12th साइंस के बाद क्या करें | 12वीं साइंस के बाद करियर कैसे बनाये

जो विद्यार्थी 12वीं कक्षा को साइंस विषय से पास कर लेते हैं, उन्हें 12वीं कक्षा को पास करने के बाद इस बात की चिंता होने लगती है, कि अब वह आगे ऐसी कौन सी पढ़ाई करें, जिससे उनका अच्छा भविष्य बने और उनका अच्छा कैरियर की स्थापित हो।

अगर आप भी ऐसे विद्यार्थियों में से हैं, जिन्होंने 12वीं कक्षा को साइंस विषय के साथ पास किया है और आप इस कंफ्यूजन में है कि अब आगे क्या करें, तो आज का हमारा यह आर्टिकल आपके लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध होगा, क्योंकि आज के इस आर्टिकल में हम आपको 12वीं कक्षा को साइंस विषय के साथ पास करने के बाद क्या करें, इसके बारे में जानकारी देने वाले हैं।

हर साल जितने भी विद्यार्थी 12वीं कक्षा पास करते हैं, उन्हें अपना कैरियर पसंद करने में काफी कंफ्यूजन होती है। बहुत से विद्यार्थी इसी कन्फ्यूजन में रहते हैं कि, 12वीं कक्षा को पास करने के बाद कौन सी फील्ड की तरफ अपना कदम आगे बढ़ाए, ताकि आगे चलकर उन्हें एक अच्छी नौकरी प्राप्त हो सके और वह अपना कैरियर अच्छे से स्थापित कर सके।

साइंस की फील्ड हमेशा से ही विद्यार्थियों के लिए पहली रेफरेंस रही है, क्योंकि साइंस के विषयों के साथ पढ़ाई करने के बाद व्यक्ति को आसानी से किसी भी फील्ड में नौकरी प्राप्त हो जाती है। बहुत से विद्यार्थी‌ अच्छे करियर के लिए साइंस में अपना कैरियर बनाने की सोचते हैं।

तो अगर आपने 12वीं कक्षा को साइंस के विषयों के साथ पास किया है और आप इंटरनेट पर यह ढूंढते रहते हैं कि 12वीं साइंस के बाद क्या करें या फिर 12वीं साइंस के बाद कौन सा कोर्स करें,तो आप आज बिल्कुल सही जगह पर आए हैं।

Table of Contents:

12th साइंस के बाद क्या करें

12वीं साइंस के बाद करियर कैसे बनाये

12th science ke baad kya kare

नीचे हमने आपको फिजिक्स केमिस्ट्री मैथ्स, फिजिक्स केमिस्ट्री बायोलॉजी और फिजिक्स केमिस्ट्री मैथ, बायोलॉजी के विभिन्न कोर्सों की जानकारी दी है,आइए जानते हैं इनके बारे में।

12वीं साइंस में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलोजी के बाद करने वाले विभिन्न कोर्स की जानकारी

एमबीबीएस

12वीं साइंस में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के विषय के साथ 12वीं साइंस को पास करने के बाद आप चाहे तो एमबीबीएस का कोर्स कर सकते हैं। यह मेडिकल से संबंधित कोर्स होता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एमबीबीएस का फुल फॉर्म होता है बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी।

एमबीबीएस का कोर्स एक अंडरग्रैजुएट कोर्स होता है और आमतौर पर इस कोर्स को वही अभ्यर्थी करते हैं, जो डॉक्टर बनना चाहते हैं। एमबीबीएस का कोर्स मेडिकल साइंस में एक प्रोफेशनल डिग्री मानी जाती है।

जिस व्यक्ति के पास एमबीबीएस की डिग्री होती है, उसे एक सर्टिफाइड मेडिकल प्रैक्टिशनर माना जाता है।एमबीबीएस का कोर्स करने के बाद अगर अभ्यर्थी का सिलेक्शन सरकारी अस्पताल में हो जाता है तो उसे महीने की अच्छी खासी सैलरी मिलती है।

इसके अलावा प्राइवेट अस्पतालों में एमबीबीएस डॉक्टर की महीने की सैलरी ₹100000 से लेकर ₹150000 के आसपास होती है।हालांकि इसमें सैलरी जितनी ज्यादा है, उससे ज्यादा रुपए इस कोर्स को करने में लगते हैं।

सामान्य तौर पर अगर देखा जाए तो एमबीबीएस का कोर्स करने के लिए आपको सालाना तौर पर 10 से 12 लाख रुपए तक की फीस भरनी पड़ सकती है।यह फीस सरकारी कॉलेज और प्राइवेट कॉलेज में अलग-अलग हो सकती है।

बीएएमएस

बीएएमएस का फुल फॉर्म होता है बैचलर ऑफ आयुर्वैदिक मेडिसिन एंड सर्जरी।यह एक अंडरग्रैजुएट डिग्री प्रोग्राम होता है। इस कोर्स के अंदर विद्यार्थियों को आयुर्वेद से संबंधित जानकारियां बताई जाती है तथा सिखाई जाती है।

इसके अलावा आयुर्वेदिक दवाई का इस्तेमाल करके मरीजों को कैसे ठीक किया जाता है, इसके बारे में भी जानकारी प्रदान की जाती है। इस कोर्स को करने के बाद व्यक्ति आयुर्वेदिक डॉक्टर कहलाता है।आयुर्वेद से संबंधित इस कोर्स में अभ्यर्थी को आधुनिक दवाइयों के साथ-साथ उनके कांसेप्ट के बारे में भी शिक्षा दी जाती है।

बैचलर ऑफ आयुर्वैदिक मेडिसिन एंड सर्जरी का कोर्स 5 साल और 6 महीने का होता है। इस कोर्स में अभ्यर्थियों को प्राचीन आयुर्वेद के साथ-साथ आधुनिक आयुर्वेद में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की जानकारी भी दी जाती है।

हमारे भारतीय एजुकेशन सिस्टम में बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी की डिग्री का बहुत ही महत्व है, क्योंकि पिछले कुछ सालों से पूरी दुनिया में आयुर्वेद के इस्तेमाल में काफी बढ़ोतरी हुई है। इस कोर्स में विद्यार्थियों को नेचुरल तत्वों के द्वारा रोगियों का उपचार करना सिखाया जाता है।

बीएचएमएस

बीएचएमएस का फुल फॉर्म होता है बैचलर ऑफ़ होम्योपैथी मेडिसिन एंड सर्जरी।इस कोर्स में विद्यार्थियों को होम्योपैथी से संबंधित पढ़ाई करवाई जाती है। होम्योपैथी की दवाइयों के द्वारा रोगियों के विभिन्न रोगों की दवा की जाती है और उनके नेचुरल हिलिंग सिस्टम को बढ़ाया जाता है।

इस कोर्स को अनुभवी होम्योपैथी डॉक्टर के द्वारा पढ़ाया जाता है, साथ ही इस कोर्स में यह भी बताया जाता है कि किसी मरीज को डायग्नोसिस के आधार पर कैसे ट्रीटमेंट देना है।

बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी का कोर्स 5 साल का होता है और इस कोर्स को पूरा करने के बाद अभ्यर्थियों को 1 साल की इंटर्नशिप किसी भी अस्पताल में करनी होती है।

इस कोर्स को पूरा करने के बाद अभ्यर्थी होम्योपैथिक डॉक्टर बन जाता है। इस कोर्स में एडमिशन पाने के लिए अभ्यर्थियों को 12वीं कक्षा में कम से कम 50% अंक से पास होना जरूरी होता है।

बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी का कोर्स करने के बाद अभ्यर्थियों को
डॉक्टर, प्राइवेट प्रैक्टिस, पब्लिक हेल्थ स्पेशलिस्ट्स, टीचर्स, रिसर्चेस, कंसलटेंट, फार्मासिस्ट, जैसे पदों पर आसानी से नौकरी मिल जाती है।

बीयूएमएस

इसका फुल फॉर्म होता है बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी। यह एक अंडर ग्रैजुएट डिग्री कोर्स होता है। इस कोर्स में अभ्यर्थी को यूनानी मेडिसिन और सर्जरी से संबंधित बातें सिखाई तथा पढ़ाई जाती है। इसके अलावा इस कोर्स में अभ्यर्थी को युनानी सिस्टम से संबंधित सभी जानकारियां प्रदान की जाती है।

12वीं साइंस को फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायलॉजी के विषय के साथ पास करने के बाद विद्यार्थी चाहे तो बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी का कोर्स कर सकते हैं।

यह कोर्स टोटल साढे 5 सालों का होता है और इसमें अनिवार्य विषय जीव विज्ञान और उर्दू होता है। विद्यार्थी चाहे तो इस कोर्स को करने के बाद एमडी और एमएस का कोर्स भी कर सकते है।

साढे 5 साल के इस कोर्स में 1 साल का इंटर्नशिप करना भी जरूरी होता है। इस कोर्स में प्रवेश पाने के लिए आपको 12वीं कक्षा में कम से कम 60% अंक लाने जरूरी होते हैं।

बीएससी

बोटेनी, जूलॉजी, नर्सिंग, डेयरी टेक्नोलॉजी, होम साइंस, एंथ्रोपोलॉजी एंथ्रोपोलॉजी, रेडियोग्राफी, न्यूट्रिशन एंड डाइटेटिक्स, स्पीच एंड लैंग्वेज थेरेपी, रिहैबिलिटेशन थेरेपी,ऑक्यूपेशनल थैरेपी, मेडिकल टेक्नोलॉजी, ऑडियोलॉजी।

आप चाहे तो 12वीं कक्षा को साइंस के विषय में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के साथ पास करने के बाद बीएससी का कोर्स कर सकते हैं। बीएससी के कोर्स में आप विभिन्न कोर्स का चुनाव कर सकते हैं। इसके बारे में हम आपको नीचे बताने वाले हैं।

बोटेनी

प्लांट साइंस को ही बोटेनी कहा जाता है। यह प्लांट बायोलॉजी की एक शाखा होती है, जिसे प्लांट लाइफ की साइंस भी कहा जाता है। बॉटनी के कोर्स में पौधों के शरीर का अध्ययन किया जाता है।

जूलॉजी

यह भी बायोलॉजी की ही एक ब्रांच होती है, जिसमें एनिमल से संबंधित बातें पढ़ाई जाती हैं। इसके अंतर्गत आपको एनिमल एंटोनोमी,फिसीकोलोजी,बायोकेमिस्ट्री, जेनेटिक्स, इवोल्यूशन, इकोलॉजी, बिहेवियर और कंजर्वेशन से संबंधित पढ़ाई करवाई जाती है।जूलॉजी के कोर्स में जानवरों के शरीर का अध्ययन किया जाता है।

नर्सिंग

यह एक ऐसा कोर्स होता है, जिसे अधिकतर लोग 12वीं कक्षा को पास करने के बाद करने की इच्छा रखते है। इस कोर्स को करने के बाद अभ्यर्थियों को प्राइवेट अथवा सरकारी अस्पतालों में मरीजों की देखभाल करने की नौकरी आसानी से प्राप्त हो जाती है।

इस कोर्स के अंदर अभ्यर्थियों को मरीजों की देखभाल कैसे करनी है, आपातकाल में निर्णय कैसे लेना है, सर्जरी से पहले कौन कौन सी तैयारी करनी होती है, इसके बारे में पढ़ाई करवाई जाती है। आमतौर पर नर्सिंग का कोर्स करने वाले लोग अस्पताल में डॉक्टर के सहायक के रूप में काम करते हैं।

नर्सिंग का कोर्स करने के बाद आमतौर पर नर्स की नौकरी प्राप्त होती है। एक नर्स अस्पतालों में ना सिर्फ रोगी का ध्यान रखती है, बल्कि रोगी की समय-समय पर हेल्थ अपडेट डॉक्टर को और रोगी के परिवार वालों को देती रहती है।

नर्सिंग का कोर्स करने के बाद अभ्यर्थियों को हमारे भारत देश के अलावा विदेशों में भी आसानी से नौकरी प्राप्त हो सकती है, क्योंकि इसकी डिमांड हर जगह होती है। भारत से हर साल हजारों नर्से दुनिया के विभिन्न देशों में जाती हैं।

डेरी टेक्नोलॉजी

डेरी टेक्नोलॉजी एक ऐसा कोर्स है, जिसमें डेरी प्रोडक्ट के बारे में बताया जाता है। डेयरी टेक्नोलॉजी फूड टेक्नोलॉजी और प्रोसेसिंग इंडस्ट्री का ही एक हिस्सा है।

इस कोर्स के अंदर अभ्यर्थियों को मिल्क प्रोसेसिंग कैसे की जाती है और किस प्रोडक्ट से कौन सी चीज बनाई जाती है, इसके बारे में जानकारी प्रदान की जाती है।

बीएससी इन डेयरी टेक्नोलॉजी का कोर्स 3 साल का होता है। डेयरी टेक्नोलॉजी के कोर्स में दूध की गुणवत्ता को और कैसे बेहतर बनाना है, इसके बारे में दिखाया जाता है। इसके साथ ही मवेशियों की प्रजनन दर और वह ज्यादा दूध कैसे दें, इसके बारे में बताया जाता है।

होम साइंस

होम साइंस के कोर्स में अभ्यर्थियों को गृह विज्ञान से संबंधित पढ़ाई करवाई जाती है। इस कोर्स के अंदर अभ्यर्थियों को घर, व्यक्ति, फैमिली मेंबर और रिसोर्सेज से संबंधित बातें बताई जाती है।

इसके अलावा होम साइंस के कोर्स में अभ्यर्थियों को घर को सजाने और संवारने की ट्रिक,घर की साफ सफाई, बच्चों की डेवलपमेंट, खाना बनाना, फैमिली रिलेशन सिखाया जाता है।

इसके अलावा इसमें टेक्निकल जानकारी भी दी जाती है, साथ ही होम साइंस के कोर्स में कम्युनिटी लिविंग, न्यूट्रिशन, कपड़े का रखरखाव, डिजाइनिंग, इकोनॉमिक्स के बारे में भी बताया जाता है।

होम साइंस का कोर्स करने के बाद आप
सोशल वर्कर,ह्यूमन डेवलपर
अध्यापिका, फैमिली काउंसलर,रिसोर्स मैनेजर,ड्रेस डिजाइनर,टेक्सटाइल मर्चेडाइजर,टेक्सटाइल डिजाइनर,फूड टेक्नोलॉजिस्ट,टूरिस्ट रिजोर्ट, टीवी कलाकार जैसे पदों पर नौकरी पा सकते है।

एंथ्रोपोलॉजी

यह साइंस की एक ऐसी शाखा है, जिसकी पढ़ाई पूरी दुनिया में होती है। इस कोर्स में अभ्यर्थियों को मानव का विकास कैसे हुआ, इसके बारे में पढ़ाई करवाई जाती है। एंथ्रोपोलॉजी को हिंदी में मानव शास्त्र भी कहा जाता है।

अभ्यर्थी एंथ्रोपोलॉजी में बैचलर डिग्री, पीजी डिप्लोमा, मास्टर डिग्री या फिर पीएचडी तक के कोर्स कर सकते हैं। इस कोर्स को करने के लिए भारत में विभिन्न संस्थाएं हैं। सामान्य तौर पर इस कोर्स की सालाना फीस एक लाख के आसपास होती है।

एंथ्रोपोलॉजी का कोर्स किया हुआ अभ्यर्थी आर्कोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, फ़ूड एंड न्यूट्रीशियन इंस्टीट्यूट, थ्रोपोलॉजी एक्सपर्ट ट्राइबल वेलफेयर डिपार्टमेंट, जेनेटिक लैब्स, मेडिकल कॉलेज एंड इंस्टीट्यूट, एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, मेडिसिन डिपार्टमेंट, आईसीएमसीआर लैब, मेडिकल राइटर, मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन, मेडिकल कॉडर जैसे क्षेत्र में आसानी से नौकरी पा सकते हैं।इनकी शुरुआती सैलरी 25000 से शुरू होती है और अनुभव बढ़ने पर इनकी सैलरी में भी वृद्धि होती है।

रेडियोलॉजी

रेडियोलॉजी को रेडियोग्राफर भी कहा जाता है। एक रेडियोग्राफर पेशेंट की सही बीमारी का पता लगाने के लिए उसके शरीर का एक्स-रे की मदद से स्कैनिंग करता है। एक्स-रे के अलावा रेडियोग्राफर सिटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड और एमआरआई भी करता है। रेडियोग्राफी का इस्तेमाल शरीर के अंदर छुपी हुई बीमारियों की फोटो को लेने के लिए किया जाता है।

12वीं साइंस को पास करने के बाद आप रेडियोलॉजी में बीएससी का कोर्स भी कर सकते हैं। इसके अलावा आप चाहे तो रेडियोलॉजी में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट का कोर्स भी कर सकते हैं।

हालांकि इन कोर्स को करने के लिए आपको विभिन्न प्रकार की एंट्रेंस एग्जाम को देना पड़ेगा। इसके साथ ही रेडियोलॉजी में बीएससी करने के बाद आप आगे चलकर इसमें पीएचडी भी कर सकते हैं।

रेडियोग्राफर का कोर्स करने के बाद आप
अल्ट्रासाउंड टेक्निशियन/डायग्नोस्टिक मेडिकल सोनोग्राफर, एमआरआई टेक्निशियन, रेडियोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजी टेक्नॉलजिस्ट/रेडियोग्राफर, रेडियोलॉजी टेक्निशियन, सीटी टेक/सीएटी स्कैन टेक्नॉलजिस्ट/सीटी स्कैन टेक्नॉलजिस्ट जैसे पदों पर काम कर सकते हैं।

ऑक्यूपेशनल थेरेपी

ऑक्यूपेशनल थेरेपी के अंदर अभ्यर्थियोंग को फिजिकली एंड मेंटली रूप से विकलांग लोगों को उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को आसान कैसे बनाएं, इसके बारे में जानकारी प्रदान की जाती है। सामान्य तौर पर ऑक्यूपेशनल थेरेपी की आवश्यकता ऐसे लोगों के लिए पड़ती है, जो इमोशनल डिसऑर्डर से पीड़ित होते हैं।

ऑडियोलॉजी

ऑडियोलॉजी दो शब्दों से मिलकर बना हुआ शब्द है, जिसमें ऑडियो का अर्थ होता है सुनना और लॉजी का अर्थ होता है अध्ययन। इस कोर्स में अभ्यर्थियों को कान से संबंधित रोगों का उपचार कैसे करना है, उसके बारे में जानकारी दी जाती है। इस कोर्स को करने के बाद अभ्यर्थी रोगी के कानों से संबंधित समस्याओं का समाधान करने में सक्षम हो जाता है।

इस कोर्स को करने के बाद अभ्यर्थियों को चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर, प्राइवेट अस्पताल, प्री स्कूल, काउंसलिंग सेंटर, फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर, एनजीओ इत्यादि में आसानी से नौकरी प्राप्त हो जाती है।

इसके अलावा अगर आपने ऑडियोलॉजी में ऑडियोलॉजी एंड स्पीच थेरेपी से संबंधित कोर्स किया है, तो इस कोर्स को करने के बाद आप अपना खुद का प्राइवेट क्लीनिक भी खोल सकते हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस कोर्स की डिमांड विदेशों में भी काफी है। अगर आपने इस कोर्स को किया है, तो आप विदेशों में भी नौकरी के लिए कोशिश कर सकते हैं।

ऑडियो एंड स्पीच थेरेपी की अवधि 3 सालों की होती है और इस डिग्री को सफलतापूर्वक पास करने के बाद आप इसमें पोस्ट ग्रेजुएशन भी कर सकते हैं। इसके अलावा इसमें डिग्री और डिप्लोमा के अलावा 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं।

इस कोर्स को करने के बाद आप की शुरुआती सैलरी 15 से ₹20000 महीने तक हो सकती है और अनुभव बढ़ने पर आपकी सैलरी में भी वृद्धि होगी।

12वीं साइंस में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथमैटिकस के बाद करने वाले विभिन्न कोर्स की जानकारी

बीई/बीटेक

इंजीनियरिंग के कोर्स में आपको मुख्य रूप से साइंस, टेक्नोलॉजी और मैथमेटिक्स से संबंधित विषय के बारे में पढ़ाया जाता है। इंजीनियरिंग के कोर्स में अभ्यर्थियों का मुख्य रूप से इनोवेशन,डिजाइन, डेवलपमेंट और मेंटेनेंस के बारे में जानकारी प्रदान की जाती है।

नीचे हमने आपको विभिन्न प्रकार की इंजीनियरिंग की ब्रांच की जानकारी दी है। इसमें से आप अपने इंटरेस्ट के हिसाब से अपने कोर्स का चुनाव कर सकते हैं।

एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग, इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग,एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, मरीन इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, मैक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, बायो टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग, मेटालर्जिकल इंजीनियरिंग, सिरामिक इंजीनियरिंग,माइनिंग इंजीनियरिंग,केमिकल इंजीनियरिंग, पैट्रोलियम इंजीनियरिंग,सिविल इंजीनियरिंग, पावर इंजीनियरिंग, कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग,प्रोडक्शन इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग, रोबोटिक्स इंजीनियरिंग, कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग, स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग,इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, टैक्सटाइल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, टूल इंजीनियरिंग,एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग,ट्रांसपोर्टेशन इंजीनियरिंग

बीएससी होनर

12वीं साइंस के बाद बहुत से लोग इस कोर्स को करना भी पसंद करते हैं, क्योंकि यह बहुत ही पॉपुलर कोर्स है। यह कोर्स वैसे विद्यार्थियों के लिए फाउंडेशन माना जाता है, जो अपना कैरियर साइंस की फील्ड में बनाना चाहते हैं।

बीसीए

बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन का कोर्स एक प्रोफेशनल डिग्री कोर्स होता है।इसके अलावा इसे टेक्निकल कोर्स भी कहा जाता है। बीसीए के कोर्स में अभ्यर्थियों को कंप्यूटर एप्लीकेशन तथा कंप्यूटर साइंस के बारे में पढ़ाई करवाई जाती है।

इस कोर्स में अभ्यर्थियों को वह सारी बातें बताई जाती हैं, जिन्हें पढ़कर वह आगे जाकर कंप्यूटर या फिर आईटी की फील्ड में काम कर सकें।

इस कोर्स को पूरा कर लेने के बाद अभ्यर्थियों को कंप्यूटर से संबंधित विभिन्न प्रकार के जानकारी हासिल हो जाती है।जैसे कि किसी सॉफ्टवेयर को किस तरह बनाया जाता है तथा सॉफ्टवेयर में कोडिंग कैसे की जागगती है।

इस कोर्स को पूरा कर लेने के बाद अभ्यर्थी किसी भी कंपनी में एक अच्छे सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी प्राप्त कर सकते हैं। अभ्यर्थी चाहे तो इस कोर्स को पूरा कर लेने के बाद इसमें पोस्ट ग्रेजुएशन यानी कि एमसीए भी कर सकते हैं।

एलएलबी/बैचलर ऑफ लाॅ

इस कोर्स में अभ्यर्थियों को कानून से संबंधित पढ़ाई करवाई जाती है। यह कोर्स सामान्य तौर पर वैसे लोग करते हैं, जिन्हें वकील बनने की इच्छा होती है।अगर आप कानून की पढ़ाई करना चाहते हैं, तो आप इस कोर्स को कर सकते हैं।

एलएलबी का कोर्स दो तरह का होता है। इसमें अगर आप 12वीं कक्षा को पास करने के बाद एलएलबी के कोर्स की पढ़ाई करते हैं तो आपको इसके लिए 5 सालों का समय देना होगा, वही अगर आप ग्रेजुएशन के बाद एलएलबी की पढ़ाई करना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको 3 साल का समय देना होगा।

एलएलबी का कोर्स करने के लिए आपके 12वीं कक्षा में 55% से अधिक अंक होने चाहिए। इसके अलावा आपके अंदर कुछ व्यक्तिगत योग्यताएं भी होनी चाहिए। जैसे कि आपका दिमाग क्रिएटिव होना चाहिए। आपके दिमाग में समस्याओं को सुलझाने की कला होनी चाहिए।

होटल मैनेजमेंट

12वीं साइंस पास करने के बाद आप चाहे तो होटल मैनेजमेंट का कोर्स भी कर सकते हैं। होटल मैनेजमेंट के कोर्स में अभ्यर्थियों को होटल सर्विस से संबंधित बातें पढ़ाई तथा सिखाई जाती हैं।

इस कोर्स में अभ्यर्थियों को होटल संचालन से लेकर ग्राहकों के साथ कैसा व्यवहार करना है, खाना कैसे सर्व करना है, साफ-सफाई कैसे रखनी है, कम्युनिकेशन स्किल इत्यादी के बारे में सिखाया जाता है।

12वी में साइंस में फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स, बायोलॉजी के बाद करने वाले विभिन्न कोर्स की जानकारी

बीएससी

आप चाहे तो नॉर्मल बीएससी भी कर सकते हैं।बीएससी में आप बोटानी, फिजिक्स, केमिस्ट्री, जूलॉजी, नर्सिंग, डेरी टेक्नोलॉजी, होम साइंस, एंथ्रोपोलॉजी, एग्रीकल्चर या बायो टेक्नोलॉजी का कोर्स कर सकते हैं। इसके अलावा आप मेडिकल का कोर्स भी कर सकते हैं।

लैब टेक्नीशियन

वर्तमान के समय में लगभग हर हॉस्पिटल में लैब टेक्नीशियन की आवश्यकता होती ही है कयोंकी लैब टेक्नीशियन विभिन्न प्रकार की जांच डॉक्टरों के कहने पर करते हैं।

इसीलिए जो छात्र और छात्राएं 12 कक्षा को साइंस के विषयों के साथ पास कर चुके हैं वह लैब टेक्नीशियन का कोर्स करके अपना अच्छा कैरियर बना सकते हैं। क्योंकि आमतौर पर चाहे कोई सरकारी अस्पताल हो चाहे प्राइवेट अस्पताल हो सभी अस्पतालों में लैब टेक्नीशियन की आवश्यकता होती ही है।

लैब टेक्नीशियन डॉक्टरों के द्वारा लिखी गई जांच को टेस्ट करने का काम करते हैं। इसके अलावा लैब टेक्नीशियन सामानों का रखरखाव भी करते हैं।

पैरामेडिकल

आप चाहे तो 12वीं साइंस को पास करने के बाद पैरामेडिकल का कोर्स भी कर सकते हैं। पैरामेडिकल एक ऐसे विशेष हेल्थ कर्मचारी होते हैं, जो अस्पतालों में पेशेंट की देखभाल तथा उनका इलाज करने का काम करते हैं। इसके अलावा कभी-कभी इमरजेंसी में पैरामेडिकल की टीम को जांच के लिए बुलाया जाता है।

बी फार्मा

12वीं कक्षा को साइंस के विषयों के साथ पास करने के बाद आप बी फार्मा का कोर्स भी कर सकते हैं। इस कोर्स को करने के बाद आप फार्मेसिस्ट कहलाते हैं।

इस कोर्स को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद आप आसानी से अपना मेडिकल स्टोर खोल सकते हैं और लोगों को उनके रोग के हिसाब से दवाइयां दे सकते हैं।अधिकतर लोग इस कोर्स को करने के बाद मेडिकल स्टोर खोल कर अपनी कमाई करते हैं।

12वीं साइंस के बाद डिप्लोमा कोर्स की जानकारी

वेब डिजाइनिंग

भारत सहित पूरी दुनिया में इस समय वेब डिजाइनिंग की काफी डिमांड हो रही है, क्योंकि जैसा कि आप जानते हैं कि अब अधिकतर लोग अपनी वेबसाइट बनवा ही रहे है, फिर चाहे वह आम लोग हो या फिर कोई कंपनी हो।

सभी अपनी वेबसाइट का निर्माण करवाते हैं और सभी यह चाहते हैं कि उनकी वेबसाइट का लुक अच्छा हो और एक वेबसाइट को अच्छा लुक देने का काम वेब डिज़ाइनर ही करता है।

वेब डिजाइनर अपनी स्किल्स का उपयोग करके किसी भी साइट को डिजाइन करता है और उसे एक अच्छा लुक देता है। अगर आपको कंप्यूटर में इंटरेस्ट है तो आप इस कोर्स को करके अपना कैरियर वेब डिजाइनिंग में बना सकते हैं।

डिप्लोमा इन फैशन डिजाइनिंग

यह भी आपके लिए एक अच्छा कैरियर विकल्प साबित हो सकता है, क्योंकि इस कोर्स को सीखने के बाद अगर आपने कोई अच्छा कपड़े का डिजाइन किया और अगर वह डिजाइन किसी कंपनी को पसंद आ गया तो फिर आपकी इतनी कमाई हो जाएगी कि आप सोच भी नहीं सकते।

फैशन डिजाइनिंग के कोर्स में आपको कपड़े की डिजाइन किस तरह करनी है, इसके बारे में जानकारी दी जाती है।

आमतौर पर जो फैशन डिजाइनर होते हैं, उनकी महीने की सैलरी शुरुआती तौर पर 25000 के आसपास होती है।इसी से आप जान सकते हैं कि इसमें कितनी कमाई है।

डिप्लोमा इन जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशंस

अगर आपको मीडिया के क्षेत्र में जाने की इच्छा है, तो आप डिप्लोमा इन जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन का कोर्स कर सकते हैं।

इस कोर्स को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद आपको किसी भी न्यूज़ एजेंसी में एडिटर या फिर रिपोर्टर की जॉब आसानी से मिल जाएगी और वहां पर काम करके जब आपको अच्छा अनुभव हो जाएगा, तो आपकी पदोन्नति ऊंचे पद पर हो जाएगी।

डिप्लोमा इन कंप्यूटर कोर्स

12वीं कक्षा को पास करने के बाद आप कंप्यूटर कोर्स में डिप्लोमा का कोर्स भी कर सकते हैं और इस कोर्स को करने के बाद आपको किसी भी आईटी कंपनी में आसानी से नौकरी प्राप्त हो जाएगी।

इसके अलावा आप चाहे तो खुद का इंस्टिट्यूट भी खोल सकते हैं और अपने इंस्टिट्यूट में आने वाले लोगों को इस कोर्स से संबंधित पढ़ाई करवा सकते हैं, वहीं अगर आपके पास अंतरराष्ट्रीय मान्य डिप्लोमा इन कंप्यूटर कोर्स का सर्टिफिकेट है, तो आपको भारत के अलावा विदेशों में भी आसानी से नौकरी प्राप्त हो जाएगी, क्योंकि लगभग हर जगह अब कंप्यूटर का काम अधिक होने लगा है।

डिप्लोमा इन एचआर ट्रेंनिंग

अगर आप डिप्लोमा इन एचआर ट्रेनिंग का कोर्स कर लेते हैं, तो इस कोर्स को पूरा करने के बाद आपको किसी भी कंपनी में एचआर की नौकरी आसानी से मिल जाएगी।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, एचआर का मुख्य काम होता है कि वह जिस कंपनी में काम कर रहा है, उस कंपनी के लिए कुशल और उपयोगी कर्मचारियों का चुनाव करना।

HR का पूरा नाम होता है हुमेन रिसोर्स। ह्यूमन रिसोर्स अधिकारी कंपनियों में नए कर्मचारियों की भर्ती करने से पहले उनके इंटरव्यू लेता है तथा उनके डॉक्यूमेंट को चेक करता है और अगर उसे लगता है कि वह कर्मचारी उनकी कंपनी के लिए लाभदायक हो सकता है, तो हुमेन रिसोर्स अधिकारी उसे अपनी कंपनी में भर्ती कर लेते हैं।

आपकी और दोस्तों:

तो फ्रेंड्स ये था 12th साइंस के बाद क्या करे, हम उम्मीद करते है की इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आप सभी को ये पता चल गया होगा की 12वीं साइंस के बाद करियर कैसे बनाये.

यदि आपको ये पोस्ट अच्छी लगी हो तो प्लीज इस पोस्ट को १ लाइक जरुर करे और अपने दोस्तों के साथ शेयर भी अवश्य करे ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगो 12th के बाद क्या करना चाहिए इसके बारे में सही जानकारी मिले. धन्येवाद दोस्तों|

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