भगवान की पूजा कैसे करे

पूजा तो हम सब करते हैं लेकिन शांत मन से और अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए पूजा को पूरे विधान से किए जाना बहुत जरूरी है। इसीलिए आज हम जानेंगे कि किस विधि से और किस तरह मन को शांत करके पूजा किया जा सकता है, जिससे आपका पूजा सफल हो। तो आइए जानते हैं पूजा करने के दौरान किन बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है। और कुछ अच्छे नियमों का पालन कैसे किया जाता है जिससे भगवान के पूजा में वाधा ना हो और कुछ कमी ना रह जाए।

पूजा तो आप रोज करते हैं लेकिन सबसे पहले आइए जान लेते हैं कुछ ऐसे नियम, जिनके बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं —

पूजा करते समय क्या नहीं नहीं करना चाहिए:

Bhagwan ki pooja kaise kare

● हिंदू धर्म में तुलसी को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है इसीलिए हम तुलसी माता को पूजते हैं।

● तुलसी माता को गंगा माता के समान शुद्ध और पूजनीय माना गया हैं। इसीलिए हमें कभी भी तुलसी का अपमान नहीं करना चाहिए। क्योंकि तुलसी का अपमान करने से स्वयं भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी क्रोधित होती हैं। इसीलिए हर एक घर में तुलसी का होना बहुत जरूरी होता हैं। हिंदू धर्म के अनुसार घर में बरकत रखने के लिए तुलसी माता का रहना बहुत जरूरी है। लेकिन कुछ नियमों को पालन ना करने से माता तुलसी क्रोधित होती है और घर में नहीं रहती तो आइए जानते हैं कुछ बातें जो हमें पूजा के दौरान ध्यान रखनी चाहिए।

● शिव जी गणेश जी और भगवान भैरव जी को कभी भी तुलसी के पत्ते नहीं चलानी चाहिए।

● पूजा में इस्तेमाल होने वाले तुलसी के पत्ते कभी भी बिना स्नान किए नहीं तोड़ने चाहिए। क्योंकि शास्त्रों में बताया गया है कि जो बिना स्नान किए तुलसी के पत्ते को तोड़ता है, पूजन में भगवान ऐसे तुलसी के पत्तों को स्वीकार नहीं करते स्वीकार नहीं करते।

● 11 दिनों तक तुलसी के पत्ते बासी नहीं होते हैं आप एक बार तोड़े हुए पत्ते11 दिनों तक रोजाना गंगाजल छिड़क कर भगवान को अर्पित कर सकते हैं।

● रविवार के दिन, एकादशी के दिन, द्वादशी के दिन, सक्रांति और संध्या के समय में कभी भी तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।

● सुबह बहुत लोग भगवान सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सूर्य देव को कभी भी शंख से अर्ग नहीं देना चाहिए। हिंदू धर्म में हम लोग सूर्य को एक महान देवता के रूप में पूजते हैं। ऐसे में हमारे शास्त्रों में बताया गया है कि हमें सूर्य देव को कभी भी शंख से जल भरकर अर्ग नहीं देना चाहिए।

● हिंदू धर्म में दूर्वा को बहुत महत्वशील बताया गया है। दूर्वा जो कि एक प्रकार की घास होती है, जो हर एक पूजा में प्रयोग की जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुर्वा को कभी भी रविवार के दिन नहीं तोड़ना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से भगवान बहुत क्रोधित होते हैं।

पूजा करने के कुछ खास नियम:

पीपल की पूजा

हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि पीपल के वृक्ष में सभी देवी देवताओं का वास होता है। जिस कारण हम पीपल की पूजा करते है, जल अर्पित करते हैं और एकादशी के दिन तो पीपल के वृक्ष की खास पूजा होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बुधवार के दिन और रविवार के दिन पीपल के वृक्ष में जल अर्पित नहीं करने चाहिए। इसीलिए पीपल के वृक्ष की पूजा करते समय ध्यान रखें कि बुधवार के दिन और रविवार के दिन पीपल के वृक्ष में जल अर्पित ना करें।

गंगाजल कैसे रखें

हर एक पूजा में गंगाजल को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि गंगाजल के बिना पूजा में शुद्धि नहीं आती और कोई भी पुजा बिना गंगा जल के शुद्ध नहीं मानी जाती। इसीलिए गंगाजल हमेशा घर में रखना जरूरी होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्लास्टिक के बोतल में या किसी अपवित्र धातु के बर्तन में कभी भी गंगाजल नहीं रखने चाहिए। जैसे की एलुमिनियम या लोहा से बने धातु में कभी भी गंगाजल नहीं रखना चाहिए।

शिवलिंग की पूजा कैसे करें

भगवान शिवजी को प्रसन्न करने के लिए हमेशा शिवलिंग की पूजा की जाती है और सोमवार को तो खासकर शिवलिंग को घी, मधु, धतूरे के फूल चढ़ाकर पूजा करना होता है। लेकिन लोग यथासंभव जल अर्पित करके भी शिवजी को प्रसन्न करते हैं। लेकिन आप पूजा के दौरान ध्यान दें की कभी भी खाली जल किसी भी भगवान को नहीं चढ़ाना चाहिए। कहा जाता है कि खाली जल रक्त के समान होता है इसीलिए थोड़े से परिमाण में ही सही चल में दूध, अक्षत मिलाकर भगवान शिवजी को अर्पित करें। हो सके तो सोमवार के दिन मधु,घी, धतूरा चढ़ाकर शिव जी को पूजा करें, और कभि भी शिवलिंग पर केतकी के फूल ना चढ़ाए।

दक्षिणा जरूर देना चाहिए

आप घर में या मंदिर में कभी ना कभी छोटा या बड़ा पूजा करवाते होंगे। लेकिन ऐसे में आपको ध्यान रखना चाहिए कि कभी भी मनोकामना पूर्ति के लिए या किसी और काम के लिए भी पूजा करवाए तो उसमें आपको दक्षिणा देना जरूरी होता है। भले ही आप पूजा में कितने ही खर्चे क्यों ना करें लेकिन शास्त्रों में बताया गया है कि छोटा या बड़ा किसी भी प्रकार की पूजा करने से उसमें अपनी श्रद्धा अनुसार कुछ ना कुछ दक्षिणा रखना जरूरी होता है। तभी पूजा पूजा को सफल माना जाता है। इसके लिए किसी भी पूजा में मनोकामना की सफलता के लिए अपनी शक्ति अनुसार दक्षिणा जरूर दें।

माता लक्ष्मी को कमल का फूल चढ़ाए

आप लोग तो जानते हैं कि हमारे हिंदू धर्म में अनेक देवी देवता हैं हालांकि सब एक हैं बस सबका स्वरूप अलग अलग हैं। सब का महत्व भी एक ही है, लेकिन हमारे शास्त्रों में सभी देवी देवताओं की पूजा करने के तरीके अलग-अलग बताए गए हैं। ऐसे में माता लक्ष्मी अन्नपूर्णा की माता है, माता लक्ष्मी ही हमें धन-धान्य से भर्ती है। ऐसे में माता लक्ष्मी का पूजा करना तो अवश्य ही हर एक व्यक्ति के लिए बहुत जरूरी होता है।

हम लोगों को हमेशा माता लक्ष्मी का ध्यान करना चाहिए। रोजाना माता लक्ष्मी की पसंदीदा कमल का फूल अर्पित करना चाहिए। और इसीलिए आप लोग हमेशा जिस तरह रोजाना पूजा करते हैं उसी समय माता लक्ष्मी को एक कमल का फूल जरूर अर्पित करें। अब आप कहेंगे कि रोजाना कमल के फूल कहां से आएंगे, लेकिन आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। आप चाहे तो कमल के एक फूल को पांच दिन तक गंगाजल छिड़ककर चढ़ा सकते हैं। क्योंकि कमल का फूल पांच दिनों तक बासी नहीं होता। आप एक कमल के फूल को तुलसी के पत्तों की तरह ही 5 दिनों तक प्रयोग कर सकते हैं।

पंचदेव की पूजा अवश्य करें

सूर्य, गणेश, शिव, दुर्गा और विष्णु इन सभि देवी देवताओं को पंचदेव कहा जाता है। और इसीलिए सभी कामों में इनकी पूजा भी अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए। आप प्रतिदिन तो पूजा करते ही होंगे, ऐसे में ध्यान रखे की प्रति दिन किए जाने वाले पूजा में इन पांच पंचदेव की पूजा अवश्य करे और इनका ध्यान करें।

हर रोज़ दो वक़्त पूजा करें

हिंदू धर्म के अनुसार किसी भी घर को घर बनाए रखने के लिए घर में हमेशा पूजा-पाठ होना जरूरी होता है। नहीं तो घर घर नहीं रहता अगर घर में मंदिर है तो अच्छी बात है और अगर नहीं भी है तो हर रोज सुबह शाम पूजन अवश्य करें। परिवार में रहने वाले किसी भी एक व्यक्ति को घर में दो टाइम भगवान का नाम लेना चाहिए। घर में सुख शांति के साथ माता लक्ष्मी का वास रहने से ही घर में शांति और बरकत बनी रहती हैं। इसीलिए रोजाना घर के मंदिर में सुबह और शाम पूजा करके एक दीपक जलाना चाहिए।

घर के मंदिर में कैसी मूर्ति रखे

घर के मंदिर में ज्यादा बड़ी मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार कहा गया है कि अगर हम मंदिर में शिवलिंग रखना चाहते हैं तो शिवलिंग हमारे अंगूठे के आकार से बड़ा नहीं होना चाहिए। हिंदू धर्म के अनुसार शिवलिंग बहुत ही संवेदनशील होता है और इसी कारण घर के मंदिर में छोटा सा शिवलिंग रखना शुभ माना गया है। दूसरे देवी-देवताओं की मूर्तियां भी रखनी चाहिए और वह भी छोटे आकार की ही होनी चाहिए। ज्यादा बड़ी मूर्तियां बड़े मंदिरों के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है लेकिन घर के छोटे मंदिर के लिए छोटे आकार की मूर्तियां ही रखी जानी चाहिए।

पूजा करते समय इन बातों का ध्यान दें:

● घर में पूजा करते समय व्यक्ति का मुंह पश्चिम दिशा की ओर रखना शुभ होता है। इसके लिए पूजा स्थल का द्वार पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। और अगर ऐसा संभव ना हो तो पूजा करते समय व्यक्ति का मुंह पूर्व दिशा में रहना श्रेष्ठ बताया गया है।

● पूजा करते समय पूरे घर में एक बार घंटी बजाना चाहिए। ऐसा करने पर घंटी की आवाज से घर की नकारात्मक शक्ति नष्ट होती है और सकारात्मक ऊर्जा आती है।

● पूजा में कभी भी बासी फूल अर्पित नहीं करनी चाहिए। हमेशा स्वच्छ और ताजे फूल का ही उपयोग करना चाहिए।

● व्यक्ति को पूजा के लिए लाने वाले फूल का सुगंध नहीं लेना चाहिए। आप जिस फूल का सुगंध ले लेंगे भगवान उस फूल को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।

घर के पूजा करने वाले स्थान या मंदिर के लिए ध्यान रखे इन बातों का:

● जब आप घर में मंदिर स्थापित करते हैं तो मंदिर को ऐसे जगह पर मंदिर को बनाना चाहिए या स्थापित करना चाहिए जहां दिनभर में कभी भी कुछ देर के लिए सूर्य की रोशनी पहुंचती हो। जिन घरों में सूर्य की रोशनी और ताजी हवा आती है उन घरों के में रहने वाले दोष स्वयं ही नष्ट हो जाते हैं और हमेशा के लिए शांति आती है। कहा जाता है सूर्य की रोशनी से वातावरण की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और सकारात्मक ऊर्जा में बढ़ोतरी होती है।

● घर में आप लोग जहां मंदिर स्थापित करते हैं वहां पर कभी भी चमड़े से बनी चीज जैसे जूते, चप्पल, बेग नहीं ले जाना चाहिए। इसके अलावा मंदिर में अपने पूर्वजों या मृतकों के चित्र भी नहीं लगाया जाता है, क्योंकि पूर्वजों की चित्र लगाने के लिए दक्षिण दिशा को सही माना गया है। दक्षिण दिशा की दीवार पर आप मृतकों के चित्र लगा सकते हैं लेकिन मंदिर में मृतकों की छवि ना रखें।

● ध्यान रखें कि घर के मंदिर के आसपास शौचालय होना नहीं चाहिए, क्योंकि ऐसा अशुभ माना गया है। आप जिस स्थान पर पूजन कक्ष बनाए ध्यान रखें कि वहां आसपास शौचालय नहीं होना चाहिए।

● जब आप रात को सोने जाते हैं तब आपको मंदिर के दरवाजे पर पर्दा टांगना चाहिए। जिस तरह हम सोने से पहले किसी तरह का बाधा पसंद नहीं करते उसी तरह, उसी भाव के साथ भगवान के मंदिर पर भी पर्दा ढक देना चाहिए जिससे भगवान को विश्राम करने में बाधा ना आए।

रोजाना पूजा कैसे करें

सुबह सबसे पहले मंदिर की सफाई करें। जैसे कि पहले दिन के चढ़ाए हुए फल, फूल को उठा ले और फिर एक साफ कपड़े से मूर्ति को और मंदिरों पर पड़े धूल को साफ कर दें। फिर पूजा के बर्तनों को धो ले आपने जो पहले दिन पूजा के प्रसाद चढ़ाएं थे, उसे गरीबो में बाट दें या घर पर सभी लोग ग्रहण कर ले। उसके बाद सभी देवी देवताओं को फूल अर्पित करें और नए प्रसाद, जल, तुलसी के पत्ते, दुर्वा चढ़ाकर धूप, दीप, अगरबत्ती इत्यादि जलाकर भगवान को मन से प्रणाम करें। फिर कुछ देर भगवान का ध्यान करें ध्यान करते समय बाकी किसी चीज के बारे में न सोचे। बस भगवान का नाम लेकर भगवान के प्रतिमा का ध्यान करना है आप किसी भी भगवान का ध्यान कर सकते हैं इस तरह आपका पूजा संपन्न हो जायगा।

घर की पूजा करने के बाद बाहर का पूजा करें

बाहर की पूजा में आपको भगवान सूर्य देव को जल अर्पित करना है और माता तुलसी को जल चढ़ाना है।
ध्यान रखें कि जल में थोड़ा सा और दूध या अक्षत मिलाकर भगवान को अर्पित करें। आप चाहे तो बाहर शिवलिंग भी स्थापित कर सकते हैं। हर रोज तुलसी माता और सूर्य देव को जल देने के साथ आप शिवलिंग पर भी जल चढ़ाकर पूजा करें।

शाम की पूजा

जैसा की हमने बताया कि दो बार पूजा किया जाता है एक सुबह और एक शाम को। शाम को पूजा में ज्यादा कुछ करना नहीं पड़ता बस भगवान को धूप, दीप इत्यादि जलाकर भगवान को ध्यान करना चाहिए। और संध्या माता को प्रणाम करना चाहिए।

निष्कर्ष:

आशा करते हैं आपको यह पोस्ट पसंद आई और आपने पूरे पोस्ट को एन्जॉय किया। अब जल्दी से इस आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और अगर आपको भी पूजा पाठ से जुड़ी कोई खास नियम पता है या कोई खास विधि से आपके फैमिली में पूजा की जाती है तो हमारे साथ जरूर शेयर करें। आज के लिए बस इतना ही।

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