो काफी गर्लफ्रेंड राह चुकी थी पर मीरा का अहसास उसे अलग लगा जो आज से पहले कभी नहीं हुआ था उसके साथ।।

रात मै दोनो सो तो गए पर नींद दोनो को नहीं आयी दोनो एक दूसरे के बारे मै ही सोच रहे थे ओर ऐसे ही सुबह हो जाती है माहिर अपने कमरे से नीचे आता है जहां पर आज हल्दी कि रसम होने वाली थी ओर मीरा पहले से ही वहां पर बैठी हुई थी….माहिर उसको देखता है पर कुछ नहीं कहता सारे लोग वहा पर खुश थे सिर्फ माहिर ओर मीरा के अलावा।।

माहिर कुछ देर बाद मीरा से मिलता है ओर कहता है मुझे आज शाम को तुम बनारस की घाट पर मिलना मुझे तुम्हारा इंतज़ार रहेगा ये कहकर वो चला जाता है मीरा नहीं जाना चाहती थी पर उसके मन मै भी कुछ था जो उसे उसकी तरफ खीच रहा था…शाम का वक्त हो चुका माहिर घाट पर खड़ा होकर मीरा का इंतज़ार कर रहा था कि वो कब आयगी उसने ब्लैक शर्ट पहन रखी थी हाथ मै वॉच ओर शर्ट की बाहें फोल्ड कर रखी थी उसके बाल हवा के साथ उड़ रहे थे ओर वो नदी की तरफ देख रहा था।।

मीरा वहां आ जाती है ओर माहिर के कंधे पर हाथ रख देती है ओर माहिर अचानक से मुड़ता है तो मीरा को मुंह बिल्कुल उसके मुंह के पास था ओर अचानक से मीरा के बाल उसके चहरे पर आ जाते है माहिर उन्हें अपनी उंगली से हटा देता है मीरा के दिल की धड़कने तेज हो गई थी माहिर पहला लड़का था जो उसके इतने करीब आया था।।

थोड़ी देर बाद दोनो दूर होते है…मीरा दूसरी तरफ मुंह करके खड़ी हो जाती है ओर जैसे ही माहिर उसको अपनी ओर करता है तो मीरा की आंखो मै आंसू थे…माहिर उसको बोलता है रो क्यों रही हो पागल…मीरा कहती है कोई मुझे नहीं समझता है मै बहुत अकेली हूं ओर वो माहिर के गले लग जाता है ये अहसास माहिर के लिए भी अलग था ओर वो भी मीरा को गले लगा लेता है ओर कहता है मै हू ना तुम्हारे साथ तुम क्यों टेंशन ले रही हो…वक्त बीत जाता है ओर ये दोनो बहुत करीब आ जाते है ओर एक दूसरे से प्यार करने लगते है पर शादी का दिन भी करीब आ गया था ।।

मीरा माहिर के कमरे मै आती है ओर कहती है मै अपने पापा को धोका नहीं दे सकती माहिर तुम मुझे भूल जाना मुझे ये शादी करनी ही पड़ेगी तुम चले जाओ यहां से…माहिर की आंखो मै आंसू आ जाते है और वो मीरा से कहता है तुमने कितनी आसानी से कह दिया ना कि चले जाओ मेरे प्यार का कोई मतलब नहीं तुम्हारे लिए…तुम्हारे प्यार ने मुझे जीना सिखाया है माहिर पर तुम भी समझो मै अपने पापा को इज्जत के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकती ओर मीरा ये कहती हुई रोने लग जाती है ओर वहां से चली जाती है…पर माहिर ने सोच लिया था कि वो अपने प्यार को ऐसे नहीं जाने देगा चाहे कुछ भी हो जाय।।।

मीरा दुल्हन की तरह सज चुकी थी बारत ओर पंडित जी भी तैयार ही बैठ थे मीरा मंडप मै आ जाती है उसकी आंखो मै आंसू ओर दिल मै माहिर के लिए प्रेम था पर फिर भी वो ये शादी कर रही थी।।

दूल्हा भी बैठा हुआ था ओर पंडित जी शादी के मंत्र पढ़ने लग गए थोड़ी देर बाद पंडित जी कहते है शादी विधि विधान से सम्पन्न हुई आज से आप दोनो पति पत्नी हुए।।

मीरा के दुख को कोई अंत नहीं था पर सबकी निगाहें जब दूल्हे ओर पड़ती है तो उनकी आंखे फटी की फटी राह जाती है कि ये क्या हुआ दूल्हे कि जगह माहिर बैठा हुआ था मीरा ये देखकर बहुत खुश होती है पर ये सब कैसे हुआ उसे समझ नहीं आ रहा था तभी असली दूल्हा वहा आ जाता है ओर कहता है माहिर ओर मीरा एक दूसरे से प्यार करते थे ओर ये बात मुझे पता थी ओर मै भी किसी ओर से प्यार करता था ओर अगर ये शादी हो जाती तो आज तीन जिंदगियां बर्बाद हो जाती ओर जब माहिर मेरे पास गुस्से मै आया तो मैने भी उसे सब बता दिया ओर ये शादी हो गई ओर मैने भी तन्वी से शादी कर ली।।

माहिर, मीरा के पापा से माफी मांगता है पर वो कहते है जो हुआ अच्छा हुआ मेरी बेटी खुश रहने चाहिए बस ओर मुझे क्या चाहिए…मीरा की खुशी का भी कोई ठिकाना नहीं था माहिर उसको बोलता है देखो कहा रहा ना नहीं होने दूंगा शादी…ओर फिर उनको वो प्यार भरी नोक झोंक शुरू हो जाती है…।।

इस तरह से दो प्यार करने वालों को उनकी मंजिल मिल जाती है।।

समाप्त!

आपकी और दोस्तों

तो दोस्तों ये थे कुछ बहुत ही सेड और रोमांटिक लव स्टोरी, हम उम्मीद करते है की आपको ये सभी कहानी आपको बहुत अच्छी लगी होगी यदि आपको सच में अच्छी लगी तो प्लीज इस पोस्ट को १ लाइक जरुर करे और अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करना ना भूले|

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