जज कैसे बने पूरी जानकारी | जज बनने के लिए क्या करे

जज कैसे बने पूरी जानकारी: जज के नाम से आप लोग अच्छी तरह से परिचित होंगे, क्योंकि जब समाज में रहने वाले किसी भी व्यक्ति के साथ कुछ भी गलत होता है, तो वह उसकी शिकायत पुलिस थाने में करता है और पुलिस आवश्यक कार्रवाई करके उसको कोर्ट में भेज देती है, जहां पर न्यायाधीश द्वारा दोनों पक्षों की बातों को सुनकर सबूतों और गवाहों के आधार पर उचित निर्णय लिया जाता है।

हम सभी यह भली-भांति जानते हैं, कि किसी भी देश को अच्छे से चलाने के लिए और अच्छे से संचालन करने के लिए सरकार की कितनी जरूरत होती है, परंतु सरकार से भी अधिक आवश्यकता होती है कोर्ट की, कयोंकि कोर्ट ही अपराधियों को उनके जुर्म की सजा देती है और पीड़ित व्यक्ति को न्याय दिलवाती है।

जैसा कि आप जानते हैं कि अदालतों में न्याय देने के लिए न्यायाधीश अर्थात जज की नियुक्ति सरकार द्वारा की जाती है और यह एक ऐसा पद होता है, जिसमें काफी जिम्मेदारी होती है, साथ ही इस पद में काफी संयम से काम करना पड़ता है|

क्योंकि न्यायाधीश का एक आदेश किसी की जिंदगी बना सकता है तथा किसी की जिंदगी खराब भी कर सकता है।वैसे अगर देखा जाए तो भारत में बहुत सारे कोर्ट है, जैसे डिस्ट्रिक्ट कोर्ट, क्रिमिनल कोर्ट, हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट परंतु आमतौर पर सबसे ज्यादा बात सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की ही होती है।

इन दोनों अदालतों में जजों की की नियुक्ति हमारे भारत देश के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है तथा इसके अलावा अन्य अदालतों में न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा मुख्य जज की सलाह पर की जाती है।

चुकि हाई कोर्ट अदालत राज्यों से संबंध रखती है, इसलिए हाईकोर्ट में मुख्य और अन्य जजों की नियुक्ति हमारे भारत देश के राष्ट्रपति द्वारा राज्य के गवर्नर यानी कि राज्यपाल और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य जज की सलाह पर की जाती है।

इसके अलावा जिला जज की नियुक्ति भी राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है।एक बार जब जज को अदालत में नियुक्ति प्रदान की जाती है,तो उसके बाद अगर उन्हें किसी कारण से हटाना होता है|

तो उसके लिए महाभियोग प्रस्ताव लाया जाता है और महाभियोग प्रस्ताव के द्वारा ही किसी जज को उसके पद से हटाया जा सकता है। वैसे तो जज बनना इतना आसान नहीं है, जितना लोगों को लगता है।

जज बनने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है, परंतु अगर आप सच्ची लगन से मेहनत करते हैं, तो आपका जज बनने का सपना जरूर पूरा होगा। आज के इस आर्टिकल में हम आपको “जज कैसे बने” इसके बारे में जानकारी देने वाले हैं, तो चलिए चलते हैं मुख्य मुद्दे पर।

जज कैसे बने पूरी जानकारी

जज बनने के लिए क्या करें

Judge kaise bane

1. जज क्या होता है

जज को हिंदी में क्या कहते हैं, यह वैसे तो लगभग सभी को पता होता है, परंतु जिनको पता नहीं होता है, उनके लिए बता दे कि जज को हिंदी में न्यायाधीश कहा जाता है और एक न्यायाधीश अदालत में बैठकर देश की जनता को न्याय देने का काम करता है।

जज ऐसा व्यक्ति होता है, जो किसी भी अदालत की कार्यवाही की अध्यक्षता करता है और किसी भी केस में दोनों पक्षों के वकीलों की बातों को सुनकर सबूतों और गवाहों को ध्यान में रखते हुए न्याय करने का काम करता है तथा जो दोषी रहता है, उसे उचित सजा देने का ऐलान करता है।

2. जज का काम

हमारे भारत देश में विभिन्न प्रकार के जज होते हैं और उनके पद के हिसाब से उनके काम भी अलग-अलग होते हैं।एक जज कौन से काम करता है, उसकी जानकारी हमने आपको नीचे दी है।

जैसा कि इसके नाम से ही प्रतीत होता है, कि जज अदालतों में सुनवाई की अध्यक्षता करता है और इसके अलावा वह अदालतों में दोनों पक्ष और उनके वकीलों के द्वारा पेश किए गए सबूतों और गवाहों के आधार पर सही निर्णय लेता है तथा दोषी व्यक्ति को सजा देता है।

सुप्रीम कोर्ट का जज किसी भी कानून को लागू करना है या नहीं इसके फैसले ले सकते हैं। जज का पद बहुत ही जिम्मेदारी का होता है, इसलिए इन्हें सभी मामलों में सावधानी रखनी पड़ती है।

3. जज बनने के लिए शैक्षिक योग्यता

जो अभ्यर्थी जज बनना चाहता है, उसे जज बनने के लिए 12वीं की कक्षा को कम से कम 45% अंकों के साथ पास करना जरूरी है। इसके बाद यूनिवर्सिटी के द्वारा एंट्रेंस एग्जाम आयोजित की जाती है|

जिसमें सफलता प्राप्त करने के बाद आपको बीए एलएलबी के कोर्स मे एडमिशन मिलता है और इस कोर्स की समय अवधि 5 साल की होती है। इसके साथ-साथ आप ग्रेजुएशन की परीक्षा 45 प्रतिशत अंकों के साथ पास करके एलएलबी के 3 साल के कोर्स में एडमिशन पा सकते हैं।

4. जज बनने के लिए अन्य योग्यताएं

जो व्यक्ति भारत में जज का पद प्राप्त करना चाहता है, उसे भारतीय नागरिकता रखनी जरूरी है। इसके अलावा जो व्यक्ति नेपाल अथवा भूटान के नागरिक हैं, वह भी भारत में जज बनने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

इसके अलावा अदालत में जज बनने के लिए अभ्यर्थी को दो या दो से अधिक अदालतों में कम से कम 5 सालों तक जज के रूप में काम करना जरूरी है या फिर इसके अलावा किसी हाईकोर्ट में लगातार 10 सालों तक अधिवक्ता के रूप में काम करना जरूरी है।

भारत सरकार ने एक नियम बनाया है, जिसके अंतर्गत किसी हाईकोर्ट के जज या फिर सुप्रीम कोर्ट अथवा हाई कोर्ट के रिटायर जज को सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में नियुक्त किया जा सकता है।

जो अभ्यर्थी जज बनना चाहता है, उसकी अधिकतम उम्र 62 साल होनी चाहिए। जो अभ्यर्थी 62 साल की उम्र को पार कर जाते हैं उन्हें जज के पद से रिटायर कर दिया जाता है।

5. जज की ट्रेनिंग

जैसा कि हर नौकरी में होता है, वैसे ही जज के रूप में सिलेक्शन होने के बाद अभ्यर्थी को ट्रेनिंग लेना जरूरी होती है। इस ट्रेनिंग में अभ्यर्थी को अदालतों के परीक्षण के बारे में, कानूनी प्रक्रिया के बारे में, कानून के बारे में तथा अदालत के नियम कानून और मान मर्यादा के बारे में जानकारी दी जाती है।

जब अभ्यर्थी सभी टेस्ट को सफलतापूर्वक पास कर लेते हैं, तो उसके बाद उन्हे भारत सरकार द्वारा जज के पद की नियुक्ति प्रदान की जाती है।

6. जज बनने के लिए व्यक्तिगत योग्यता

भारत की अदालतों में जज बनने के लिए सिर्फ पढ़ाई ही जरूरी नहीं होती, बल्कि इसके अलावा भी आपके अंदर कुछ अन्य योग्यताएं होनी चाहिए।वह कौन सी योग्यताएं है, उसकी जानकारी हम आपको नीचे दे रहे हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़ें।

जज का काम अदालतों में दोनों पक्ष और उनके वकीलों की बातों को ध्यान पूर्वक सुनकर सही निर्णय लेना होता है और दोषी व्यक्ति को सजा तथा निर्दोष व्यक्ति को रिहा करना होता है।

एक जज के रूप में अभ्यर्थी को सबूतों का सही ढंग से मूल्यांकन करना आना चाहिए, इसके अलावा सबूतों और गवाहों के आधार पर सही निर्णय लेना चाहिए। जज का पद बहुत ही जिम्मेदारी का होता है, इसीलिए किसी भी केस में जज को सभी बातों को गौर करते हुए अपना फैसला सुनाना चाहिए।

एक जज के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण बात होती है कि उन्हें कानून के बारे में अधिक से अधिक जानकारी हो, जिससे वह कानून में लिखित नियमों का सही ढंग से पालन करवा सके।

आजकल मार्केट में ऐसी कई किताबें उपलब्ध है, जिसमें कानून से संबंधित सारी बातें बताई जाती है। इन किताबों को पढ़कर आप कानून के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

जज के तौर पर आपको सभी पक्षों पर विशेष ध्यान देना चाहिए, जिससे कि आप किसी भी मामले की जड़ तक पहुंच सके और उस मामले में सही से अपना निर्णय देकर न्याय कर सके।

जज बनने के लिए अथवा बनने के बाद आपकी पढ़ने और लिखने की स्पीड तेज होनी चाहिए, क्योंकि जज को सभी सबूतों का एनालिसिस करना होता है और उनके बीच क्या अंतर है, इसके बारे में पता करना होता है।

लेखन क्षमता के माध्यम से जज केस के मामले से जुड़े सभी बातों को स्पष्ट तरीके से लिख सकते हैं या फिर किसी भी चीज की अच्छे-अच्छे स्टडी करने के बाद उस पर अपनी निष्पक्ष राय दे सकते हैं।

7. जज बनने की प्रक्रिया

जज बनने के लिए आपको 12वीं परीक्षा में अच्छे से अच्छे अंक लाने चाहिए,क्योंकि आपके 12वी परीक्षा में प्राप्त अंक ही इस बात का निर्धारण करते हैं, कि आप जज बनने के लिए आगे की प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं या नहीं।

1#  बारहवीं अच्छे नम्बरों से पास करें

जो व्यक्ति भारत की अदालतों में जज बनना चाहता है, उसे शुरू से ही अपनी पढ़ाई पर विशेष ध्यान देना होता है और खासतौर में उसे 12वीं की परीक्षा में ज्यादा ध्यान देना पड़ता है|

क्योंकि 12वीं की परीक्षा में अच्छे अंक लाने के बाद वह आगे की प्रक्रिया में शामिल होता है और अगर आपके 12वीं परीक्षा में कम अंक आएंगे, तो आप आगे की प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पाएंगे। इसीलिए 12वीं परीक्षा में अच्छे से अच्छे अंक लाने के लिए खूब मेहनत करें।

#2 एंट्रेंस एग्जाम CLAT क्लियर करें

एलएलबी का कोर्स करने के लिए कानून की यूनिवर्सिटीओं में प्रवेश पाने के लिए सीएलएटी नाम की एंट्रेंस एग्जाम को क्लियर करना जरूरी है, तभी आप एलएलबी के कोर्स में प्रवेश पा सकते हैं|

हालांकि हर कॉलेज में एडमिशन प्रक्रिया अलग-अलग हो सकती है, लेकिन सामान्य तौर पर कॉलेज में प्रवेश पाने के लिए इस एग्जाम को पास करना जरूरी होता है।

हर साल मई के महीने में यह परीक्षा आयोजित करवाई जाती है और इसके लिए हर साल जनवरी के महीने में नोटिफिकेशन जारी किया जाता है और इस परीक्षा के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि मार्च महीने तक होती है।अगर आप मार्च महीने के बाद आवेदन करेंगे, तो आपका आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

#3 एलएलबी का कोर्स पूरा करें

अगर आपके एंट्रेंस एग्जाम में अच्छे नंबर आएंगे, तभी आपको किसी फेमस लॉ कॉलेज में एडमिशन मिलेगा। इसके लिए एंट्रेंस एग्जाम में अच्छे नंबर लाने का प्रयास करें।

जब आपका एडमिशन हो जाए, तो उसके बाद अपना पूरा ध्यान सिर्फ कानून की पढ़ाई के ऊपर लगाए और एलएलबी के कोर्स को ढंग से पूरा करें।

#4 वकील बनें

एलएलबी का कोर्स पूरा करने के बाद या कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद आपको इंटर्नशिप करनी होती है और जब आप अपनी इंटर्नशिप सफलतापूर्वक पूरी कर लेते हैं|

तो उसके बाद वकील बनने के लिए आपको अपने आप को किसी बार काउंसिल में रजिस्टर्ड करवाना होता है, हालांकि इसके लिए आपको सबसे पहले स्टेट बार काउंसिल द्वारा आयोजित एआईबीए की परीक्षा को पास करना होता है।जब आप इस परीक्षा को पास कर लेते हैं, तो उसके बाद आप वकील बन जाते हैं।

#5 स्टेट जुडिशल सर्विस एग्जाम क्लियर करें

जब आप वकील बन जाए, तो उसके बाद आपको जुडिशल सर्विस परीक्षा को पास करने की जरूरत होती है।इस परीक्षा में शामिल होने के लिए अलग-अलग राज्यों के हिसाब से उम्र की सीमा निर्धारित होती है|

परंतु आमतौर पर इस परीक्षा में शामिल होने के लिए उम्र की सीमा 21 साल से लेकर 35 साल के बीच होती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस परीक्षा को तीन भागों में संपन्न करवाया जाता है|

जिसके भाग में प्रारंभिक परीक्षा होती है, दूसरे भाग में मुख्य परीक्षा होती है और तीसरे और अंतिम भाग में अभ्यर्थी का इंटरव्यू लिया जाता है।

8. जज बनने के लिए तैयारी कैसे करें

अगर कोई अभ्यर्थी जज बनने की तैयारी कर रहा, तो उसे सबसे पहले यह निर्णय लेना होता है, कि वह किस राज्य में जज का पद प्राप्त करना चाहता है। यह इसलिए आवश्यक है, क्योंकि हर राज्य के अंदर हर महीने या फिर साल में जजों की पदों के लिए वैकेंसी निकलती रहती है।

इसके अलावा राज्य चुनने का एक और कारण यह भी है, कि हर राज्य का कानून अलग अलग होता है, जो कि राज्य के अंदर होने वाले जज की परीक्षा में पूछे जाते हैं।

राज्य का चुनाव कर लेने के बाद अभ्यर्थी को उस राज्य में हुई जजों की परीक्षा के पिछले 10 सालों के पेपर को इकट्ठा करने का प्रयास करना चाहिए और उन पेपर को इकट्ठा करके उन्हें अच्छे से समझ कर उनमे दिए गए सवालों को सही ढंग से हल करने का प्रयास करना चाहिए।

ऐसा करने से आपको जज की परीक्षा के सिलेबस और विषयों के बारे में अच्छी जानकारी प्राप्त होगी।

जज की परीक्षा को पास करने के लिए आपको सिलेबस से संबंधित सभी विषयों का अध्ययन करना होता है। इसके अलावा आप जो भी पढ़े, उसका समय-समय पर रिवीजन भी अवश्य करें। ऐसा करने से आपको आपने जो पढ़ा है, वह याद रहेगा।

इसके अलावा अगर आपके घर के आसपास कोई ऐसा व्यक्ति है, जिसने जज बनने की परीक्षा दी है, तो उनसे अपना संपर्क स्थापित करें और उनसे इस परीक्षा के बारे में महत्वपूर्ण राय और टिप्स हासिल करने की कोशिश करें।

जज की परीक्षा की तैयारी करने के लिए आप अपने घर के आस-पास स्थित किसी अच्छे कोचिंग इंस्टिट्यूट में एडमिशन भी ले सकते हैं। इसके अलावा आप चाहे तो घर बैठे बैठे यूट्यूब के द्वारा भी जज की परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आज यूट्यूब पर ऐसे कई एजुकेशन चैनल उपलब्ध है, जहां पर ना सिर्फ जज बल्कि भारत की अन्य बड़ी-बड़ी परीक्षाओं की तैयारी भी करवाई जाती है और इन यूट्यूब चैनल के द्वारा समय-समय पर आपको परीक्षा से जुड़ी अपडेट भी दी जाती है।

9. जज के कोर्स की फीस

अगर हमें जज बनने के लिए कितनी फीस देनी पड़ती है, इसके बारे में बात करें तो जज बनने के लिए अभ्यर्थी को कानून की डिग्री हासिल करनी होती है और भारत में कानून की डिग्री|

अर्थात एलएलबी, जिसे बैचलर ऑफ लॉ कहते हैं, कि साल की फीस ₹100000 से लेकर ₹300000 के आसपास होती है और जिसे एलएलएम जिसे मास्टर ऑफ लॉ कहा जाता है, के कोर्स की फीस 100000 से लेकर ₹200000 साल की होती है।

कानून की डिग्री प्राप्त करने के बाद अभ्यर्थी को अधिक अनुभव प्राप्त करने के लिए किसी अदालत में इंटर्नशिप करना जरूरी होता है।

10.  जज बनने के लिए स्किल

अगर आप जज बनकर अपना कैरियर सवारना चाहते हैं, तो आपको कानून की अच्छी जानकारी होनी जरूरी है। इसके अलावा भी आपके अंदर कुछ योग्यता होनी चाहिए।इसकी जानकारी हमने आपको नीचे दी है।

जज बनने के लिए अभ्यर्थियों को कानून की सभी धाराएं और नियमों के बारे में जानकारी होनी चाहिए और कानून की अच्छी समझ होनी चाहिए।इसके अलावा अभ्यर्थी की सोचने समझने की शक्ति भी अच्छी होनी चाहिए|

साथ ही अभ्यर्थी की बातचीत करने की कला भी अच्छी होनी चाहिए।अभ्यर्थी के अंदर सही और गलत को परखने की क्षमता होनी चाहिए, क्योंकि जज बनने के बाद आपको सबूतों और तथ्यों का आकलन करके अपना निर्णय देना होता है।

11. जज की सैलरी

भारत में हर जज की सैलरी अदालतों के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है। अगर हम भारत में हाई कोर्ट के जज की सैलरी के बारे में बात करें, तो हाईकोर्ट के जज की महीने की सैलरी 2,25000 के आसपास होती है।

इसके अलावा इन्हे अन्य सरकारी भत्ते भी मिलते हैं। जिनमें राशन खर्चा, लाइट बिल, टेलीफोन खर्चा, वाहन पेट्रोल खर्चा, यात्रा खर्चा, मेडिक्लेम सुविधा, सरकारी सुरक्षा गार्ड इत्यादि।

इसके अलावा इन्हें पीएफ और ग्रेजुएटी का लाभ भी मिलता है और रिटायरमेंट के बाद पेंशन भी मिलती है, वही जो अभ्यर्थी भारत का सुप्रीम कोर्ट होता है उसे महीने की सैलरी के रूप में ₹2,50000 मिलते हैं और इन्हें भी ऊपर बताए गए सभी लाभ मिलते हैं।

12. जज का प्रमोशन

जज का पद प्राप्त करने के पहले अभ्यर्थी को सात-आठ सालों तक किसी भी अदालत में प्रैक्टिस करनी होती है। इसके बाद किसी भी लॉ ग्रैजुएट अभ्यर्थी का प्रमोशन होता है।

ठीक इसी तरह हमारे भारत देश के सबसे बड़े कोर्ट यानी कि सुप्रीम कोर्ट में जज बनने के लिए अभ्यर्थी को किसी भी हाईकोर्ट में कम से कम 10 सालों का अनुभव लेना जरूरी होता है।

आपकी और दोस्तों

तो दोस्तों यह था एक जज कैसे बने, हम उम्मीद करते हैं कि इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आप सभी को पता चल गया होगा कि एक जज बनने के लिए क्या करना पड़ता है|

यदि आपको हमारी यह पोस्ट हेल्पफुल लगी हो तो प्लीज इस पोस्ट को एक लाइक जरुर करें और अपने दोस्तों के साथ फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर अवश्य करें|

क्योंकि हम चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को यह पता चल पाएगी एक जज बनने की तैयारी कैसे करे धन्यवाद दोस्तों|

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