Dhoka Shayari in Hindi | प्यार में धोखा शायरी

नमस्कार दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम आपके साथ प्यार में धोखा शायरी शायरी करने जा रहे है और हम उम्मीद करते है की आपको ये शायरी जरुर पसंद आएगी.

जब कभी भी प्यार में धोका मिलता है तब दिल पूरी तरह से टूट जाता है और फिर कुछ भी समझ में नहीं आता है की अब इस टूटे हुए दिल को कैसे संभाले.

Dhoka Shayari in Hindi

प्यार में धोखा शायरी

Dhoka-Shayari

1.
धोका कुछ इस कदर उसने मुझे दिया था
मेरे इतना प्यार करने के बाद भी
उसने किसी और से प्यार किया था

2
उस धोखेबाज से
मोहब्बत की उम्मीद करना ही मेरी सबसे बड़ी गलती थी उसने ही दिया है मुझे धोका
तो उस बेवफा से वफा की
उम्मीद करना ही मिल सबसे बड़ी भूल थी

3
मैंने उसे कितना प्यार किया था
मैंने उसे कितना चाह था
हर इबादत में मांगा था
फिर भी उसने मुझे झूठ बोला था

4
मैं अब उसका क्या इंतजार करूंगा
मैं अब क्या उससे प्यार करूंगा
वह तो किसी और का है
मैं अब क्या मुझ पर एतबार करुंगा

5
वह किसी और के साथ खुश रहे
मैं यही चाहता हूं
वह करे किसी और से मोहब्बत मैं यही चाहता हूं

6
मुझे तो हर शख्स ने धोखा दिया है
उसने दिया तो क्या हो गया
मैंने तो हर किसी से की थी उम्मीद
और हर किसी ने मुझे दर्द दिया है तो क्या हो गया

7
अब मैं कुछ इस तरह गम में रहा करता हूं
अगर वह है खुश किसी और के साथ
तो मैं भी अब तो बहुत खुश रहा करता।

8
इन आंखों में कभी उसके सिवा
और कोई चेहरा नहीं आया
बहुत आई मेरी जिंदगी में मोहब्बत
पर उस जैसा कोई नहीं आया
और वो चली गई मुझे छोड़कर
मैंने तो कभी उसे नहीं सताया

9
अब सिर्फ तुम मुझे दुआओं में याद रखना
तुम अब मुझसे मोहब्बत कभी नहीं करना
किसी और के साथ हो गई है मोहब्बत
तो अब मुझसे मिलने की कोशिश मत करना

10
हर सफर उसके साथ तय किया था
मेने उसे इतना चाहा था
वो थी मैरी मोहब्बत
फिर भी उसने किसी और को चाहा था।

11
इश्क़ तुम से बेइंतहा किया..
वक़्त तुझे हर पल दिया..
वफाई दिल से की..
पर जालिम बेवफाई दे गया।

12.
वो कुछ इस तरह मिली..
बेवफा बन कर मिली..
ऐसे कौनसे गुनाह थे खुदा.
जो मुझे बेवफाई मिली!

13.
बेवफाई का आलम ये था जनाब..
की उसको यादों से भी नफरत होने लगी..
उसके खतों को बहा दिया पानी में…
और कोई पढ़ ना ले इसलिए..
पानी में भी आग लगा दी है।

14
जख्म इतने है दिल पे..
की किसी पे ऐतबार नहीं ..
डर सा लगने लगा है अब जमाने से..
कहीं सब बेवफा तो नहीं !

15
कुछ हुस्न वालो ने हसीन बनकर गुनाह किया..
किसी और से क्या वास्ता उन्होंने मुझे भी तबाह किया..
पेश की जब शायरी उनकी बेवफाई की..
दुसरो ने क्या उन्होंने भी वाह वाह किया!

16
दिल तोड़ ही दिया है तो ..
जला दो अरमान मेरे..
ताकि हो जाये हम खाक..
ये सही है इससे तो ,की देखना तेरा..
गैरो के संग मुस्कुराना!

17
बेवफा से दिल लगा बैठे थे एक दिन..
उस सूरत में कितने नादान थे हम..
वो आज बता रहे थे हमें अंजान ..
जिनकी कभी जान थे हम!

18
ना मोहब्बत मिली ना प्यार..
हमें मिले बेवफा यार..
यहाँ तो बन गयी तमाशा जिंदगी..
हर कोई मकसद का तलबगार !

19
जिनसे मिले ये नैन मेरे..
बने थे जिंदगी के सिलसिले हमारे..
इतने प्यार के बाद भी सनम बेवफा निकले..
लो अब हम खुद से ही हारे!

20
मोहब्बत उससे कुछ इस कदर निभा गए
वो देते रहे हमे धोका
हम फिर भी उनसे मोहब्बत निभा गए।।

21
अब जिंदगी कुछ इस तरह जीना है
हमे भी सबको भुला देना है
जो देते है हमे धोका
हमे भी उन्हें याद नही रखना है।

22
वो कुछ इस तरह हमें भुलाने लगे हैं
किसी और से दिल लगाने है
वो नही करते हमसे मोहब्बत
और हमे अब धोका देने लगे है।।

23
मैं अब कुछ नहीं बताते
हम भी उन्हें कुछ नहीं समझाते
उन्होंने हमसे मोहब्बत
तो हम भी उनसे दिल नहीं लगाते

24
वह जहां रहे खुश रहे बस यही चाहता हूं
मैं तो हरदम उसकी खुशी ही चाहता हूं
उसके जीवन में रहे सब अच्छा
पर उस धोक बाज को अब देखना नही चाहता हूं।।

24
अब मैं उससे कुछ नही कहता
मुझे अब कुछ अच्छा नही लगता
वो है अगर धोखेबाज
तो मैं भी उसे अब अपनी जान नही कहता।।

25
वो कही भी रहे
मुझे कुछ नही चाहिए
उसका धोका देख लिया
अब और कुछ नही चाहिए।।

26
अब मैं कहा जाऊंगा
कैसे जिंदा रह पाऊंगा
उसके धोखे को मैं अब
कैसे सह पाएंगे

27
अब मैं उसके बारे मैं क्या कहूं
अब मैं उसे कैसे समझाऊं
जब वो नही है मेरी
तो उसे कैसे अपनी तकलीफ दिखऊ

28
अब वो कहा भी रहे
किसी के भी पास रहे
अगर दे रही मुझे धोका
तो फिर वो कैसे भी रहे।।

29
अब हमे क्या चाहिए
हमे अब कुछ नही चाहिए
वो भी नही चाहिए
और उसका धोका भी नही चाहिए

30
अब हम कुछ इस तरह उनसे दूर जाएंगे
सब कुछ याद रहेगा फिर भी उनसे अंजान बन जाएंगे
अब क्या है हमारे पास जो उन्हे बताएंगे
अब उनसे दूर ही रहेंगे और प्यार नही जताएंगे

31
हमने उन्हें इतना चाहा
फिर भी उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा
वो रहे किसी और के पास ही
हमारे होने या ना होने से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा

32
मैं उससे कितना प्यार करता था
यह भी नहीं जानती थी
मैं उसे मानता था अपनी जान
मगर वह मुझे नहीं पहचानती थी

33
कुछ भी हो जाए वह कहां भी चली जाए
वह हरदम मेरे दिल में रहेगी
और मैं उसका होकर रहना चाहता हूं
वह भी मेरी ही होकर रहेगी

34
उसने दिया धोखा तो क्या हुआ
मैं उसे धोखा नहीं दूंगा
उसके बाद में किसी और से प्यार नहीं करूंगा

35
तेरे धोखे ने तो मुझे जीना सिखा दिया
मैं तो था पर बरबाद मुझे आबाद बना दिया

36
अब तू जिसके भी साथ रहे खुश रहना
बस जो मेरे साथ किया है वह
उसके साथ मत करना

37
शायद तेरी फितरत में ही था धोखा देना
इसीलिए तूने धोखा दिया था
और मेरा साथ छोड़कर किसी और का साथ दिया था

38
किसी और के साथ है तू
तो इतना याद रखना
जब भी जरूरत पड़े तो मेरा ख्याल रखना
मैं जरूर आऊंगा तुझे बचाने तू मेरी मोहब्बत पर यकीन रखना

39
तुझे शायद मुझ पर कभी यकीन ही नहीं आया था
तुझे मुझ पर कभी ऐतबार ही नहीं आया था
मैंने कितना भी किया तुझसे प्यार
मगर तुझे मुझ पर प्यार ही नहीं आया था

40
तू साथ रहे हरदम मैं नहीं चाहता
तुम मुझसे दूर चली गई
धोखा तो नहीं देती मुझे कम से कम
तुम मुझे छोड़ कर चली गई

41
तेरे बारे में मैंने जो भी सुना था
शायद सही सुना था
लोग सही कहते थे तेरे बारे में तू बेवफा है
और मैंने तुझे सही ही चुना था

42
अपने जीवन की सबसे बड़ी में गलती कर गया
तुझसे मोहब्बत करके मैं मर गया
तू अभी कुछ है और मैं जीते जी बर्बाद हो गया

43
तेरी वो धोखेबाजी आज भी याद है मुझे
तेरी वह बेवफाई आज भी याद है मुझे
अब मोहब्बत करने को दिल नहीं करता
क्युकी हर सकस मैं तेरी ही आवाज याद है मुझे

44
अब गैरों से क्या शिकायत करनी
जब अपना प्यार ही धोखा दे दिया
और मैं नहीं करता किसी पर यकीन
जब मेरा महबूब है मुझे छोड़कर चला गया

45
अच्छा हुआ तू आज ही चला गया हैं
आज नहीं जाता तो कल जाता
और असलियत तुम्हें दिखा दी जल्दी वरना
मैं फिर बाद में भी मर जाता

46
हम नहीं मरेंगे तेरे प्यार में
हम पागल भी नहीं होंगे
तूने क्या सोचा था
हम क्या कभी किसी और के नहीं होंगे
अगर दिया है तूने धोखा तो तू भी याद रखना
हम भी अब किसी और की बाहों में ही सोएंगे

47
तेरी वो बातें आज भी याद है मुझे
जो तुम मुझसे प्यार करती थी
और जो वादे किए थे तुमने वह आज भी याद है मुझे
जो तू किसी और से प्यार करती थी वो धोका आज भी याद है मुझे

48
प्यार तो तूने कभी मुझसे किया ही नहीं
एतबार को कभी तूने मुझ पर किया ही नहीं
तू तो हमेशा रही किसी और के इंतजार में
मुझ पर कभी यकीन तूने किया ही नहीं

49
अगर मुझ पर एतबार किया होता
अगर मुझसे प्यार किया होता
तो आज हम दोनों रहते साथ साथ
तूने मुझे यूं ना धोखा दिया होता

50
तू क्या जन्म से ही ऐसा था
या तेरी फितरत अब बदल रही है
और तू था किसी और के इंतजार में
किसी और की मोहब्बत में
या फिर तेरी मोहब्बत अब बदल रही है

51
तेरे प्यार में तो मैंने जीना सीखा था
पर तूने यह मुझे क्या सिखा दिया
मैं कितना अच्छा था
और तूने मुझे कितना बुरा बना दिया

52
सोचा नहीं था मोहब्बत में वो दिन वह भी आएगा
जब कोई मुझे छोड़कर चला जाएगा
और सिर्फ धोखेबाजी ही रहेगी मेरे पास
और कोई मेरे पास ना आएगा

53
आज भी मैं उसे याद आता हूं
भरोसा है उस तरह याद नहीं आता
जिस तरह पहले याद किया करती थी
अब तो सिर्फ वह मुझसे बहाने करती है
और किसी और से प्यार करती है

54
तुझे उससे करनी है मोहब्बत
तो तू उससे ही कर मुझसे यह प्यार ना जता
और तुझे करना है उसी से प्यार
तो उसी कर मुझ पर यह सब मत बता

55
मेरे एहसानों के तले दबा हुआ है तू
और तू मेरा कर्ज चुका नहीं सकता
अगर अपने खून से भी लिखे तू खत मुझे
फिर भी मुझे अपना बना नहीं सकता

56
मैं अब अकेला ही अच्छा हूं
मैं इस दुनिया से दूर ही अच्छा हूं
मोहब्बत ने क्या दिया मुझे
मैं तो अभी सिर्फ एक बच्चा हूं

57
तेरे लिए मैंने क्या नहीं किया
तुझसे बेपनाह इश्क नहीं किया
तेरे लिए इबादत की तेरे लिए
सब कुछ छोड़ दिया
सिर्फ तुझसे बात की
और तूने मुझसे ही रिश्ता तोड़ दिया

58
मोहब्बत का यह सिला भी अच्छा दिया तूने
किसी और को गले लगा कर हमें बेवफा कह दिया तूने

59
हम मोहब्बत में जान नहीं देंगे
और तेरे जैसे को हम अपना प्यार नहीं देंगे
तू है ना किसी और के साथ ही
हम तुझे अपना महबूब नहीं कहेंगे

60
तू किसी और की थी पहले से ही
मुझसे तो बस अपना मतलब निकल रही थी
कुछ काम था तेरा इसीलिए
शायद तुम मुझसे इश्क जता रही थी

61
अरे मुझे धोखा ही देना था तुझे
तो मुझसे प्यार का नाटक ही क्यों किया
अगर मुझसे कुछ चाहिए था तो बता देती
मुझे इतना बर्बाद क्यू किया

62
शायद तुम मुझसे कोई
पिछले जन्म का बदला निकाल रही है
और मोहब्बत नहीं है तुम्हे मुझसे
तू तो बस मुझसे अपना मतलब निकाल रही है

63
अब तू मेरे साथ मत रह
मैं तुझे अपने साथ रखना भी नहीं चाहता
तू किसी और से मोहब्बत कर
मैं तुझसे मोहब्बत करना भी नहीं चाहता

64
मेरा इस प्यार मोहब्बत इश्क से अब दिल भर गया है
नहीं चाहिए मुझे कोई और मेरा सब से दिल भर गया है

65
किसी का किसी से मन लग नहीं पता
किसी को किसी से मोहब्बत ही नहीं होती
लोग तो बस कहते रहते हैं वो मेरी जान है
मगर उसने सच्ची इबादत ही नहीं होती

66
अगर तूने मुझसे सच्चा इश्क किया होता
तो मैं तुझे मोहब्बत में जन्नत दिखा सकता था
मगर तूने मुझे धोखा नहीं दिया होता
तो शायद मैं तुझे अपना हमसफर बना सकता था

67
तेरी किस्मत में ही मेरा प्यार नहीं लिख रहा शायद
तेरे जैसे बेवफा से मेरा मेल नहीं लिखा था शायद
अच्छा है जो वक्त रहते पता चल गई मुझे तेरी सच्चाई क्योंकि अब हमारा और तुम्हारा कोई रिश्ता नहीं लिखा था शायद

68
तेरे रिश्ते तेरी मोहब्बत को ठुकरा चुका हूं मैं
और तू अब रहे किसी और के साथ
किसी और से दिल लगा चुका हूं मैं

69
अब कुछ इस तरह हम तुम्हें भुला दिया करेंगे
जब भी बात आएगी मोहब्बत की
हम अपना सर झुका लिया करेंगे

70
तू मुझसे दूर ही रहे तो अच्छा है
मुझ पर यकीन ना करें तो ही अच्छा है
आज फिर तूने मुझे धोखेबाज जब कह दिया
तो हम दोनों में यह दूरियों का रिश्ता ही अच्छा है

71
जितनी शराफत से तुम झूठ बोल देते हो
खुद गलत होते हो और हमें बेवफा बोल देते हो

72
अच्छा नाटक कर लेते हो तुम मोहब्बत का
तुम्हें तो कोई कलाकार होना चाहिए था
मोहब्बत तुम्हारे बस की बात नहीं है मुझसे
तुम्हें तो किसी और के साथ उसके साथ होना चाहिए था

73
अब बस इतना करना तुम
मुझसे प्यार ना करना तुम
और किया है तुमने किसी और पर ऐतबार
अब मेरा इंतजार ना करना

74
तूने तो हर दफा मेरी मोहब्बत पर शक ही किया है
तू किसी और के साथ ही रहती है
पर तूने तो मुझे हमेशा बेवफा है

75
तुम भी ऐसी निकल जाओगी
यह मैंने सोचा नहीं था
की थी मोहब्बत मेने तुझसे
मैंने तुझ से नाता तोड़ा नहीं था

76
तूने जब मुझसे रिश्ता तोड़ दिया
तो मैं भी तुझ से आपको रिश्ता रखना नहीं चाहता
और तू खुश है अगर किसी और के साथ
में भी अब तेरा होकर नहीं रहना चाहत

77
तेरी चाहत ने मुझे क्या बना दिया था
मैं तो एक सीधा साधा इंसान था
पर तुम मुझे मोहब्बत में आशिक बना दिया था
इस तरह बर्बाद कर छोड़ दिया
तूने तो मुझे पागल ही बना दिया था

78
अब तो हम बर्बाद हो चुके हैं
हमारी बर्बादी की कहानी लिखी जा चुकी है
हमारा महबूब निकला धोखेबाज
और हमारी जिंदगी बर्बाद की जा चुकी है

79
खुद ही पसंद किया था हमने उसे
तो फिर किसी से सवाल क्या करना
जब निकला अपना ही महबूब धोखेबाज
तो फिर जमाने के सामने बवाल क्या करना

80
मैंने तुम्हारे साथ कुछ हसीन देखे थे
जिनको मैं पूरा करना चाहता था
पर तुम तो निकले इश्क में बेवफा
अब मैं तुमसे मिलना भी नहीं चाहता था

81
सोचा था कि रोज तुमसे मिलूंगा
और अपने दिल की सारी बातें बता दूंगा
मुझे क्या पता था तू मेरा नहीं है
किसी और का इंतजार करता है
तू मेरा हमसफर नही है

82
तेरी असलियत अब जान चुका हूं मैं
और तुझे अच्छे से पहचान चुका हूं मैं
तेरी बेवफाई की किस्से मशहूर थे पहले भी
पर अब तेरी हर अदाओं से वाकिफ हूं मैं

83
मैंने तुझ पर कितना एतबार किया था
मेरे उस प्यार की लाज तो रखी होती
मैंने तुझे कितना चाहा था
तूने उस चाहत की थोड़ी तो कदर रखी होती

84
क्यों लोग मुझे हर दफा इस तरह धोखा दे जाते हैं
किसी और के हो जाते हैं पर मुझे बर्बाद कर जाते हैं

85
इश्क में मैं तो हमेशा बर्बादी हुआ हूं
लोग होते होंगे आबाद मैं तो हमेशा पागल ही हुआ

86
अब हम भी कसम खाते हैं
दोबारा कभी जिंदगी में किसी से इश्क नहीं करेंगे
महबूब तो छोड़कर ही चला गया हमें
पर हम अब किसी से बात भी नहीं करेंगे

87
हमें लोगों को यही सलाह दिया करता हूं
मोहब्बत ना करे तो अच्छा है यह उन्हें बता दिया करता हूं हर शख्स होता है इस दुनिया में धोखेबाज
मैं उन्हे प्यार का मतलब अच्छे से समझा दिया करता है

88
मोहब्बत मोहब्बत हर बार यही मुझ पर इल्जाम आता है मैं ही हूं बेवफा हर दफा मुझे ही समझाया जाता है

89
वह तुम मुझे गलत समझती है
वह तो मुझे ही मुजरिम समझती है
अपने दोष से दिखाई देता ही नहीं
वह तो मुझे ही तो धोखेबाज समझती है

90
हमारे रिश्ते में इतनी गलतफहमी हो गई थी कि
उसे किसी और से मोहब्बत हो गई थी

91
रोज में अपनी सुनता था
रोज उसको सुना करता था
मुझे क्या पता था मेरा महबूब मुझसे बातें छुपाया करता था

92
हर बात मैंने अपने सीने में दबा रखी थी
कुछ बातें थी जो उससे छुपा रखी थी
मैं जानता था उसे वह है बेवफा
फिर भी उससे मोहब्बत बना रखी थी

93
मैंने सोचा था वह एक दिन सुधर जाएगी
मैंने सोचा था वह तुम तो मेरी हो जाएगी
मुझे क्या पता था वह किसी और की है
उसको एक दिन किसी और से मोहब्ब्त हो जाएगी

94
हम आज हर चीज से इनकार करते हैं
तुमसे नहीं था प्यार यही भूल करते हैं
तुम हो धोखेबाजी सरेआम एलान करते हैं

95
इश्क में हमको कुछ इस कदर सताया गया
महफिल में बुलाकर
हमें फिर मोहब्बत में जलील किया गया

96
उसने सबके सामने भरी महफिल में मुझे बदनाम किया था मैं गया था उसके बुलाने पर
वह उसे किसी और के साथ इश्क का इजहार किया था

97
हर किसी से गलती हो जाती है
मुझसे भी हो गई
मैंने किया उससे इश्क यही मुझसे खता हो गई

98
जब भी मैं उसके बारे में कुछ कहता हूं
तो फिर मैं रो पड़ता हूं
मैंने की थी उससे सच्ची मोहब्बत
इसीलिए उसे आज भी याद करता हूं

99
मेरी जिंदगी बर्बाद कर कर
वो कहां चली गई
किसी और के साथ खुश है वह
क्या हुआ मुझे या बात कर कर चली गई

100
रहो तुम्हें जिसके साथ रहना है
मैं तुमसे कुछ नहीं कहूंगा
तुम्हारी बात करना तो दूर
मैं तुम्हारा नाम भी नहीं लूंगा

101
तुमसे मोहब्बत पहले थी मुझे अब नहीं है
यकीन था तुम पर पहले अब नहीं है

102
आज भी मैं तो वही इंसान हूं जो पहले था
पर तुम तो बहुत बदल चुकी हो
किसी और से इश्क में अब तुम पागल हो चुकी हो

103
तुम्हें क्या लगा था मुझे कुछ पता नहीं चलेगा
तेरी हर रंग से वाकिफ हूं मैं
क्या मुझे तेरे धोखे का पता नहीं चलेगा

104
मैं तो पहले दिन से ही तेरी असलियत जानता था
मैं तुझे अच्छे से पहचानता था
और तेरी बातों में आ गया मैं
क्योंकि मैं तुझसे मोहब्बत करता था

105
चलो रात बहुत हो गई है
अब सो जाना चाहिए
कल करेंगे उस बेवफा को याद
अब हमें कुछ देर आराम करना चाहिए

106
जिंदगी हमारी इस कदर टूट कर बिखर गई
उसकी याद में हम से हमारी जिंदगी ही रूठ गई

107
रहे वो किसी और के साथ
हम भी अपनी दुनिया में खुश रहेंगे
ना तुम हमें याद करना हम भी तुम्हें याद नहीं करेंगे

108
चलो आज एक सौदा करते हैं
तुमसे अपनी बर्बादी का हिसाब करते हैं
तुमने दिया है जितने भी जख्म
चलो आज वही फिर से याद करते हैं

109
तुम मेरी ना हो सकी कम से कम उसकी तो हो जाना जिसके लिए तुम ने मुझे छोड़ दिया

110
मुझे छोड़ दिया तुमने
इश्क मोहब्बत से नाता तोड़ दिया तुमने
मैंने कितना मनाया तुम्हें
फिर भी यह सफर अधूरा छोड़ दिया तुम

111
मुझे फालतू का ज्ञान मत दिया करो
अपने पास ही रखो अपनी मोहब्बत
मुझे झूठी तसल्ली ना दिया करो

112
अब जब तुझे मैं अच्छे से जान चुका हूं
तब मुझे तू सिखा रही है
मैं हूं गलत थी आज तुम मुझे बता रही हो

113
मैं तो कल भी गलत नहीं था
मैं तो आज भी गलत नहीं हूं
और तू कल भी मुझसे प्यार नहीं करती थी
आज भी नहीं करती है
तू कल भी बेवफा थी और आज भी बेवफा है

114
अब तेरी बेवफाई तुझे क्या बताएंगे
हम तुझे क्या मोहब्बत से सिखाएंगे

115
हम तुझसे प्यार नहीं करते
तू भी हमसे प्यार मत कर
हम भी तुझ पर ऐतबार नहीं करते
तू भी हम पर ऐतबार मत कर

116
तेरी धोकेब्बजी ने मुझे इतना तो सिखाया है
मैं पहले बहुत दिल का साफ था
मुझे तूने दुनियादारी का मतलब समझाया है

117
तू मत रहे मेरे साथ मैं भी तेरे साथ नहीं रहता
मैं नहीं करता तुझसे मोहब्बत
ना ही तेरी बातों का ध्यान रखता

118
हर पल मैंने तुझे सोचा था
एक रोज मैंने तुझे चाहा था
कोई थी मेरी मोहब्बत जिसे
मैंने रब से दुआओं में मांगा था

119
खुदा ने तो कभी मुझे कुछ नहीं दिया
कभी प्यार तो कभी इंतजार नहीं दिया
मोहब्बत तो बहुत है मेरी जिंदगी में
पर कभी सच्चाई वाला यार नहीं दी

120
वह मुझसे कहती है
क्या मेरी गलती थी
पर मैं तो किसी की गलती मानता भी नहीं हूं
अरे तू भी अपनी जगह सही है
चल जा मैं तुझे पहचानता भी नहीं हूं

121
मैं क्या तुझेसे ले पाऊंगा
और क्या तुझको दे पाऊंगा
तेरे पास तो सिर्फ धोखेबाजी है
और मैं तो सिर्फ तुझे प्यार ही दे पाऊंगा

122
मैंने तुझसे कितनी मोहब्बत की थी
उसके बदले में तूने मुझे क्या दिया
और मैंने तुझसे कितना प्यार किया था
तूने उसके बदले में मुझे क्या दिया

123
तू शायद मुझे कभी कुछ दे ही नहीं सकती थी
धोखे के सिवा कुछ और कर ही नहीं सकती थी
मैं ही गलत था जो मैंने तुझ पर ऐतबार किया
तुम मुझसे प्यार कभी कर ही नहीं सकती थी

124
सबसे बड़ी गलती यह अपनी बता रहा हूं मैं
अपनी करतूतों खुद छुपा रहा हूं मैं
इसे बताया था मैंने शान से अपना प्यार
उसी को अब धोखेबाज बता रहा हूं

125
प्यार मोहब्बत अब मेरे बस की बात नहीं है
क्योंकि अब मैं और सह नहीं सकता
मर चुका हूं मैं अंदर सें अब
में बहुत दर्द है बर्दाश्त नहीं कर सकता

126
बेशक तेरे जाने के बाद मेरी जिंदगी में बहुत आएंगे
पर वह तेरी जगह कभी नहीं ले पाएंगे
माना तू निकली धोखेबाज
फिर भी हम तुझ से अपना रिश्ता निभाएंगे

127
इतनी मोहब्बत करूंगा मैं तुमसे
ये मैंने सोचा था शायद
मैंने कुछ तो मैं ज्यादा ही दे दिया
इसीलिए तुमने मुझे धोखा दिया था शायद

128
कुछ इस तरह तुम मुझे अब ठुकरा देना
जब तेरे पास वापस आया में
तो तू फिर अपनी औकात दिखा देना

129
तेरी औकात मेरे सामने कुछ भी नहीं है
और तेरा प्यार मेरे सामने कुछ भी नहीं है
तू भरोसे के लायक ही नहीं है tu हमारा प्यार ही नहीं है

130
सोचा नहीं था मैंने
कि तू इतना बेवफा निकल जाएगा
तो प्यार करेगा किसी और से
और हमसे झूठा रिश्ता निभाएगा

131
इंसान से अब मेरा भरोसा उठ चुका है
मैंने तो की है सबसे मोहब्बत
पर हर किसी ने मुझे धोखा ही दिया है

132
तू भी अब चली जा मुझे अकेला छोड़ कर
मुझे तू नहीं चाहिए तेरा प्यार नहीं चाहिए
और तेरे जैसे धोखेबाज का साथ नहीं चाहिए

133
अच्छा होता अगर मैं तुझे पहले ही पहचान जाता
तेरी असलियत पहले ही देख लेता
और तुझ से यह प्यार का रिश्ता नहीं निभाता

134
मुझे क्या पता था तू इस तरह मक्कार निकलेगी धोखेबाजी तेरे खून में भरी है और तू मुझसे प्यार करेगी

135
तुम मुझसे कभी प्यार कर ही नहीं सकती
तू मुझ पर कभी ऐतबार करे नहीं सकती
तू किसी और के साथ ही रहेगी खुश
तू कभी मेरे साथ रह ही नहीं सकती

136
अब मेरी आंखों में प्यार नहीं बचा है
इनमें सिर्फ दर्द बचा है जो तूने दिया है
मोहब्बत नहीं बची है बेदर्दी बची है जो तूने दिया है

137
आज मैं सिर्फ रोना जानता हूं हसना नहीं जानता
धोखेबाज को पहचानता हूं प्यार नहीं पहचानता

138
तेरी धोखेबाजी का सिर्फ इतना असर होगा
आज के बाद जो भी मिलेगा हमें वह हमसे दूर ही होगा

139
हर दिन हर रात रोया हूं मैं
तेरे इंतजार में कब से नहीं सोया हूं मैं
तूने क्यों किया मेरे साथ ऐसा देखो कितना बदल गया हूं मैं

140
तूने मुझे आज इतना बदल दिया
जितना मुझे आज तक किसी ने नहीं बदला
और तूने मुझे इतना धोखा दिया
जितना मुझे आज तक किसी ने नहीं दिया

141
तू भी धोखेबाज है
तेरा यार भी धोखेबाज है
तूने मुझसे जो प्यार किया वह भी धोखेबाज है

142
तूने मुझे बेदर्दी और धोखेबाजी के सिवा दिया क्या है
मैंने तेरे सारे खर्चे उठाये है
पर तूने मुझे नफरत के सिवा दिया क्या है

143
शायद तू मेरी कभी बन ही नहीं सकती थी
क्योंकि तुम मुझसे कभी मोहब्बत कर ही नहीं सकती थी

144
अब मैं जब भी तेरा नाम लेता हूं
वही यादें फिर से आ जाया करती हैं
जब तुम मुझे छोड़ कर रही थी
किसी और के साथ
वही सब याद है मुझे फिर से सताया करती हैं

145
मैं तुझसे क्या कहूं मेरे महबूब
शायद तुम मुझे छोड़कर जाना ही था
सब ने मुझ से तोड़ दिया था रिश्ता
शायद तुझे भी तोड़कर जाना ही था

146
मैंने तुझसे कितना प्यार किया
मैंने तुझको कितना चाह था
मैंने तेरा इंतजार किया था
ओर बता और मैं क्या करता
मैंने तुझसे कितना प्यार निभाया था

147
मैंने सब कुछ तो किया था तेरे लिए
जो शायद आज तक किसी ने नहीं किया
तुझे इतना प्यार दिया था मैंने
जितना शायद तुझे आज तक किसी ने नहीं दिया

148
हर तरफ आज मेरे चर्चे हैं
पूरी दुनिया मुझे जानती है पहचानती है
अब तू मुझसे कह रही है कि मैं गलत हूं
जब मैं बन गया हूं इतना बड़ा
तब मुझसे अपनी गलती की माफी मांगती है

149
तेरे यार कितने हैं मुझे नहीं पता
और तुझे प्यार किससे है मुझे नहीं पता
बस अब तुम मुझे माफ कर दे मुझे तेरा चेहरा नहीं पता

150
मैं नहीं करता उससे प्यार
मैं नहीं करता तुझ पर ऐतबार
जब तू हो चुकी है किसी और की
तो मैं नहीं करता तेरा इंतजार

151
मैंने हर दफा बस तेरा इंतजार किया था
तेरा नाम लेकर मैंने बहुत से प्यार किया था

152
अरे मेरे प्यार में ऐसी क्या कमी रह गई थी
मेरी इबादत में ऐसी कौन सी कमी रह रही थी
जो तुझे कोई और पसंद आ गया
और तूने मुझसे धोखेबाजी का रिश्ता निभा गया

153
इतना तो तूने याद रखा होता
कि मैं तेरा कौन लगता हूं
मुझे एक बार धोखा देने से पहले
मेरा प्यार तो दिल मैं रखा

154
शायद तुझे मुझसे प्यार ही नहीं था
इसलिए तुम मुझे छोड़ कर चली गई
अगर थोड़ी सी भी होती मुझसे मोहब्बत
तो यूं मुझ से नाता छोड़कर क्यों चली गई

155
मुझे छोड़ जाने के तेरे पास और भी बहाने थे
पर तूने बिल्कुल सही बहाना बनाया है
जब तू करने लगी किसी और से मोहब्बत
तो तूने मुझे ही धोखेबाज बताया है

156
मुझे अपनी सफाई देने का तो तूने वक्त भी नहीं दिया
तू चली गई किसी और के साथ उस दिन
तूने तो मेरा एक पल इंतजार भी नहीं किया

157
तू उस दिन मेरा इंतजार कर लेती
तो शायद आज हम साथ साथ होते
और तू अगर कर लेती मुझसे प्यार
तो आज हम दोनों कितने खुश होते

158
तूने अगर मुझे थोड़ा सा भी चाहा होता
तो मैं तुझे आज यूं बद्दुआ ना दे रहा होता

159
तेरा इश्क तेरी इबादत कर तेरी मोहब्बत सब झूठी थी
तूने जितने भी वादे किए थे और सब भी झूठे थे

160
मोहब्बत तेरी इस तरह बुला रहे हैं
हम तेरी धोखेबाजी को भुलाने के लिए
शराब का सहारा ले रहे हैं हम

161
जिंदगी में हम कुछ इस तरह करेंगे
मोहब्बत तुमसे कभी नहीं करेंगे
तुम निकले हैं अगर हमारे दिल से
तो हम भी फिर तुम पर दोबारा यकीन नहीं करेंगे

162
मैं कहता था मेरा महबूब सबसे अच्छा है
वह तो लाखों में एक है और सबसे अच्छा है
मुझे क्या पता था वही धोखेबाज है जो मुझे सबसे प्यारा है

163
तुझसे मैंने इतना प्यार किया
उसका मुझे क्या फायदा हुआ
मोहब्बत में कुछ तो देती तुम मुझे
क्या तुझे मुझसे कभी थोड़ा भी प्यार नहीं हुआ

164
अब कुछ इस तरह हम तुमसे दूर रहा करेंगे
अगर तुम नहीं करोगे बात हमसे
तो हम भी नहीं किया करेंगे
तुम्हें दिया है तो का हमें हमें यह कभी सहा नहीं करेंग

165
मेरे लफ्ज़ मेरी खामोशी को बयान कर रहे हैं
तेरी मोहब्बत झूठी थी यह चिल्ला चिल्ला कर बता रहे हैं

166
बहुत खा ली हमने तेरे नाम की कसमें
और बहुत हमने तुझसे वफा निभा ली
अब तू रहे किसी और के साथ
हमने तुझसे बहुत मोहब्बत निभा ली

167
तू जैसे इंसान से क्या मोहब्बत करना
तू तो यकीन की काबिल भी नहीं है
तू चाहे जिसके साथ रहे
तू हमारी मोहब्बत के काबिल नहीं है

168
हर तरफ से मुझे एक ही गम खाया जाता है
तू क्यों आया मेरी जिंदगी में
मुझे यही तो खुद तड़पाया जाता है

169
ना तू मिला होता ना तुझसे मोहब्बत हुई होती
ना प्यार हुआ होता है और ना ही नफरत हुई होती

170
नफरत की बची है अब तेरे मेरे दरमियां
अब कोई रिश्ता नहीं है
जब भी मिलेंगे दोनों एक दूसरे के दुश्मन बन कर मिलेंगे आप प्यार की इसमें कोई जगह नहीं है

171
तेरे वास्ते मैंने क्या नहीं किया
क्या मैंने तुझसे कभी प्यार नहीं किया
हर दफा तो मैंने सोचा था तुझे
क्या मैंने तेरा कभी इंतजार नहीं किया

172
मुझे धोखा देने से पहले एक बार यह तो सोच लिया होता मैं तुझसे कितना प्यार करता हूं
दिल में ख्याल तो कर लिया होता

173
तू रह ले मुझसे कितना भी नाराज
मैं तुझसे बात नहीं करूंगा
सब कुछ पता चल गया है मुझे तेरे बारे में
अब तुझसे कभी मुलाकात नहीं करूंगा

174
हमसे तुम दूर रहोगी तो अच्छा है
और किसी और के साथ ही रहोगे तो बहुत अच्छा है
हमें नहीं चाहिए तुम्हारे जैसी मोहब्बत
तुम जैसी मोहब्बत से यह दिल बिना प्यार के ही अच्छा है

175
ना तुम्हारे पहले मुझे किसी से मोहब्बत हुई थी
ना तुम्हारे बाद मुझे किसी से मोहब्बत होगी
क्योंकि जब तुमने धोखा दिया था मुझे
तो मुझे किसी पर फिर से यकीन नहीं होगी

176
तू अब भी कहता है मैं तुझ पर यकीन कर लूं
अरे मैं तुझ पर यकीन कर भी लेता
पर जब देख है मैंने तुझे
अपनी आंखों से किसी और के साथ
तो मैं फिर कैसे तुझसे प्यार कर लेता

177
जा मैंने तुझे माफ किया
तेरी हर गुस्ताखी को माफ किया
पर क्या तुम मुझे मेरी जिंदगी के वो पल लौटा सकती है
जो मैंने तेरे साथ बिताए थे
और जो दर्द में सहा था मैं
तू मुझे लौटा सकती है जो मैंने आंसू तेरे लिए बहाए थे

178
तू क्या सोचती है तू मुझे बर्बाद कर देगी
अरे मैं अगर अपनी पर आ गया तू मेरा कुछ नहीं करेगी पर मैं तुझे बर्बाद कर दूंगा
तुझे तेरी औकात दिखा कर सरेआम नेस्तनाबूद कर दूंगा

179
तेरी औकात मुझे आज पता चल रही
तो क्या थी मुझे आज पता चल रही
मैंने तुझे समझाता जान पर
तू तो कोयला थी आज मुझे पता चल रही हैं

180
वह तो चैन से सो जाया करती है
नींद तो हमें ही नहीं आ करती है
हमें जागते हैं उसके इंतजार में रातों को
और वह किसी और के साथ मोहब्बत निभाया करती है

181
हर राज उसने मुझसे छुपाया था
मेरे लाख कहने पर भी उसने नहीं बताया था
अब मैं क्या करूंगा उसकी मोहब्बत को जबरदस्ती पाकर भी जब उसने मुझे धोखेबाज बताया था

182
मैंने उससे कितना पूछा
जब किसी और से मोहब्बत है तो बता दो
पर वह हर बार मना किया करती थी
और जब मुझे पता चला तो फिर वह खुद नाटक किया करती थी

183
किसी गैर से बात करना
उसे इतना रास आ गया
हमारी मोहब्बत छोड़ दी उसने
और उसकी मोहब्बत में वह पनाह ले गया

184
वह हमसे बात करने की कोशिश किया करता है
हमसे मुलाकात करने को कहा करता है
अरे क्या बचा है अब हम दोनों के दरमियां
और क्यों मुझ पर अब इतना मरता है

185
मैं तो अब उसे नहीं चाहता
यह उसे बहुत बार बता चुका हूं
और मैं नहीं करता उसे बिल्कुल भी मोहब्बत
यू से हर दफा समझा चुका हूं

186
वो मुझसे दूर रहे और मैं उससे दूर रहो
इसी में हम दोनों की भलाई है
उसने दिया है अगर धोखा मुझे तो
मुझे भी अब उससे कोई लड़ाई है

187
मैं उससे कुछ नहीं कहूंगा
मैं उससे बात भी नहीं करूंगा
वह बोल रहे थे कि बुरा मुझे
फिर भी उससे कभी मुलाकात नहीं करूंगा

188
आप कहने सुनने को कुछ रहा नहीं है
क्योंकि अब हम दोनों के दरमियां प्यार रहा नहीं है

189
प्यार मोहब्बत इश्क से मुझे फिजूल लगता है
तेरी यह बातों में मुझे सब कुछ झूठ लगता है
तू रहना चाहती है किसी और के साथ
और तू कहती है तुम मुझे अभी सच्चा लगता है

190
तुम मुझे क्या अपनी सच्चाई बताएगा
मैं खुद तेरी सच्चाई जान चुका हूं
अब क्या मुझसे रिश्ता निभाएगा

191
तेरी हर दुखी को जाना है मेने
और तुझे अच्छे से पहचाना है मेने
तू उसी के पास जा
तेरी मोहब्बत को भी आज से छोड़ा है मैंने

192
हर सफर में जब तू उसके साथ रहा था
उसके साथ ही रहे हो जब तूने किया था उससे मोहब्बत तो उसी से मोहब्बत कर ले

193
जिससे वादे किए थे तुमने उसी के साथ जाकर निभाओ और यह अपनी गंदी शक्ल हमें अब मत दिखाओ

194
रहो उसी के साथ वही तुम्हें रास आता है
हम नहीं करते धोखेबाजी से मोहब्बत
जब तुम्हें उस जैसा बेवफा शक्श ही पसंद आता है

195
अब मैं तेरे साथ खुश नहीं रह सकता
तुझसे प्यार तो दूर की बात
मैं तुझसे नफरत का रिश्ता भी नहीं रख सकता

196
तेरे लिए सब कुछ किया है मैंने
अब कुछ नहीं करूंगा
तुझसे बहुत कर लिया प्यार मैंने
अब तुझ पर ऐतबार नहीं करूंगा

198
मैंने तुझे कितना चाहा है बहुत चाहा
इससे ज्यादा मैं तुझे चाहा नहीं सकता
और बहुत मोहब्बत की है मैंने तुझे
इससे ज्यादा मैं तुझे मोहब्बत कर नहीं सकता

199
अगर हमें यह पता होता
मोहब्बत का अंजाम धोखा होता है
तो हम तुझसे कभी मोहब्बत नहीं करते
अगर मोहब्बत में हमें बेवफाई का पता होता
तो हम कभी इजहार नही करते

200
जाओ जाओ तुमने भी अपनी औकात दिखाई ही दी
उसको दोस्त दोस्त बोल कर
तुमने उसे अपनी मोहब्बत बता ही दें

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