घड़ी का आविष्कार किसने किया था | Who Invented Watch in Hindi

समय ब्रह्मांड का एक ऐसा घटक है जिसका इंसानों के जीवन पर बहुत ज्यादा प्रभाव है। आज बिना समय की गणना के कोई भी काम करना बहुत मुश्किल है। हमारा उठना, खाना-पीना, सोना, काम करना आदि सभी एक निश्चित समय पर होता है।

पुराने समय में जब समय की गणना करने का कोई साधन नहीं था, तो हमारे पूर्वज सूरज से समय का अंदाजा लगाते थे। परंतु बादलों वाले दिन और रात को समय का पता लगाना मुश्किल हो जाता था।

इसलिए समय की गणना करने के लिए हमें एक ऐसे यंत्र की आवश्यकता पड़ी, जो हमें सही-सही समय बताएँ। सामान्य भाषा में इस यंत्र को ही घड़ी कहते हैं। आज हर इंसान के पास किसी न किसी रूप में घड़ी जरूर है, चाहे वो इलेक्ट्रोनिक घड़ी हो या कोई दूसरी।

आज हर घर में आपको दीवार पर लटकती हुई घड़ी अवश्य मिलेगी। घड़ी हमारी दिनचर्या को एक क्रम में बांधे रखती है। हम घड़ी में समय देखकर ही अपना काम करते हैं। खासकर आज के जमाने में तो लोग हर 10 मिनट में घड़ी जरूर देखते हैं।

तो अब हमारे मन में सबसे बड़ा सवाल यह उत्पन्न हुआ है कि घड़ी का आविष्कार किसने किया था? इस सवाल का जवाब जानने से पहले हमें घड़ी को अच्छे से समझना होगा।

घड़ी क्या है?

ghadi ka avishkar kisne kiya

घड़ी एक ऐसा यंत्र है जो समय की गणना करता है। आज के समय में मौजूद घड़ियाँ धातुओं से बनी होती है। परंतु पुराने समय में यह कई प्रकार की होती थी। जिनमें सूर्य घड़ी, जल घड़ी प्रमुख थी। वक्त के साथ इनमें बहुत सारे परिवर्तन आए हैं।

आज के समय में चलने वाली घड़ियाँ पूरी तरह से इलेक्ट्रोनिक होती है। इस कारण इनमें समय की गणना उचित तरीके से होती है। हाथ पर बांधने वाली घड़ी में तीन सूइयाँ लगी होती है। जो घड़ी के अंदर मौजूद गोल गरारी से जुड़ी होती है।

घड़ी में एक सूई सेकंड, दूसरी मिनट और तीसरी घंटा के बारे में बताती है। सेकंड वाली सूई अपना एक पूरा चक्कर 1 मिनट में और मिनट वाली सूई एक घंटे में लगाती है। इसके अलावा घंटे वाली सूई 24 घंटों में एक पूरा चक्कर लगाती है।

समय निर्धारक उपकरणों का इतिहास

यांत्रिक या अन्य साधनों के माध्यम से समय का पता लगाना लगभग 5500 वर्ष पहले प्राचीन मिस्र, सुमेर और प्राचीन मेसोपोटामिया में विकसित हुआ था। इन स्थानों को आज की आधुनिक सभ्यता का जन्मस्थान माना जाता है।

उस समय यहाँ के निवासियों में विभिन्न प्रकार की सूर्य घड़ी, रेत घड़ी और पानी घड़ी बनाने की कला थी। उपकरण बनाने की इनके पास हज़ार वर्षों की परंपरा मौजूद थी, जो इनके उपकरणों को अत्यधिक प्रभावशाली बनाती थी।

इनके विभिन्न प्रकार के उपकरण बनाने का ज्ञान जल्द ही भूमध्यसागरीय क्षेत्र में फैल गया। इस ज्ञान को ग्रीक, रोमन और फ़ारसी साम्राज्यों ने बहुत जल्दी से अपने दिमाग में उतार लिया। जिससे इनकी प्रगति को काफी फायदा हुआ और यह धनवानों की श्रेणी में आने लगे।

15वीं और 16वीं शताब्दी से पहले यानी आधुनिक उपकरणों के आविष्कार से पहले, समय को मोमबत्ती घड़ियों, धूप घड़ियों, तेल-दीपक घड़ियों, साधारण गियर घड़ियों और खगोलीय घड़ियों से मापा जाता था।

धूप घड़ी (सूर्य घड़ी) सबसे पहले प्राचीन मिस्र में लगभग 4000 ईसा पूर्व पहले अस्तित्व में आई थी। आज तक ज्ञात सबसे पुरानी सौर घड़ी 3500 ईसा पूर्व की है।

सूर्य इस सभ्यता के लोगों का मुख्य देवता था, इस कारण छाया की माप पर बहुत ध्यान दिया जाता था। ताकि सूरज भगवान उनसे नाराज न हो जाएँ।

समय को आसानी से मापने के लिए, मिस्रवासियों ने दिन के समय को 10 बराबर भागों में विभाजित किया था। जिसमें 4 अतिरिक्त भाग सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के लिए निश्चित थे। जमीन पर बनाए गए निशानों की श्रृंखला ने मिस्रवासियों को आसानी से समय को नापने में सक्षम बनाया।

इसके अलावा वे यहां तक ​​भी जानने में सक्षम हो गए थे कि वे वर्ष के किस मौसम में हैं। परंतु आसमान में बादल होने या रात के समय में धूपघड़ी बिल्कुल अप्रभावी थी। इस समस्या को दूर करने के लिए समय मापने के नए तरीकों का आविष्कार किया गया था।

इसके बाद प्राचीन यूनानियों और रोमन वासियों ने पानी की घड़ियों को विकसित करने पर अधिक ध्यान केंद्रित किया। इन्होने 325 ईसा पूर्व तक अपनी शुरुआती कला की तुलना में बहुत अधिक सटीकता हासिल की। अब यह बहुत अच्छे से नए उपकरण बनाने में सक्षम हो गए थे।

यह लोग पानी की घड़ी में पानी के प्रवाह से समय की गणना करने लगे। इस घड़ी ने इनको आसानी से समय मापने और इसे अलार्म घड़ी के रूप में उपयोग करने में सक्षम बनाया (पहली पानी आधारित अलार्म घड़ी Plato द्वारा बनाई गई थी)।

परंतु इस क्षेत्र में कई विकासों के बावजूद ग्रीक और रोमन लोगों के पूरे जीवन में धूपघड़ी लोकप्रिय बनी रही। प्राचीन काल की सबसे बड़ी धूपघड़ी का निर्माण 10 ईसा पूर्व में सम्राट ऑगस्टस द्वारा किया गया था।

इसमें मोंटेसिटोरियो के 30 मीटर ऊंचे लाल ओबिलिस्क ग्रेनाइट का इस्तेमाल किया गया था। जिसे प्राचीन मिस्र में रोम से आयात किया गया था। क्योंकि उस समय में यह पत्थर वहीं मिलता था।

रोमन साम्राज्य के पतन के बाद, फारस और चीन में पानी की घड़ियों में सुधार करना जारी रखा। उस समय की सबसे प्रसिद्ध और सबसे जटिल पानी की घड़ी 1206 में मुस्लिम इंजीनियर अल-जाजरी द्वारा बनाई गई थी।

6 वीं शताब्दी तक चीन ने मोमबत्ती और धूप घड़ियों का उपयोग करना शुरू कर दिया था, जो धीरे-धीरे पश्चिम में फैलने लगीं। 13वीं शताब्दी में यह तकनीक मध्य पूर्व और यूरोप तक पहुँच गईं।

परंतु उस समय चीन ने खगोलीय घड़ियां बनाने की शुरुआत की। एक चीनी व्यक्ति सु सोंग ने पहली पानी से चलने वाली खगोलीय घड़ी बनाई।

समय के साथ यूरोप में जहाज से व्यापार का विस्तार शुरू हुआ। जिस कारण खुले समुद्र में नौकायन की बढ़ती संख्या ने विश्वसनीय और सटीक समय मापने वाले उपकरणों की आवश्यकता को जन्म दिया। फारस में डिजाइन की गई धूपघड़ी प्रत्येक पानी के जहाज पर उपयोग होने लगी।

15वीं शताब्दी और उसके बाद से भरोसेमंद और सटीक धूपघड़ी न केवल समुद्र में, बल्कि उद्योग, चर्च, खाना पकाने और अन्य कामों में बहुत लोकप्रिय घड़ी बन गई। जयपुर के जंतर मंतर में स्थित धूपघड़ी इसी का एक उदाहरण है।

16वीं शताब्दी तक यांत्रिक उपकरण अब औद्योगिक प्रयोगशालाओं में विकसित होने लगे। जिससे पेंडुलम और स्प्रिंग्स पर आधारित समय मापने वाले उपकरण अस्तित्व में आए। इन उपकरणों ने भरोसेमंद और सटीक समय मापने का एक नया जरिया बनाया।

जैसे-जैसे सदियां बीतती गईं, इनके डिजाइन और अधिक उन्नत होते गए। इनकी संरचना और आकार छोटा होता गया। 19वीं शताब्दी तक यांत्रिक पॉकेट, टेबल और दीवार घड़ियां पूरी दुनिया में आम हो गईं। आज डिजिटल उपकरण हमारी दुनिया के हर कोने में पाए जाते हैं।

आधुनिक घड़ी का इतिहास

समय निर्धारक उपकरणों का इतिहास लोकप्रिय डिजाइनों के कई उदाहरणों से भरा पड़ा है। जिन्होंने लोगों को समय मापने में सक्षम बनाया। लेकिन घड़ियाँ हमारी सभ्यता को बहुत बड़े पैमाने पर बदलने में कामयाब रहीं है।

शुरुआत में बनाई गई सभी घड़ियाँ यांत्रिक, टेबल और दीवार घड़ियाँ थीं। इन घड़ियों को बनाने में बहुत समय लगता था, इसके अलावा यह बहुत महंगी भी थी। साथ ही यह सही समय बताने में अप्रभावी थी। इस कारण इनमें बहुत सारे बदलाव किए गए।

छोटी घड़ियों के अस्तित्व में आने के बाद लोगों ने इन्हें बहुत तेजी से खरीदना शुरू किया। यह आकार में छोटी होने के कारण कहीं भी ले जाई जा सकती थी।

इनकी बढ़ती ने इंजीनियरों, वैज्ञानिकों, निर्माताओं और फैशन डिजाइनरों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। जिस कारण इनमें निरंतर विकास और परिवर्तन होता रहा।

इस तरह की लोकप्रियता ने आविष्कारकों को प्रेरित किया। उनके दिमाग में इसको छोटा ओर सस्ता बनाने के तरीके उभरने लगे। क्योंकि छोटे, विश्वसनीय, उत्पादन में आसान और सस्ते उपकरणों का हमेशा से ही लोगों में बोलबाला रहा है।

पहली पोर्टबल घड़ी को सबसे पहले यूरोप में बनाया गया था। 16वीं शताब्दी के दौरान इंजीनियरों और निर्माताओं ने छोटी घड़ीयों और उपकरणों को बनाने की क्षमता हासिल की।

इनका उद्देश्य था कि लोग इसे अपने साथ कहीं भी ले जा सकें। लेकिन शुरुआती मॉडल वजन में बहुत भारी थे, इस कारण उनको जेब या कलाई में बांधना मुश्किल था।

इसलिए शुरुआत में बनाए गई पोर्टेबल घड़ियों को गर्दन पर पहना जाता था। इसके अलावा इनमें समय गणना करने की सटीकता नहीं थी। साथ ही इन घड़ियों के कवच भी इतने मजबूत नहीं थे। जिस कारण यह आसानी से टूट जाती थी।

इस कारण इन गर्दन या लटकने वाली घड़ियों में सुधार की आवश्यकता पड़ी। इसके लिए कई आविष्कारकों ने ड्राइंग बोर्ड पर इनको सेट कर इन्हें बेहतर बनाने का तरीका खोजा। इस पहल ने छोटी घड़ियों को जन्म दिया।

इन घड़ियों में कांच की सुरक्षा, हल्के फ्रेम, छोटे गियर और महत्वपूर्ण पेंच का इस्तेमाल किया गया था। बाजार में इन छोटी घड़ियों के आने के बाद लटकन वाली घड़ियाँ जल्द ही पुरानी हो गईं और इन घड़ियों का फैशन शुरू हुआ।

यह समय 1675 का था, जब इंग्लैंड के एन. चार्ल्स द्वितीय ने वास्कट-छोटी पॉकेट घड़ी पेश कीं। यह घड़ी छोटी श्रृंखला के साथ सूट से जुड़ी हुई थीं।

यह फैशन जल्द ही पूरे यूरोप और उत्तरी अमेरिका में फैल गया। जहां जेब घड़ियों का उपयोग पुरुषों की महंगी लक्जरी वस्तुओं और लटकन घड़ियों का उपयोग महिलाओं की वस्तुओं के रूप में किया जाता था।

पॉकेट घड़ियों की पहुंच 18 वीं शताब्दी के मध्य तक बहुत बड़ी आबादी में पहुँच गई थी। जब लोकप्रिय लीवर एस्केपमेंट ने घड़ी निर्माताओं को सस्ती और बहुत सटीक घड़ियों का उत्पादन करने में सक्षम बनाया। लीवर एस्केपमेंट घड़ी में लगी गोल-गोल गरारियाँ होती है।

19वीं शताब्दी में रेल नेटवर्क के उदय ने समय के वैश्विक मानकीकरण और घड़ियों के विस्तार की आवश्यकता को जन्म दिया। विशेष रूप से कुछ ट्रेन दुर्घटनाओं के बाद जिन्हें टाला जा सकता था, यदि ट्रेन कर्मियों को सटीक समय का पता होता।

संयुक्त राज्य में ट्रेन के समय को मानकीकृत करने की पहल आखिरकार 1893 में हुई, जो दुनिया भर में सटीक घड़ियों के बड़े विस्तार के लिए जिम्मेदार थी।

लेकिन प्रथम विश्व युद्ध के दौरान फैशन में फिर से बदलाव आया जब पॉकेट घड़ियों को छोटी, अत्यंत पोर्टेबल और उपयोग में आसान कलाई घड़ियों से प्रतिस्पर्धा मिली।

स्वचालित वाइंडिंग की उन्नत तकनीकों और छोटे डिज़ाइनों के साथ, कलाई घड़ियाँ बहुत तेज़ी से दुनिया में सबसे लोकप्रिय प्रकार की घड़ियाँ बन गईं। दशकों के आविष्कारों ने हमें कई डिज़ाइनों की इलेक्ट्रॉनिक घड़ियों को बनाने में सक्षम बनाया।

आधुनिक समय में भी कलाई घड़ियाँ बहुत लोकप्रिय हैं। पेंडेंट घड़ियाँ (लटकने वाली) बहुत दुर्लभ हैं और पॉकेट घड़ियाँ केवल थोड़े समय के दौरान ही फैशन में वापिस लौटी थी। जब 1970 और 1980 दशक के अंत में थ्री-पीस सूट लोकप्रिय था।

घड़ी का आविष्कार

सदियों के विकासक्रम के बाद आधुनिक मानव सभ्यता ने अंततः यांत्रिक और औद्योगिक ज्ञान की मदद से सटीक घड़ी बनाने में महारत हासिल की। पुराने लोग समय की गणना करने के लिए आकाशीय पिंडों की गति और पानी के प्रवाह का उपयोग करते थे।

हालांकि इनके द्वारा बनाई गई तकनीकों को भले ही आज भूला दिया गया हो, लेकिन फिर भी इनकी प्रेरणा से ही आधुनिक घड़ियों का आविष्कार संभव हो पाया था। जैसे सू सुंग द्वारा बनाई गई 1092 में उत्कृष्ट जल घड़ी समय के साथ भूला दी गई।

भले ही इतिहास के पन्ने अपने पहले कई घड़ी निर्माताओं और आविष्कारकों के बारे में भूल गए हैं। लेकिन आधुनिक वैज्ञानिक समुदाय यह स्वीकार करता है कि जर्मनी के नूर्नबर्ग के निवासी पीटर हेनलेन आधुनिक घड़ी के पिता और पूरे घड़ी उद्योग के प्रवर्तक हैं। इस प्रकार पीटर हेनलेन ने घड़ी का आविष्कार किया था।

पीटर हेनलेन का जन्म 1485 में हुआ था और उनके प्रारंभिक जीवन के बारे में बहुत कम जानकारी है। इनके बारे में सबसे अधिक संभावना है कि ये एक मरम्मत करने और ताला बनाने वाले के रूप में प्रसिद्ध थे। इतिहास की किताबों में इनके बारे में जानकारी 7 सितंबर, 1504 को शुरू होती है, जब वह एक विवाद में उलझ गए थे।

इस विवाद में उनके ताला बनाने वाले दोस्त और साथी जॉर्ज ग्लेसर मारे गए थे। पीटर तुरंत स्थानीय फ्रांसिस्कन मठ गए जहां उन्हें सुरक्षा मिली। चार साल बाद वह नूर्नबर्ग लौट आए, यहां आकार उन्होने अपना वही काम शुरू किया।

जिसके थोड़े समय बाद वे सुप्रसिद्ध ताला बनाने वालों में से एक बन गए। इनको विशेष रूप से छोटी Spring-Powered पीतल की घड़ी बनाने की उनकी क्षमता के लिए प्रशंसा मिली, जो उस समय बहुत दुर्लभ और महंगी थीं।

इस तरह की लोकप्रियता के बाद स्थानीय और दूर के डिज़ाइनरों ने इनसे संपर्क किया। वे चाहते थे कि पीटर उनके लिए अधिक सुंदर और छोटे घड़ी डिजाइन करें। पुराने सबूतों से पता चलता है कि पीटर हेनलेन ने पहली घड़ी 1510 में बनाई गई थी।

1541 तक आते-आते वह अपने शिल्प और कला के लिए अच्छी तरह से पहचाने जाने लगे। पीटर न केवल छोटी घड़ियाँ बल्कि लिचटेनाऊ महल के लिए बड़ी टॉवर घड़ी बनाने में भी सक्षम हो गए थे। उन्हें अब बड़ी-बड़ी इमारतों में बड़ी-बड़ी घड़ी बनाने का काम मिलने लगा।

हालांकि उनके द्वारा बनाए गए डिजाइन विशेष रूप से सटीक नहीं थे। परंतु फिर भी उनके द्वारा जो घड़ियां बनाई गई थीं, वो जल्द ही यूरोप के वैज्ञानिक हलकों और यूरोपीय आबादी में लोकप्रिय बन गई थी।

आज पीटर हेनलेन को आधुनिक घड़ियों के पिता के रूप में जाना जाता है, जिन्होने छोटी घड़ी के डिजाइन बनाए थे। यह जानते हुए कि उनका आविष्कार हमेशा के लिए जीवित रहेगा, 1547 में इनकी मृत्यु हो गई थी।

Final Words:

तो दोस्तों ये था घड़ी का आविष्कार किसने किया था, हमने इस पोस्ट में आपको घड़ी के बारे में पूरी जानकारी देने की पूर्ण कोशिश करी है और हम उम्मीद करते है की आपको ये जानकारी जरुर अच्छी लगी होगी.

दोस्तों अगर आपको ये पोस्ट अच्छी लगी तो प्लीज इसको १ लाइक जरुर करे और अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगो को घड़ी के आविष्कार के बारे में सही जानकारी मिल पाए धन्येवाद.

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