GPS Full Form in Hindi | GPS का फुल फॉर्म क्या है

GPS Full Form in Hindi: दोस्तों हमारे आज के इस आर्टिकल में हम आपको ” जीपीएस के फुल फॉर्म” के बारे में जानकारी देने वाले हैं। अगर आप इंटरनेट पर यह सर्च करते रहते हैं कि, जीपीएस का फुल फॉर्म क्या होता है या फिर जीपीएस का मतलब क्या होता है, तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं, क्योंकि आज के इस आर्टिकल में आपको जीपीएस से संबंधित सभी जानकारी प्राप्त होगी।

आज के समय में टेक्नोलॉजी काफी आधुनिक हो गई है और इसीलिए हमें कई चीजों का इस्तेमाल करने में काफी सरलता प्राप्त होती है। पहले के जमाने में टेक्नोलॉजी उतनी आधुनिक नहीं थी, इसीलिए मानव को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था

परंतु धीरे-धीरे वैज्ञानिकों ने खोज करके हमें ऐसी ऐसी टेक्नोलॉजी प्रदान की, जिसका इस्तेमाल करके हमने अपने जीवन को काफी आसान बना लिया है।अगर उदाहरण के रूप में कहें तो पहले कपड़े धोने के लिए आदमी अपने हाथों का इस्तेमाल करता था परंतु वैज्ञानिकों ने इस समस्या को देखते हुए वॉशिंग मशीन का आविष्कार किया और अब कपड़े वॉशिंग मशीन में धुले जाते हैं।

दोस्तों आपने कभी ना कभी तो गूगल मैप का इस्तेमाल किया ही होगा, अगर आपने नहीं किया तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गूगल मैप का इस्तेमाल विभिन्न स्थानों की जानकारी प्राप्त करने में तथा रास्ते की जानकारी प्राप्त करने में होता है।

जैसे अगर किसी व्यक्ति को कहीं जाना है परंतु उसे उसका रास्ता नही पता तो पहले के समय में वह या तो अपनी यात्रा स्थगित कर देता था या फिर यात्रा करते समय जो भी रास्ते में मिलता था उससे रास्ता पूछता था।

परंतु अब किसी भी व्यक्ति को कहीं की भी यात्रा करनी होती है, तो वह उस यात्रा की जगह का रास्ता गूगल मैप के द्वारा सर्च करता है और गूगल मैप्स उसको सही रास्ता बताता है, ऐसे में क्या आपने यह कभी सोचा है कि गूगल मैप हमें यह सब जानकारी कैसे देता है।

अगर आप नहीं जानते तो बता दें कि दोस्तों इसके पीछे जीपीएस का हाथ होता है, जीपीएस के द्वारा ही गूगल मैप हमें विभिन्न प्रकार की जानकारी प्रदान करता है।

GPS Full Form in Hindi

GPS का फुल फॉर्म क्या है

GPS full form in hindi

■ जीपीएस का फुल फॉर्म क्या होता है

सबसे पहले तो आइए जान लेते हैं कि जीपीएस का फुल फॉर्म क्या होता है। जीपीएस का फुल फॉर्म होता है “ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम” यह हमें मौसम से लेकर विभिन्न प्रकार की जानकारी प्रदान करता है।

जीपीएस अंतरिक्ष पर आधारित उपग्रह नेविगेशन सिस्टम होता है, जो कि सभी मौसम की स्थिति में हमें स्थान और टाइम की सही इंफॉर्मेशन प्रदान करता है, फिर चाहे वह धरती की किसी भी जगह में स्थित क्यों ना हो।

ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम सेटेलाइट के ऊपर आधारित नेवीगेशन सिस्टम होता है, जो 24 सैटेलाइट के नेटवर्क के समूह द्वारा बना है और इसे धरती के ऑर्बिट में रखा जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका के डिफेंस डिपार्टमेंट के द्वारा जीपीएस का मुख्य तौर पर बनाया गया है।

अमेरिका ने जब इसका निर्माण किया था, तब यह सिर्फ मिलिट्री एप्लीकेशन के इस्तेमाल के लिए ही अवेलेबल था, परंतु साल 1980 में सरकार ने इस सिस्टम को सामान्य लोगों के लिए भी खोल दिया और फिर सामान्य लोग भी जीपीएस का इस्तेमाल करने लगे।

जीपीएस किसी भी मौसम में अपना काम करता है फिर चाहे वह ठंडी का मौसम है, बरसात का मौसम हो या फिर गर्मी हो। इसके अलावा यह 24 घंटे काम करता रहता है। जीपीएस की सबसे अच्छी बात यह है कि, इसे इस्तेमाल करने के लिए दुनिया के किसी भी व्यक्ति को कोई भी फीस या फिर कोई भी पैसे नहीं देने पड़ते हैं।यह पूरी दुनिया के लोगों के लिए बिल्कुल मुफ्त में अवेलेबल है और पूरी दुनिया के लोग इसका इस्तेमाल करने के लिए स्वतंत्र हैं।

■ जीपीएस का परिभाषा

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम तीन चीजों से मिलकर बना हुआ होता है, वह तीन चीजें हैं सेटेलाइट, ग्राउंड स्टेशन और रिसीवर। इसमें सेटेलाइट तारों की तरह काम करते हैं, वही ग्राउंड स्टेशन रडार की तरह इस्तेमाल किया जाता है, जिससे कि यह पता चलता है कि वास्तव में स्थिति क्या है।रिसीवर सेटेलाइट के द्वारा भेजे गए सिग्नल को रिसीव करता है। रिसीवर यह निश्चित करता है कि, वह असल में एक दूसरे से कितनी दूरी पर है।

ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम का इस्तेमाल करके व्यक्ति अपनी खुद की लोकेशन की जानकारी कभी भी और कहीं भी प्राप्त कर सकता है, हालांकि इसे चलाने के लिए व्यक्ति के फोन में इंटरनेट का होना आवश्यक है और उसके पास पर्याप्त टावर भी होना चाहिए।

■ जीपीएस की हिस्ट्री

सबसे पहले जीपीएस का इस्तेमाल अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस के द्वारा किया गया था जिसे नेवस्टार भी कहा जाता था।

जीपीएस का निर्माण अमेरिका के द्वारा किया गया था और इसका निर्माण मूल रूप से अमेरिका के सैनिकों और सैनिकों के वाहनों की सहायता के लिए डिजाइन किया गया था परंतु वर्तमान के समय में जीपीएस का इस्तेमाल कोई भी व्यक्ति आसानी से कर सकता है, सभी व्यक्ति इसका उपयोग करने के लिए स्वतंत्र हैं।

साल 1960 के दशक में अमेरिकी नौसेना के जहाजों को और अधिक सटीक रूप से नियंत्रित करने में हेल्प करने के लिए विकसित किया गया था।

जीपीएस के टेक्नोलॉजी का सबसे ज्यादा इस्तेमाल नेवीगेशन करने के लिए या फिर अगर कोई व्यक्ति कहीं की यात्रा करने के बारे में सोच रहा है, तो उस यात्रा को करने के लिए उसे किस रास्ते से जाना है, इसका पता लगाने के लिए करता है

और वर्तमान के समय में नेविगेशन की टेक्नोलॉजी इतनी ज्यादा एडवांस हो गई है कि आप इसका इस्तेमाल अपने मोबाइल फोन, हवाई जहाज में, रेलवे में,बस में और यहां तक कि अपनी गाड़ियों में भी कर सकते हैं और जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया कि नेवीगेशन का इस्तेमाल सबसे ज्यादा रास्ता ढूंढने में होता है।

इसीलिए आप इसका इस्तेमाल रास्ता ढूंढने के लिए भी कर सकते हैं, इसके द्वारा आप किसी भी रास्ते को बड़ी आसानी से ढूंढ सकते हैं और अपनी मंजिल तक पहुंच सकते हैं।

■ जीपीएस ट्रैकिंग क्या है

जीपीएस सेटेलाइट से जुड़कर अपना काम करता है और इसके लिए यूनाइटेड स्टेट अमेरिका ने 50 से अधिक जीपीएस सेटेलाइट पृथ्वी की कक्षा से बाहर छोड़े हुए हैं और वह सभी सैटेलाइट हर समय पृथ्वी पर लगातार सिग्नल भेजते रहते हैं

और उन सेटेलाइट के द्वारा भेजे गए सिग्नल को रिसीव करने के लिए एक रिसीवर की आवश्यकता होती है। अगर आपका स्मार्टफोन वह सिग्नल रिसीव करने लगता है तो आपको अपनी लोकेशन अच्छे से पता चल जाती है और इसके लिए चार सेटेलाइट आपकी लोकेशन को चेक करते हैं

और आपको आपकी सही लोकेशन बताते हैं। इसके अलावा लोकेशन बताने के साथ-साथ यह सेटेलाइट आपकी स्पीड, आपका डिस्टेंस भी बताने का काम करते हैं।

■ GPS काम कैसे करता है

हमने आपको पहले ही बताया कि जीपीएस मोबाइल रिसीवर की तरह काम करता है। इसके लिए जब हम अपने स्मार्टफोन को जीपीएस से कनेक्ट करते हैं, तब हमारा स्मार्टफोन सबसे पहले किसी नजदीकी सेटेलाइट से कनेक्ट होता है

और यह कनेक्ट होने के लिए 4 सेटेलाइट का सहारा लेता है,मतलब कि यह चार सेटेलाइट के साथ कनेक्ट होता है और वह चार सेटेलाइट आपके स्मार्टफोन से अलग-अलग प्रकार की जानकारी लेते हैं और फिर आपको आपकी सही लोकेशन, स्पीड और आपको जहां जाना है, वहां का सही डिस्टेंस बताते हैं।

■ जीपीएस लॉकिंग क्या है

जब हमें किसी चीज के बारे में बिल्कुल सही जानकारी प्राप्त करनी होती है, तब हम जीपीएस का इस्तेमाल करते हैं और जीपीएस ट्रैकर हमें सही जानकारी प्रदान करता है। जैसे कि मान लीजिए अगर आप कोई गाड़ी चला रहे हैं, तो उसकी स्पीड कभी कम या कभी ज्यादा होती ही है

और इसके अलावा हमें उसकी सही लोकेशन का पता लगाने में भी समय लगता है और इसीलिए जीपीएस लॉकिंग इसी बात पर निर्भर करती है कि वह किस अवस्था में जीपीएस रिसीवर को शुरू किया है।जीपीएस लोकिंग तीन प्रकार की होती है जिसके बारे में हमने आपको नीचे जानकारी दी है।

■ हाॅट स्टार्ट

अगर GPS को आपकी अपनी अंतिम स्तिथि और सैटेलाइट के साथ ही UTC टाइम का पता है तो उसी सैटेलाइट की मदद से वह उस जानकारी के हिसाब से आप की नई स्थिति का पता लगाता है।

इसकी काम करने की प्रणाली आपकी नई स्थिति के ऊपर आधारित होती है। अगर जीपीएस रिसीवर पहले वाली स्थिति में दोबारा आ जाता है या फिर पहले वाली लोकेशन के आसपास ही होता है, तो आपको ट्रैकिंग करने में बहुत ही हेल्प मिलती है और आप बहुत जल्दी से ट्रैकिंग कर पाते हैं।

■ वार्म स्टार्ट

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जीपीएस रिसीवर पहले वाली इंफॉर्मेशन के अलावा पुरानी इंफॉर्मेशन को भी याद कर के रखा है।इस प्रकार रिसीवर अपना सारा डाटा संग्रहित करके रखता है और नई पोजीशन की जानकारी करने के लिए उसे सेटेलाइट की आवश्यकता होती है, जिसका इस्तेमाल करके वह नए सिग्नल या फिर पोजीशन का पता लगाता है, परंतु सैटेलाइट की जानकारी इसको बहुत ही जल्दी मिलती है। यह हॉट स्टार्ट से तो धीमा है लेकिन सबसे धीमा नहीं है।

■ कोल्ड स्टार्ट

इस स्थिति में पहले से ज्यादा समय लगता है, क्योंकि इसे स्थिति के बारे में कोई भी जानकारी नहीं होती है।

■ GPS से क्या-क्या कर सकते हैं?

रास्ता ढूंढने और दिखाने में

मोबाइल फोन को ढूंढने में

कार की सेफ्टी

बाइक की सेफ्टी

बच्चों की निगरानी

अन्य:- जीपीएस एयरक्राफ्ट ट्रैकिंग, disaster relief, इमरजेंसी relief, मोबाइल फोन, tracking and other.

■ GPS का उपयोग कहाँ-कहाँ होता है

अभी तक आप यह जान ही गए होंगे कि जीपीएस क्या होता है तथा जीपीएस का फुल फॉर्म क्या होता है, साथ ही जीपीएस कैसे काम करता है, चलिए अब आपको यह बताते हैं कि जीपीएस का इस्तेमाल कहां कहां किया जाता है।

– Transport

वर्तमान के समय में ट्रांसपोर्ट सेक्टर में जीपीएस का इस्तेमाल बहुत अधिक होने लगा है। जहां पहले बिना जीपीएस के कई लोग रास्ता भटक जाते थे, वहीं अब जीपीएस का इस्तेमाल करके लोग अपनी मंजिल तक आसानी से पहुंच जा रहे हैं।

अब तो ट्रक और बस में भी जीपीएस का इस्तेमाल होने लगा है और इसके द्वारा ट्रक और बस का मालिक ट्रक और बस कहां पहुंची है, इसके बारे में जानकारी रखता है। इससे उन्हें काफी फायदा भी होता है

इसके अलावा प्राइवेट टैक्सी जैसे कि ओला और उबर में भी जीपीएस का इस्तेमाल होने लगा है, जिससे टैक्सी ड्राइवर को रास्ते के बारे में कोई भी चिंता नहीं होती। जीपीएस का सबसे ज्यादा फायदा लड़कियों को भी मिल रहा है,

क्योंकि लड़कियां अब जीपीएस का इस्तेमाल करके अपने परिवार को अपनी लोकेशन भेज सकती हैं। ऐसे में अगर उनके साथ कोई अनहोनी हो जाती है, तो उसकी खबर उनके परिवार वालों को होती है और वह उसकी लोकेशन के अनुसार जल्दी ही उस जगह पर पहुंच सकते हैं।

इसके अलावा प्राइवेट टैक्सीया जैसे Ola, Uber में भी जीपीएस लगा होता है जिससे अब रास्ते में किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं आती है।

– Military

वर्तमान के समय में दुनिया की लगभग सभी आर्मी जीपीएस का इस्तेमाल कर रही हैं। यह आर्मी जीपीएस का इस्तेमाल करके अपने दुश्मन की लोकेशन का पता लगाते हैं और उनके बकरो को खत्म करते हैं। जीपीएस का इस्तेमाल करने से सभी को बहुत फायदा मिल रहा है।

– Disaster Relief

जब भी कभी किसी जगह पर प्राकृतिक आपदा आती है, तो ऐसे में डिजास्टर मैनेजमेंट द्वारा जीपीएस का इस्तेमाल काफी किया जाता है।इसके जरिए वे मुसीबत में फंसे हुए लोगों को ढूंढते हैं और उन्हें Rescue करते हैं।

– Shipping

जब भी कभी आप ऑनलाइन कोई भी सामान बुक करते हैं तब वह आपके घर पर आसानी से पहुंच जाता है और
जो व्यक्ति आपके घर पर सामान लाता है वह कोरियर बॉय कहलाता है और कुरियर बोय जीपीएस का इस्तेमाल करके ही आपको बड़ी ही आसानी से और तेज डिलीवरी देता है।

■ किन देशों के पास खुद का जीपीएस सिस्टम है

रूस, अमेरिका, यूरोपियन यूनियन, भारत, चाइना के पास अपना खुद का जीपीएस नेविगेशन सिस्टम है। भारत के जीपीएस नेवीगेशन सिस्टम का नाम Navik है।

■ जीपीएस के फायदे और उपयोग

जीपीएस का इस्तेमाल करके हम अपनी वर्तमान लोकेशन का पता बहुत ही आसानी से लगा सकते हैं, क्योंकि जीपीएस हमें लोकेशन पता करने की सुविधा देता है। इसके अलावा हम अपनी लोकेशन के साथ-साथ दूसरे की लोकेशन का भी पता लगा सकते हैं।

इसके अलावा जीपीएस के द्वारा हम अपनी लोकेशन को किसी अन्य व्यक्ति को भेज भी सकते हैं, ताकि वह व्यक्ति हम तक आसानी से पहुंच जाए।जीपीएस का इस्तेमाल करके हम किसी भी सड़क, गली या फिर किसी भी पिनकोड एड्रेस के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।इसके अलावा जीपीएस के इस्तेमाल से हम उस जगह की फोटो भी देख सकते हैं जहां पर हमें जाना है।

जीपीएस का इस्तेमाल करके हमें जिस जगह से जिस जगह पर जाना है, उसकी दूरी भी पता कर सकते हैं और उस जगह तक पहुंचने में हमें कितना समय लगेगा, यह जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।इसके अलावा जीपीएस का इस्तेमाल करके हम गाड़ी चलाते समय हमारी गाड़ी की स्पीड कितनी है, यह भी पता कर सकते हैं क्योंकि जीपीएस में स्पीड मीटर भी लगा हुआ होता है, जो हमें हमारी स्पीड के बारे में जानकारी देता है।

जीपीएस का उपयोग मैप डिजाइनिंग के लिए भी किया जाता है।इसके अलावा जीपीएस का इस्तेमाल मोबाइल फोन,गाड़ी, रेलवे और एरोप्लेन में भी किया जाता है, साथ ही जीपीएस का इस्तेमाल दुनिया के अधिकतर देशों की आर्मी भी करती है, वह जीपीएस का इस्तेमाल मिलिट्री में इस्तेमाल होने वाले मिसाइल,बम और एयरक्राफ्ट को जांचने के लिए करती है।

आपकी और दोस्तों

तो दोस्तों ये था GPS का फुल फॉर्म क्या ही, हम उम्मीद करते है की इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपको जीपीएस के फुल फॉर्म के बारे में पूरी जानकारी मिल गयी होगी|

अगर आपको हमारी ये आर्टिकल पसंद आई है तो प्लीज पोस्ट को १ लाइक जौर करे और अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे. धन्येवाद दोस्तों|

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