करवा चौथ का व्रत कैसे करे सही तरीका | करवा चौथ व्रत की पूजन विधि

करवा चौथ का व्रत कैसे करे: इस व्रत के बारे में तो आप लोगों ने सुना ही होगा। क्या आपकी भी नई नई शादी हुई है या होने वाली है। क्या आप भी टीवी सीरियल के आदर्श जोरों से इंप्रेस होकर करवा चौथ का व्रत रखना चाहती हैं?

क्या आपको भी इस व्रत के विधि के बारे में जानने की उत्सुकता हो रही है। अगर हां तो यह पोस्ट आप ही के लिए है। आज के पोस्ट में हम करवा चौथ के व्रत की सारी विधि आपको बताएंगे।

साथ ही उस दिन सुहागिनों को किस तरह की सावधानी बरतनी चाहिए और करवा चौथ व्रत कथा भी हम आपके साथ शेयर करेंगे।

बस आप लोग इस पोस्ट को पूरा पढ़िए। आज के पोस्ट को पढ़ने के बाद आप लोगों को भी करवा चौथ के महत्व का पता लग जाएगा और आप लोग भी करवा चौथ का व्रत सफलतापूर्वक संपन्न कर पार्वती मां से अखंड सौभाग्यवती का वर लेने में सफल होंगे।

तो चलिए शुरू करते हैं। सबसे पहले हम करवा चौथ व्रत के महत्व के बारे में जानेंगे उसके बाद व्रत की विधि समझेंगे।

करवा चौथ व्रत का महत्व

करवा चौथ का बहुत महत्व है दोस्तों। कहा जाता है कि अगर कोई पत्नी पूरे सच्चे दिल से अपने पति के लिए करवा चौथ का व्रत रखती है तो पति की उम्र लंबी हो जाती है, साथ ही पति पत्नी का साथ सारी उम्र के लिए बना रहता है और पति पत्नी का रिश्ता पूरे सात जन्मों के लिए अटूट हो जाता है।

सिर्फ इतना ही नहीं, इस व्रत को करने से और निर्जला उपवास रखने से माता पार्वती की कृपा से पति की सेहत में बरकत होती है, पति पत्नी के बीच तनाव कम होता है और गृहस्थी जीवन सुख से कटती है।

इस व्रत को करने से गरीबी और दरिद्रता के नाश होता है। पति की आमदनी में बरकत होती है और पूरा जीवन हंसी खुशी में बीतता है। इस व्रत को करने से माता पार्वती की कृपा से पति का प्यार अपनी पत्नी के लिए दिन प्रतिदिन बढ़ता जाता है|

और जो पत्नियां अपने पति को दूसरी औरत के चंगुल से छुड़ाना चाहती है या जिन पत्नियों के पति गलत राह पर चल पड़े हैं, उनको भी माता पार्वती सद्बुद्धि देती है वह अपने आप सही राह पर आ जाते हैं। ठीक उसी तरह अगर पति भी अपनी पत्नी के लिए इस व्रत को करें तो पत्नी का सेहत अच्छीरहती है और उनका साथ हमेशा बना रहता है।

करवा चौथ का व्रत कैसे करे सही तरीका

करवा चौथ व्रत की पूजन विधि

Karwa chauth ka vrat kaise kare

1. ब्रह्म मुहूर्त में उठें:

करवाचौथ के दिन सुहागिन महिलाओ को ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाना चाहिए। फिर स्नान करके सूर्यादय से पहले सरगी खाएं और दिन भर निर्जल व्रत रखें। सरगी अक्सर सास अपनी बहुओ के लिए तैयार करती है।

2. करवा का चित्र बनाए:

सरगी खाने के बाद व्रत का संकल्प ले और फिर दीवार पर गेरू और चावल के घोल से करवा का चित्र बनाएं।

3. माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करे:

उसके बाद माता पार्वती की प्रतिमा लकड़ी के किसी आसान पर विराजमान करें। अब माता पार्वती को सुहाग का सामान अर्पित करें। उसके बाद मां के सामने धूप दीप जलाकर उनकी पूजा करे।

4. लोटे पर स्वास्तिक बनाएं एवं पूजा करे:

इसके बाद लोटे में जल भर ले और रोली से करवा पर स्वास्तिक बनाएं। अब पूरे सच्चे मन से गौरी-गणेश और करवा की पूजा करते हुए पति की लंबी उम्र के लिए शिव-पार्वती से प्रार्थना करें।

5. कथा सुने:

शाम को करवा चौथ की कथा सुनें। यह कथा काफी सारी सुहागिन महिलाएं मिलकर एक साथ सुनती है और कोई बुजुर्ग महिला इस कथा को सुनाती है। कथा सुनने के बाद सभी सुहागिन अपने बड़ों का आशीर्वाद लें।

6. चांद को अर्घ्य:

रात को चांद निकलने पर चांद को अर्घ्य दिया जाता है। सभी सुहागिन महिलाएं बेसब्री से चांद निकलने का इंतजार करती है और चांद निकलने के बाद बड़ी श्रद्धा भाव के साथ चांद को अर्घ्य देती है।

7. छलनी से पति को देखे:

छलनी से पति को देखना हिंदी फिल्मों का एक प्रसिद्ध सीन है। छलनी की ओट से पति को देखकर चंद्रमा से जिंदगी भर पति का साथ पाने की कामना करवा चौथ वाले दिन सुहागिन महिलाएं करती है।

8. व्रत का समापन:

चंद्र की पूजा करने के बाद अपने पति के हाथों से पानी ग्रहण किया जाता है। सभी सुहागिन महिलाएं उस जल को पीकर व्रत का पारण करती है।

9. बड़ो का आशीर्वाद ले:

व्रत खोलने के बाद अपनी सास को मिठाई, फल, कपड़ेे इत्यादि एक थाल में सजाकर उन्हें भेट दें। उनसे सौभाग्यवती का आशीर्वाद भी लें।

आप सभी ने करवा चौथ व्रत के बारे में जाना। साथ ही इस व्रत की विधि भी हमने आप सभी से शेयर की। अब आइए जानते है इस प्रसिद्ध करवा चौथ व्रत के कथा के बारे में।

करवा चौथ व्रत कथा

एक राजा थे। उनके सात बेटे थे। सातों भाईयो के वीरावती नाम की एक बहन थी। सात भाइयों की अकेली लाडली बहन होने के कारण वीरावती सभी भाइयों की जान थी।

समय बीतता गया और एक दिन वीरावती का विवाह हो गया। शादी के बाद वीरावती भाइयों के घर आई तो उसने अपनी सातों भाभियों के साथ करवा चौथ का व्रत रखा लेकिन वीरा से भूख सहन नहीं हुई और शाम होते-होते वो भूख से तड़प उठी।

प्यारी वीरावती की ये हालत सातों भाइयों से देखी नहीं गई और भाईयो ने एक जुगार लगाने का सोचा। भाइयों ने पेड़ पर दीपक जलाकर वीरावती से कहा कि चांद निकल आया है।

वीरावती ने भाइयों पर भरोसा करते हुए खुशी से चांद देखकर अर्घ्‍य दिया और खाने पे बैठ गई। जैसे ही वीरावती ने पहला निवाला मुंह में डाला तो उसे एक छींक आ गई, दूसरे निवाले में बाल निकल गया|

और जैसे ही उसने तीसरा निवाला मुंह में डाला तो उसके पति के मौत का समाचार उसे मिला। यह सुनते ही वीरावती व्याकुल हो गई। वो तुरंत अपने ससुराल के लिए निकल गयी।

जाते जाते रास्ते में उसकी मुलाकात भगवान शिव और माता पार्वती जी से हुई। मा पार्वती ने वीरा को बताया कि उसके पति की मृत्यु का कारण वीरावती स्वयं है। पार्वती मां ने वीरा के सामने सबकुछ खुलकर बता दिया।

जब उसे पूरी बात पता चली तो उसने मां पार्वती से अपने भाइयों की भूल के लिए माफी मांगी और पति के प्राण की भीख मांगने लगी।

फिर माता पार्वती ने वीरा से कहा कि उसका पति पुनः जी सकता है लेकिन इसके लिए वीरा को पुरी विधि-विधान से करवा चौथ का व्रत करना होगा।

इसके बाद माता के द्वारा बताई विधि का पालन करते हुए वीरावती ने करवा चौथ का व्रत पूर्ण किया और अपने पति को फिर से जीवित किया। तब से लेकर आज तक सुहागिन महिलाएं इसी कथा के साथ करवा चौथ का व्रत करती हैं। कुछ जगहों पर तो कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा वर पाने के लिए इस पावन व्रत को करती हैं।

करवा चौथ का व्रत करते समय ध्यान रखने लायक कोई कुछ बातें

चौथ वाले दिन सुहागिनों को काला या सफेद वस्त्र नहीं पहनना चाहिए। उस दिन नया वस्त्र धारण करना चाहिए। वस्त्र अगर पति खरीद कर लाए तो सबसे शुभ होता है और अगर आर्थिक स्थिति खराब है तो पहले का कोई वस्त्र धोकर उसे धारण कर सकते हैं।

लेकिन वस्त्र का रंग लाल पीला या हरा हो या फिर और कोई अच्छा कलर होना चाहिए। लाल रंग सबसे सर्वश्रेष्ठ होता है और सुहाग की निशानी भी होती है।

करवा चौथ वाले दिन महिलाओं को सोलह श्रृंगार अवश्य करना चाहिए। ठीक जिस तरह लड़की अपनी शादी के दिन सोलह श्रृंगार करती है, उसी तरह करवा चौथ के दिन भी महिलाओं को सोलह सिंगार करना चाहिए और मंगलसूत्र तो अवश्य पहनना चाहिए।

जब पति करवा चौथ वाले दिन अपनी पत्नी को सोलह श्रृंगार में सजे हुए देखता है तो उनका प्यार अपनी पत्नी के लिए और ज्यादा बढ़ जाता है और माहौल भी एकदम खुशनुमा हो जाता है।

करवा चौथ व्रत के दिन सोना नहीं चाहिए। करवा चौथ वाले दिन उपवास रखकर कभी भी दोपहर को सोना नहीं चाहिए। पूरा दिन कुछ ना कुछ करते रहना चाहिए।

आस-पड़ोस की सभी महिलाओं को अपने घर बुलाकर हंसी खुशी के साथ रस्मों रिवाजों को निभाते हुए पूरा दिन व्यतीत करना चाहिए। तभी पूजा का फल अच्छी तरह से प्राप्त होता है।

नमक या मांसाहारी भोजन छूना भी नहीं चाहिए। पूरा दिन निर्जला उपवास तो रखना ही है साथ ही नमक या फिर कोई मांसाहारी चीज को हाथ नहीं लगाना चाहिए।

कुछ महिलाएं ऐसा करती है कि खुद उपवास रखती है लेकिन घर में बाकी लोगों के लिए खाना बनाती है जिसमें लहसुन प्याज या फिर नॉनवेज का भी इस्तेमाल कर लेती है।

लेकिन उस दिन मन और शरीर दोनों को शुद्ध और पवित्र रखना चाहिए। घर में किसी को भी मांसाहारी भोजन नहीं करना चाहिए। घर में लहसुन प्याज या फिर मीट मछली का इस्तेमाल बिल्कुल ना करें तो अच्छा है।

करवा चौथ का व्रत पति पत्नी के बीच प्यार का त्यौहार होता है उस दिन पति पत्नी को आपस में झगड़ा नहीं करना। चाहे गलती किसी की भी हो लेकिन थोड़ा-थोड़ा दोनों को झुक जाना चाहिए।

खासकर क पति को। करवा चौथ का त्यौहार पति पत्नी के बीच प्रेम का त्यौहार है। पति पत्नी आपस में झगड़ा करने से पार्वती माता रूष्ट जाती है और शांति और समृद्धि के बजाय क्लेश और दरिद्रता घर में आती है।

वैसे तो कभी भी झगड़ा नहीं करना चाहिए, हां छोटी मोटी नोकझोंक चलती है लेकिन झगड़ा करना समझदारी नहींं होती। खासकर करवा चौथ वाले दिन पति पत्नी को झगड़ा ना करते हुए एक दूसरे के प्रति सम्मान और प्यार दिखाते हुए पूरा दिन हंसी खुशी से व्यतीत करना चाहिए।

पति भी यह व्रत कर सकता है?

आजकल काफी सारे टीवी सीरियल्स में यह देखने को मिलता है की पत्नी के साथ पति भी करवा चौथ का व्रत करते हैं। लेकिन कहीं-कहीं इस बात को लेकर अभी भी कंफ्यूजन है कि क्या पति भी यह व्रत कर सकता है?

क्या पति को भी वही आशीर्वाद मिलेगा जो एक पत्नी को मिलता है? तो इसका जवाब है दोस्तों हां! यह तो व्रत है और यह पति हो या पत्नी कोई भी कर सकता है।

जिस तरह पत्नी अपने पति के लंबी उम्र और पूरा जीवन का साथ पाने के लिए यह व्रत करती है। ठीक उसी तरह पति को भी हक है अपनी पत्नी की लंबी उमर और उसके साथ के लिए व्रत करने का।

इसमें कोई भी दो राय नहीं है कि अगर पति भी पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ अपनी पत्नी के लिए व्रत करेगा तो पार्वती मां और शिव जी का आशीर्वाद पति पत्नी दोनों पर बनी रहेगी।

कहीं ना कहीं पति को भी यह व्रत करना ही चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से पत्नी के मन में पति के प्रति प्यार और सम्मान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। जिस तरह पत्नी अपने पति के लिए व्रत करती है ठीक उसी तरह पति भी अपनी पत्नी के लिए व्रत कर सकता है।

इससे दोनों का प्यार बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और जो पति अपनी पत्नी के लिए पूरा दिन भूखे रहकर यह व्रत करती हैं उनकी पत्नी उनसे बहुत ज्यादा खुश और संतुष्ट हो जाती है।

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सोमवार का व्रत की करे

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करवा चौथ व्रत पूजन विधि

आपकी और दोस्तों

तो दोस्तों ये था करवा चौथ का व्रत कैसे करे, हम उम्मीद करते है की इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपको करवा चौथ की विधि और तरीका पता चल गया होगा.

अगर आपको ये पोस्ट अच्छी लगी हो तो प्लीज इसको अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करे और लाइक भी करे ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को करवा चौथ का व्रत रखने का सही तरीका पता चल पाए धन्येवाद दोस्तों.

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