DM Full Form In Hindi | DM का फुल फॉर्म क्या है

DM Full Form In Hindi: दोस्तों हमारे आज के इस आर्टिकल में हम आपको “डीएम की फुल फॉर्म” के बारे में जानकारी देने वाले हैं। अगर आप इंटरनेट पर यह सर्च करते रहते हैं कि, डीएम का फुल फॉर्म क्या होता है या फिर डीएम का मतलब क्या होता है, तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं, क्योंकि आज के इस आर्टिकल में आपको डीएम से संबंधित सभी जानकारी प्राप्त होगी।

हमारा भारत देश जनसंख्या के मामले में विश्व में दूसरा सबसे बड़ा देश है। हमारे देश के पहले जनसंख्या के मामले में चीन का नंबर आता है। वर्तमान में हमारे भारत देश की जनसंख्या 130 करोड़ के पार पहुंच गई है और इतनी बड़ी जनसंख्या होने के कारण अपराध दर भी हमारे भारत में बहुत ज्यादा है।

और अपराध को कम करने के लिए तथा लोग कानून का पालन करे, इसके लिए हमारी भारतीय सरकार ने भारतीय पुलिस विभाग की स्थापना की है, जो भारत के हर जिले में रहकर कानूनों का पालन करवाती है और जो अपराधी होते हैं उन्हें पकड़कर कोर्ट के सामने पेश करती है और फिर कोर्ट उस अपराधी को सजा सुनाती है।

इसके अलावा हमारे देश की सीमा की सुरक्षा के लिए हमारी भारतीय सरकार ने विभिन्न आर्मी को तैनात किया हुआ है,जिसमें जल, थल और वायु सेना शामिल है।

इसके अलावा हमारे भारत के जंगलों में तथा ऐसे इलाकों में जो नक्सली से प्रभावित है, वहां पर भारतीय सरकार ने सीआईएसएफ और सीआरपीएफ की स्थापना की है।

जो नक्सली हमलों से आम लोगों को बचाते हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि किसी भी सिस्टम को चलाने के लिए बहुत से लोगों की आवश्यकता होती है, अगर इसे उदाहरण के तौर पर समझा जाए पुलिस को अपराधी को गिरफ्तार करने का अधिकार है ना कि उसे सजा देने का।

परंतु कई बार ऐसा होता है कि, पुलिस खुद ही बेलगाम हो जाती है और वह अपनी मनमर्जी करने लगती है। आपने ऐसे कई उदाहरण देखे होंगे, जहां पर पुलिस खुद ही नियम कानून को ताक पर रखकर कई निर्णय लेने लगती है,

जिससे लोगों को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसीलिए हमारी भारतीय सरकार ने सभी लोगों को मैनेज करने के लिए किसी ना किसी अधिकारी को रखा है।

उदाहरण के तौर पर अगर पुलिस में कोई व्यक्ति सब इंस्पेक्टर के पद पर है तो उसे नियंत्रित करने के लिए एसओ का पद भी रखा जाता है और एसओ को नियंत्रित करने के लिए सीओ का पद रखा जाता है

तथा एस आई, एसओ और सीओ को नियंत्रित करने के लिए भारत सरकार ने हर जिले में एक डीएम को भी नियुक्त किया होता है।डीएम अपने जिले के सभी थानों का समय-समय पर निरीक्षण करते हैं, इसके अलावा भी डीएम अन्य कई काम करते हैं।

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DM Full Form In Hindi

DM का फुल फॉर्म क्या है

DM Full Form in Hindi

■ डीएम का अंग्रेजी में फुल फॉर्म क्या होता है

सबसे पहले तो आइए जान लेते हैं कि, डीएम का अंग्रेजी में फुल फॉर्म क्या होता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, डीएम का अंग्रेजी में फुल फॉर्म होता है “डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट”।डीएम को हिंदी में जिलाधिकारी कहा जाता है।

यह किसी एक जिले में होने वाले सभी कामों की देखरेख करते हैं और डीएम जिस जिले में तैनात रहते हैं, उस जिले के सभी थाने तथा अन्य सरकारी विभाग डीएम के अंदर काम करते हैं। भारत के हर राज्य के हर जिले में एक डीएम की ही नियुक्ति की जाती है। 1 जिले में एक से अधिक डीएम नहीं रखा जाता।

■ डीएम को हिंदी में क्या कहते हैं

डीएम को हिंदी में जिलाधिकारी कहते हैं और इसे अंग्रेजी में डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट कहा जाता है।

■ डीएम क्या है

डीएम यानी कि डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट भारत के किसी भी राज्य के किसी भी जिले का प्रमुख अधिकारी होता है। डीएम को इसीलिए जिलाधिकारी कहा जाता है, क्योंकि डीएम जिस जिले में नियुक्त होता है, उस जिले से संबंधित सारे अधिकार उसके पास होते हैं।

जिस जिले में डीएम नियुक्त होता है, उस जिले में आने वाले सभी पुलिस थाने, सभी सरकारी अस्पताल, सभी सरकारी फायर स्टेशन तथा अन्य सभी सरकारी विभाग डीएम के अंदर काम करते हैं।

अगर डीएम कोई आदेश देता है, तो वह आदेश सरकारी विभाग को मानना होता है। जैसे अगर डीएम ने आदेश दिया कि किसी क्षेत्र में धारा 144 लगानी है तो पुलिस का काम है कि उस क्षेत्र में में धारा 144 लगाए और उसका पालन करवाएं।

डीएम का मुख्य काम होता है कि वह अपने जिले में कानून व्यवस्था को बनाए रखें और उसके जिले में सरकारी विभाग तथा अन्य विभाग अपना काम सही ढंग से कर रहे या नहीं उसकी जांच करें।

इसके अलावा कभी-कभी डीएम भारतीय सरकार को देश के विकास के लिए राय देने का काम भी करते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सामान्य तौर पर डीएम जिस राज्य में काम करता है, उस राज्य के मुख्यमंत्री के आदेशों का पालन करता है।। हालांकि मुख्यमंत्री डी एम के काम में बहुत कम ही हस्तक्षेप करते हैं।

■ डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के तौर पर दायित्व

डीएम का सबसे प्रमुख काम होता है, कि वह अपने जिले में शांति बनाए रखें तथा कानून व्यवस्था का पालन करवाएं। इसके अलावा एक डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के जिले में काम करने वाले अन्य सभी मजिस्ट्रेट की गतिविधियों पर भी नजर बनाए रखने का काम करता है।

डीएम अपने जिले में कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ जिले में आपराधिक प्रक्रिया कोड के निवारक खंड के तहत डीएम को आवश्यक कार्रवाई करने का अधिकार भी प्राप्त होता है।

इसके लिए डीएम को अपने जिले को किसी भी अप्रिय घटना से बचाने के लिए निर्णय लेने के लिए स्वतंत्रता प्रदान है। यह डिसीजन पब्लिक सिक्योरिटी,नागरिकों की सुरक्षा या जिले के अधिकारों से सम्बंधित हो सकते हैं।

कभी-कभी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट सरकार के द्वारा आदेश पाने के बाद किसी विशेष मामले की सुनवाई भी कर सकते हैं और उस मामले में अपना निर्णय भी सुना सकते हैं।इसलिए यह कहा जा सकता है कि डीएम कुछ स्थितियों में क्रिमिनल और नागरिक न्याय भी कर सकते हैं।

एक डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट का यह भी कर्तव्य होता है कि वह अपने जिले में काम करने वाले सभी पुलिस विभाग को नियंत्रित करें। इसके अलावा डीएम अपने जिले में होने वाली अपराधिक घटनाओं की रिपोर्ट राज्य सरकार के मांगने पर उनके सामने प्रस्तुत करने का काम भी करता है।

इसके अलावा जिलाधिकारी साल में कम से कम एक बार पुलिस स्टेशन को सुपरवाइज करता है और वह वीजा तथा पासपोर्ट से संबंधित मामलों की सिफारिश करता है। इसके अलावा जिले में कौन से विदेशी नागरिक आ रहे हैं, इसकी निगरानी करना भी डीएम का कर्तव्य होता है।

डीएम अपने जिले में शांतिपूर्ण इलेक्शन करवाने के लिए भी जिम्मेदार होता है। चुनाव के समय डीएम की यह जिम्मेदारी होती है, कि वह अपने जिले के सभी आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्तियों पर नजर बनाए रखें।

इसके अलावा चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद डीएम चुनाव आयोग के आदेश पर अवैध असलहा की रिकवरी के लिए आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्तियों को नोटिस भी देता है तथा सड़कों पर चेकिंग लगाकर भी गाड़ियों की चेकिंग की जाती है।

इसके अलावा जिलाधिकारी अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा समुदाय और स्वतंत्रता सेनानियों को प्रमाण पत्र जारी करने का भी अधिकार रखता है। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णो को दिए जाने वाले आरक्षण के सर्टिफिकेट पर अपने सिग्नेचर भी करता है।

साथ ही डीएम गांव में चौकीदार की नियुक्ति के लिए उत्तरदाई होता है। इसके अलावा डीएम कानून का पालन ना करने वालों एवं शांति भंग करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार भी रखता है।

इसके अलावा डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट अपने जिले का बजट राज्य सरकार के सामने प्रस्तुत करने का काम भी करता है।

■ डीएम बनने के लिए योग्यता

अगर हम डीएम बनने के लिए कम से कम शैक्षिक योग्यता के बारे में बात करें तो, डीएम बनने के लिए अभ्यर्थी को भारत के किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की डिग्री लेना जरूरी है और यह डिग्री अभ्यर्थी किसी भी विषय में ले सकता है।

अभ्यर्थी अपना ग्रेजुएशन साइंस, आर्ट्स या कॉमर्स किसी भी विषय से कर सकता है। कहने का मतलब है कि, डीएम बनने के लिए कोई विशेष सब्जेक्ट निर्धारित नहीं है। इसीलिए हर वह विद्यार्थी डीएम बनने की कोशिश कर सकता है जिन्होंने चाहे बीए किया हो,बीकॉम किया हो या फिर बीएससी का कोर्स किया हो।

हालांकि इसके लिए आपकी आयु इसके आगे ना आए, क्योंकि बहुत से ऐसे लोग होते हैं, जो ओवरेज हो जाते हैं और उनका डीएम बनने का सपना अधूरा रह जाता है। हालांकि डीएम बनने के लिए विभिन्न कैटेगरी के हिसाब से उम्र सीमा अलग-अलग हो सकती है।

डीएम बनने के लिए जो उम्मीदवार सामान्य वर्ग से संबंध रखते हैं, उनकी कम से कम उम्र 21 साल और अधिक से 32 साल होनी चाहिए। इसके अलावा अन्य वर्गों के लोगों को भारतीय संविधान में दिए गए आरक्षण के तहत छूट दी गई है, जो नीचे बताए अनुसार है।

– अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए 5 वर्ष तक की छूट ।

– अन्य पिछड़ा वर्ग को तीन वर्षों की छूट का प्रावधान ।

– रक्षा सेवा कर्मियों को तीन वर्षों की छूट का प्रावधान ।

– पूर्व सैनिकों सहित कमीशन अधिकारीयों को पांच साल की छूट का प्रावधान ।

– अंधे, बहरे, मूक एवं ऑर्थोपेडिक रूप से विकलांग व्यक्तियों को दस साल छूट का प्रावधान ।

■ डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट बनने के लिए क्या करें

जो अभ्यर्थी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट बनना चाहता है, उसे सबसे पहले भारत के किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से रिजर्वेशन की डिग्री प्राप्त करनी होगी, क्योंकि डीएम बनने के इच्छुक अभ्यर्थी को सबसे पहले आईएएस ऑफिसर बनना होता है।

हालांकि आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, एक डिस्टिक मजिस्ट्रेट भी आईएएस ऑफिसर ही होता है, परंतु आम तौर पर आईएएस बनने के बाद एक दो पदोन्नति होने के बाद अधिकतर लोगों को डीएम बनने का मौका मिलता है।

इसीलिए जो अभ्यर्थी डीएम बनना चाहता है, उसे अपनी ग्रेजुएशन को पूरा करने के बाद यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन के द्वारा आयोजित करवाई जाने वाली सिविल सर्विस एग्जाम में हिस्सा लेना होता है और एग्जाम को अच्छे अंको से पास करना होता है।।

एक जानकारी के मुताबिक ऐसे व्यक्ति जिनके सीएसई परीक्षा में रैंक 100 के अंदर होती है, उनके डीएम बनने की संभावना सबसे अधिक होती है।

इसीलिए डीएम बनने के इच्छुक अभ्यर्थियों को यह चाहिए कि, वह सिविल सर्विस परीक्षा में अच्छे से अच्छे अंक लाने का प्रयास करें ताकि उनकी रैंक अच्छी है।

कहने का मतलब यह है कि, भारत के किसी भी राज्य के किसी भी जिले में डीएम बनने के इच्छुक विद्यार्थियों को सबसे पहले आईएएस ऑफिसर बनना होगा, आइए आगे जानते हैं कि आईएएस ऑफिसर कैसे बनते हैं।

जब अभ्यर्थी आईएएस ऑफिसर बन जाता है तो आईएएस ऑफिसर बनने के बाद अभ्यर्थी को डीएम बनने के लिए इंतजार एवं अपनी ड्यूटी पूरी लगन से करनी होती है

क्योंकि सामान्य तौर पर आईएएस ऑफिसर एक ही दो पदोन्नति पाने के बाद डीएम के पद प्राप्त कर लेते हैं। जिस अभ्यर्थी की एग्जाम में अच्छी रैंक होती है वह अपने मन के मुताबिक अपनी ड्यूटी करने के लिए राज्य या फिर जिले का चुनाव कर सकते हैं।

संक्षेप में कहें तो डीएम बनने के लिए सबसे पहले अभ्यर्थियों को अपनी ग्रेजुएशन पूरी करनी होगी, उसके बाद यूपीएससी के द्वारा आयोजित करवाई जाने वाली सिविल सर्विस एग्जाम की तैयारी करके उसमें अच्छी रैंक लानी होगी और फिर आईएएस ऑफिसर बनना होगा, उसके बाद जब उसकी पदोन्नति होगी, तो वह अपने आप ही डीएम बन जाएगा।

■ डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट का वेतन एवं अन्य सुविधाएँ

जैसा कि हम जानते हैं कि, प्रशासनिक ढांचे में डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट पूरे जिले का अधिकारी होता है और इसीलिए उसे जिलाधिकारी भी कहते हैं,इसीलिए जिलाधिकारी को सरकार द्वारा बहुत सी शक्तियां और पावर प्रदान की जाती है।

इसके अलावा डीएम को मासिक तौर पर अच्छी खासी पगार भी दी जाती है, हालांकि असंवैधानिक तौर पर एक डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट की कमाई के बहुत से तरीके होते हैं, परंतु कानूनी तौर पर जिलाधिकारी की कमाई का मुख्य जरिया उसकी पगार ही होती है।

2017 के एक आंकड़े के अनुसार एक डीएम की महीने की सैलरी ₹50000 से लेकर ₹100000 के आसपास होती है।इसके साथ जैसे-जैसे उनका कार्यकाल बढ़ता जाता है वैसे वैसे उनकी सैलरी में भी वृद्धि होती रहती है।

महीने की पगार के अलावा डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को पीएफ तथा ग्रेजुएटी का लाभ भी मिलता है, इसके अलावा भी उन्हें अन्य कई सरकारी लाभ मिलते हैं, जिसकी जानकारी नीचे बताई गई है।

जिस जिले में डीएम की पोस्टिंग होती है, वहां पर डीएम को रहने के लिए सरकार द्वारा मुफ्त सरकारी बंगला दिया जाता है। इसके अलावा डीएम के आवागमन के लिए उसे सरकारी वाहन भी दिया जाता है

साथ ही महीने का फ्री पेट्रोल और डीजल खर्चा भी दिया जाता है। एक डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को मोबाइल, टेलीफोन, बिजली कनेक्शन मुफ्त में मुहैया करवाया जाता है। इसके अलावा उसे सरकार द्वारा विभिन्न प्रकार के नौकर जैसे ड्राइवर,माली, रसोईया, पर्सनल असिस्टेंट इत्यादि भी दिए जाते हैं।

साथ ही डीएम को सरकार द्वारा सुरक्षा देने के लिए पुलिस ऑफिसर या फिर होमगार्ड भी दिए जाते हैं। इसके अलावा डीएम को अन्य भत्ते जैसे स्टेशनरी और वाहन भत्ता भी दिया जाता है।

■ डीएम एग्जाम पैटर्न

डीएम बनने के लिए सबसे पहले आपको यूपीएससी के द्वारा आयोजित करवाई जाने वाली सिविल सर्विस एग्जाम में शामिल होना होता है और आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यूपीएससी के द्वारा आयोजित करवाई जाने वाली सिविल सर्विस एग्जाम 3 चरणों में संपन्न होती है।

इसमें सबसे पहले लिखित परीक्षा होती है फिर मुख्य परीक्षा होती है और सबसे आखरी में अभ्यर्थी का इंटरव्यू लिया जाता है।आइए इसके बारे में जानते हैं।

– प्रारंभिक परीक्षा

इस परीक्षा में अभ्यर्थी को 2 क्वेश्चन पेपर दिए जाते है। इसमें पहले क्वेश्चन पेपर में अभ्यर्थी से एक नंबर के सवाल पूछे जाते हैं और दूसरे प्रश्न पत्र में अभिव्यक्ति से ढाई नंबर के सवाल पूछे जाते हैं।

इस पेपर को देने के लिए अभ्यर्थियों को दो दो घंटे का समय दिया जाता है और इस पेपर में ऑब्जेक्टिव प्रश्न पूछे जाते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग भी की जाती है, इसलिए आपको जिस प्रश्न का सही से जवाब नहीं आता, उसे खाली छोड़ दें।

– मुख्य परीक्षा

लिखित परीक्षा को पास करने के बाद अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में शामिल होना होता है। इस परीक्षा में टोटल 9 क्वेश्चन पेपर होते हैं और इसमें हर क्वेश्चन पेपर को देने के लिए आपको यूपीएससी की तरफ से 3 घंटे का समय दिया जाता है।इस परीक्षा में आपसे निबंध के प्रश्न पूछे जाते हैं तथा इस परीक्षा में करंट अफेयर तथा ऑब्जेक्टिव और सब्जेक्ट इन दोनों प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं।इस परीक्षा में हर प्रश्न पत्र 250 अंकों का होता है।

– इंटरव्यू

प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को सबसे आखरी में इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है और जो अभ्यर्थी सफलतापूर्वक इंटरव्यू को भी पास कर लेता है, उसे उसके रैंक के हिसाब से पद दिए जाते हैं।

■ डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के कार्य संक्षेप में

– भूमि मूल्यांकन का कार्य ।

– जिला बैंकर्स समन्वय समिति के अध्यक्ष के तौर पर कार्य करने की जिम्मेदारी ।

– जिला उद्योग केंद्र के प्रमुख के तौर पर कार्य करना ।

– भूमि अधिग्रहण ।

– भूमि राजस्व का संग्रह करना ।

– सभी प्रकार के टैक्स जैसे आयकर, उत्पाद शुल्क, सिंचाई इत्यादि से सम्बंधित बकाये रकम का संग्रह करना ।

– कृषि ऋण का वितरण करना ।

– बाढ़, अकाल या महामारी जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी ।

– दंगों या बाहरी आक्रामकता के दौरान संकट प्रबंधन की जिम्मेदारी ।

■ डीएम को मिलने वाली सरकारी सुविधाएं संक्षेप में

– डीएम को सरकार द्वारा मुक्त आवास दिया जाता है

– डीएम को सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा मुफ्त बॉडीगार्ड दिए जाते हैं

– आवागमन के लिए सरकारी वाहन दिया जाता है

– पीएफ और ग्रेजुएटी का लाभ मिलता है

– स्टेशनरी भत्ता और वाहन भत्ता मिलता है

– घर में काम करने के लिए नौकर दिए जाते हैं

– गाड़ी चलाने के लिए ड्राइवर दिया जाता है

– मोबाइल, टेलीफोन, बिजली कनेक्शन मुफ्त में दिया जाता है

■ डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट बनने से संबंधित अन्य प्रश्न

– डीएम का फुल फॉर्म क्या होता है

डीएम का फुल फॉर्म होता है डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट

– डीएम को हिंदी में क्या कहते हैं

डीएम को हिंदी में जिलाधिकारी कहते हैं।

– डीएम के महीने की तनख्वाह कितनी होती है

डीएम की महीने की तनख्वाह ₹50000 से लेकर डेढ़ लाख के आसपास होती है,अनुभव बढ़ने पर डीएम की तनख्वाह भी बढ़ती है।

– डीएम बनने के लिए क्या करना होता है

डीएम बनने के लिए सबसे पहले ग्रेजुएशन पूरी करनी होती है, फिर यूपीएससी के द्वारा करवाई जाने वाली सिविल सर्विस परीक्षा में अच्छे अंक लानी होती है, तब जाकर आप डीएम बनते हैं।

– क्या डायरेक्ट डीएम बन सकते हैं

आप डायरेक्ट डीएम नहीं बन सकते। डीएम बनने के लिए सबसे पहले आपको आईएएस ऑफिसर बनना होगा, उसके बाद एक दो पदोन्नति होने के बाद आप डीएम का पोस्ट प्राप्त करेंगे।

– डीएम बनने के लिए उम्र सीमा क्या है

डीएम बनने के लिए सामान्य वर्ग से संबंध रखने वाले अभ्यर्थियों की उम्र सीमा 21 साल से लेकर 32 साल तक है। इसमें sc-st समुदाय को उम्र में 5 साल की छूट तथा ओबीसी समुदाय को उम्र में 3 साल की छूट सरकार द्वारा दी जाती है।हालांकि उम्र में छूट को प्राप्त करने के लिए इन दोनों समुदाय के लोगों को अपने आरक्षण का सर्टिफिकेट दिखाना जरूरी होता है।

– डीएम बनने के लिए छात्र कितनी बार परीक्षा को दे सकते हैं

जो अभ्यर्थी सामान्य वर्ग से संबंध रखते हैं और डीएम बनना चाहते हैं, वह अधिकतम 6 बार डीएम बनने की परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा ओबीसी समुदाय से संबंध रखने वाले अभ्यर्थी अधिकतम 9 बार डीएम की परीक्षा को दे सकते हैं।

तथा sc-st यानी की अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंध रखने वाले अभ्यर्थी जितनी चाहे उतनी बार डीएम बनने की परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। इन वर्गों से संबंध रखने वाले अभ्यर्थियों के लिए अधिकतम प्रयास की कोई भी सीमा निर्धारित नहीं की गई है।

इसके अलावा जो लोग विकलांग होते हैं, उनके लिए भी अधिकतम परीक्षा देने की सीमा निर्धारित नहीं की गई है। विकलांग लोग जितनी चाहे उतनी बार डीएम बनने की परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।

– डीएम बनने के लिए कौन सी परीक्षा देनी होती है

डीएम बनने के लिए अभ्यर्थियों को यूपीएससी के द्वारा आयोजित करवाई जाने वाली सिविल सर्विस एग्जाम को देना होता है और इसमें अच्छी रैंक लानी होती है।

– डीएम बनने के लिए कितने नंबर तक की रैंक अच्छी मानी जाती है

डीएम बनने के लिए रैंक 1 से लेकर रैंक 100 के बीच की रैंक अच्छी मानी जाती हैं। अगर आपका रैंक 1 से लेकर 100 के बीच है, तो आप अपनी मर्जी के मुताबिक अपनी पोस्टिंग भारत के किसी भी जिले में ले सकते हैं।

आपकी और दोस्तों:

तो दोस्तों ये था डीएम का फुल फॉर्म क्या होता है, अगर आपको हमारी ये पोस्ट अच्छी लगी तो पोस्ट को १ लाइक जर्रूर करे और अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करना ना भूलें|

क्यूंकि हम चाहते है की ज्यादा से ज्यादा लोगो को डीएम का फुल फॉर्म के बारे में पूरी जानकारी मिल पाए. धन्येवाद दोस्तों|

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