GDP Full Form in Hindi | GDP का फुल फॉर्म क्या है

दोस्तों हमारे आज के इस आर्टिकल में हम आपको ” जीडीपी के फुल फॉर्म” के बारे में जानकारी देने वाले हैं। अगर आप इंटरनेट पर यह सर्च करते रहते हैं कि, जीडीपी का फुल फॉर्म क्या होता है या फिर जीडीपी का मतलब क्या होता है, तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं, क्योंकि आज के इस आर्टिकल में आपको जीडीपी से संबंधित सभी जानकारी प्राप्त होगी।

हमारा भारत देश एक बड़ी जनसंख्या वाला देश है। वर्तमान में हमारे भारत देश की जनसंख्या 130 करोड़ के पार पहुंच गई है और इतनी बड़ी जनसंख्या का पालन पोषण करने के लिए हमारे भारत देश में विभिन्न प्रकार की सुविधाएं सरकार चलाती है, जिससे हमारे भारत देश की जनता को बहुत से लाभ प्राप्त होते हैं।

हमारे भारत देश की बड़ी आबादी होने के कारण काफी समस्याएं भी होती है जैसे कि अपराध, लूट, चोरी इत्यादि।हालांकि सभी विभाग मे समस्याओं के प्रकार भी अलग-अलग होते हैं जिनके लिए सरकार ने अलग-अलग घोषणा की है।

दोस्तों हमारे भारत देश में हर सरकारी विभाग में लाखों लोग काम कर रहे हैं। ऐसे में क्या आपने कभी सोचा है कि, उन लाखों लोगों को जो पगार दी जाती है, वह आखिर आती कहां से हैं और इसके अलावा पगार देने के साथ-साथ सरकार हमारे देश के विकास के लिए जो पैसे खर्च करती है वह कहां से आते हैं।

क्या सरकार के पास कोई खजाना है, जहां से वह पैसे निकालती रहती है या फिर कोई ऐसा सिस्टम है, जिससे सरकार के पास आमदनी होती रहती है और वह हमारे देश के विकास के लिए पैसे खर्च करती रहती है।

आपने यह भी गौर किया होगा कि जब हमारे देश में कोई प्राकृतिक आपदा आती है, तो सरकार उस आपदा से निपटने के लिए उस अरबो रूपए उस पर पर खर्च कर देती है।

जैसे 2 साल पहले ही आपने देखा था कि केरल में भीषण बाढ़ आई थी, जिसमें लाखों लोग प्रभावित हुए थे और उस समय भारत सरकार ने केरल में बाढ़ से राहत दिलाने के लिए 6 अरब से भी अधिक रूपए खर्च किए थे। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर सरकार के पास इतने पैसे आते कहाँ से हैं,

जैसे किसी भी वस्तु के किसी भी प्रकार के स्तर को नापने के लिए विभिन्न प्रकार की मशीन या फिर माप होते हैं, वैसे ही किसी भी देश की विकास की रफ्तार को नापने के लिए जीडीपी का इस्तेमाल किया जाता है।अगर आपने कहीं जीडीपी का नाम सुना होगा, तो आपने यह अवश्य सुना होगा कि फलाना देश की जीडीपी कितनी पर्सेंट है और फलाना देश की जीडीपी कितनी पर्सेंट है।

ऐसे में मन में यह क्वेश्चन आना लाजमी है, कि आखिर किसी देश की जीडीपी कितनी होनी चाहिए और जीडीपी कम या ज्यादा होने से उस देश को क्या फर्क पड़ता है। जिस देश की जीडीपी ज्यादा होती है, उस देश की अर्थव्यवस्था अच्छी मानी जाती है और जिस देश की जीडीपी कम होती है, उस देश को अपनी अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए प्रयास करने होते हैं।

अगर सामान्य भाषा में कहें तो जिस देश की जीडीपी कम होती है, उस देश की विकास की रफ्तार भी कम होती है और जिस देश की जीडीपी ज्यादा होती है, उस देश की विकास की रफ्तार भी ज्यादा होती है।

किसी भी देश के लिए जीडीपी में गिरावट सही नहीं माना जाता है और इसीलिए हर देश या तो अपनी जीडीपी को बैलेंस बना कर चलते हैं या फिर अधिक से अधिक जीडीपी को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

जिस देश की जीडीपी कम होती है, उस देश में जीडीपी कम होने का सारा दोष उस देश की वर्तमान सरकार को जाता है जिसके कारण सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है।

दुनिया के हर देश अपनी जीडीपी को लगातार बढ़ाने का प्रयास करते हैं, कोई भी देश नहीं चाहता कि उसके देश की जीडीपी कम हो, आइए जानते हैं जीडीपी के बारे में

GDP Full Form in Hindi

GDP का फुल फॉर्म क्या है

GDP Full Form In Hindi

■ जीडीपी का फुल फॉर्म क्या होता है

सबसे पहले तो आइए जान लेते हैं कि जीडीपी का फुल फॉर्म क्या होता है। जीडीपी का फुल फॉर्म होता है “ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्शन”। इसका प्रयोग देश के आर्थिक विकास की गणना के लिए किया जाता है।

■ जीडीपी का हिंदी में क्या मतलब होता है

जीडीपी को अंग्रेजी में ग्रॉस डॉमेस्टिक प्रोडक्शन कहते हैं और इसे हिंदी में सकल घरेलू उत्पाद कहा जाता है।

■ ग्रॉस डॉमेस्टिक प्रोडक्शन क्या होता है

जीडीपी को सकल घरेलू उत्पाद भी कहते हैं और इस शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल साल 1935 से लेकर साल 1944 के बीच अमेरिका के अर्थशास्त्री ने किया था, जिनका नाम साइमन था।

यह वह समय था, जब दुनिया की बड़ी-बड़ी बैंकिंग इंस्टिट्यूट देश के आर्थिक विकास को मापने पर काम कर रही थी, लेकिन तब ऐसा कोई भी यंत्र या फिर ऐसा कोई भी पैरामीटर निश्चित नहीं किया गया था जिससे किसी भी देश के आर्थिक विकास की गणना को किया जा सके या फिर किसी भी देश के आर्थिक विकास को मापा जा सके।

तभी साल 1935 और 1944 के बीच अमेरिका की संसद जिसे कांग्रेस भी कहा जाता था, वहां पर अमेरिका के अर्थशास्त्री साइमन ने सबसे पहले जीडीपी शब्द का इस्तेमाल किया तथा जीडीपी के पक्ष में कई महत्वपूर्ण बातें सामने रखी है, जिससे अधिकांश लोग सहमत हुए।

इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी कि आईएमएफ ने भी इस शब्द का इस्तेमाल करना चालू कर दिया, जिसके बाद दुनिया के सभी देशों ने अपने देश की आर्थिक विकास की गणना को करने के लिए जीडीपी के शब्द का इस्तेमाल करना प्रारंभ कर दिया।

जीडीपी का अर्थ ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट है हिंदी भाषा में इसे सकल घरेलू उत्पाद कहा जाता है।

जीडीपी का इस्तेमाल किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को मापने के लिए किया जाता है। इसको इस प्रकार से समझा जा सकता है कि किसी भी देश की सीमा रेखा के अंदर उत्पादित हुई वस्तु और सर्विस का बाजार में कितना मूल्य है।

अधिक मूल्य होने पर उस देश के अंदर विदेशी करेंसी आएगी, जिससे वह देश तेज गति से डेवलपमेंट करेगा और अगर उत्पादित वस्तुओं और सर्विस की कीमत कम है, तो उस देश की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रहेगी और उस देश की जीडीपी भी कम रहेगी।

ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्शन के अंतर्गत खेती, उद्योग और सर्विस तीन प्रमुख घटक आते हैं और इन क्षेत्रों में प्रोडक्शन बढ़ने या फिर घटने के औसत के आधार पर ग्रॉस डॉमेस्टिक प्रोडक्शन की दर तय होती है।

हमारे भारत देश में हर 3 महीने के बाद ग्रॉस डॉमेस्टिक प्रोडक्शन का अंदाजा लगाया जाता है, ताकि सरकार यह जान सके कि हमारे देश की विकास की रफ्तार कितनी तेज है या फिर कम है।

■ जीडीपी कैसे निकालते हैं

जीडीपी निकालने के लिए हमने नीचे एक सूत्र दिया है, जिसका इस्तेमाल करके जीडीपी निकाली जा सकती है।

सकल घरेलू उत्पाद = निजी खपत + सकल निवेश + सरकारी निवेश + सरकारी खर्च + (निर्यात-आयात) जीडीपी डिफ्लेटर (अपस्फीतिकारक) बहुत ही जरूरी है।

इसके द्वारा मुद्रास्फीति को मापा जाता है। इसकी गणना के लिए वास्तविक जीडीपी में से अवास्तविक (नामिक) जीडीपी को विभाजित किया जाता है और इसे 100 से गुणा किया जाता है।

– GDP (कुल घरेलू उत्पाद) = उपभोग (Consumption) + कुल निवेश

– GDP = C + I + G + (X − M)

■ उपभोग

उपभोग का मतलब होता है व्यक्ति के द्वारा इस्तेमाल की गई वस्तु के लिए खर्च की गई रकम। जैसे कि घर का किराया, खाने का भोजन, मेडिकल खर्च। इसमें नए घर को शामिल नहीं किया जाता है।

■ कुल निवेश

इसके द्वारा हमारे देश की सीमा के अंदर देश की सभी संस्थाओं के द्वारा किए गए कुल खर्चे का कैलकुलेशन होता है।

■ जीडीपी के प्रकार

1. वास्तविक जीडीपी

इस प्रकार की जीडीपी में एक आधार वर्ष में कीमत के मूल्य को फिक्स करके जीडीपी का कैलकुलेशन किया जाता है और इस जीडीपी के मूल्य में कोई भी बदलाव नहीं किया जाता है।हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वर्तमान में हमारे भारत देश का आधार वर्ष साल 2011 से साल 2012 है, परंतु केंद्रीय सांख्यिकी संगठन इस आधार वर्ष को बदलकर साल 2017 से साल 2018 करने पर विचार कर रहा है।

2. नाममात्र जीडीपी

नाम मात्र जीडीपी एक ऐसी जीडीपी होती है जिसमें करंट मार्केट की कीमतों के बेस पर जीडीपी का कैलकुलेशन किया जाता है ना कि केंद्रीय सांख्यिकी संगठन के द्वारा तय की गई निर्धारित कीमत के आधार पर।अगर हम आर्थिक विकास की बात करें तो नाम मात्र जीडीपी की तुलना में वास्तविक जीडीपी हमारे देश के आर्थिक विकास को सही तरीके से प्रदर्शित करती है।

■ दुनिया के टॉप 5 जीडीपी देश की लिस्ट

2020 में भारत ने जीडीपी के मामले में यूके और फ्रांस जैसे देश को पीछे छोड़कर सातवें पायदान से आगे बढ़कर पांचवा पायदान हासिल किया और यह हम भारतवासियों के लिए काफी खुशी की बात थी, तो चलिए आगे जानते हैं कि ऐसे पांच कौन से देश हैं जिनकी जीडीपी दुनिया में सबसे ज्यादा है और टॉप पर कौन सा देश है।

1. यूनाइटेड स्टेट्स(United States)

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका को विश्व की महाशक्ति कहा जाता है, क्योंकि अमेरिका शुरू से ही सभी क्षेत्रों में आगे रहा है।अमेरिका की गिनती विकसित देशों में होती है। अमेरिका की अर्थव्यवस्था साल 1981 से ही जीडीपी के मामले में दुनिया में पहले स्थान पर बनी हुई है और अमेरिका वर्तमान में जीडीपी के मामले में पहला स्थान भी रखता है।

इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि, दुनिया की अर्थव्यवस्था में लगभग एक चौथाई हिस्सा केवल यूनाइटेड स्टेट यानी कि अमेरिका ही देता है।2018 में अमेरिका की जीडीपी 20.58 थी और साल 2020 में अमेरिका की जीडीपी पुरानी जीडीपी से बढ़कर ज्यादा हो गई। साल 2020 में अमेरिका की जीडीपी 22.32 तक जाने का अनुमान लग रहा है।

2. चीन(China)

पिछले कुछ सालों से चीन लगातार हर क्षेत्र में प्रगति कर रहा है। इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि, दुनिया के लगभग सभी देशों में मिलने वाली चीजों में से आधे सामान चाइना में ही बने हुए होते हैं।

हमारे भारत देश में ही हर साल अरबों रुपए के चाइना के सामान भारत के व्यापारी मंगाते हैं, क्योंकि चाइना का सामान अन्य सामान्य की तुलना में सस्ता होता है, इसीलिए भारत के व्यापारी चाइना के सामान मंगा कर इंडिया में बेचते हैं।

1980 में हमारा पड़ोसी देश दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, परंतु वर्तमान में चीन सातवें पायदान से दूसरे पायदान पर आ गया है और वर्तमान में चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है।

चीन अपने सामान दुनिया के अधिकतर देशों में निर्यात करता है। 2018 के एक आंकड़े के अनुसार हमारे पड़ोसी देश चाइना की जीडीपी 13.37 ट्रिलियन डॉलर थी, जो लगातार बढ़ती ही जा रही है।

3. जापान(Japan)

जापान देश भी टेक्नोलॉजी के मामले में काफी एडवांस है और जापान के वैज्ञानिकों का लोहा पूरी दुनिया मानती है।जापान हमारे भारत देश का काफी अहम दोस्त भी है। आपको याद होगा कि हमारे भारत में जो बुलेट ट्रेन का प्रोजेक्ट चल रहा है, उसमें जापान की कंपनियां भी सहभागिता दिखा रही है

और जापान के कई वैज्ञानिक भी इस काम में लगे हुए हैं। जापान वर्तमान के समय में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसकी अर्थव्यवस्था वर्तमान के समय में 5 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर चुकी है जापान देश में प्राकृतिक संसाधन बहुत है।
इसकी जीडीपी में सेवा क्षेत्र का 70.9% उद्योग क्षेत्र का 29.7% और कृषि क्षेत्र का 1% योगदान है। 2019 में जापान की जीडीपी 5.15 ट्रिलियन डॉलर थीं।

4. जर्मनी(Germany)

जर्मनी देश भी टेक्नोलॉजी के मामले में काफी एडवांस है। दुनिया में मिलने वाली अधिकतर लग्जरी कारों का निर्माण जर्मनी में ही होता है। वर्तमान के समय में जर्मनी दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और जर्मनी देश यूरोप भर में सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था है। 2019 के एक आंकड़े के अनुसार जर्मनी की जीडीपी $3.86 थी।जर्मनी लोहा, स्टील, कोयला, मशनरी टूल्स, रसायन, ऑटोमोबाइल्स के उत्पादन में बहुत आगे है।

5. भारत (India)

पांचवें नंबर पर जीडीपी के मामले में हमारे भारत देश का स्थान आता है।हमारा भारत देश वर्तमान में जीडीपी के मामले में दुनिया का पांचवा सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश है।

हमारे भारत देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने हमारे भारत देश की जीडीपी को 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने की बात कही है, जिसके लिए वह लगातार प्रयास भी कर रहे हैं।हमारा भारत देश खेती, दूध, पशुपालन के साथ-साथ कपड़ा, रसायन, इस्पात और खनन के मामले में सबसे बड़े उत्पादक देशों में से एक देश है।

भारत जीडीपी(GDP) के लिए 16.8% कृषि पर और 28.9 % उद्योग पर निर्भर है 2019 में भारत की जीडीपी 2.94 ट्रिलियन डॉलर थीं।

■ GDP और GNP में अंतर

जब हम जीडीपी के बारे में बात करते हैं, तो हमें एक शब्द और सुनने को मिलता है, जिसे “जीएनपी” कहा जाता है, जिसके कारण बहुत से लोग जीडीपी और जीएनपी को लेकर कंफ्यूज हो जाते हैं, उन्हें यह पता ही नहीं होता है कि जीएनपी का मतलब क्या होता है।

जीडीपी का मतलब होता है सकल घरेलू उत्पाद जबकि जीएनपी का मतलब होता है सकल राष्ट्रीय उत्पाद। अगर हम सामान्य भाषा में कहें तो जीडीपी का इस बात से कोई भी लेना देना नहीं है कि उत्पादन कौन कर रहा है क्योंकि जीडीपी तो बस यही देखता है कि उत्पादन देश की सीमा के अंदर हो रहा है या नहीं, परंतु जीएनपी यह सुनिश्चित करता है कि उत्पादन देश के नागरिकों के द्वारा ही हो।

■ भारत की जीडीपी कैसे तय होती है

अगर हम भारत की बात करें तो, हमारे भारत देश की जीडीपी तीन मुख्य घटकों पर आधारित होती है। हमारे भारत देश की जीडीपी एग्रीकल्चर, इंडस्ट्री और सर्विस के ऊपर आधारित होती है, जिनमें प्रोडक्शन बढ़ने या घटने के औसत आधार पर जीडीपी की दर तय होती है।

अगर जीडीपी ज्यादा है, तो इसका मतलब यह होता है कि कोई देश तरक्की कर रहा है और अगर किसी देश की जीडीपी कम है, तो इसका मतलब है कि उस देश की अर्थव्यवस्था ठीक नहीं है

और उस देश की अर्थव्यवस्था नीचे जा रही है और उस देश को अपनी अर्थव्यवस्था को सुधारने की आवश्यकता है, जिसके लिए उसे विभिन्न प्रकार की योजनाएं और नीति बनाना आवश्यक है।

अगर बहुत ही आसान भाषा में कहा जाए तो अगर जीडीपी का आंकड़ा बढ़ रहा है, तो इसका मतलब होता है कि विकास की दर बढ़ रही है और अगर जीडीपी का आंकड़ा कम हो रहा है, तो इसका मतलब होता है कि देश की माली हालत खराब हो रही है, जिसे सुधारने की आवश्यकता है।

■ भारत में कौन जारी करता है GDP के आंकड़ें

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हमारे भारत देश में जीडीपी के आंकड़े सीएसओ संस्था जारी करती है, जिसे केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय कहा जाता है।केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय हमारे पूरे भारत भर में से प्रोडक्शन और सर्विस के आंकड़े को इकट्ठा करती है, जिसमें विभिन्न प्रकार के सूचकांक भी शामिल होते हैं

और उसी सूचकांक के आधार पर केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय हमारे भारत देश की जीडीपी के आंकड़े सार्वजनिक करती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हमारे भारत देश की जीडीपी के आंकड़े हर 3 महीने में सार्वजनिक किया जाता है।

■ जीएनपी क्या है

जीएनपी एक अर्थव्यवस्था के नागरिकों के पूरे प्रोडक्शन को मापता है, जिसमें विदेश में रहने वाले लोग भी शामिल होते हैं, परंतु विदेशियों द्वारा घरेलू उत्पादन को इसमें ऐड नहीं किया जाता है।

■ GDP ग्रोथ के फायदे

जीडीपी अधिक होने का मतलब होता है कि उस देश में काम करने वाली कंपनियां भी फायदे में चल रही है, जिसके कारण उस कंपनी में काम करने वाले कर्मचारी भी खुश होते हैं और जब कंपनी को अधिक लाभ होने लगता है, तब वह अपना प्रोडक्शन भी बढ़ा देती है। जिस कारण अधिक से अधिक मजदूरों को रोजगार प्राप्त होता है और उनकी इनकम होती है तथा वह अपना जीवन अच्छे ढंग से जी पाते हैं।

जीडीपी बढ़ने से सरकार की इनकम में भी बढ़ोतरी होती है, क्योंकि जीडीपी बढ़ने से उनके टैक्स में बढ़ोतरी होती है। आप तो यह जानते ही हैं कि सरकार को बेरोजगारी की समस्या पर पैसे खर्च करने की आवश्यकता होती है, इसलिए आर्थिक विकास सरकारी कर्ज को कम करने में काफी मदद पहुंचाती है।बढे हुए टैक्स के साथ सरकार पब्लिक सेवा जैसे नेशनल हाईवे और एजुकेशन पर अधिक खर्च कर सकती है।

जीडीपी के बढ़ने से सरकार के पास काफी मात्रा में टैक्स आता है और ऐसे में हमारे भारत देश में जो लोग अपना रोजगार चालू करना चाहते हैं उन्हें सरकार की तरफ से लोन दिया जाता है ताकि वह अपना काम चालू कर सके और आत्म निर्भर बन सके।

■ 2020 भारत की जीडीपी कितनी है

आप आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2019 में भारत की जीडीपी 5.8 परसेंटेज थी, परंतु वर्तमान में भारत की जीडीपी 5 परसेंट है, हालांकि इसके बढ़ने के आसार हैं।

आपकी और दोस्तों

तो दोस्तों ये था जीडीपी का फुल फॉर्म क्या है, हम उम्मीद करते है की इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपको जीडीपी के फुल फॉर्म के बारे में पूरी जानकारी मिल पाए|

अगर आपको हमारी ये पोस्ट अच्छी लगी तो प्लीज पोस्ट को १ लाइक जरुर करे और अपने दोस्तों के साथ भी शेयर जरुर करे. धन्येवाद दोस्तों|

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