CAB FullForm in Hindi | CAB क्या है

CAB FullForm in Hindi: आज के इस आर्टिकल में हम आपको सीएबी के फुल फॉर्म के बारे में जानकारी देने वाले हैं। इसके साथ ही हम सीएए के बारे में अन्य जानकारी भी प्राप्त करेंगे।

नागरिकता विधेयक कानून को ही सीटीजन अमेंडमेंट बिल कहा जाता है।यह साल 2019 में लोकसभा और राज्यसभा में पास होने के बाद राष्ट्रपति के पास गया था और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर करने के बाद सिटीजन अमेंडमेंट बिल भारत में एक कानून के तौर पर लागू हो गया था।

CAB के कानून के पारित होने के बाद हमारे भारत देश के विभिन्न राज्य जैसे बंगाल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल इत्यादि में हिंसक विरोध प्रदर्शन चालू हो गए।

इसमें छात्र-छात्राएं, विभिन्न राजनीतिक पार्टियां और नेता भी शामिल थे। इनमें से कई नेताओं और लोगों को सरकारों ने गिरफ्तार भी किया था। इसके अलावा कई उपद्रवियों को भी सरकार ने गिरफ्तार किया था।

पहले इसका नाम Citizenship Amendment Bil था, जो अब Citizenship Amendment Act हो गया है।

हमारे भारत देश की नागरिकता यानी कि Citizenship के नए कानून को ही CAB या CAA कहा जाता है।

पिछले 1 साल से आपने समाचार चैनल,समाचार अख़बारों और रेडियो में सीएए का जिक्र अवश्य सुना होगा और ऐसे में आप यह सोचते होंगे कि आखिर ये CAB होता क्या है। सबसे पहले CAB का नाम साल 2019 में अस्तित्व में आया और इसके अस्तित्व में आते ही हमारे भारत देश में कई जगह इसका विरोध भी होने लगा।

साल 2019 में 19 दिसंबर को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लोगों ने इसका जमकर विरोध किया और इस एक्ट के विरोध में प्रदर्शन भी किया, जो बाद में हिंसा और आगजनी में तब्दील हो गया, जिसके बाद मजबूरन उत्तर प्रदेश सरकार को हालत को काबू में करने के लिए धारा 144 लगानी पड़ी।

इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार ने 45 घंटों के लिए उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में इंटरनेट के इस्तेमाल पर भी पाबंदी लगा दी थी।

अगर आप भी इंटरनेट पर CAB के फुलफोरम के बारे में सर्च करते रहते हैं या आप यह जानना चाहते हैं कि सीएबी का मतलब क्या होता है, सीएबी क्या होता है तो आज के इस आर्टिकल में आपको इसके बारे में सभी जानकारी प्राप्त होगी। इसीलिए आज के हमारे इस आर्टिकल को ध्यानपूर्वक पढ़ें।

CAB FullForm in Hindi

CAB क्या होता है

CAB FullForm in Hindi

1. सीएबी, सीएए का फुल फॉर्म

अगर हम CAB के फुल फॉर्म के बारे में बात करें तो सीएबी का फुल फॉर्म होता है सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल। इसे हिंदी में नागरिकता संशोधन अधिनियम कहा जाता है और अगर हम इसे अंग्रेजी में कहें तो सीएए का अंग्रेजी में अर्थ होता है Citizenship Amendment Act

इसके अलावा इसे सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल भी कहा जाता है, हालांकि जब यह बिल अस्तित्व में आया था, तब उसे सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल कहा जाता था, परंतु इसके अस्तित्व में आने के 6 से 7 दिन के बाद इसे सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट कहा जाने लगा है।सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल को हिंदी में
नागरिकता संशोधन विधेयक कहा जाता है।

2. सीएबी या सीएए के अन्य फुल फॉर्म|

सीएबी या सीएए को सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट के अलावा अन्य कई नामों से भी जाना जाता है। जिसके बारे में हम आपको नीचे जानकारी दे रहे हैं।

  • California Aikido Association ( Associations )
  • California Alumni Association ( Alumini )
  • Calling All Angels ( General )
  • Campaign Against Acronyms ( General )
  • Cancel All Aviation ( Transportation )
  • Cancer Arthritis Artery ( Cancer )
  • Carrollton Athletic Association ( Athletic )

3. सीएबी क्या है

सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल के द्वारा भारत की नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन करके थोड़े से बदलाव किए गए हैं और उन बदलावों के अंतर्गत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के हिंदू सिख बौद्ध जैन पारसी और ईसाई लोगों को भारत में नागरिकता देने का कानून प्रस्तावित हुआ है।

यह निर्णय इस बात को ध्यान में रखते हुए लिया गया है कि, भारत के इन पड़ोसी देशों में ऊपर बताए गए धर्मों के लोगों पर काफी अत्याचार होते हैं और भारत उनका स्वभाविक तौर पर होमलैंड है।

इसीलिए ऊपर बताए गए धर्मों के लोग, जो जुल्म से सताए गए हैं, वह भारत आके यहां पर रह सकते हैं। इसी उद्देश्य से सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट या सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल का गठन किया गया है।

हालांकि इसमें गौर करने वाली बात यह भी है कि भारत के पड़ोसी देश जैसे पाकिस्तान बांग्लादेश और अफगानिस्तान मे रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों को इस कानून के अंतर्गत शामिल नहीं किया गया है

अर्थात भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान बांग्लादेश और अफगानिस्तान में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों को भारत की नागरिकता नहीं देने का प्रावधान किया गया है।

सीएए के अन्य भी कई फुल फॉर्म होते हैं, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण कोस्टल एक्वाकल्चर अथॉरिटी शब्द को माना गया है।सीएबी हमारे भारत देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में नागरिकता बिल संशोधन के लिए प्रसिद्ध शब्द है।

4. सीएबी का क्या मतलब है

सीएबी का मतलब नागरिकता संशोधन अधिनियम होता है और नागरिकता संशोधन अधिनियम के तहत हमारे भारत देश की संसद ने बांग्लादेश अफगानिस्तान और पाकिस्तान में रहने वाले धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए भारत में नागरिकता देने के लिए कानून बनाया है।

इन धार्मिक अल्पसंख्यकों में मुस्लिम समुदाय को छोड़कर अन्य सभी धर्म शामिल है, जैसे कि हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई।

अर्थात पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में रहने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के लोग भारत में नागरिकता के लिए आवेदन दे सकते हैं और अगर उन्हें सरकार द्वारा मंजूरी दे दी जाती है, तो वह भारत के नागरिक बनकर भारत में रह सकते हैं और यहां के वैलिड आईडी प्रूफ बनवा सकते हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल के अंतर्गत ऐसे लाभार्थियों को लाभ मिलेगा, जो 31 दिसंबर साल 2014 को या फिर उससे पहले भारत में आ चुके हैं।

हमारे भारत देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी और वर्तमान में सबसे अधिक राज्यों में अपनी सरकार चलाने वाली भारतीय जनता पार्टी ने अपने साल 2014 के चुनावी घोषणा पत्र में अत्याचार का शिकार हुए हिंदू शरणार्थियों के लिए हमारे भारत देश में एक प्राकृतिक शरणार्थी शिविर बनाने की घोषणा की थी

और जब कुछ हिंदू शरणार्थी सरकार की नजरों में आए तब साल 2015 में मीडिया में भी यह खबर काफी उछली और फिर इसके बाद सरकार हरकत में आई और सरकार ने पड़ोसी देशों से आए ऐसे शरणार्थियों को उनकी यात्रा संबंधी डॉक्यूमेंट की परवाह किए बिना उन्हें लंबे समय तक भारत में रहने के लिए वीजा अलाउ किया।

हमारे भारत देश के इंटेलिजेंस ब्यूरो के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार अभी तक 30,000 से अधिक शरणार्थी इस सुविधा का फायदा उठा चुके हैं और उन शरणार्थियों को अब संशोधित नागरिकता अधिनियम के तहत भारत की नागरिकता मिलने की उम्मीद है।

सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल के अंतर्गत भारत के पड़ोसी देश जैसे पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में रहने वाले हिंदू सिख ईसाई पारसी बौद्ध जैन धर्म के लोगों को भारत की नागरिकता पाने के लिए कम से कम उन्हें 6 साल भारत में रहना जरूरी है।

हालांकि आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पुराने सिटीजनशिप कानून के अनुसार भारत की नागरिकता प्राप्त करने के लिए किसी भी व्यक्ति को कम से कम भारत में लगातार 11 साल तक रहना जरूरी है।

5. सीएबी में कौन से धर्म शामिल हैं

सीएबी में टोटल 6 गैर मुस्लिम धर्म शामिल है, जिसमें हिंदू,ईसाई, सिख, जैन, पारसी और बौद्ध धर्म शामिल है।इन धर्म के लोगों को भारतीय नागरिकता तब मिलेगी, जब यह 31 दिसंबर साल 2014 को या फिर उससे पहले भारत में प्रवेश कर गए हो।

6. क्या सीएबी का भारत के मुसलमानों पर फर्क पड़ेगा

हमारे भारत देश के गृह मंत्रालय ने पहले ही यह बात साफ कर दी है कि सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल का भारत के किसी भी धर्म के किसी भी नागरिक से कोई भी लेना देना नहीं है।

इसमें में गैर मुस्लिम धर्म के लोगों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है, जो भारत के पड़ोसी राज्य देश जैसे कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में रह रहे हैं और वहां पर उन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त है तथा उन्हें वहां पर धार्मिक आधार पर भेदभाव का शिकार होना पड़ता है।

इस बिल में 31 दिसंबर साल 2014 तक भारत आ गए लोगों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है। हालांकि इसमें सिर्फ तीन ही देश शामिल किए गए हैं जिनमें पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान का नाम शामिल है।

7. सीएबी के विरोध और प्रदर्शन का कारण क्या है

सिटीजन अमेंडमेंट बिल यानी की नागरिकता संशोधन विधेयक के अंतर्गत भारत के पड़ोसी देश जैसे पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय जैसे कि हिंदू, सिख, इसाई, जैन,पारसी और बौद्ध शरणार्थियों को भारत में भारतीय नागरिकता देने की बात कहीं गई है।

हालांकि इससे भारत में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों को कोई भी परेशानी नहीं होगी परंतु फिर भी कुछ असामाजिक तत्व ऐसा भ्रम फैला रहे हैं कि यह कानून भारत के मुसलमानों के लिए सही नहीं है और यह कानून मुस्लिम विरोधी है,जिसके कारण भारतीय मुसलमानों को यह डर लग रहा है कि कहीं इस कानून की आड़ में उनके साथ कोई चाल तो नहीं चली जा रही है

और इसी के कारण अफवाह का शिकार होकर भारतीय मुसलमान भारत के कई शहरों में सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और कई जगह यह प्रदर्शन हिंसक घटनाओं और आगजनी में तब्दील हो जा रहा है और उन प्रदर्शन को काबू करने में सरकार को कई बार हवाई फायरिंग और लाठीचार्ज भी करना पड़ रहा है।

सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल के विरोध प्रदर्शन के कारण भारत के कई शहरों में भयंकर आगजनी हुई। जिसके कारण अरबों की सरकारी संपत्ति का नुकसान हुआ।

हालांकि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने Citizenship Amendment Bill के विरोधियों से निपटने के लिए अलग ही तरकीब अपनाई और उन्होंने सरकारी संपत्ति के नुकसान की भरपाई दंगाइयों से ही करवाई, जिसके कारण अन्य राज्यों की तुलना में उत्तर प्रदेश में कम हिंसक घटनाएं हुई।

भारत के मुस्लिम समुदाय के लोगों को यह डर है कि कहीं इस कानून की आड़ में उनकी नागरिकता ना छीन ली जाए।इसलिए वह इस कानून का विरोध कर रहे हैं।

हालांकि पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने कई बार अपने बयानों में यह स्पष्ट कर दिया है कि इस कानून से भारतीय मुसलमानों को कोई भी नुकसान नहीं होगा और इस कानून में भारत के किसी भी नागरिक की नागरिकता छीनने का प्रावधान नहीं है।

8. सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल के खिलाफ प्रदर्शन की शुरुआत

जब सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल की घोषणा हुई, तो सबसे पहले इसके विरोध में आवाज भारत के नॉर्थ ईस्ट से शुरू हुई।नोट ईस्ट साइड के लोगों ने बड़े पैमाने पर इसका विरोध करना शुरू किया और फिर नॉर्थ ईस्ट के असम राज्य में लोग धरना प्रदर्शन पर बैठ गए।

जब उनसे बात की गई तो पता चला कि असम के लोगों का यह मानना है कि इस बिल के कारण बाहरी लोग आकर असम में रहने लगेंगे जिससे असम की डेमोग्राफी चेंज हो जाएगी और असम के मूल निवासियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। इसके अलावा भारत की दो बड़ी यूनिवर्सिटी जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भी बड़े पैमाने पर इसका विरोध शुरू हुआ।

जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया कि सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल के कारण भारतीय मुसलमान अफवाह का शिकार हो गए और इसी कारण उन्होंने लगभग डेढ़ महीनों तक दिल्ली के साहीन बाग में विशाल धरना प्रदर्शन किया। जबकि सरकार बार-बार यह कहती रही कि इस कानून से भारत के मुसलमानों को कोई खतरा नहीं है।

परंतु कुछ नेताओं के बहकावे में आकर दिल्ली के साहीन बाग में लगभग डेढ़ महीनों तक सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट का विरोध चला, जिसके कारण दिल्ली का माहौल काफी अस्त-व्यस्त हो गया था और नोएडा से दिल्ली जाने वाले लोगों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा था।

हालांकि बाद में फिर डेढ़ महीने के बाद पुलिस अपनी हरकत में आई और लोगों की अत्यधिक दिक्कतों के कारण उन्होंने शाहिनबाग को खाली करवाया और दिल्ली वासियों को इस धरना प्रदर्शन से मुक्ति मिली।

9. नागरिकता संशोधन बिल बनाम नेशनल रजिस्टर सिटिजनशीप

भारत में नागरिकता संशोधन बिल के सामने आने के बाद विभिन्न प्रकार की बहस चालू हो गई थी। इसमें कुछ लोग यह कह रहे थे कि यह एनआरसी का उल्टा है, वही बंगाल की सीएम ममता बनर्जी कह रही थी कि इस कानून को इसीलिए लाया गया है ताकि एनआरसी को जल्द से जल्द लागू किया जा सके और यह दोनों कानून एक ही सिक्के के दो पहलू है परंतु अब सवाल यह उठता है कि आखिर सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल और एनआरसी में क्या अंतर है।

हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत की नागरिकता संशोधन कानून में एक विदेशी व्यक्ति को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है, वहीं एनआरसी का मकसद है ऐसे लोगों की पहचान करना है जो हमारे भारत देश के नागरिक नहीं है, परंतु अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं और भारत के संसाधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

सिटिजनशीप अमेंडमेंट बिल के अंतर्गत 31 दिसंबर साल 2014 को या 31 दिसंबर साल 2014 से पहले भारत में आए हुए हिंदू, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी धर्म के लोगों को भारत की नागरिकता देने के नियमों में ढील दी गई है।

वही एनआरसी के अंतर्गत 25 मार्च 1971 या उससे पहले भारत में रहने वाले लोगों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है।

10. सीएबी मूल रूप से किस कानून का संशोधन है?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल मूल रूप से भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 का संशोधित वर्जन है।इसके अलावा दिसंबर साल 2019 से पहले भी पांच बार इसमें संशोधन हो चुका है

अगर हम उन पांचों संशोधन के बारे में बात करें तो सितंबर 2019 के पहले इसमें साल 1986,1992,2003, 2005 और 2015 में संशोधन हो चुका है, हालांकि इन सभी संशोधन में धर्म शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया था।

हमारे भारत देश के संविधान के अनुच्छेद 14 में समानता शब्द को परिभाषित किया गया है, जबकि हमारे भारत देश के संविधान के अनुच्छेद 15 में धर्म, लिंग, वंश, जाति और जन्म स्थान के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करने के लिए कहा गया है।

वही हमारे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 11 के प्रावधान के अनुसार हमारे भारतीय संसद के सांसदों को नागरिकता से संबंधित कानून बनाने का अधिकार प्राप्त है।

अनुच्छेद 11 के तहत हमारे भारतीय संसद के सांसद किसी भी व्यक्ति को भारत की नागरिकता देने या उसकी नागरिकता को खत्म करने से संबंधित कानून बनाने के अधिकार रखते हैं।

आपकी और दोस्तों:

तो दोस्तों ये था CAB का फुल फॉर्म क्या है, हम उम्मीद करते है की इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आप सभी को CAB के बारे में पूरी जानकारी मिल गयी होगी.

अगर आपको हमारा ये आर्टिकल अच्छा लगा हो तो प्लीज इसको अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करे और लाइक भी अवश्य करें धन्येवाद दोस्तों|

Spread the love

Leave a Comment

Your email address will not be published.