Aids Full Form in Hindi | एड्स का फुल फॉर्म क्या है

Aids fullform in Hindi: आज के इस आर्टिकल में हम आपको AIDS के फुल फॉर्म के बारे में जानकारी देने वाले हैं। अगर आप इंटरनेट पर यह सर्च करते रहते हैं कि एड्स का फुल फॉर्म क्या होता है या फिर एड्स क्या होता है तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं।

आज के समय में बढ़ते हुए हानिकारक केमिकल के कारण प्रदूषण काफी बढ़ गया है और ऐसी अवस्था में सभी लोग यही चाहते हैं कि उनका स्वास्थ्य अच्छा रहे क्योंकि जो व्यक्ति रोगों से ग्रसित होता है या फिर बीमार होता है, वह व्यक्ति काफी परेशान रहता है और उसका स्वभाव काफी चिड़चिड़ा हो जाता है और जिस व्यक्ति के पास अच्छा स्वास्थ्य होता है वह व्यक्ति शारीरिक, मानसिक और मनोवैज्ञानिक रूप से किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहता है।

इस संसार में रहने वाला कोई भी व्यक्ति यह नहीं चाहता कि, उसे जल्दी कोई बीमारी हो कयोंकि बिमारी अपने साथ-साथ विभिन्न प्रकार के दुख भी लाती है और मनुष्य के पैसे खर्च करवाती है

और यह बात तो आप जानते ही हैं कि, वर्तमान के समय में दवाई और इलाज कराना कितना महंगा हो गया है। आज के समय में सामान्य से सामान बीमारियों के इलाज के लिए कम से कम ₹100 लगते हैं और हमारे देश में आज भी कई ऐसे कई लोग हैं जिनकी रोज की 100 रूपए कमाई भी नहीं है और ऐसी अवस्था में जब किसी व्यक्ति को कोई बीमारी हो जाती है, तो उस पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है, क्योंकि उसके पास अपना इलाज करवाने के लिए पैसे नहीं होते हैं।

वैसे तो वर्तमान के समय में कई बीमारियां अस्तित्व में है। इनमें से हर बीमारी अलग-अलग माध्यम से फैलती है। जैसे कुछ बीमारियां जानवरों के माध्यम से इंसानों में फैलती हैं, तो कुछ बीमारियां जहरीले पेड़ पौधों के कारण फैलती है।

वहीं कुछ बीमारी ऐसी भी है, जो इंसानों के द्वारा इंसान में फैलती है। कुछ बीमारियों के लिए दवाइयां उपलब्ध है तो कुछ बीमारियां ऐसी हैं जो लाइलाज है, मतलब कि जिनका आज तक कोई इलाज ढूंढा नहीं गया है और जिसे लाईलाज बीमारी हो जाती है, उसे काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

हालांकि अभी तक जितनी भी बीमारियां आई हैं उन सब का इलाज वैज्ञानिको ने ढूंढ लिया है, परंतु अभी भी कुछ ऐसी बीमारियां है, जो काफी जटिल बीमारी मानी जाती है और जिस व्यक्ति को वह बीमारी हो जाती है, वह काफी घबरा जाता है। वह यही सोचता है, कि वह उस बीमारी से उबर पाएगा या नहीं। ऐसी ही एक बीमारी है जिसका नाम है एड्स।आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

1. एड्स का फुल फॉर्म क्या होता है

Aids full form in hindi

सबसे पहले तो हम यह जान लेते हैं, कि आखिर एड्स का फुल फॉर्म क्या होता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि
एड्स का फुल फॉर्म होता है “एक्वायर्ड इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस”

2.  एचआईवी का फुल फॉर्म क्या है

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एचआईवी का फुल फॉर्म होता है “हुमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस”

3.  एड्स क्या है

एड्स का मतलब होता है एक्वायर्ड इम्यूनोडिफिशिएंसी सिंड्रोम और यह एचआईवी वायरस के सबसे अंत में होने वाली अवस्था होती है।

एचआईवी के वायरस हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली में काम आने वाली cd4 सेल्स पर हमला करके हमारे शरीर को एड्स की स्थिति तक पहुंचा देते है और जब हमारे शरीर में से बहुत सी cd4 कोशिकाएं नष्ट हो जाती है, तब हमारे शरीर में कई गंभीर और घातक वायरस पैदा हो जाते हैं और समय रहते उनका इलाज ना करने पर कभी-कभी व्यक्ति की मृत्यु भी हो जाती है या फिर उसकी हालत गंभीर हो जाती है।

जब किसी व्यक्ति की मृत्यु एड्स से हो जाती है, तब अक्सर मौत का कारण अधिक संक्रमण और एचआईवी के लंबे समय का प्रभाव होता है।एड्स हमारे शरीर की कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली को दर्शाता है, जो वायरस को नहीं रोक सकता।

एचआईवी एड्स वायरस सबसे खतरनाक वायरस में से एक वायरस है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एचआईवी एड्स का सबसे पहला केस साल 1980 में अमेरिका में निकला था।

4. एचआईवी क्या है?

एचआईवी का मतलब होता है हुमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस।एचआईवी का जो वायरस होता है, वह एड्स के कारण बनता है।

हमारे मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रतिरक्षा प्रणाली या फिर इम्यून सिस्टम कहा जाता है। इम्यून सिस्टम हमारे शरीर को विभिन्न प्रकार के वायरस और बैक्टीरिया से लड़ने के लिए शक्ति प्रदान करता है और एचआईवी एड्स के वायरस इसी इम्यून सिस्टम पर हमला करके इसे कमजोर करते हैं।

अगर समय रहते वायरस को कंट्रोल करने के लिए दवा का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, तो एचआईवी के वायरस हमारे शरीर की कोशिकाओं पर कब्जा कर लेते हैं और फिर असंख्य वायरस बना देते हैं, जिससे हमारे शरीर की कोशिकाएं नष्ट हो जाती है और हमारे शरीर की इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है और फिर यह धीरे-धीरे एचआईवी एड्स का रूप ले लेता है।

एचआईवी एड्स के कई प्रकार होते हैं, परंतु सामान्य तौर पर इन्हें दो मुख्य प्रकारों में बांटा जाता है।

एचआईवी-1:

एचआईवी एड्स का यह प्रकार पूरी दुनिया में पाया जाता है और यह सबसे आम प्रकार होता है।

एचआईवी-2:

एचआईवी एड्स का यह प्रकार अधिकतर साउथ अफ्रीका, एशिया और यूरोप के देशों में पाया जाता है। जो व्यक्ति एचआईवी एड्स से प्रभावित होता है, उसके शरीर में एक ही समय में एचआईवी एड्स के कई प्रकार मौजूद हो सकते हैं।

5. एड्स और एचआईवी का शुद्ध हिंदी में मतलब

एड्स को हिंदी में उपार्जित प्रतिरक्षी अपूर्णता सहलक्षण कहते हैं। एचआईवी को हिंदी में
प्रतिरक्षी अपूर्णता विषाणु कहते हैं।

6. वर्ल्ड एड्स डे कब मनाया जाता है

हर साल 1 दिसंबर को इंटरनेशनल एड्स दिवस मनाया जाता है। इसे अंग्रेजी में वर्ल्ड एड्स डे कहां जाता है। यह इसलिए मनाया जाता है, ताकि लोग इस भयानक बीमारी के प्रति जागरूक हो सकें।साल 1980 में सबसे पहले अमेरिका में इसका पहला मामला सामने आया था और तब से ही इस बीमारी से हर साल पूरी दुनिया भर में लाखों लोग मारे जा रहे हैं। इसीलिए दुनिया के कई देश हर साल एचआईवी से रोकथाम के लिए लोगों को प्रेरित करने के लिए काफी पैसे खर्च करते हैं।

7. हमे कैसे पता चलेगा कि हमे एड्स हुआ है

जो लोग एचआईवी के संक्रमण में आ जाते हैं, अक्सर उन्हें यह पता ही नहीं चलता कि उन्हें एचआईवी एड्स हो गया है, जो कि सामान्य तौर पर उन्हें इसके लक्षण पता ही नहीं होते हैं।

सामान्य तौर पर एचआईवी के लक्षण एचआईवी के संपर्क में आने के 2 से 3 सप्ताह के बाद दिखाई देने लगते हैं।आइए जानते हैं कि एचआईवी के लक्षण किस तरह के होते हैं जिससे आप यह जान सकते हैं, कि आप को एचआईवी एड्स हुआ है या नहीं या फिर आप उसके संक्रमण में है या नही।

अगर आपको अधिक बुखार आने लगा है, तो समझ लीजिए कि आपको एचआईवी ऐड्स हुआ है या फिर आप उसके संक्रमण में है।

अगर आपकी ग्रंथियों में सूजन हो रही है तो यह भी एचआईवी एड्स के लक्षण है या फिर लगातार आपके गले में खराश बनी रहती है तो यह भी एचआईवी एड्स के संक्रमण है।

इसके अलावा आपको रात में सोते समय अधिक पसीना निकलता है फिर चाहे वह गर्मी का मौसम हो या ठंडी का मौसम हो तब भी यह एचआईवी का लक्षण हो सकता है।

साथ ही आपके मांसपेशियों में दर्द होता हो या फिर सरदर्द होता हो या फिर आपको बहुत अधिक थकान महसूस होती हो या फिर आपके शरीर पर हल्के चकत्ते निकल आए हो तो यह भी एचआईवी का लक्षण हो सकता है।

इन सभी अवस्था में डॉक्टर से अपनी जांच अवश्य करा लें ताकि समय रहते आप अपना इलाज करवा सके।

कई बार कुछ लोग इन लक्षणों पर ध्यान नहीं देते हैं क्योंकि यह लक्षण दिखने में बहुत ही साधारण लगते हैं या फिर उन्हें लगता है कि यह तो सर्दी या खांसी के लक्षण है परंतु फ्लू जैसे लक्षणों के गायब होने के बाद भी एचआईवी से ग्रसित व्यक्ति किसी भी लक्षण के बिना सालों तक जी सकता है।

अगर आप एचआईवी से पीड़ित है, तो इसे जानने का एकमात्र तरीका है कि आप अपना एचआईवी टेस्ट अवश्य कराएं, तभी आपको पता चल पाएगा कि आप एचआईवी एड्स से पीड़ित है या नहीं।

8. एड्स कैसे फैलता है

एचआईवी यानी कि हुमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस सेक्स के माध्यम से मानव से मानव के शरीर में प्रवेश करता है और यह तब फैलता है, जब कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के साथ असुरक्षित सेक्स संबंध बनाता है।

हालांकि ऐसा नहीं है कि आप किसी भी महिला के साथ संबंध बनाए तो आपको एचआईवी एड्स हो जाएगा। यह तभी होता है जब आप किसी ऐसी महिला या पुरुष के साथ संबंध बनाते हैं जो एचआईवी से ग्रसित होता है।

यानी किसी को HIV है तो उसके साथ बिना प्रोटेक्शन के सेक्स से ये वायरस शरीर में प्रवेश कर जाता है।

असुरक्षित यौन संबंधों के अलावा एचआईवी का वायरस हमारे शरीर से निकलने वाले फ्लूड जैसे कि वजाइना से निकलने वाले फ्लूड या स्पर्म या लार या फिर खून के संपर्क में आने से भी हमारे शरीर में प्रवेश कर जाता है और जब एचआईवी का टेस्ट करवाने पर एचआईवी वायरस पॉजिटिव आता है, तो उस व्यक्ति को या फिर उस महिला को एचआईवी पॉजिटिव कहा जाता है।

एक अनुमान के मुताबिक इस समय पूरी दुनिया में चार करोड़ 2000000 लोग एचआईवी पॉजिटिव है और इनमें से दो तिहाई हिस्सा साउथ अफ्रीका के देशों का है और जिन देशों में इसका सबसे ज्यादा संक्रमण है, वहां हर तीन में से एक व्यक्ति इसका शिकार है

और वर्तमान के समय में पूरी दुनिया में हर रोज तकरीबन 14000 लोग इसके शिकार हो रहे हैं।इसीलिए यह डर बन गया है कि बहुत जल्दी एचआईवी एड्स का वायरस पूरे एशिया को भी अपनी चपेट में ले लेगा। इसलिए डॉक्टर हमेशा इससे सचेत रहने के लिए कहते हैं और असुरक्षित यौन संबंधों को ना बनाने के लिए प्रेरित करते रहते हैं।

9. एड्स का खतरा किसे होता है

जो महिला या पुरुष एक से अधिक लोगों से यौन संबंध बनाता है, उसे इसका खतरा होता है।इसके अलावा वेश्यावृत्ति करने वाले महिला या पुरुषों को भी इसका खतरा होता है, क्योंकि आमतौर पर वेश्याएं प्रोटेक्शन का इस्तेमाल नहीं करती हैं, इसलिए वैसी वेश्याओं के साथ समागम करने से इसका खतरा हो सकता है।

जो व्यक्ति नशीली दवाओं को इंजेक्शन के द्वारा अपने शरीर में प्रवेश करवाता है, उसे भी एचआईवी का खतरा हो सकता है। इसके अलावा जो व्यक्ति पहले से ही एचआईवी ऐड्स वायरस से पीड़ित है, उसके साथ संबंध में बनाने से इसका खतरा हो सकता है

या फिर किसी के माता-पिता अगर एचआईवी से पॉजिटिव है तो उनकी होने वाली संतान को भी इसका खतरा हो सकता है। इसके अलावा कभी-कभी अस्पताल में बिना जांच किए हुए किसी अन्य का ब्लड चढ़ाने पर भी एचआईवी का खतरा हो सकता है।

10. एड्स से बचाव कैसे करें

एचआईवी एड्स से बचाव करने के लिए किसी भी व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध ना बनाएं। इसके अलावा संबंध बनाते समय हमेशा कंडोम का इस्तेमाल करें, क्योंकि यह एचआईवी होने से बचाता है।

इसके अलावा ऐसे किसी भी व्यक्ति के द्वारा इस्तेमाल की गई सिरींजेस या सुई का इस्तेमाल ना करें जो ड्रग्स या फिर नशीली दवाइयां लेता हो, साथ ही जो महिलाएं एड्स से पीड़ित हैं वह गर्भधारण ना करें क्योंकि ऐसा करने से उनके बच्चे में भी इसका वायरस फैल सकता है।

इसके अलावा जब भी आप को खून की आवश्यकता हो, तब ऐसे किसी भी व्यक्ति से खून ना लें जो एचआईवी से पीड़ित हो या फिर खून लेते समय इस बात का पता अवश्य करले की खून की जांच हुई है या नहीं और खून एचआईवी के वायरस से मुक्त है या नहीं।

इसके अलावा डिस्पोजेबल सिरिंज और सुई तथा अन्य चिकित्सीय उपकरणों का इस्तेमाल 20 मिनट पानी में उबालकर ही करें तथा किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा इस्तेमाल की गई ब्लेड या फिर पत्ती का इस्तेमाल ना करें।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एड्स एक लाइलाज बीमारी है, इसलिए इससे बचाव ही सबसे कारगर उपाय है।

11. एड्स का उपचार क्या है

हालांकि अभी तक इसकी कोई कारगर दवाई नहीं खोजी गई है, इसीलिए इससे बचे रहना ही सबसे कारगर उपाय है। एड्स के ट्रीटमेंट के लिए एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है।

इन दवाइयों का मुख्य उद्देश्य एचआईवी के प्रभाव को कम करना होता है, इसके अलावा यह दवाइयां हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है, ताकि हमें वायरस से लड़ने में मदद मिल सके।

हालांकि समय-समय पर वैज्ञानिक एड्स पर खोज करते रहते हैं और वह लगातार एड्स की दवाई खोजने में व्यस्त हैं परंतु अगर सही तौर पर कहा जाए तो इससे बचाव ही फिलहाल सबसे कारगर उपाय है। एड्स से बचाव कैसे करें, इसके बारे में हमने आपको पहले ही बता दिया है।

12. एड्स किन कारणों से नहीं फैलता है

जो व्यक्ति एचआईवी एड्स से पीड़ित होता है, उसके साथ सामान्य संबंधों से, उसके साथ हाथ मिलाने से, उसके साथ भोजन करने से, एक ही घड़े का पानी पीने से, एक ही बिस्तर और कपड़ों का इस्तेमाल करने से, एक ही घर या फिर कमरे में रहने से, एक ही शौचालय या फिर स्नानघर का इस्तेमाल करने से, मच्छरों या फिर खटमल के काटने से यह रोग नहीं फैलता है।

इसके अलावा जो व्यक्ति एचआईवी से पीड़ित होता है उसे दुत्कार नहीं बल्कि उसके साथ प्यार से बात करें ताकि उसे हिम्मत और हौसला मिले। जैसा कि आप जानते हैं कि अभी तक एड्स का कोई वायरस या फिर टीका नहीं बना है, इसीलिए इससे सचेत रहना ही सही है। इसके अलावा समागम करते समय निरोध का इस्तेमाल अवश्य करें।

13. एड्स और एचआईवी के बीच क्या भिन्नता है

एचआईवी का वायरस अगर आपके शरीर में प्रवेश कर लेता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप को एचआईवी एड्स हो गया है। आप एचआईवी के साथ बिना किसी लक्षण के या एचआईवी के थोड़े बहुत लक्षणों के साथ भी कई सालों तक अपनी जिंदगी जी सकते हैं।

जिस व्यक्ति को एचआईवी हो गया है, अगर वह डॉक्टर के कहे अनुसार नियमित तौर पर अपनी दवाई समय से लेता है, तो उसे एड्स होने की संभावना बहुत ही कम हो जाती है।

परंतु अगर व्यक्ति अपना इलाज नहीं करवाता है, तो Cd4 कोशिकाएं की संख्या हमारे शरीर में इतनी कम हो जाती है, कि हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत ही कमजोर हो जाती है, जिससे वायरस अधिक फलते फूलते है।

एचआईवी एड्स से पीड़ित लोग नियमित तौर पर एचआईवी की दवाई लेकर अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही एक लंबा और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

एचआईवी एड्स FAQ’S

1: क्या एड्स गंभीर होता है

अगर जिस व्यक्ति को एचआईवी का संक्रमण हो गया है वह समय रहते अपना इलाज करवा ले तो वह भी सामान्य इंसानों की तरह ही अपनी जिंदगी जी सकता है।

2: क्या एड्स का इलाज संभव है

फिलहाल अभी तक इस बीमारी का कोई भी कारगर इलाज नहीं ढूंढा गया है, परंतु एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी के चलते इस बीमारी पर कुछ नियंत्रण पाया जा सका है, हालांकि वैज्ञानिक इस बीमारी की कारगर दवाई की खोज करने के लिए काफी प्रयत्नशील है।

3: एड्स की रोकथाम कैसे करें

किसी के साथ असुरक्षित यौन संबंध ना बनाएं और हर बार समागम करने से पहले नए कंडोम का इस्तेमाल करें

किसी के द्वारा इस्तेमाल की गई सुई का इस्तेमाल ना करें।

अपने द्वारा इस्तेमाल की गई ब्लेड या फिर रेजर को किसी अन्य को इस्तेमाल करने के लिए ना दें।

इसके साथ ही अपने शरीर में खून चढ़ाने से पहले यह अवश्य पता कर लें की उस खून की जांच हुई है या नहीं और उस खून में किसी भी प्रकार की कोई खराबी है या नहीं।

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आपकी और दोस्तों:

तो दोस्तों ये था एड्स का फुल फॉर्म क्या है, हम उम्मीद करते है की इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आप सभी को एड्स के बारे में पूरी जानकारी मिल गयी होगी|

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