हवाई जहाज का आविष्कार किसने कब और कैसे किया था | Who Invented Aeroplane in Hindi

हवाई जहाज का आविष्कार किसने,कब और कैसे किया था: हवाई जहाज आधुनिक समय की वो खोज है जिसने इंसान के सफर को बहुत छोटा कर दिया है। प्राचीन समय में एक देश से दूसरे देश या किसी एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप में जाने पर महीनों लग जाते थे।

लेकिन अब यह सफर मात्र कुछ घंटों का ही रह गया है। यह सब सिर्फ और सिर्फ हवा में उड़ने वाली उस वस्तु के कारण हुआ है, जिसे हम “हवाई जहाज” कहते हैं। लेकिन क्या आप बता सकते है इस जादुई वस्तु का आविष्कार किसने और कैसे किया? तो आइए हम आपको हवाई जहाज के आविष्कार के बारे में विस्तार से बताते हैं।

हवाई जहाज का आविष्कार किसने,कब और कैसे किया था

Who Invented Aeroplane in Hindi

hawai jahaj ka avishkar kisne kiya tha

1. इतिहास

वैसे तो हवाई जहाज का इतिहास इतना पुराना नहीं है। इसकी शुरुआत आज से 2 सदी पहले हुई थी। पुराने समय से ही इंसान इस खोज में लगा हुआ है कि वो पक्षियों की तरह आसमान में कैसे उड़ें? लेकिन उसे यह कभी समझ नहीं आया, कि वो ऐसा कैसे करें?

लेकिन वक्त के साथ यह सब बदलता गया। जिस उड़ने की वो कल्पना करता था वो आज हकीकत में हो रहा है। हालांकि इंसान खुद तो उड़ने में कामयाब नहीं हुआ, लेकिन उसने एक ऐसी वस्तु बना ली जिसने उसके सपनों को हकीकत में बदल दिया। और वो उन परिंदों के साथ उड़ने लगा, जिनके पास उसका हमेशा से जाने का सपना था।

पिछले कुछ समय से इंसान ने विज्ञान में बहुत तरक्की की है। इस आधुनिक युग में मनुष्य ने ऐसी-ऐसी वस्तुओं का निर्माण किया है, जिनकी कल्पना करना भी मुश्किल था।

2 लाख वर्षों के इतिहास में पिछली 4 सदियों ने इंसान और उसकी सोच को काफी हद तक बदला है। और उसी सोच ने आज इंसान को हवाई जहाज जैसी जादुई चीज दी है।

आज से 3 सदी पहले कुछ लोगों ने पक्षियों की नकल करके हवा में उड़ने की कोशिश की। उन्होने अपनी बाहों पर लगाने के लिए ऐसे पंखों का निर्माण किया, जिन्हें ओर्निथोप्टर कहा गया।

लेकिन यह सतह पर तो ठीक थे, परंतु इनके साथ जमीन से ज्यादा ऊंचाई पर उड़ना मुश्किल था। क्योंकि एक मशीन और एक इंसान को हवा में उड़ाने के लिए ज्यादा बल की आवश्यकता थी।

2. गुब्बारे से उड़ान

इसके बाद लोग उड़ान भरने के लिए दूसरे तरीकों की तलाश करने लगे। साल 1783 के शुरुआत में कुछ एयरोनॉटस ने गर्म हवा और हाइड्रोजन से भरे गुब्बारे बनाए।

उड़ान भरने के लिए यह एक साहसी कदम था, लेकिन इसमें भी बहुत खामियाँ थी। क्योंकि यह गुब्बारा उसी दिशा में जा सकता था जिस दिशा में हवा चल रही हो। यह सिर्फ हवा की दिशा में उड़ने का एक साधन बन गया था। जिसकी दिशा हवा के साथ कभी बदल सकती थी।

3. Cayley के प्रयास

उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में यॉर्कशायर के एक English Baronet ने एक ऐसे यंत्र की कल्पना की जिसके अपने खुद के पंख, खुद चलने की क्षमता और एक सतह हो। यह कुछ-कुछ आज के आधुनिक विमान की मूल अवधारणा थी।

इसी सिद्धांत पर Sir George Cayley ने 1799 में एक एयरप्लेन को विकसित किया, जो कुछ-कुछ पतंग जैसा था। हालांकि यह इतना कारगर सिद्ध नहीं हुआ, लेकिन फिर भी इसने बहुत कुछ सीखा दिया। और वो हवा में उड़ने वाली वस्तु पर ज्यादा काम करने लगे।

Cayley का यह विचार सभी को पसंद आया और भविष्य में जाकर इसी सिद्धांत ने आधुनिक हवाई जहाज के आविष्कार में अपना योगदान दिया।

Cayley बार-बार इस पर मेहनत करते रहे। 1849 में Cayley ने एक ऐसे प्लेन को विकसित किया जो 80 पाउंड की एक वस्तु को उड़ाने में सक्षम था। यह दिखने में पैराशूट जैसा था। जब Cayley ने इसे हवा में उड़ाया तो यह कुछ देर उड़ने के बाद वापिस जमीन पर आकार गिर गया।

यही वो विमान था जिसमें एक 10 साल के लड़के ने उड़ान भरी। जो मानव इतिहास में इंसान द्वारा बनाई गई वस्तु से पहली उड़ान थी। Cayley के इन्हीं प्रयासों के कारण उन्हे इतिहास में “ग्लाइडर बॉय” के नाम से जाना गया।

4. भाँप से प्लेन को उड़ाना

इसके बाद 1857 में “जीन-मैरी ले ब्रिस” पहले “पावर ग्लाइडर” (भाप से चलने वाले विमान) का परीक्षण करते है। जिसकी पहली उड़ान तो सफल रही लेकिन दूसरी उड़ान में वो सतह से टकराकर चूर-चूर हो गया।

यह दिखने में बिल्कुल बाज जैसा था। इसके बाद इसी वर्ष Felix duTemple और उनके भाई Louis एक मोनोप्लेन बनाते है जो भाप के इंजन से चलता था। यह मोनोप्लेन इतना आधुनिक था कि वो खुद उड़ान भरने के बाद सफल लैंडिंग कर सकता था।

यह एक हवाई जहाज के आविष्कार का सबसे बड़ा कदम था। क्योंकि इसमें खुद उड़ने की क्षमता थी। यह अपने आप संचालित होने वाला दुनिया का पहला विमान था। लेकिन इसका आकार बहुत छोटा था।

इसके बाद दोनों भाई मिलकर इस प्लेन में काफी बदलाव करते हैं। फिर दोनों ने 1874 में 40 फीट वाले एक ऐसे Monoplane को डिज़ाइन किया, जिसमें एक व्यक्ति बैठकर उड़ान भर सकता था। और इसका इंजन 6 हॉर्स पावर का था।

हालांकि लंबे समय तक उड़ान भरने के लिए इसमें काफी कम शक्ति थी। लेकिन फिर भी यह मानव द्वारा संचालित पहला बड़ा हवाई जहाज था। जिसके पास खुद अपनी शक्ति थी। जो भाँप की ऊर्जा से उड़ान भरने में सक्षम था।

इसके बाद Sir Hiram Maxim ने एक 3.5 टन के एयरक्राफ्ट को डिज़ाइन किया। जिसके 110 फीट (34 मीटर) लंबे दो पंख थे। तथा साथ ही इसमें 360 हॉर्स पावर का एक बड़ा सा इंजन था।

इसे 1884 में रेल लाइन के ऊपर चलाया गया, लेकिन तब यह बेकाबू होकर चल रहा था। Maxim जल्द ही समझ गए की इसमें काफी खामियाँ है, इस कारण उन्होने इस पर काम करना बंद कर दिया।

1890 के दशक में Lawrence Hargrave ने एक पतंग जैसा बॉक्स विकसित किया। इस बॉक्स ने अपने पहले परीक्षण में एक व्यक्ति जितना वजन उठाया। 1867 से 1896 के बीच जर्मनी के Otto Lilienthal ने एक मोनोप्लेन विकसित की।

Otto पहले व्यक्ति थे जिन्होंने सफल ग्लाइडिंग फ्लाइट का निर्माण किया। लेकिन 9 अगस्त, 1996 में ग्लाइडर क्रैश में इनकी मौत हो गई। अभी तक सभी विमानों का अपने आप पर नियंत्रण नहीं था लेकिन ओटो द्वारा बनाए गए इस विमान का अपने आप पर बहुत अच्छा नियंत्रण था।

5. आधुनिक हवाई जहाज के आविष्कारक

धीरे-धीरे आधुनिक हवाई जहाज की रूप रेखा तैयार होती गई। शुरुआत में बिना किसी पावर के प्लेन बनाए गए। जिन्होंने काफी अच्छे परिणाम दिये। फिर बाद में भाप के इंजन की सहायता से अपने आप संचालित होने वाले विमानों का निर्माण किया गया।

Felix duTemple और अन्य कई खोजकर्ताओं ने भाप से हवाई जहाज उड़ाने की सोच को विकसित किया। तथा वो इसमें कामयाब भी हुए। लेकिन उनके आविष्कार में बहुत सारी कमियाँ थी।

लेकिन वर्तमान समय में उड़ने वाले इन हवाई जहाज के आविष्कार का श्रेय “राइट ब्रदर्स” को दिया जाता है। Wilbur Wright और Orville Wright दोनों को बचपन से ही नई-नई मशीनें बनाने का शौक था।

वो घर में रहकर ऐसी-ऐसी वस्तुएँ बनाते थे जो हवा में उड़ सके। एक बार उनके पिता ने उन्हें एक खिलौना उपहार में दिया। जिसकी बनावट आज के हेलीकॉप्टर जैसी थी।

दोनों भाई इस खिलौने से बहुत प्रभावित हुए और वो इसके साथ तब तक खेलते रहे जब तक की वो टूट नहीं गया। फिर इन्होंने एक ऐसा ही हेलीकॉप्टर बनाकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस छोटे से खिलौने ने दोनों भाइयों को उड़ने वाली वस्तु बनाने के लिए प्रेरित किया।

1889 में Wilbur और Orville ने मिलकर एक प्रिंटिंग प्रेस की शुरुआत की। फिर कुछ ही समय बाद दोनों भाइयों ने मिलकर एक साप्ताहिक समाचार पत्र की शुरुआत की। जिसका नाम The West Side News था।

इसके बाद दिसंबर 1892 में दोनों भाइयों ने मिलकर साइकल रिपेयरिंग की दुकान खोली। जिसमें वो साइकल बेचा भी करते थे। जिसका नाम Wright Cycle Company रखा। 4 सालों की कड़ी मेहनत के बाद दोनों भाइयों ने स्वयं के ब्रांड का उत्पादन शुरू किया।

जब इस कंपनी से अच्छी ख़ासी कमाई होने लगी तो दोनों अपने बचपन के सपने को पूरा करने की योजना बनाई। 1996 में जब दोनों भाइयों ने Otto Lilienthal की मौत के बारे में सुना तो उन्हें गहरा सदमा लगा।

लेकिन फिर दोनों ने मिलकर उनके कार्य को पूरा करने का दृढ़ संकल्प लिया। Wilbur Wrights ने एक बार Otto के बारे में कहा कि “वो एक महान इंसान थे, इस दुनिया पर उनके इस ऋण को कभी नहीं भुलाया जा सकता।”

इसके बाद मई 1899 में विल्बर ने एक इंस्टीट्यूसन से एयरोनोटिक्स के बारे में जानकारी लेने के लिए अनुरोध किया। जिसमें उन्होने George Cayley और अन्य व्यक्तियों के बारे में पढ़ा जिन्होंने प्लेन बनाने के लिए अनेक रिसर्च किए थे।

इसके बाद जुलाई 1999 में राइट बंधुओं ने एक ऐसे बाईप्लेन को विकसित किया जिसके पंख 6 फीट तक लंबे थे। जब Wilbur ने इसका परीक्षण किया तो वो उनके अनुसार काम कर रहा था। जो उनके लिए एक बहुत बड़ी कामयाबी थी।

लेकिन उनका यह सिलसिला अभी नहीं रुका और वो इसपर ज्यादा मेहनत करने लगे। वर्ष 1900 में Wilbur ने अमेरिका की 150 अलग-अलग जगहों का पता लगाया, जहां हवा की रफ्तार काफी अधिक हो। 28 सितंबर, 1900 को वे Kitty Hawk पहुँच गए, और सर्वप्रथम अपने विमान का परीक्षण 3 अक्टूबर को किया।

जिसमें वो काफी हद तक कामयाब भी हुए। लेकिन अभी इनके विमान का वजन काफी ज्यादा था। जिस कारण गुरुत्वाकर्षण बल प्लेन को नीचे की तरफ गिरा रहा था। इस कारण दोनों भाई Kitty Hawk से वापिस लौट आए।

लेकिन एक साल बाद 1901 में उन्होने दोबारा किट्टी हॉक जाकर अपने दूसरे ग्लाइडर का परीक्षण किया। लेकिन यह भी वजन उठाने के लिए काम नहीं कर रहा था। तब उन्हें Otto के काम में कमियाँ नजर आई, क्योंकि वो इतने दिन Otto Lilienthal के सिद्धांतों पर ही काम कर रहे थे।

फिर इन्होंने अपने अनुसार पंखों को डिज़ाइन किया। जो वक्राकार आकृति के थे। धीरे-धीरे दोनों भाइयों की मेहनत रंग लाने लग गई। अब वो इसमें और भी ज्यादा खो गए।

अब Wright Brothers ने अपने तीसरे ग्लाइडर को बनाया। जिसमें एक जबरदस्त वैज्ञानिक शौध और समझ के साथ एयरोनोटिक्स और पंखों का निर्माण किया गया था। 19 सितंबर, 1902 को फिर दोनों भाइयों ने अपने नए ग्लाइडर का परीक्षण किया।

इनके इस ग्लाइडर में काफी सुधार था और उनका यह ग्लाइडर बाकी ग्लाइडरों से बहुत शक्तिशाली और नियंत्रित था। लेकिन जब इसे मोड़ने की कोशिश करते तो वो हवा में झूलने लग जाता था। 23 सितंबर को उनका यह प्लेन क्रैश हो गया, लेकिन दोनों भाइयों ने इसे वापिस तैयार कर लिया।

फिर अपने ग्लाइडर की वो कमी दूर करने लगे, जो उसे हवा में झूला रही थी। जिसमें वो कामयाब भी हुए। धीरे-धीरे दोनों भाई दुनिया की नजर में आने लगे। उनके किस्से अखबारों में छपने लगे, लोग उनके प्रयोगों के बारे में जानने के लिए उत्सुक होने लगे। दोनों भाई रात-दिन मेहनत करते और अपने प्लेन को बार-बार उड़ाते। उसमें जो भी कमी आती फिर वो उसे दूर करते।

6. आधुनिक हवाई जहाज

कहते है ना की मेहनत और लगन जब एक साथ आ जाए तो इंसान कुछ भी बना सकता है। ठीक ऐसा ही राइट बंधुओं के साथ हुआ। 17 दिसंबर, 1903 का वो दिन इतिहास के पन्नों में छप गया।

जब सुबह के ठीक 10.35 मिनट पर एक पूरी तरह से नियंत्रित एयरक्राफ्ट को हवा में उड़ाया गया। हालांकि उसका सफर मात्र 12 सेकंड का था और वो सिर्फ 120 फीट की ऊंचाई तक ही उड़ पाया। लेकिन मानव इतिहास का यह सबसे सुनहरा पल था।

इसके कुछ ही घंटों के बाद दोनों भाइयों ने 4 और एयरक्राफ्ट का परीक्षण किया, जिसमें एक 59 सेकंड तक हवा में रहा और वो 852 फीट की ऊंचाई तक उड़ा। दोनों भाई अब खुशी से समा नहीं पा रहे थे। जल्दी से अपने पिता और बहन को संदेश भेजा कि दोनों भाइयों ने पहले पावर फ्लाइट का सफल परीक्षण कर लिया है।

इसके बाद दोनों भाईयों ने मिलकर अनेक नए विमानों का निर्माण क्या जो आधुनिक समय में हमारे सामने हैं। आज के सभी आधुनिक विमान “राइट ब्रदर्स” के बनाए गए सिद्धांतों पर ही काम करते हैं। हालांकि हम दोनों भाइयों को इस आविष्कार का श्रेय देते हैं।

लेकिन 100 साल पहले Cayley और Felix duTemple की मेहनत ने भी कहीं न कहीं इसमें अपनी भूमिका निभाई थी। Cayley पतंग की तरह प्लेन बनाने में कामयाब हुए तो वही Felix duTemple ने भांप की शक्ति से प्लेन को उड़ाने का आविष्कार किया।

परंतु राइट ब्रदर्स ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से इस मुकाम को हासिल किया। ऐसा नहीं है कि वो एक बार में ही कामयाब हो गए, उन्हें बहुत बार असफलता हाथ लगी।

परंतु उन्होने हिम्मत नहीं हारी और वो इस पर ज्यादा से ज्यादा मेहनत करने लगे। एक इंटरव्यू में Wilbur ने कहा कि जब वो Kitty Hawk में अपने पहले ग्लाइडर का परीक्षण कर रहे थे, तब उन्हें उनके अनुसार परिणाम नहीं मिला। जिस कारण वो गुस्सा हो गए और वहाँ अपने टैंट को तहस-नहस कर दिया।

रिलेटेड पोस्ट:

मोबाइल फोन का आविष्कार किसने किया था

आपकी और दोस्तों

तो दोस्तों यह था हवाई जहाज का आविष्कार किसने और कैसे किया था, हम उम्मीद करते हैं कि इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आप सभी लोगों को यह पता चल गया होगा कि एरोप्लेन को बनाने वाला व्यक्ति कौन था.

यदि आपको हमारी यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो प्लीज इस पोस्ट को एक लाइक अवश्य करें और अपने दोस्तों और घर परिवार वालों के साथ फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर करना ना भूले. धन्यवाद दोस्तों

Leave a Comment

Your email address will not be published.