ISRO Full Form in Hindi | ISRO का फुल फॉर्म क्या है

ISRO Full Form in Hindi: आज के इस आर्टिकल में हम आपको “इसरो की फुल फॉर्म” के बारे में जानकारी देने वाले हैं। अगर आप इंटरनेट पर यह सर्च करते रहते हैं कि इसरो क्या है या फिर इसरो का फुल फॉर्म क्या है, तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं, क्योंकि आज आपको इसके बारे में सभी जानकारी प्राप्त होगी।

दोस्तों दुनिया के हर देश के पास अपनी अपनी एजेंसी होती है और यह एजेंसियां अलग-अलग काम करती है। जैसे कुछ एजेंसीया मौसम का हाल पता करती रहती है तो कुछ एजेंसीया देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए काम करती है।

वैसे ही कुछ एजेंसीया ऐसी भी है, जो वायुमंडल यानी कि सौर ग्रह में अपने उपकरण को छोड़ने का काम करती हैं और वायुमंडल से जुड़े हुए कई रहस्यों को उजागर करने का काम करती हैं।

इसके अलावा सभी एजेंसियां अपने देश के व्यक्तिगत फायदे के लिए समय-समय पर अंतरिक्ष में उपग्रह छोड़ती रहती है।इसके अलावा वे सेटेलाइट भी छोड़ती है।

हर सैटेलाइट का अपना अलग-अलग उद्देश्य होता है, परंतु हाल के समय में आपने टीवी या अखबारों में यह अवश्य देखा होगा कि, चंद्रयान की चर्चा बहुत खूब जोर शोर से हो रही है। मिशन मंगल या फिर चंद्र जान के पीछे बहुत से देश लगे हुए हैं।

सभी देश मंगल पर या फिर चंद्र पर पानी की खोज तथा अन्य खोज करने में व्यस्त है और ऐसे में एक संस्था का नाम बार-बार आपको दिखाई देता है जिसे इसरो कहा जाता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दुनिया में मंगल और चंद्र पर आधारित विभिन्न देश खोज कर रहे हैं और ऐसे में हमारा भारत देश भी इसमें पीछे नहीं है। हमारे भारत देश की स्पेस एजेंसी इसरो भी लगातार मंगल और चंद्र ग्रह के बारे में नई नई जानकारी खोज रही है।

जिसके लिए वह लगातार मंगल और चंद्र ग्रह पर सेटेलाइट भेजने का प्रयास भी कर रही है। वैसे तो दुनिया में हर देश मंगल और चंद्र ग्रह पर जाने के लिए प्रयत्नशील है।

परंतु अगर हम हमारे भारत देश की बात करें तो हमारे भारत देश में जो एजेंसी सबसे ज्यादा मंगल और चंद्र ग्रह के प्रति खोज कर रही है वह एजेंसी इसरो ही है।आइए इसके बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करते हैं।

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ISRO Full Form in Hindi

ISRO का फुल फॉर्म क्या है

ISRO Full Form in Hindi

■ इसरो का फुल फॉर्म क्या है

सबसे पहले तो आइए जान लेते हैं कि इसरो का फुल फॉर्म क्या होता है। इसरो का फुल फॉर्म होता है “इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन” इसे हिंदी में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र कहा जाता है।यह हमारे भारत देश की सबसे बड़ी स्पेस रिसर्च एजेंसी है, जो समय-समय पर वायुमंडल के बारे में नई नई खोज करती है और हमें नई नई जानकारियां वायुमंडल के बारे में हमे प्रदान करती है।

■ इसरो को हिंदी में क्या कहते हैं

इसरो को हिंदी में कहते हैं भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र और इसे अंग्रेजी में कहते हैं इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन।

हमारे भारत देश को डेवलपमेंट की ओर ले जाने के लिए एक ऐसे संगठन की आवश्यकता उत्पन्न हुई, जो वायुमंडल और अंतरिक्ष से संबंधित सूचनाओं को इकट्ठा करके उस पर अनुसंधान करके भारत को नई टेक्नोलॉजी प्रदान करें, जिससे भारत सहित अन्य देशों को भी फायदा हो

और भारत अन्य देशों के बराबर ही अंतरिक्ष में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाएं और अंतरिक्ष के बारे में नई-नई जानकारियां खोज कर दुनिया के सामने उपस्थित करें और इसीलिए हमारे भारत देश में इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी का विस्तार हो, इसी उद्देश्य से इसरो की स्थापना हुई है और अपने स्थापना के बाद से ही इसरो एजेंसी ने सफलता के नए कीर्तिमान छुए हैं।

■ इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन क्या है

इसरो हमारे भारत देश की सबसे बड़ी स्पेस रिसर्च एजेंसी है और आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन संस्था की स्थापना साल 1969 में 15 अगस्त को विक्रम भाई साराभाई के द्वारा की गई थी।

इसरो हमारी भारत सरकार का एक विभाग है, जिसके अंतर्गत अंतरिक्ष से संबंधित मिशन चलाए जाते हैं।इसरो अंतरिक्ष से संबंधित खोज करता है तथा सेटेलाइट और टेक्नोलॉजी का निर्माण करता है और उस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भारत सरकार और भारत की सुरक्षा के लिए करती है।

जिससे कि हमारे भारत देश को आंतरिक और बाहरी सिक्योरिटी प्रदान की जा सके। इसरो संस्था हमारे भारत देश के अंतरिक्ष मिशन के लिए पूर्ण रूप से जिम्मेदार होती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन के हमारे पूरे भारत देश में विभिन्न केंद्र है।

जहां पर अंतरिक्ष से संबंधित शोध कार्य होते हैं।इसरो के द्वारा किए गए कई प्रयोग आज तक सफल हुए हैं, जिसके कारण भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में सफलता हासिल करने वाला विश्व का छठा देश बन गया है और इसरो के कारण ही आज हमारा भारत देश अपने खुद के सेटेलाइट का निर्माण करता है और उन्हें अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित करता है।

इसरो के कारण ही दुनिया के कई देश भारत से अपने सैटेलाइट को अंतरिक्ष में छोड़ने के लिए डील करते हैं। इसका एक कारण यह भी है कि हमारी इसरो संस्था दुनिया के अन्य स्पेस एजेंसी से काफी सस्ते में अन्य देशों की सेटेलाइट को अंतरिक्ष में छोड़ने का काम करती है।

इसलिए दुनिया के कई देश भारत की स्पेस एजेंसी से अंतरिक्ष कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आग्रह करते हैं।अभी तक हमारे भारत देश ने ताइवान, वियतनाम, श्रीलंका और कंबोडिया जैसे देशों की सेटेलाइट को अंतरिक्ष में छोड़ने का काम किया है और इनके पीछे इस संस्था का बहुत बड़ा हाथ है।

■ इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन का हेड क्वार्टर कहां है

हमारे भारत में जितनी भी संस्थाएं हैं, सब ने अपना मुख्यालय कहीं ना कहीं बनाया है और उसी तरह इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन का मुख्यालय भी हमारे भारत में स्थित है। इसरो का मुख्यालय हमारे भारत में कर्नाटक राज्य के बेंगलुरु में स्थित है।

इसके अलावा भी इसके हमारे पूरे भारत देश में विभिन्न अनुसंधान केंद्र हैं, परंतु वह सभी अनुसंधान केंद्र बेंगलुरु के ऑफिस से ही जुड़े हुए हैं और बेंगलुरु के ऑफिस से जो आदेश मिलते हैं, वह अनुसंधान केंद्र उनका पालन करते हैं

■ इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन कि हमारे भारत में कितने केंद्र हैं

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन के हमारे भारत में टोटल 6 प्रमुख केंद्र है। इसके अलावा भी इसरो की कई इकाइयां, एजेंसी और प्रयोगशाला हमारे देश में स्थापित है। वह 6 केंद्र इस प्रकार हैं।

  • विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) तिरुवनंतपुरम
  • इसरो उपग्रह केंद्र (आईएसएसी) बेंगलूर
  • सतीशधवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी-शार) श्रीहरिकोटा
  • द्रव नोदन प्रणाली केंद्र (एलपीएससी) तिरुवनंतपुरम, बेंगलूर और महेंद्रगिरी में
  • अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (सैक), अहमदाबाद
  • राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी), हैदराबाद

■ इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाईजेशन का मुख्य काम क्या है

इसरो का सबसे पहला मुख्य काम है कि, वह अंतरिक्ष में लांच होने वाले व्हीकल सिस्टम और साउंडिंग रॉकेट की पूरी डिजाइन को बनाएं और उसकी टेक्नोलॉजी को प्राप्त करने का प्रयास करें और उन्हें ठीक तरह से अंतरिक्ष में लॉन्च करने की कोशिश करें।

इसके अलावा इसरो का दूसरा मुख्य काम यह है कि वह भारतीय जनता के लिए दूरसंचार टेलीविजन प्रसारण को और अधिक बढ़िया बनाने के लिए समय-समय पर अंतरिक्ष में सेटेलाइट भेजे ताकि भारतीय जनता सभी रेडियो, इंटरनेट और टीवी का इस्तेमाल अच्छे से कर पाए और भारतीय जनता को बेहतर इंटरनेट सुविधा प्राप्त हो सके।

इसके अलावा इसरो का यह काम भी है कि वह अंतरिक्ष में ऐसे सेटेलाइट को लांच करें जो समय-समय पर पृथ्वी की भौगोलिक स्थिति के बारे में जानकारी प्रदान करता रहे ताकि पृथ्वी पर होने वाले सभी आपदाओं को पहले से ही अनुमान लगाने में सहायता प्राप्त हो।

इसरो का सबसे महत्वपूर्ण कार्य भी है कि वह हमारे भारत देश के लिए कुछ ऐसे हथियार बनाएं जिनकी सहायता से किसी भी प्रकार की जंग या फिर कोई भी सीक्रेट मिशन के लिए भारत देश की जनता व सरकार हमेशा तैयार रहें।

इसके अलावा इसरो का यह काम भी है कि वह अन्य देशों की सेटेलाइट को उनके कहने पर लॉन्च करें और उनसे उस सेटेलाइट को लांच करने के बदले एक निश्चित रकम ले।

■ इसरो के द्वारा अब तक कितने सेटेलाइट लांच किए जा चुके हैं ?

अगर हम इस बारे में बात करें कि इसरो ने अभी तक कितने सेटेलाइट लांच किए हैं तो एक अंदाज के मुताबिक इसरो ने अभी तक लगभग 105 सैटेलाइट अंतरिक्ष में लॉन्च किए हैं।

हालांकि इनमें से बहुत से सेटेलाइट विदेशों के भी है क्योंकि इसरो अपनी स्पेस एजेंसी से कई अन्य देशों के सेटेलाइट भी लांच करता है। नीचे हमने इसरो ने अभी तक कितने सेटेलाइट लांच किए हैं, उनके कुछ नाम बताए हैं। एक बार इन पर गौर अवश्य करें।

■ इसरो द्वारा लांच की गई सैटेलाइट्स की सूची

भारतीय इसरो संस्था ने अभी तक एक अंदाज के मुताबिक 105 सैटेलाइट अंतरिक्ष में लॉन्च किए हैं, जिनमें से नीचे हमने कुछ प्रसिद्ध सेटेलाइट की सूची दी है, जोकि इस प्रकार है।

1.आर्यभट्ट 19 अप्रैल, 1975 पहली भारतीय सैटेलाइट

2. भास्करा – 1 7 जून, 1979 पहली एक्सपेरीमेंटल रिमोट सेंसिंग अर्थ ऑब्सरवेशन सैटेलाइट

3. रोहिणी आरएस – 1 18 जुलाई, 1980 स्वदेशी लांच व्हीकल एसएलवी द्वारा

4. एरीयन पैसेंजर पेलोड एक्सपेरीमेंट (एप्पल) 19 जून, 1981 पहला भारतीय 3 – एक्सिस स्टाबिलाइज्ड एक्सपेरीमेंटल जियोस्टेशनरी कम्युनिकेशन सैटेलाइट

5. भास्करा – 2 20 नवम्बर, 1981 ऑर्बिट से अर्थ ऑब्जरवेशन के लिए पहला भारतीय सैटेलाइट

6. इनसैट – 1ए (भारतीय नेशनल सैटेलाइट) 10 अप्रैल, 1982 पहला ऑपरेशनल मल्टीपर्पस संचार एवं मौसम विज्ञान सैटेलाइट

7. आईआरएस – 1ए (भारतीय रिमोट सेंसिंग – 1ए) 17 मार्च, 1988 पहला रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट

8. इनसैट – 2ए (भारतीय नेशनल सैटेलाइट) 10 जुलाई 1992 पहला भारतीय मल्टीपर्पस सैटेलाइट

9. ओसियनसैट – 1 (आईआरएस – पी4) 26 मई, 1999 पहला भारतीय सैटेलाइट जो विशेष रूप से ओसियन एप्लीकेशन्स के लिए बनाया गया था।

10. कल्पना – 1 (मेटसैट) 12 सितम्बर, 2002 पहला भारतीय डेडिकेटेड मीटरोलॉजी सैटेलाइट

11. जीसैट – 3 (ग्रामसैट – 3) (इदुसैट) 20 सितम्बर, 2004 पहला भारतीय सैटेलाइट जो विशेष रूप से एजुकेशनल सेक्टर की सेवा के लिए बनाया गया था.

12. आईएमएस – 1 (तीसरा विश्व सैटेलाइट – टीडब्ल्यूसैट) 28 अप्रैल, 2008 पहला भारतीय सैटेलाइट जिसमें इसरो के भारतीय मिनी सैटेलाइट का उपयोग किया गया था।

13. आईआरएनएसएस – 1ए (भारतीय रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) 1 जुलाई, 2013 आईआरएनएसएस सीरीज में पहला नेविगेशनल सैटेलाइट

14. मार्स ऑर्बिटर मिशन (एमओएम) स्पेसक्राफ्ट 5 नवंबर, 2013 भारत का पहला मंगल ऑर्बिटर, जिसे मंगलयान भी कहा जाता है।

15. एस्ट्रोसैट 28 सितम्बर, 2015 मल्टी – वेवलेंथ स्पेस ऑब्जर्वेटरी के साथ पहला भारतीय सैटेलाइट

16. जीसैट – 15 (ग्रामसैट – 15) 11 नवंबर, 2015 कम्युनिकेशन के लिए उपयोग होने वाली भारतीय सैटेलाइट

17. स्वयं – 1 22 जून, 2016 पहला भारतीय सैटेलाइट जोकि पैसिव एटीट्यूड कण्ट्रोल को प्रदर्शित करने के लिए लांच किया गया था।

18. माइक्रोसैट – टीडी (माइक्रोसैटेलाइट) 10 जनवरी, 2018 यह स्पेस में भारत का 100 वां सैटेलाइट था।

19. जीसैट – 31 6 फरवरी, 2019 यह एक हाई थ्रूआउट टेलीकम्यूनिकेशन सैटेलाइट था।

20. ईएमआईसैट 1 अप्रैल, 2019 यह सैटेलाइट इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम मेज़रमेंट के लिए था, जोकि एक भारतीय रिकोनाइसंस सैटेलाइट है।

21. चंद्रयान – 2

इसके अलावा भी इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन ने अपनी स्थापना से लेकर अभी तक बहुत सारे सैटेलाइट अंतरिक्ष में लॉन्च किए हैं, जिनकी लिस्ट इतनी लंबी है कि दुनिया इसरो की तारीफ करती नहीं थकती।

इसमें एक उपलब्धि यह भी है कि, दुनिया की अन्य स्पेस एजेंसी के मुकाबले हमारी इसरो संस्था बहुत ही कम खर्चे में सैटेलाइट और यान को अंतरिक्ष में भेजती है, जो दुनिया के लिए एक आश्चर्य का विषय है और इसीलिए दुनिया के विकासशील देश इसरो संस्था से अपने सैटेलाइट को अंतरिक्ष में छुड़वाने का काम करते हैं।

■ इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन की मुख्य उपलब्धियां

– साल 1975 में 19 अप्रैल के दिन पहली बार हमारे भारतीय वैज्ञानिकों ने एक सेटेलाइट लांच किया था जिसका नाम आर्यभट्ट था और इस सैटेलाइट को भारत के मित्र देश रूस की मदद से लांच किया गया था और जब भारत ने इस सेटेलाइट को लांच किया, तब दुनिया के बहुत से देशों ने भारत को बधाइयां दी थी।

– इसरो ने अपनी स्थापना से लेकर अभी तक 105 से भी ज्यादा सैटेलाइट अंतरिक्ष में लॉन्च किए हैं और जिसमें से अधिक से अधिक सेटेलाइट अमेरिका और रूस जैसे बड़े देशों के लिए भारत द्वारा बनाए गए थे और लांच किए गए थे और आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इन सेटेलाइट को लांच करने के बदले इसरो संस्था को 7 अरब से भी अधिक का मुनाफा हुआ था जो अपने आप में एक बड़ी रकम है।

– इसरो ने अपनी उपलब्धियों में सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल की थी चंद्रयान की। जिसको इसरो ने साल 2008 में 22 अक्टूबर को सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया था।आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब इस यान को धरती से छोड़ा गया था तब इस यान को चांद तक पहुंचने में लगभग 5 दिन का समय लगा था और इसे चंद्रमा की सतह में स्थापित होने के लिए कम से कम 15 दिन का समय लगा था।

चंद्रयान-1 के सफलतापूर्वक 10 महीने तक काम करने के बाद अंतरिक्ष के वैज्ञानिकों का चंद्रयान 1 से पूरी तरह से कांटेक्ट टूट गया था परंतु संपर्क टूटने के पहले चंद्रयान-1 अपना 95% काम कर चुका था।

चंद्रयान-1 भारतीय वैज्ञानिकों की बहुत बड़ी सफलता थी क्योंकि इसी ने चंद्रमा पर पानी की खोज की थी और वहां पर मानव जीवन संभव है इसकी जानकारी प्रदान की थी। जब चंद्रयान ने चंद्रमा पर पानी की खोज की थी तब पूरी दुनिया आश्चर्यचकित हो गई थी और तब से ही चंद्र मे दुनिया के अन्य देशों की दिलचस्पी बढ़ने लगी और फिर सभी देश अपने अपने स्तर पर चंद्रमा के बारे में खोज करने के लिए कोशिश करने लगे।

– चंद्रमा के बारे में खोज करने के बाद इंडियन स्पेस रिसर्च एजेंसी ने मंगल के बारे में खोज करने का निर्णय लिया और साल 2013 में इसकी शुरुआत की गई, जिसे मिशन मंगल नाम दिया गया है और यह मिशन लगभग 298 दिन चला

और साल 2014 के सितंबर महीने में 24 तारीख को मंगलयान को मंगल की कक्षा में स्थापित करके इसरो ने एक बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल की। 2013 तक कोई भी देश मंगलयान के इस मिशन में सफलता हासिल नहीं कर पाया था।

इसीलिए जब भारत ने मिशन मंगलयान को पूरा किया तब दुनिया के अधिकतर मीडिया ने भारत के मिशन मंगलयान को कवर किया था और बहुत से देशों ने भारत को मिशन मंगलयान के लिए बधाइयां दी थी।

– इसके अलावा इसरो ने साल 2008 में पीएसएलवी की सहायता से एक साथ 10 रॉकेट अंतरिक्ष में छोड़ने का कीर्तिमान बनाया था और इसमें कमाल की बात यह थी कि इस हलके उपग्रहों को छोड़ने के लिए पीएसएलवी का इस्तेमाल किया गया था और अभी तक पीएसएलवी की सहायता से अंतरिक्ष में 70 से ज्यादा उपग्रह इसरो संस्था ने छोड़ चुके हैं।

और इसकी सफलता से प्रेरित होकर भारतीय वैज्ञानिकों ने साल 2016 में 22 जून को एक साथ 20 उपग्रह पृथ्वी की कक्षा में भेज दिए और उन्हें वहां पर सफलतापूर्वक स्थापित करवाया।

■ चंद्रयान 2 की जानकारी

इसरो ने पिछले साल 2019 में 22 जुलाई को भारतीय समय के अनुसार दोपहर में 2:43 को श्रीहरिकोटा से चंद्रयान-2 को अंतरिक्ष की कक्षा में भेजा था और इस प्रयोग के बाद भारत विश्व में अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक शक्ति बनकर उभरा है और इसका पूरा श्रेय इसरो तथा उसके वैज्ञानिकों को जाता है।

■ भारत का पहला उपग्रह

हमारे भारत देश का पहला ग्रह सोवियत संघ के द्वारा साल 1975 में 19 अप्रैल को लांच किया गया था, जिसका नाम वैज्ञानिकों ने आर्यभट्ट रखा था, क्योंकि यह नाम हमारे भारत देश के महान गणित शास्त्री। आर्यभट्ट हमारे भारत देश के बहुत ही प्रसिद्ध गणितज्ञ थे।

हालांकि भारत के द्वारा लांच किया गया यह उपग्रह ज्यादा दिनों तक का काम नहीं कर पाया था और लांच होने के बाद 3 दिन के बाद उसने अपना काम करना बंद कर दिया था परंतु इसे हम भारत की पहली अंतरिक्ष सफलता मान सकते हैं।

■ भारत का दूसरा उपग्रह

साल 1979 में 7 जून को भारत ने अपने दूसरे उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया। इसका नाम भारत ने भास्कर रखा था और इसका वजन लगभग 445 किलो के आसपास था।

■ पहला स्वदेशी रॉकेट/उपग्रह

सन 1980 में भारत ने पहला स्वदेशी निर्मित प्रक्षेपण यान slv-3 को अंतरिक्ष की उपग्रह में स्थापित किया था, जिसका नाम इसरो के वैज्ञानिकों ने रोहिणी रखा था।

■ इसरो के वर्तमान चेयरमैन/ अध्यक्ष कौन है

इसरो के वर्तमान निदेशक/अध्यक्ष डॉ॰ के॰ शिवान (कैलासवटिवु शिवन्) हैं, जोकि इसरों के वैज्ञानिकों भी हैं।

■ इसरो की कमाई कितनी हो सकती है

अगर हम इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाईजेशन की कमाई के बारे में बात करें तो कमाई के मामले में इसरो सबसे आगे हैं, क्योंकि यह संस्था भारत के उपग्रह को तो लॉन्च करती ही है, साथ ही में यह अन्य विदेशी उपग्रह को भी लॉन्च करती है, जिससे इसरो को काफी कमाई होती है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2016 के जून महीने तक इंडियन रिसर्च स्पेस ऑर्गेनाइजेशन ने दुनिया के 20 अलग-अलग देशों के लगभग 57 सैटेलाइट को लांच करने का काम किया है और लगातार यह काम जारी रखा है और एक अंदाज के मुताबिक इन 20 उपग्रहों को अंतरिक्ष में लॉन्च करने के लिए इसरो को 10 करोड़ यूएस डॉलर की कमाई हुई थी।

■ इसरो के आने वाले मिशन की जानकारी

हमारी इंडियन स्पेस रिसर्च एजेंसी आने वाले समय में कुछ बहुत बड़े मिशन की तैयारी बहुत ही तेजी के साथ कर रही है जिसमें इसरो संस्था सूर्य मिशन, गगनयान और मार्स आर्बिटर मिशन टू जैसे मिशन की ओर आगे बढ़ने की तैयारी में है। नीचे हमने कुछ ऐसे मिशन के नाम दिए हैं जिन्हे इसरो जल्द ही पूरा करने वाली है।

  • DESTINATION CRAFT का नाम प्रक्षेपण यान साल
    सूर्य
  • आदित्य एल 1 पीएसएलवी
  • Shukrayaan -1
  • TBD
  • मार्स ऑर्बिटर मिशन 2(मंगलयान 2)

■ इसरो के कुछ ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स

– इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन अपने पहले ही प्रयास में मंगल पर पहुंचने में कामयाब हुआ था और ऐसा करने वाला भारत पहला राष्ट्र बन गया था।

– इसरो मंगल की कक्षा में पहुंचने वाली एशिया की पहली अंतरिक्ष एजेंसी है

– इसरो संस्था ने साल 2016 में 18 जून को एक ही वाहन में 20 उपग्रहों को अंतरिक्ष में छोड़ा था।

– इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन संस्था को साल 2014 में शांति निशस्त्रीकरण और डेवलपमेंट के लिए इंदिरा गांधी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

आपकी और दोस्तों

तो दोस्तों ये था ISRO का फुल फॉर्म क्या है, हम आशा करते है की इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपको इसरो के फुल फॉर्म के बारे में पूरी जानकारी मिल गयी होगी|

दोस्तों आप इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करे ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगो को isro का फुल फॉर्म पता चल पाए धन्येवाद दोस्तों

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