भारत में बेरोजगारी की समस्या पर निबंध



भारत में बेरोजगारी की समस्या पर निबंध – नमस्कार दोस्तों कैसे हो आप लोग आज के इस पोस्ट में हम आपके साथ भारत में बेरोजगारी की समस्या पर हिंदी निबंध शेयर करने जा रहे है. इस टॉपिक पर निबंध लिखने का मेन कारण ये है की स्टूडेंट्स को एग्जाम में essay बहुत ज्यादा पुचा जाता है.

यदि आपको भी कभी इस टॉपिक पर इम्तिहान में पुचा जायेगा तो आप इस हिंदी निबंध का उपयोग कर सकते हो. तो चलो दोस्तों ज्यादा समय बर्बाद ना करते हुए आज के इस हिंदी essay की शुरुवात करते है.

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भारत में बेरोजगारी की समस्या पर निबंध

समस्याओं के देश भारतवर्ष में जो एक बहुत बड़ी समस्या सभी को पीड़ित व आतंकीत किए हुए हैं, वह है बेकारी की समस्या. भारत में यह समस्या द्वितीय महायुद्ध के समाप्त होते होते बढ़ने लगी थी और आज यह अपनी चरम सीमा पर विद्यमान है.

यह धीरे-धीरे विकराल रूप धारण करती जा रही है. आज देश में शिक्षित बेरोजगारों की संख्या लगभग 10 करोड़ है. जिसमें लाखों युवक पथ भ्रष्टता एवं अराजकता शिकार बन गए हैं. आज जो देश में हिंसा तोड़फोड़ मारधाड़ धोखाधड़ी आदि कई तरह के अपराध पनप रहे हैं.

भारत में बेरोजगारी इस समय इतनी ज्यादा है की हम आपको बता नहीं सकते है. नौकरी ना होने के कारन लोग अपने परिवार को अच्छे से पाल नहीं पा रहे है और कई जगह पर तो ये देखा गया है की छोटे छोटे गाव में लोग पैसे ना होने के करना अपने बच्चो को स्कूल तक नहीं भेज रहे है.

इसकी वजह से बच्चो का पूरा फ्यूचर ख़राब हो जाता है और बेरोजगारी की वजह से ऐसे लोग के घर में हमेशा टेंशन रहती है और लड़ाई झगडे होते रहते है.

बेरोजगारी का भारत में इतना ज्यादा होने का कारण ये है की आज कल जॉब मिलना बहुत ज्यादा मुस्खिल हो गया है और जिन लोगो ने ज्यादा पढाई लिखी नहीं कर राखी है वो लोग बेरोजगारी के ज्यादा शिकार हो रहे है.

उनका कारण है बेकार युवा वर्ग की मानसिकता कहावत भी है खाली मन-मस्तिष्क शैतान का घर होता है हमारे देश मैं बेकारी अंग्रेजों की देन है अंग्रेजों ने देश के उन छोटे-छोटे उद्योग को समाप्त कर दिया जिन्हें प्राचीन काल से भारतीय अपने घरों में चला कर रोजी रोटी कमा लेते थे.

कोई कपड़ा बुनता कोई चरखा काटता कोई गुढ़ बनाता तो कोई टोकरी व खिलौने यह सब उन्होंने अपने देश के व्यापार को बढ़ाने के लिए किया. बेकारी की समस्या का दूसरा मूल कारण है भारत की बढ़ती जनसंख्या. देश के साधन तथा उत्पादन तो आगे बढ़ते नहीं वरना उपभोक्ताओं की संख्या निरंतर बढ़ती गई है.

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प्रत्येक घर में गरीबी बढ़ती चली गई तथा परिवार में कमाने वालों की संख्या सीमित होती चली गई और परिवार में कमाने वालों की संख्या सीमित होती चली गई. इसका तीसरा कारण है वर्तमान शिक्षा पद्धति जो देश में केवल कर्रको की संख्या को बढ़ाने में सहायक रही है.

क्या कारण है सामाजिक व धार्मिक परंपराओं का होना साधु-संन्यासियों को भिक्षा देने व दान देने की प्रवृत्ति ने भी लोगों को आलसी बना दिया है. हष्ट पुष्ट शरीर वाले लोग भिक्षावृत्ति पर उतर आते हैं वर्ण व्यवस्था कारण भी बेरोजगारी को बढ़ावा मिला है.

किसी एक वर्ग का व्यक्ति दूसरे के कार्य को नहीं अपनाना चाहता है. भले ही उसे बेकार ही क्यों ना रहना पड़े बेरोजगारी के कारण युवकों में फैले आक्रोश तथा असंतोष ने समाज में अव्यवस्था व अराजकता की स्थिति पैदा कर दी है. यदि इसका शीघ्र ही कोई हल नहीं ढूंढा गया तो इसके भयंकर परिणाम होने की संभावना है.

आज इस बढ़ते हुए बेकारी के रोग को समूल उखाड़ फेंकने के लिए हमें अनेक उपाय करने होंगे. सर्वप्रथम तो जनसंख्या की वृद्धि को रोकना होगा दूसरा हमें अपनी शिक्षा पद्धति में बदलाव लाना होगा वह तकनीकी व व्यावहारिक होनी चाहिए तीसरा घरेलू व लघु उद्योगों को बढ़ावा देना होगा .

चौथा हमें अपनी धार्मिक मान्यताओं में परिवर्तन लाना होगा. भारत की सरकार ने इस समस्या के हल के लिए काफी ठोस कदम उठाए हैं जैसे b.a. Pass व्यक्ति बेरोजगारों को सस्ते दर पर रुपैया उधार देना 20 सूत्री कार्यक्रम की स्थापना करना बड़े बड़े उद्योगों की स्थापना करना है.

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आपकी ओर दोस्तों

तो दोस्तों ये था भारत में बेरोजगारी की समस्या पर निबंध हम उम्मीद करते है की आज का ये एस्से पढ़कर आपको अब इस टॉपिक पर लिखने में कोई भी प्रॉब्लम नहीं होगी. अगर आपको हमारा ये निबंध हेल्पफुल लगा हो तो इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ फेसबुक और व्हात्सप्प पर जरुर शेयर करो. थैंक यू दोस्तों