बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर कविता

नमस्कार दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम आपके साथ बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर कविता शेयर करने वाले है जिसको पढ़कर आपको बहुत अच्छा लगेगा| बेटी घर की लक्ष्मी होती है लेकिन आज भी ऐसे लोग मौजूद है जो की बेटी होने पर उदास और टेंशन में आ जाते है|

हमारी ये कोशिश है की इन कविताओं की मद्दद से हम लोगो की सोच बदल सके और वो लोग बेटी को भी बेटे की तरह स्वीकार करे| तो चलिए दोस्तों पोस्ट को स्टार्ट करते है|

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर कविता

beti bachao beti padhao par kavita

1.बेटी को ना मारो

बेटी को यूं ना भ्रूण में मारो
जीवन जीने का अधिकार दो
नाम तुम्हारा रोशन करेगी
पढ़ने का अधिकार दो।।

लड़कों से कम नहीं यह उसको बतलाने दो
अपनी खुद की जीवन में उसको पहचान बनाने दो
वह होती दुर्गा का रूप नारी शक्ति दिखलाने दो
बेटी को तुम जग में लाओ सुंदर जहां बनाने दो।।

कल्पना और इच्छाशक्ति से उड़ान उसको भरने दो
जीवन के सारे संकल्पों को पूरा करने दो
दूसरों की प्रेरणा आत्मनिर्भर बनने दो
अशुभ नहीं है वह जीवन उसको जीने दो।।

लड़कों की चाहत में उसको यूं ना मरने दो
पढ़ा लिखा कर योग्य बनाओ
जीवन में उसको नाम करने दो।।

2. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

बेटी से होती पहचान
उसकी होने से सब का मान
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
यह है हम सब का अभियान।।

शिक्षा दो तुम उसको संपूर्ण
काम करने दो परिपूर्ण
भ्रूण में में ना उसको ऐसे मारो
तुम सब अपनी सोच सुधारो।।

क्यों करते हो उसकी हत्या
क्या तुम भाग्य विधाता हो
ईश्वर का आशीर्वाद है वह
पाप नहीं वरदान है वह
हत्या ना करो तुम इसकी
राष्ट्र का अभिमान है वह।।

आओ हम संकल्प करें
भ्रूण हत्या को बंद करें
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
हम सब ये अभियान करें।।

3. एक बेटी की पुकार

पढ़ लिखकर तुम क्या करोगी,ये उसको कहा जाता है
चूल्हा चौका काम है तेरा ,ये बतलाया जाता है
घर से बाहर नहीं जाना यह सिखाया जाता है
हर बात पर उसको रोका टोका जाता है।।

स्कूल जाते बच्चों को देखकर
उसका भी मन होता पढ़ने का
हाथ में कॉपी और पेन लेकर उस पर लिखने का
पर उसके हाथों में जिम्मेदारी दी जाती है
पढ़ने की उसकी उम्र में शादी कर दी जाती है।।

इस समाज के कुचक्रो के नीचे
एक बेटी दब जाती है
शिक्षा और अधिकार से
वह वंचित रह जाती है।।

फिर वापस से वही कुचक्र चल जाता है
फिर से बेटी को मारा और नहीं पढ़ाया जाता है
कानून का भी खोफ नहीं
लिंग परीक्षण करवाया जाता है।।

एक बेटी को मां की गर्भ में मारा जाता है
फिर से यह समाज मूकदर्शक बन रह जाता है
कानून बेबस लाचार कुछ नहीं कर पाता है
एक नन्ही जीव की हत्या फिर उसी तरह हो जाती है।।

फिर से एक बेटी मौत के घाट उतारी जाती है
करुण वेदना उसकी ना कोई सुन पाता है
बेटी को उसका अधिकार ना मिल पाता है।।

4. बेटी को बचाओ

आज मार रहे हो बेटी को
कल बहू कहां से लाओगे
मां भी तो तुम्हारी किसी की बेटी है
संसार कैसे चलाओगे।।

आज रोकोगे पढ़ने से उसको
जल्दी ब्याह कराओगे
बेटी को भ्रूण में मार कर
तुम कहां बच पाओगे।।

गुड्डे गुड़ियों से खेलने की उम्र में
बाल विवाह कराओगे
जन्म ले लेती है वह अगर
तो तुम उसको ना पढाओगे।।

अपने अंदर झांकोगे तो खुद को दोषी पाओगे
बेटी को मार कर तुम कहां बच पाओगे
कैसे इंसान हो तुम कब तक यह पाप कर पाओगे।।

5. बाबा मुझको भी आने दो

बाबा मुझ को आने दो,
लाडो हूं ना मैं तो आपकी,
जीवन मुझको पाने दो,
मुझे भी खेलना है अंगने मै,
सम्मान मुझे वो पाने दो,
मुझे भी पढ़ना लिखना है,
अफसर बिटिया बनना है,
संग तुम्हारे खेलना है,
कंधे पर झूला झूलना है,
बाबा मुझको आने दो,
मां का प्यार भी पानी दो,
बचपन भी मुझको जीना है,
सखियों संग घूमना है,
मुझको जीवन जीना है,
मत मारो गर्भ में मुझको,
गर्भ से बाहर तो आने दो।।

6. जब बेटी ना होगी तो

जब बेटी ही ना होगी तो जन्म कैसे पाओगे,
जब बहन ही ना होगी तो राखी किससे बंधवाओगे।।

जब मां ही ना होगी तो ममता को कैसे पाओगे
जब बेटी ही ना होगी तो बहू कहां से लाओगे।।

जब पत्नी ही ना होगी तो, पिता कैसे बन पाओगे
बेटी है जीवन का आधार ये कैसे समझ पाओगे।।

अपनी रानी बिटिया कहकर फिर तुम किसे बुलाओगे
घर में ना किलकारी गूंजेगी, बच्चे कहां से लाओगे।।

बेटी को तुम भ्रूण में मारोगे,तो यह सब कैसे पाओगे
बेटी में होते हैं अनेक रूप, कैसे जान पाओगे।।

7. मै बेटी हूं?

मैं बेटी हूं इसीलिए दुनिया में नहीं आ पाती हूं
बराबर का अधिकार नहीं जीवन नहीं जी पाती हूं।।

घर में पढ़ाया जाता बेटे को, मुझको काम सिखाया जाता
चारदीवारी के अंदर ही, जीना मुझको बताया जाता।।

ना मैं हंस सकती हूं, ना मेरी मर्जी पूछी जाती है
दर्द वेदना विरह की अग्नि, सब अकेले ही सह जाती हूं।।

क्या मैं इंसान नहीं जो ये बर्ताव किया जाता है
बेटी है तू कहकर अत्याचार किया जाता है।।

बेटी के जन्म पर बांटी जाती मिठाई
मेरे जन्म पर मायूसी छा जाती है।।

समझा जाता मुझको कमजोर, हर बार दबाया जाता है
सह लेती हूं मैं सब, क्योंकि बेटा नहीं बेटी बनाया जाता है।।

8. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (छोटी कविता)

अब समय बदल रहा है,
बेटी को जीवन मिल रहा है,
मान और सम्मान का वो,
अधिकार मिल रहा है,
हर क्षेत्र में नाम कर रही,
बेटी ऐसा काम कर रही,
सत्ता के गलियारों में भी,
वो ऊंचा वो नाम कर रही,
सैनिक बनकर देश सेवा,
का वो काम कर रही,
पढ़ लिखकर वो विदेशों में
भारत का नाम कर रही,
बेटी बेटों से अधिक बेटी,
जीवन में नाम कर रही,
नया युग है यह नया भारत,
बेटी सब कुछ काम कर रही।।

9. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ,
यह हम सब का नारा है,
बेटियों से ही खुशहाल,
जीवन संसार हमारा है,
इज्जत और सम्मान करें,
बेटी का हम नाम करें,
खूब पढ़ाए खूब लिखाए,
आसमान उसको छूना सिखाए,
हो अगर अपमान उसका,
सम्मान में आवाज उठाए,
लिंग परीक्षण ना करने दें,
इन सब पर रोक लगाएं,
आओ हम सब मिलकर,
एक नहीं अलख जगाए,
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का,
हम सब अभियान चलाएं,
राह में रुकावट ना बने उनकी,
हम सब उनको आगे बढ़ाए,
लड़कों के कदम से कदम मिलाकर,
आओ हम उन्हें चलना सिखाए
हम बेटियों का एक अभिलाषा पूर्ण जीवन बनाएं।।

आपकी और दोस्तों

तो दोस्तों ये था बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर कविता, हम उम्मीद करते है की इन कविताओं को पढ़ने के बाद आपको भी बेटियों पर प्यार आएगा| दोस्तों हम चाहते है की आप इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे ताकि अधिक से अधिक लोगो की सोच में बदलाव आ सके धन्येवाद दोस्तों|

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