FIR Full Form in Hindi | FIR का फुल फॉर्म क्या है

FIR Full Form in Hindi: हमारा भारत देश एक बहुत बड़ा देश है और इतने बड़े देश में कानून व्यवस्था को संभालने के लिए हमारी भारतीय सरकार ने पुलिस विभाग का निर्माण किया है। हमारे भारत के हर राज्य में पुलिस विभाग कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तथा अपराधियों को पकड़ने के लिए काम करता है।

हालांकि आज के इस आर्टिकल में हम आपको “एफ आई आर”के बारे में जानकारी देने वाले हैं। अगर आप इंटरनेट पर यह सर्च करते रहते हैं कि एफ आई आर का फुल फॉर्म क्या होता है या फिर एफ आई आर का मतलब क्या होता है, तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं

क्योंकि आज के इस आर्टिकल में हम आपको f.i.r. के बारे में जानकारी देने वाले हैं। एफ आई आर के बारे में जानकारी रखना आपको इसलिए भी आवश्यक है कि आज के समय में अपराध इतने बढ़ गए हैं कि कभी ना कभी हमें किसी ना किसी के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज करवाना ही पड़ता है

और किसी भी आरोपी के खिलाफ मुकदमा लिखवाने के लिए सबसे पहले हमें उसके खिलाफ एफ आई आर लिखवानी पड़ती है, ऐसे में इसकी जानकारी होना अति आवश्यक है।

वर्तमान के समय में लड़ाई झगड़े काफी बढ़ गए हैं और कई बार झगड़ों में व्यक्ति एक दूसरे की जान तक ले लेते हैं या इसके अलावा अन्य अपराध भी होते हैं। जैसे कि कोई किसी का बलात्कार कर देता है या फिर कोई किसी से पैसे छीनने की कोशिश करता है।

इसके अलावा कई बार लोग धोखाधड़ी करके दूसरे के पैसे अपने खाते में ट्रांसफर कर लेते हैं और जिसके साथ यह सब होता है, वह थाने में जाकर सबसे पहले पुलिस के सामने अपनी एफ आई आर दर्ज करवाता है।

1. एफ आई आर का फुल फॉर्म अंग्रेजी में क्या होता है

सबसे पहले तो हम यह जान लेते हैं कि अंग्रेजी में एफ आई आर का फुल फॉर्म क्या होता है,अंग्रेजी में एफ आई आर का फुल फॉर्म होता है “फर्स्ट इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट”

FIR full form in hindi

2. एफ आई आर का हिंदी में क्या मतलब होता है

f.i.r. को हिंदी में प्रथम सूचना विवरण कहते हैं।यह तब लिखी जाती है, जब किसी व्यक्ति के साथ कोई घटना घटित हो जाती है। एफ आई आर में अगर पीड़ित व्यक्ति को आरोपी का नाम पता है, तो वह उसका नाम लिखवा सकता है

और अगर कभी ऐसी स्थिति आती है कि, किसी अनजान व्यक्ति ने उसके साथ
किसी घटना को अंजाम दिया है, तो वह अनजान व्यक्ति के खिलाफ भी एफआईआर लिखवा सकता है। इसमें पुलिस यह लिखती है कि फलां व्यक्ति के साथ अज्ञात लोगों ने वारदात की।

3. FIR क्या होती है

जब किसी व्यक्ति के साथ कोई आपराधिक घटना घट जाती है,जैसे चोरी, हत्या, बलात्कार या छिनेती तो वह थाने में जाता है और वहां पर जाकर पुलिस के सामने जो रिपोर्ट लिखवाता है, उसे ही f.i.r. कहा जाता है।f.i.r. को हिंदी में प्रथम सूचना विवरण कहा जाता है। किसी भी केस की जांच के लिए सबसे पहले व्यक्ति को पुलिस थाने जाकर f.i.r. लिखवाना जरूरी होता है।

अधिकतर f.i.r. किसी बड़े मामले में ही लिखवाई जाती है और अगर मामला ज्यादा बड़ा नहीं होता है या फिर मामला संगीन नहीं होता है तो फिर एफ आई आर नहीं लिखी जाती है।भारत का कोई भी नागरिक की किसी भी आपराधिक घटना के लिए पुलिस थाने में जाकर f.i.r. लिखवा सकता है।

इसके लिए घटना घटित होने के बाद व्यक्ति को सबसे पहले थाने जाना होता है और वहां के एसआई सामने या फिर हवलदार के द्वारा अपनी एफ आई आर दर्ज करवानी पड़ती है। इसके अलावा आजकल ऑनलाइन एफ आई आर दर्ज की जाती है। अगर व्यक्ति थाने जाने में असमर्थ है तो वह अपने घर बैठे बैठे ही ऑनलाइन एफ आई आर भी दर्ज करवा सकता है।

परंतु अगर आप फोन से अपनी शिकायत दर्ज करवा रहे हैं,तो बाद में आपको थाने जाकर पुलिस को एफआईआर लिखवानी होगी। आप जो भी शिकायत फोन के माध्यम से दर्ज करवाते हैं, उसे बाद में आपको थाने जाना पड़ता है और वहां पर अपनी शिकायत का रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है।

अगर आप अपनी शिकायत का रजिस्ट्रेशन नहीं करवाते हैं तो आपकी शिकायत निरस्त कर दी जाती है और अगर एफ आई आर लिखवाते समय थाने में अधिकारी मौजूद नहीं है तो ऐसी स्थिति में थाने के सबसे वरिष्ठ अधिकारी के पास आप अपनी शिकायत लिखवा सकते हैं।

4. पुलिस अधिकारी एफ आई आर ना लिखे तो क्या करें

जैसा कि आप जानते हैं कि हमारे भारत देश में लगभग सभी सरकारी विभागों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होता है और पुलिस विभाग ऐसा विभाग है, जहां पर पुलिस के ऊपर हमेशा नेताओं का दबाव रहता है।

ऐसे में आपने बहुत बार टीवी चैनलों या फिर समाचारों में यह सुना होगा कि कोई व्यक्ति थाने में अपनी एफ आई आर लिखवाने गया और थाने के अधिकारियों ने उसकी एफ आई आर नहीं लिखी, उल्टा उसे वहां से डांट कर भगा दिया।ऐसे मे आदमी के साथ कभी-कभी बड़ा हादसा हो जाता है।

इसीलिए अगर आप पुलिस थाने में अपनी शिकायत दर्ज करना चाहते हैं और पुलिस थाने के लोग आपकी शिकायत दर्ज नहीं कर रहे हैं तो आप उस थाने के खिलाफ भी कड़ी कार्यवाही करवा सकते हैं।

अगर कोई पुलिस अधिकारी आपकी शिकायतें दर्ज नहीं कर रहा है तो आप उसकी शिकायत पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से कर सकते हैं।इसके अलावा आप उस पुलिस ऑफिसर की शिकायत पुलिस अध्यक्ष या डिवीजन अधिकारी को भी कर सकते हैं

और कानून के अनुसार सभी घटनाओं में एफ आई आर दर्ज करवानी जरूरी होती है।अगर आपकी शिकायत सही है, तो उस पुलिस अधिकारी को सस्पेंड किया जा सकता है या फिर उसका ट्रांसफर किया जा सकता है, ऐसा कई मामलों में हुआ भी है।

5. FIR से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें

जब आपके साथ कोई अपराधिक घटना घट जाती है और आप पुलिस थाने में अपनी शिकायत दर्ज करवाने के लिए जाते हैं, तो पुलिस थाने में आपसे आपके साथ घटित हुई घटना के बारे में सभी जानकारियां पूछी जाती है।

उदाहरण के तौर पर आपसे यह पूछा जाता है कि आपके साथ अपराध किस समय हुआ तथा आपके साथ अपराध कौन सी जगह पर हुआ, उस समय आपके साथ कितने लोग थे। इसके अलावा आप के केस से जुड़ी अन्य बातों भी पूछी जाती हैं और यह सभी बातें एक बुक में लिखी जाती हैं, जिस बुक में यह बात लिखी जाती हैं उसे रोजनामचा कहा जाता है।

परंतु बहुत से लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें यह नहीं पता होता है की f.i.r. अलग होती है और रोजनामचा अलग होता है। कुछ लोग तो रोजनामचा की किताब को ही f.i.r. मान लेते हैं और इसे ही f.i.r. समझ कर वापस अपने घर आ जाते हैं

परंतु इससे आपके साथ घटित हुई घटना या फिर अपराध का हल नहीं निकलता है क्योंकि इसकी कोई गारंटी नहीं है कि आपकी समस्या का हल होगा ही।

इसीलिए जब भी आपके साथ कोई आपराधिक घटना घटे या फिर आप किसी के खिलाफ अपनी शिकायत दर्ज करवाना चाहते हैं तो उसके लिए f.i.r. अवश्य लिखवाए और उस एफ आई आर की फोटो कॉपी अपने साथ अवश्य ले आए।

एफ आई आर की फोटो कॉपी लेना आपका अधिकार होता है और अगर कोई अधिकारी आपकी एफ आई आर लिखने से मना करता है या फिर आपकी एफ आई आर लिखने में देरी कर रहा है या फिर आपकी एफ आई आर लिखने में आपके द्वारा बताई गई बातों के अलावा अन्य बातें भी जोड़ रहा है तो आप इसके बारे में जिम्मेदार अधिकारियों को अपनी शिकायत दे सकते हैं और उस पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही करवाने की मांग कर सकते हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कई बार ऐसा भी होता है कि जब कोई
आदमी थाने में एफआईआर लिखवाने के लिए जाता है, तब थाने में भ्रष्ट अधिकारियों के द्वारा एफ आई आर लिखने के बदले व्यक्ति से पैसों की डिमांड की जाती है।

अगर आपके साथ कभी ऐसा होता है, तो आप इसकी शिकायत पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से कर सकते हैं क्योंकि एफ आई आर लिखवाने के लिए किसी भी प्रकार के कोई भी पैसे नहीं दिए जाते हैं। एफ आई आर लिखवाना आप का अधिकार होता है जो भारतीय संविधान ने आम नागरिक को दिया है।

6. FIR दर्ज करवाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

जब भी आपके साथ कोई अपराधिक घटना घटती है तो आपको तुरंत उस घटना की f.i.r. थाने में लिखवानी चाहिए और अगर आप उसी समय अपनी एफ आई आर थाने में नहीं लिखवाते हैं

या फिर आप फर्स्ट इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट लिखवाने में देरी करते हैं तो आपको अपनी एफ आई आर में यह अवश्य बताना चाहिए कि आपको एफ आई आर लिखवाने में देर क्यों हुई या फिर आप किस वजह से अपनी एफ आई आर लिखवाने आने में लेट हो गए।

एफ आई आर बिल्कुल साफ और अच्छे शब्दों में लिखी जानी चाहिए,ताकि उसे कोई भी आसानी से पढ़ ले। इससे यह फायदा होगा कि पुलिस अधिकारियों को या फिर खुद आपको भी घटना को समझने में आसानी होगी।

7. FIR में क्या-क्या चीजें पूछी जाती है

जब आपके साथ कोई भी घटना घटित होती है, तो आपको पुलिस थाने में जाकर f.i.r. लिखवानी होती है और जब आप पुलिस अधिकारी के समक्ष अपनी एफ आई आर लिखवाते हैं, तब पुलिस अधिकारी आपके साथ घटित हुई घटना के बारे में सभी जानकारी इकट्ठा करने का प्रयास करते हैं।

तथा आपसे वह विभिन्न प्रकार के सवाल पूछते हैं। पुलिस अधिकारी आपसे यह सवाल करते हैं कि अपराध करने वाला कौन था, अगर आपको अपराधी का नाम पता है तो आप उसका नाम बता सकते हैं और अगर आपको अपराधी का नाम नहीं पता है तो आप अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ अपनी रिपोर्ट दर्ज करवा सकते हैं।

इसके अलावा पुलिस यह भी पूछता है कि अपराध आपके खिलाफ किया गया है या आपके किसी सगे संबंधी के खिलाफ किया गया है, पुलिस यह भी पूछते हैं कि क्या आप उस अपराधी को जानते हैं या फिर आप उस अपराधी को नहीं जानते हैं, अपराध दिन में हुआ या रात में हुआ।

अपराध किस समय हुआ, अपराध कौन सी जगह पर हुआ, आप उस समय वहां क्या कर रहे थे, आपके साथ कितने लोग थे, अपराध किस तरह से किया गया था, आपके खिलाफ या आपके सगे संबंधी के खिलाफ कौन सा अपराध हुआ है, आपके पास अपराध होने के समय कितने लोग मौजूद है।

आपके साथ जो अपराध हुआ है उसके आपके पास क्या सबूत है, आपके साथ जो अपराध हुआ है उससे आपको क्या नुकसान हुआ, अपराध करने के बाद आरोपी ने आपको कुछ कहा तो नहीं, आपको कहां-कहां चोट लगी है इत्यादि।

हालांकि विभिन्न प्रकार के केस के लिए अलग-अलग सवाल भी हो सकते हैं, जैसे अगर कोई बलात्कार का केस है तो उससे यह भी पूछा जा सकता है कि क्या आप उस आदमी को जानती हैं, उस आदमी ने आपको कहां-कहां टच किया,क्या आपका सामान चोरी भी किया है इत्यादि। हर केस में अलग-अलग बातें पूछी जाती हैं।

जब पुलिस अधिकारी आप के केस की सभी जानकारी इकट्ठा कर लेता है, तब आप पुलिस अधिकारी से उस एफआईआर को लेकर उसे पढ़ सकते हैं।पढने के बाद पुलिस अधिकारी आपसे उस एफ आई आर के नीचे अपने साइन या फिर अंगूठा लगाने को कहता है

और जब आप अपनी साइन या फिर अंगूठा लगा देते हैं, तो पुलिस अधिकारी उस f.i.r. को अपने रिकॉर्ड में भी लिख लेता है एफ आई आर लिखने के बाद शिकायतकर्ता का यह अधिकार होता है कि वह एफ आई आर की एक फोटो कॉपी मांग सकता है। फोटो कॉपी प्राप्त करने के लिए शिकायतकर्ता से किसी भी प्रकार की कोई भी फीस या पैसे नहीं लिए जाते हैं।

8. ऑनलाइन FIR क्या है

आज के समय में इंटरनेट की पहुंच हर जगह हो गई है और इंटरनेट के कारण हमारे काफी काम आसान हो गए हैं और इंटरनेट के कारण ही अब ऑनलाइन एफ आई आर दर्ज करवाना भी आसान हो गया है।

अब एफ आई आर दर्ज करवाने के लिए आपको पुलिस स्टेशन जाने की आवश्यकता नहीं है। आप अपने घर बैठे बैठे ही अपने स्मार्टफोन के माध्यम से एफ आई आर दर्ज करवा सकते हैं। घर से ही एफ आई आर दर्ज करवाने के बाद 24 घंटे के अंदर ही पुलिस अधिकारियों का आपके मोबाइल नंबर पर फोन आएगा।

हालांकि की ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने के लिए आपके पास स्मार्टफोन होना जरूरी है, क्योंकि ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने के लिए आपको अपनी ईमेल आईडी और फोन नंबर भी देना होता है, जिससे कि पुलिस अधिकारी आप से लगातार संपर्क में बने रहते हैं।

हमारी सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन एफ आई आर दर्ज करवाने का सिस्टम लागू किया है और अगर कोई पुलिस अधिकारी एफ आई आर दर्ज नहीं करता है, तो सुप्रीम कोर्ट उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आदेश भी दे चुकी है

साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि एफ आई आर दर्ज होने के 1 हफ्ते के अंदर कार्यवाही शुरू हो जानी चाहिए और उस मामले की जांच होनी चाहिए और अगर मामला अधिक गंभीर है तो उस मामले की विशेष तौर पर जांच होनी चाहिए तथा लोगों को न्याय मिलना चाहिए और अपराधियों को जेल होनी चाहिए।

9. एफ आई आर से संबंधित आम जनता के अधिकार

1: किसी भी घटना के बाद तुरंत फर्स्ट इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट दर्ज करवाना अति आवश्यक होता है और इसके अलावा एफ आई आर दर्ज होने के बाद पीड़ित व्यक्ति उस एफ आई आर की फोटोकॉपी ले सकता है।

इसके लिए कोई भी पुलिस अधिकारी मना नहीं कर सकता है और अगर कोई पुलिस अधिकारी फोटोकॉपी देने से मना करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है। इसके अलावा फोटो कॉपी लेने के लिए किसी भी प्रकार के पैसे नहीं देने पड़ते हैं।

2: किसी भी घटना के बारे में लिखी गई एफ आई आर को पढ़कर सुनाना जरूरी होता है और अगर शिकायतकर्ता उससे सहमत है तो वह उसे एफआईआर के नीचे अपने हस्ताक्षर करता है।

3: यह आवश्यक नहीं है कि सभी शिकायतकर्ता को अपराध के बारे में व्यक्तिगत जानकारी हो या फिर उसके सामने ही अपराध हुआ हो, फिर भी पुलिस को एफ आई आर दर्ज करनी पड़ती है,क्योंकि पुलिस का यह फर्ज है कि वह किसी भी व्यक्ति की एफ आई आर दर्ज कर सकती है। पुलिस अनजान लोग के खिलाफ भी एफ आई आर दर्ज कर सकती है।

4: शिकायतकर्ता द्वारा लिखाई गई एफ आई आर में कोई भी पुलिस अधिकारी अपनी तरफ से कोई भी टिप्पणी या शब्द तथा अन्य कोई भी चीजें नहीं लिख सकता है, क्योंकि उसे ऐसा करने का अधिकार नहीं होता है।

क्योंकि ना तो पुलिस अधिकारी के साथ कोई घटना हुई है ना ही वह इसमें किसी भी रूप से शामिल है और अगर कोई अधिकारी अपनी तरफ से कुछ बातें आपकी एफ आई आर में जोड़ता है और आपको यह लगता है कि वह बातें आपकी घटना से संबंधित नहीं है या फिर आपकी f.i.r. को दूसरी दिशा में मोड़ने का प्रयास कर रही हैं तो आप पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से इसकी शिकायत कर सकते हैं।

10. ध्यान रखने योग्य बातें

आपके द्वारा लिखाई गई एफ आई आर के ऊपर उस पुलिस स्टेशन की मोहर और वहां के अधिकारी के साइन होने चाहिए, जहां पर आपने अपनी एफआईआर लिखवाई है।

इसके अलावा जब पुलिस अधिकारी आपको एफ आई आर की कॉपी दे देगा, तब वह अपने रजिस्टर में यह लिख लेता है कि पुलिस स्टेशन द्वारा शिकायतकर्ता को एफ आई आर की कॉपी दे दी गई है।

अगर आपको किसी भी तरह की घटना में उस जगह का नाम मालूम नहीं है तो भी आप पुलिस थाने में अपनी एफ आई आर लिखवा सकते हैं और जब पुलिस छानबीन करेगी और जब उसे उस घटना की जगह के बारे में पता चलेगा तब वह उस क्षेत्र में आने वाले पुलिस स्टेशन को आपकी एफ आई आर ट्रांसफर कर देगी और फिर आपको अपनी एफ आई आर से संबंधित सभी बातें और कार्यवाही उसी पुलिस स्टेशन में जाकर करनी होंगी।

11. फर्स्ट इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट में कौन सी जानकारी देनी होती है

– आप किस क्षमता में जानकारी दे रहें हैं

– अपराध का दोषी कौन है

– अपराध किसके खिलाफ किया गया है

– अपराध होने का समय क्या था

– अपराध कौन सी जगह पर हुआ

– अपराध किस तरीके से हुआ

– अपराध के समय कोई गवाह थे

– अपराध से होने वाला नुक्सान

12. जीरो FIR क्या होती है

जब किसी गंभीर अपराध के मामले में घटनास्थल के बाहर के पुलिस थाने में फर्स्ट इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट दर्ज करवाई जाती है, तो उसे जीरो एफ आई आर कहा जाता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जीरो एफ आई आर में अपराध संख्या दर्ज नहीं की जाती है, जैसा कि आप जानते हैं कि किसी भी गंभीर अपराध होने की दशा में घटना की एफ आई आर भारत के किसी भी जिले में दर्ज की जा सकती है।

हालांकि इस इस मामले में तत्काल शिकायत नंबर नहीं दिया जाता है, परंतु जब इस मामले को घटना वाले स्थान पर स्थानांतरित किया जाता है तब वहां पर शिकायतकर्ता को अपराध संख्या मिल जाती है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अपराध दो तरह के होते हैं। पहला संज्ञेय और दूसरा असंज्ञेय।संज्ञेय यानि की गोली चलाना, हत्या बलात्कार जैसे गंभीर अपराध के मामले और असंज्ञेय मे मामूली मारपीट इत्यादि।

जो अपराध गंभीर नहीं होते उनमें एफ आई आर दर्ज नहीं की जाती है, बल्कि मजिस्ट्रेट के पास शिकायत को भेजा जाता है और फिर मजिस्ट्रेट आरोपी को समन जारी करता है, वहीं गंभीर अपराध के मामले में एफ आई आर दर्ज करना जरूरी होता है।

13. जीरो FIR कब और कैसे करनी चाहिए

जैसा कि आप जानते हैं कि अपराध कहीं भी हो सकता है। यह आवश्यक नहीं है कि अपराध उपरोक्त थाने की सीमा में ही घटित हो, इसीलिए ऐसे केस में तुरंत कार्यवाही की डिमांड होती है

परंतु बिना f.i.r के कानून भी कुछ नहीं कर सकता है, इसीलिए ऐसे मामलों में सबसे पहले आईविटनेस और उससे संबंधित अन्य जानकारियों के साथ नजदीकी पुलिस स्टेशन में जाकर शिकायतकर्ता को अपनी एफ आई आर दर्ज करवानी चाहिए।

इसके अलावा जब आप लिखित कंप्लेंट करें तब f.i.r. की एक कॉपी अपने पास रखना ना भूलें।जब एफ आई आर दर्ज हो जाती है तब पुलिस वालों की यह जिम्मेदारी होती है कि उस पर कार्रवाई करके उसकी जांच को आगे बढ़ाएं।

एफ आई आर दर्ज होने के बाद कोई भी पुलिस अधिकारी यह नहीं कह सकता कि “यह मामला हमारी सीमा के बाहर है इसलिए हम इसकी जांच नहीं करेंगे आप उपरोक्त थाने में जाइए”।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जैसे सामान्य f.i.r. लिखी जाती है, वैसे ही जीरो f.i.r. भी लिखी जाती है। आप जीरो f.i.r. लिखित या मौखिक दोनों तरह से लिखवा सकते हैं।इसके अलावा आप पुलिस अधिकारी को fir लिखने के बाद f.i.r. को पढ़कर सुनाने का अनुरोध भी कर सकते हैं।

आपकी और दोस्तों:

तो दोस्तों ये था FIR का फुल फॉर्म क्या है, हम उम्मीद करते है की इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपको FIR के बारे में पूरी जानकारी मिल गयी होगी|

दोस्तों अगर आपको हमारी पोस्ट अच्छी लगी तो प्लीज पोस्ट को १ लाइक जौर करे और पाने दोस्तों के साथ भी जरुर शेयर करे, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगो को fir के बारे में पूरी जानकारी मिल पाए. धन्येवाद दोस्तों|

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