DRDO Full Form in Hindi | DRDO का फुल फॉर्म क्या है

DRDO Full Form in Hindi: आज के इस आर्टिकल में हम आपको “डीआरडीओ की फुल फॉर्म” के बारे में जानकारी देने वाले हैं। अगर आप इंटरनेट पर यह सर्च करते रहते हैं कि डीआरडीओ क्या है या फिर डीआरडीओ का फुल फॉर्म क्या है, तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं, क्योंकि आज आपको इसके बारे में सभी जानकारी प्राप्त होगी।

दोस्तों दुनिया के हर देश के पास अपनी अपनी एजेंसी होती है और यह एजेंसियां अलग-अलग काम करती है। जैसे कुछ एजेंसीया मौसम का हाल पता करती रहती है तो कुछ एजेंसीया देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए काम करती है।

वैसे ही कुछ एजेंसीया ऐसी भी है, जो वायुमंडल यानी कि सौर ग्रह में अपने उपकरण को छोड़ने का काम करती हैं और वायुमंडल से जुड़े हुए कई रहस्यों को उजागर करने का काम करती हैं।

इसके अलावा सभी एजेंसियां अपने देश के व्यक्तिगत फायदे के लिए समय-समय पर अंतरिक्ष में उपग्रह छोड़ती रहती है।इसके अलावा वे सेटेलाइट भी छोड़ती है।

दोस्तों बढ़ते हुए कंपटीशन के कारण दुनिया के हर देश अपनी अपनी रक्षा और सुरक्षा के लिए हथियारों के निर्माण पर जोर दे रहे हैं। अभी तक हथियारों के निर्माण में सबसे अग्रणी स्थान अमेरिका,चीन, साउथ कोरिया और रसिया का ही है। इसके अलावा भी फ्रांस और जर्मनी जैसे देश भी आधुनिक हथियार बनाने में काफी एक्सपर्ट है।

अमेरिका जैसा देश शुरू से ही विश्व की महाशक्ति है और अभी भी यह विश्व की महाशक्ति बना हुआ है, हालांकि अब अमेरिका को चाइना जैसे देश से चुनौती मिलने लगी है, इसीलिए अमेरिका अपने हितों को देखते हुए अन्य देशों के साथ अपने संबंध मधुर बना रहा है।

दुनिया के हर देश को अपनी रक्षा के लिए हथियार बनाने का अधिकार है, परंतु कुछ देशों के बीच हथियारों के निर्माण पर एक सीमा निर्धारित की गई है, जिसे संधि कहा जाता है, परंतु फिर भी कई देश चोरी छुपे भी हथियारों का निर्माण कर रहे हैं

अगर हम भारत की बात करें तो हमारा भारत देश भी लगातार आधुनिक हथियारों का निर्माण कर रहा है तथा अन्य देशों से लेटेस्ट टेक्नोलॉजी वाले हथियार खरीद भी रहा है। हमारे भारत में नए नए हथियारों के निर्माण की जिम्मेदारी डीआरडीओ संस्था के पास है।

यह संस्था हमारे भारत में भारत की रक्षा से जुड़े हुए अनुसंधान की गतिविधियों के लिए उत्तरदाई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस संस्था में 5000 से अधिक वैज्ञानिक और लगभग 25000 से अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं और हमारे देश को नई ताकत प्रदान कर रहे हैं। डीआरडीओ ने हमारे भारत की आर्मी के लिए नए नए हथियार का निर्माण किया है।

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DRDO Full Form in Hindi

DRDO का फुल फॉर्म क्या है

DRDO Full Form in Hindi

 

■ डीआरडीओ का इंग्लिश में फुल फॉर्म क्या होता है

सबसे पहले तो आइए जान लेते हैं कि डीआरडीओ को इंग्लिश में क्या कहते है। डीआरडीओ का इंग्लिश में फुल फॉर्म होता
है Defence Research and Development Organisation

■ डीआरडीओ को हिंदी में क्या कहते हैं

डीआरडीओ को हिंदी में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के नाम से जाना जाता है।

■ डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन का हेड क्वार्टर कहां है

डीआरडीओ का हेड क्वार्टर हमारे भारत देश के दिल्ली राज्य में स्थित है।

■ डीआरडीओ के वर्तमान अध्यक्ष कौन है

डीआरडीओ के वर्तमान अध्यक्ष सतीश रेड्डी है।

■ डीआरडीओ के कार्यक्षेत्र संक्षेप में

– परियाजनाओं/प्रस्तावों की समीक्षा
– आवश्यकता का अनुमोदन
– बोर्डों का आयोजन करना/शामिल होना
– अनुमोदन के लिए प्रसंस्करण कार्य
– कार्यों के प्रगति की निगरानी करना
– बजट का निर्धारण और नियंत्रण
– भूमि अधिग्रहण एस्टेट प्रबंधन
– निति निर्धारण
– भविष्य की परियोजनाओं की योजना बनाना
– गुणवत्ता की गारंटी
– डेटाबेस को बनाये रखना
– सेमिनारों और संगोष्ठियों का आयोजन करना

■ डीआरडीओ क्या है

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि डीआरडीओ संस्था हमारे भारत देश के रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करता है। यह हमारे भारत देश के रक्षा मंत्रालय के रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के अधीन काम करता है और इसकी स्थापना साल 1958 में हमारे भारत देश के दिल्ली राज्य में की गई थी।

इसे Technical Development Establishment और Directorate of Technical Development and Production) के साथ Defence Science Organisation को एक करके बनाया गया था।

साल 1960 में डीआरडीओ संस्था ने अपनी पहली परियोजना की शुरुआत की थी, जिसका नाम इन्होंने इंडिगो रखा था। इंडिगो का उद्देश्य यह था कि यह जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल को विकसित करें, परंतु आपकी जानकारी के लिए बता दें कि डीआरडीओ का यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से सक्सेस नहीं हो पाया था

और इसीलिए इसे बाद में बंद कर दिया गया था, फिर साल 1970 मे प्रोजेक्ट इंडिगो ने प्रोजेक्ट वैलेंट के साथ प्रोजेक्ट डेविल का नेतृत्व किया और इसी नेतृत्व के तहत अग्नि, पृथ्वी, आकाश, त्रिशूल और नाग मिसाइल के साथ-साथ अन्य कई मिसाइल बनाई गई।

■ डीआरडीओ का लक्ष्य क्या है

डीआरडीओ का मुख्य लक्ष्य है कि वह भारत की तीनों सेनाओं के लिए विश्व के आधुनिक
हथियारों की तरह ही भारत के लिए भी आधुनिक हथियारों का निर्माण करें ताकि हमारा भारत देश आत्मरक्षा के लिए खुद पर ही निर्भर हो

और हमारा भारत देश किसी भी अन्य देश के मुकाबले हथियारों के मामले में कमजोर ना पड़े। इसके अलावा डीआरडीओ अन्य देशों को हथियार बेचने का काम भी करती है जिसके बदले में डीआरडीओ की इनकम होती है।

इसके साथ ही डीआरडीओ संस्था सैनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने का, सैनिकों को रक्षा सेवाओं से संबंधित तकनीकी समाधान देने का तथा सेंसर प्रणाली को मजबूत करने का काम भी करती है।

■ डीआरडीओ का मोटो क्या है

हर संस्था का अपना कोई ना कोई नारा अवश्य होता है और उसी तरह डीआरडीओ संस्था का भी एक नारा है। डीआरडीओ संस्था का मोटो है “बलस्य मूलम् विज्ञानम्” है। इसे संस्कृत भाषा में लिखा गया है। जिसका अर्थ होता है, “शक्ति का स्रोत विज्ञान है।”

मतलब कि किसी भी देश की पावर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि, उस देश में विज्ञान की स्थिति कैसी है और डीआरडीओ संस्था इसी बात को ध्यान में रखते हुए हमारे भारत देश को रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए अग्रसर है

■ डीआरडीओ संस्था द्वारा विकसित की गई चीजों की लिस्ट

– अग्नि मिसाइल
– पृथ्वी मिसाइल
– आकाश मिसाइल
– त्रिशूल मिसाइल
– नाग मिसाइल
– सागरिका मिसाइल
– निर्भय मिसाइल
– शौर्य मिसाइल
– ब्रह्मोस मिसाइल
– अस्त्र मिसाइल
– धनुष मिसाइल
– युद्ध टैंक अर्जुन
– हल्का लड़ाकू विमान (एस सी ए)
– बहुमुखी रोबोट बाहु
– लेजर चेतावनी प्रणाली
– कावेरी इंजन
– स्वदेशी एक्स-रे औद्योगिकी टोमोग्राफी सिस्टम
– तुरंत चिकित्सा प्रक्रिया दलों के लिए संरक्षक वस्त्र
– हल्के लड़ाकू विमानों के लाभप्रद पैराशूट प्रणाली

■ डीआरडीओ क्या काम करती है

हमारे भारत देश में डीआरडीओ की 50 से अधिक लेबोरेटरी है, जो विभिन्न प्रकार के शिक्षणों जैसे वैमानिकी, आयुध, इलेक्ट्रॉनिक्स, युद्धक वाहन, इंजीनियरिंग प्रणाली, उपकरण, मिसाइल, एडवांस कंप्यूटिंग एंड सिमुलेशन, विशेष सामग्री, नौसेना प्रणालियों, लाइफ साइंस, ट्रेनिंग इंफॉर्मेशन सिस्टम, और खेती को सिक्योरिटी देने वाली रक्षा प्रौद्योगिकियों का विकास करता है और इंडिया को दुनिया के सामने एक पावर के रूप में दिखाने के काम पर प्रयत्नशील है।

हमारे भारत देश की डीआरडीओ संस्था लगातार नई मिसाइल, हथियार, हल्के लड़ाकू विमान, रडार को विकसित करने का काम कर रहा है, ताकि हमारे भारत देश की सेनाओं को मजबूती प्रदान की जा सके और वह हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो सकें।

■ डीआरडीओ की स्थापना कब हुई थी

डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन संस्था की स्थापना साल 1958 में की गई थी और उस समय इसे रक्षा विज्ञान संस्थान के टेक्नोलॉजी विभाग के रूप में स्थापित किया गया था। उस समय डीआरडीओ के पास 10 प्रयोगशाला थी और वर्तमान के समय में डीआरडीओ संस्था के पास हमारे पूरे भारत देश में कई लेबोरेटरी है।

जहां पर विभिन्न प्रकार की शोध चल रही है और वर्तमान के समय में डीआरडीओ संस्था के पास 5000 से अधिक वैज्ञानिक काम कर रहे हैं तथा इसके अलावा इसमें 25000 और कर्मचारी भी काम कर रहे हैं और हमारे भारत देश को रक्षा के क्षेत्र में मजबूत बनाने के लिए प्रयत्नशील है। हमारी भारत सरकार हर साल डीआरडीओ संस्थान पर 16 हजार करोड रुपए खर्च करती है।

■ डीआरडीओ में जाने के लिए शैक्षिक योग्यता

अगर आप डीआरडीओ मे जाना
चाहते हैं या फिर भविष्य में डीआरडीओ मे जाने की इच्छा रखते हैं तो आपको यह जानकारी रखना अति आवश्यक है कि
डीआरडीओ मे जाने के लिए आपको कितनी पढ़ाई करनी पड़ेगी।

अगर आप नहीं जानते तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि डीआरडीओ मे जाने के लिए आपको ग्रेजुएशन की डिग्री लेनी होगी,
हालांकि आपको अपनी ग्रेजुएशन इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी में भारत के किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से करनी होगी
इसके साथ ही आपके 60 प्रतिशत से अधिक अंक होने चाहिए।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि डीआरडीओ में विभिन्न पद होते हैं और इसीलिए सभी पद के लिए अलग-अलग क्वालिफिकेशन मांगी जाती है।

■ डीआरडीओ में जाने के लिए उम्र सीमा

डीआरडीओ मे जाने के लिए अलग-अलग वर्गों के लिए अलग-अलग उम्र सीमा निर्धारित की गई है। जो अभ्यर्थी सामान्य वर्ग से संबंध रखते हैं और डीआरडीओ मे जाना चाहते हैं, वह कम से कम 18 साल और अधिक से अधिक 28 साल तक डीआरडीओ मे जा सकते हैं।

इसके अलावा एससी एसटी, ओबीसी समुदाय को भारतीय संविधान में दिए गए आरक्षण के तहत उम्र सीमा में छूट दी जाती है। sc-st समुदाय से संबंध रखने वाले लोग कम से कम 18 साल और अधिक से अधिक 33 साल तक डीआरडीओ मे जा सकते हैं।

इसके साथ ही अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंध रखने वाले लोग भी कम से कम 18 साल और अधिक से अधिक 31 साल तक
डीआरडीओ मे जा सकते हैं तथा जो दिव्यांग जन हैं वह कम से कम 18 साल और अधिक से अधिक 40 साल तक डीआरडीओ मे जा सकते हैं।

■ डीआरडीओ में जाने के लिए नागरिकता

डीआरडीओ में वही लोग भर्ती हो सकते हैं जो भारतीय नागरिकता रखते हैं। इसके अलावा नेपाल और भूटान के नागरिक भी डीआरडीओ में भर्ती हो सकते हैं तथा सरकार के आदेश के बाद कोई विदेशी साइंटिस्ट भी भारत की डीआरडीओ संस्था में काम कर सकता है।

■ DRDO में कैसे जाएँ

किसी भी संस्था में जाने के लिए या फिर किसी भी प्रकार की नौकरी प्राप्त करने के लिए उसके बारे मे जानकारी होना अति आवश्यक है, इसीलिए अगर आप डीआरडीओ में जाना चाहते हैं, तो आपको इसमें जाने के लिए क्या करना पड़ेगा तथा इसकी तैयारी कैसे करनी पड़ेगी, इसके बारे में जानकारी रखना अति आवश्यक है। आइए जानते हैं कि डीआरडीओ में कैसे जाया जाए।

डीआरडीओ में जाने के लिए आप GATE, SET और CEPTAM के एग्जाम में आवेदन करके साइंटिस्ट बन सकते है।

■ गेट की परीक्षा से डीआरडीओ में कैसे जाएं

अगर अभ्यर्थी गेट की परीक्षा के माध्यम से डीआरडीओ में भर्ती होना चाहते हैं, तो इसके लिए उन्हें गेट की परीक्षा को पास करना जरूरी है, क्योंकि डीआरडीओ संस्था डीआरडीओ में भर्ती गेट और इंटरव्यू में प्राप्त अंकों के माध्यम से साइंटिस्ट बी की भर्ती करती है

और जो अभ्यर्थी साइंटिस्ट बनना चाहते हैं, वह डीआरडीओ के एप्लीकेशन फॉर्म को गेट के द्वारा भर सकते हैं और उसके पेपर को दे सकते हैं और जो उम्मीदवार सफलतापूर्वक गेट के पेपर को पास कर लेगा, उसे फिर इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा और जो उम्मीदवार इंटरव्यू को भी पास कर लेगा, उसे फिर डीआरडीओ में भर्ती कर लिया जाएगा।

■ CEPTAM की परीक्षा से डीआरडीओ में कैसे जाएं

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगर आप इस परीक्षा के माध्यम से डीआरडीओ में भर्ती होना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको लिखित परीक्षा देनी होगी, जिसमें दो चरणों में आपको परीक्षा देनी होगी और अगर आप पहले चरण की परीक्षा को पास कर लेते हैं, तो आप दूसरे चरण की परीक्षा में बैठ सकते हैं।

– टियर – 1 में आपको ऑब्जेक्टिव टाइप के प्रश्न दिए जायेंगे। जो 150 अंक के होंगे। जिसके लिए आपको 2 घंटे का समय दिया जायेगा।

– टियर – 2 में आपसे 100 प्रश्न पूछे जायेंगे। टियर 2 में भी ऑब्जेक्टिव टाइप के होंगे और इसको हल करने के लिये आपको 1 घंटे 30 मिनट का समय दिया जायेगा।

■ DRDO भर्ती 2020 टियर -1 का सिलेबस

– क्वांटिटेटिव एबिलिटी / एप्टीट्यूड
– जनरल इंटेलिजेंस और रीजनिंग एबिलिटी
– जनरल अवेयरनेस
– इंग्लिश लेंग्वेज ( बेसिक नॉलेज )
– जनरल साइंस

■ DRDO भर्ती 2020 टियर 2 – सिलेबस

– टेस्ट स्पेसिफिक टू द सब्जेक्ट ऑफ़ द पोस्ट कोड

■ SET की परीक्षा के द्वारा डीआरडीओ में भर्ती कैसे होए

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह परीक्षा दो चरणों में होती है, जिसमें सबसे पहले आपको लिखित परीक्षा देनी होती है और लिखित परीक्षा में पास होने के बाद आपका इंटरव्यू लिया जाता है।

इसमें आपका अंतिम सिलेक्शन इंटरव्यू पर ही आधारित होता है, इसीलिए अभ्यर्थी को इंटरव्यू की तैयारी अच्छे से करनी चाहिए।हालांकि इंटरव्यू में जाने के लिए आपको परीक्षा भी पास करनी जरूरी है ।

सेट की यह परीक्षा टोटल 3 घंटों की होती है, जिसमें आपसे 500 अंकों के 150 ऑब्जेक्टिव टाइप के सवाल पूछे जाते है।

इसके सेक्शन A में BE, B.Tech, M.sc सिलेबस के अनुसार 400 अंको में से 4 नंबर के 100 अंक पूछे जाते है।

सेक्शन B में 2 अंको के 50 प्रश्न पूछे जाते है जो कुल 100 अंक के होते है जिसमे लॉजिकल रीजनिंग, न्यूमेरिकल रीजनिंग, कांसेप्ट फोर्मशन, स्पेटियल रीजनिंग, एब्सट्रेक्ट रीजनिंग से संबंधित विषय से सवाल पूछे जाते है।

■ डीआरडीओ से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारी

हर साल 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस और 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस हमारे भारत देश में मनाया जाता है और इसके साथ-साथ इसी दिन विज्ञान फोरम और सेमिनार भी आयोजित किया जाता है और इस सेमिनार में डीआरडीओ और डीआरडीओ से बाहर के प्रसिद्ध वैज्ञानिक शामिल होते हैं और विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हैं।

■ DRDO से जुड़े कुछ प्रश्न और उनके उत्तर

– DRDO एग्जाम में अप्लाई करने के लिए कौन सी आधिकारिक वेबसाइट वेबसाइट जारी की है ?

डीआरडीओ में एग्जाम के लिए रजिस्ट्रेशन करने के लिए आप drdo.gov.in वेबसाइट पर जा सकते हैं और परीक्षा से संबंधित अन्य जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।

– DRDO MTS की परीक्षा के लिए उम्मीदवार को कितने टियर में परीक्षा देनी होगी

डीआरडीओ एमटीएस की एग्जाम की परीक्षा अभ्यर्थियों को दो चरणों में देनी होती है और जिस अभ्यर्थी का चयन चरण 1 की परीक्षा में हो जाता है, उसे फिर चरण 2 की परीक्षा में बुलाया जाता है।

– DRDO परीक्षा में आवेदन करने से पहले आवेदनकर्ता को क्या जांचना चाहिए

जो अभ्यर्थी डीआरडीओ में आवेदन करना चाहता है उसे सबसे पहले यह अवश्य देख लेना चाहिए कि उसके शहर में डीआरडीओ की भर्ती का सेंटर खुला है या नहीं और उसके बाद आपको अपनी क्वालिफिकेशन, योग्यता भी जांच लेनी चाहिए तथा आपके पास पर्याप्त डॉक्यूमेंट है या नहीं, इसकी भी जांच अवश्य कर लेनी चाहिए।

– जो अभ्यर्थी के DRDO साइंटिस्ट के लिए अप्लाई करना चाहते है उन्हें कौन-कौन से एग्जाम में आवेदन करना चाहिए

अगर आप DRDO में साइंटिस्ट बनना चाहते है तो आप GATE, SET, CEPTAM के एग्जाम में अप्लाई कर सकते है।

आपकी और दोस्तों

तो दोस्तों ये था DRDO का फुल फॉर्म क्या है, हम उम्मीद करते है की इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपको DRDO के बारे में पूरी जानकारी मिल गयी होगी|

अगर आपको हमारी ये पोस्ट अच्छी लगी है तो प्लीज इसको जरुर शेयर करे और लाइक करना ना भूले ताकि अधिक से अधिक लोगो को drdo के फुल फॉर्म के बारे में जानकारी मिल पाए, धन्येवाद दोस्तों|

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