दिवाली क्यों मनाई जाती है – दीपावली मनाने के कारण

दीपावली क्यों मनाया जाता है – नमस्कार दोस्तों कैसे हो आप लोग आज के इस पोस्ट में हम आपको बताएँगे की दीवाली क्यों मनाई जाती है और इसका कारण क्या है. दोस्तों भारत एक ऐसा देश है जहा पर हर जाती धर्म के लोग रहते है और भारत में बहुत ज्यादा त्यौहार मनाये जाते है.

हर महीने कोई ना कोई त्यौहार भारत के अलग अलग जाती धर्म में मनाया जाता है. लेकिन दीपवाली का त्यौहार की बात ही कुछ और है. दिवाली एक ऐसा त्यौहार है जिसको चाहे वो हिंदू, मुस्लिम, सिख या इसयाई हो हर कोई इस त्यौहार को बड़े ही धूम धाम से मानते है.

दिवाली दशहरा के २० दिन बाद आता है और हर किसी को इस त्यौहार का बड़े ही बेसब्री से इंतजार होता है. दीपावली एक ऐसा पर्व है जो की पुरे भारत में मनाया जाता है लेकिन इस फेस्टिवल को लोग क्यों मानते है और इसका कारण क्या है हर किसी को पता नहीं है.

तो इस पोस्ट में हम आपके साथ इस त्यौहार से जुड़े कहानिया बताएँगे ताकि आपको भी पता चल पाए की पुरे भारत में दिवाली क्यों मनाई जाती है. तो चलो फ्रेंड्स पोस्ट को स्टार्ट करते है.

पढ़े – दिवाली कैसे मनाई जाती है

दिवाली क्यों मनाई जाती है

दीपावली मनाने के कारण

Diwali Kyu Manaya Jata Hai Karan

१. श्री राम के वनवास से लौटने की खुशी

ये कहानी तो हर किसी को पता है की हम दिवाली भगवान श्री राम के वनवास से लौटने की ख़ुशी में मानते है. मंथरा के गलत सोच से पीड़ित होकर भरत की माँ कैकई राम को उनके पिता दशरत से वनवास भेजने के लिए वचनवृद्ध कर देती है.

श्री राम अपने पिता की हर बात मानते थे और वो जो कहते थे वो करते थे और इसलिए लिए वो अपने माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ १४ साल के वनवास के लिए अपने घर से निकल पड़े. वो लोग जिस वन में रहते थे वही से रावण सीता माता को छल से उनका अपहरण कर लेता है.

तभी भगवान श्री राम, सुग्रीव की वानर सेना और हनुमान जी के साथ मिलकर रावण का वध करके सीता माता को वह से छुड़ा लाते है. और इस दिन को दशहरा के रूप में पुरे भारत में मनाया जाता है.

और जब राम अपने घर अयोध्या लौटते है तो पुरे शहर के लोग उनकी आने की खुशी में रात को दीपक जलाते है और पुरे शहर जगमगा उठता है. इसके बाद से ही इस दिन पर दिवाली मनाई जाती है.

पढ़े – दिवाली त्यौहार का महत्व

२. पांडवो का लौटना

आप लोगो ने तो महाभारत की कहानी तो सुनी ही होगी राईट? कौरवों ने चालक और चतुर शकुनी मामा के चल की मद्दद से शतरंज के खेल में पांडवो का सभ कुछ छीन लिया. यहाँ तक की पांडवो को उनका राज्य छोड़कर १३ साल के लिए वनवास भी जाना पड़ गया था.

इसी कार्तिक अमावस्या को वो ५ पांडव युधिस्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव १३ साल के वनवास से अपने राज्य वापिस लौटे थे. और इसी कारण पांडवो के वापिस राज्य में लौटने की ख़ुशी से राज्य के सभी लोग ने दिया जलाकर खुशिया मनाई थी. इसकी वजह से भी लोग इस दिन को दीपावली मानते है.

३. गुरु को आजादी मिलने के कारण

मुग़ल बादशाह जहांगीर ने सिखों के ६ नंबर के गुरु गोविन्द सिंह के साथ ५२ राजाओं को ग्वालियर के किले में बंधी बनाकर कैद किया था. गुरु को कैद करने के बाद बादशाह जहांगीर को मानसिक प्रॉब्लम होने लगी और वो बहुत ही ज्यादा परेशान रहता था.

बादशाह जहांगीर के सपने में किसी फ़क़ीर द्वारा गुरु को आजाद करने के हुकुम दिया गया था. जब गुरु गोविन्द सिंह को आजाद किया जाने वाला था तब गुरूजी ने अपने साथ के सभी राजाओ को भी रिहा करने की मांग प्रकट करी.

उनके कहने पर ही दुसरे सभी राजाओं को भी आजादी मिल गयी थी और इसी के कारण सिख धर्म के लोग भी दिवाली को मानते है.

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४. नरकासुर का वध

दीपावली के दिन पर ही भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था. नरकासुर बहुत ही बत्तमीज और क्रूर किसिम का इंसान था और वो प्रग्यज्योतिषपुर का राजा था जो की आज के टाइम पर नेपाल का एक प्रांत है.

नरकासुर इतना क्रूर था की उसने देवमाता अदिथि के बेहद कीमती कान की बालिया तक छीन लिया था. देवमाता भगवान श्री कृष्ण की पत्नी सत्यभामा की रिश्तेदार थी. नरकासुर ने कुलमिलाकर १६ भगवान की कन्याओ को बंधी बनाकर कैद करके रखा था.

श्री कृष्ण भगवान की मद्दद से सत्यभामा ने नरकासुर का वध कर दिया था और सभी देवी कन्याओ को आजाद किया था. और इसकी वजह से लोग दिवाली मानते है.

पढ़े – दिवाली कब है दिनाक

५. लक्ष्मी जी का अवतार

हर साल दीपावली का त्यौहार कार्तिक महीने के अमावस्या के दिन पर मनाया जाता है. इसी दिन समुन्द्र मंथन के दौरान लक्ष्मी माता जी ने सृस्ठी में अवतार लिया था. लक्ष्मी माता जी को धन की देवी माना जाता है.

इसकी कारण दिवाली के दिन हर घर में दीप जलाने के साथ साथ लक्ष्मी जी की आरती और पूजा करी जाती है ताकि लक्ष्मी जी उनसे खुश रहे और उनके घर में पैसे की बरकत बनी रहे.

६. राजा विक्रमदित्य का राज्याभिषेक

राजा विक्रमदित्य प्राचीन भारत के एक बहुत ही महान सम्राट थे. वो बहुत ही साहसी, निडर, दयालु और बुद्धिमान थे जिसके कारण उनकी लोग हमेशा प्रशंशा करते थे. इसी कार्तिक अमावस्या को उनका राज्याभिषेक हुआ था.

सम्राट विक्रमदित्य मुगलों को पराजित करने वाले भारत के अंतिम सम्राट थे. मुगुलो को पराजित करने की ख़ुशी में लोग इस दिन पर दिवाली मानते है.

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आपकी और दोस्तों

तो दोस्तों ये था भारत में दिवाली क्यों मनाई जाती है, हम उम्मीद करते है की सभी कहानियों को पढने के बाद आपको पता चल गया होगा की दीपावली क्यों मनाया जाता है.

दोस्तों यदि आपको ये पोस्ट हेल्पफुल लगी तो इस पोस्ट को अपने दोस्तों और घर परिवारवालों के साथ फेसबुक और whatsapp पर जरुर शेयर करे ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगो को दीवालों मनाने का कारण और वजह पता चल पाए. धन्येवाद दोस्तों.

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