43 Karl Marx Quotes in Hindi | कार्ल मार्क्स के अनमोल विचार वचन



Karl Marx Quotes in Hindi

कार्ल मार्क्स के अनमोल विचार वचन

कार्ल मार्क्स कोट्स इन हिंदी में

  1. बहुत सारी उपयोगी चीजों के उत्पादन का परिणाम बहुत सारे बेकार लोग बनाना है
  2. अमीर गरीब के लिए कुछ भी कर सकते हैं लेकिन उनके ऊपर से हट नहीं सकते
  3. इसमें कोई शक नहीं है कि, मशीनों ने समृद्ध आलसियों की संख्या बहुत अधिक बढ़ा दी है.
  4. अनुभव सबसे खुशहाल उन लोगों की प्रशंसा करता है, जिन्होंने सबसे अधिक लोगों को खुश किया.
  5. अगर कोई चीज निश्चित है तो  है कि, मैं खुद एक मार्क्सवादी नहीं हूँ.
  6. लोगों की खुशी के लिए पहली आवश्यकता धर्म का अंत है.
  7. पूंजीवादी समाज में पूँजी स्वतंत्र और व्यक्तिगत है, जबकि जीवित व्यक्ति आश्रित है और उसकी कोई निजता नहीं है.
  8. धर्म, मानव मस्तिष्क जो न समझ सके, उससे निपटने की नपुंसकता है.
  9. पूंजीवादी उत्पादन, टेक्नोलोजी इसलिए विकसित करता है, जिससे तरह-तरह की प्रक्रियाओं को सम्पूर्ण समाज में मिला दे; पर ऐसा वो सिर्फ संपत्ति के मूल स्रोतों – मिटटी और मजदूर को सोख कर कर करता है.
  10. मानसिक पीड़ा का एकमात्र मारक शारीरिक पीड़ा है.
  11. पूँजी मजदूर की सेहत या उसके जीवन की लम्बाई के प्रति लापरवाह है, जब तक की उसके ऊपर समाज का दबाव ना हो.
  12. इतिहास कुछ भी नहीं करता . उसके पास आपार धन नहीं होता, वो लड़ाईयाँ नहीं लड़ता . वो तो मनुष्य हैं, वास्तविक, जीवित, जो ये सब करते हैं.
  13. दुनिया के मजदूरों एकजुट हो जाओ; तुम्हारे पास खोने को कुछ भी नहीं है, सिवाय अपनी जंजीरों के.
  14. धर्म लोगों का अफीम है.
  15. लोकतंत्र समाजवाद का रास्ता है.
  16. जरुरत तब तक अंधी होती है जब तक उसे होश न आ जाये. आजादी जरुरत की चेतना होती है.
  17. शांति का अर्थ समाजवाद के विरोध का नहीं होना है.
  18. हर किसी से उसकी योग्यता के अनुसार, हर किसी को उसकी जरुरत के अनुसार.
  19. पूँजी मृत श्रम है, जो पिशाच की तरह केवल जीवित श्रमिकों का खून चूस कर जिंदा रहता है, और जितना अधिक ये जिंदा रहता है उतना ही अधिक श्रमिकों को खून चूसता है.
  20. कोई भी जो इतिहास की कुछ जानकारी रखता है वो ये जानता है कि महान सामाजिक बदलाव बिना महिलाओं के उत्थान के असंभव हैं. सामाजिक प्रगति महिलाओं की सामजिक स्थिति, जिसमे बुरी दिखने वाली महिलाएं भी शामिल हैं; को देखकर मापी जा सकती है.
  21. इतिहास खुद को दोहराता है, पहले एक त्रासदी की तरह, दुसरे एक तमाशे की तरह.
  22. यह बिल्कुल असंभव है कि प्रकृति के नियमों से ऊपर कुछ हो जाए. जो अलग-अलग ऐतिहासिक परिस्थितियों में बदल सकता है वह महज उनका रूप है जिसमे ये नियम अपने को क्रियान्वित करते हैं.
  23. लेखक इतिहास के किसी आन्दोलन को शायद बहुत अच्छी तरह से बता सकता है, लेकिन निश्चित रूप से इसका सृजन नहीं कर सकता.
  24. कंजूस मात्र एक पागल पूंजीपति है, जबकि पूंजीपति एक तर्कसंगत कंजूस है.
  25. जितना अधिक श्रम का विभाजन और मशीनरी का उपयोग बढ़ता है, उतना ही श्रमिकों के बीच प्रतिस्पर्धा बढती है, और उतनी ही उनका वेतन कम होता जाता है.
  26. लोगों के विचार उनकी भौतिक स्थिति के सर्वाधिक प्रत्यक्ष उद्भव हैं.
  27. शासक वर्ग को कम्युनिस्ट क्रांति के डर से कांपने दो. मजदूरों के पास अपनी जंजीरों के आलावा और कुछ भी खोने को नहीं है. उनके पास जीतने को एक दुनिया है. सभी देशों के कामगारों एकजुट हो जाओ!
  28. धर्म दीन प्राणियों का विलाप है, बेरहम दुनिया का हृदय है और निष्प्राण परिस्थितियों का प्राण है. यह लोगों का अफीम है.
  29. जमींदार, और सभी लोगों की तरह, वहां से फसल काटना पसंद करते हैं जहाँ उन्होंने कभी बोया नहीं.
  30. समाज व्यक्तियों से नहीं बना होता है बल्कि खुद को अंतर संबंधों के योग के रूप में दर्शाता है, वो सम्बन्ध जिनके बीच में व्यक्ति खड़ा होता है.
  31. उपयोगी वस्तु हुए बिना किसी चीज की कीमत नहीं हो सकती.
  32. पिछले सभी समाजों का इतिहास वर्ग संघर्ष का इतिहास रहा है.
  33. शासक वर्ग के विचार हर युग में सत्ताधारी के विचार होते हैं, यानि जो वर्ग समाज की भौतिक वस्तुओं पर शासन करता है, उसी समय में वह उसके बौद्धिक बल पर भी शासन करता है.
  34. साधारणतया सभ्यता और उद्योगों के विकास हमेशा वनों के विनाश में इतना सक्रिय रहें है कि उनकी तुलना में सब-कुछ जो उनके संरक्षण और उत्पत्ति के लिए किया गया कार्य नगण्य है.
  35. शायद ये कहा जा सकता है कि मशीनें विशिष्ट श्रम के विद्रोह को दबाने के लिए पूंजीपतियों द्वारा लगाए गए हथियार हैं.
  36. कारण हमेशा से अस्तित्व में रहे हैं, लेकिन हमेशा तर्कसंगत रूप में नहीं.
  37. जीने और लिखने के लिए लेखक को पैसा कमाना चाहिए, लेकिन किसी भी सूरत में उसे पैसा कमाने के लिए जीना और लिखना नहीं चाहिए.
  38. क्रांतियाँ इतिहास के इंजिन हैं.
  39. एक भूत यूरोप को सता रहा है – साम्यवाद का भूत.
  40. नौकरशाह के लिए दुनिया महज एक हेर-फेर करने की वस्तु है.
  41. चिकित्सा बीमारी की तरह संदेह को भी ठीक करती है.
  42. साम्यवाद के सिद्धांत का एक वाक्य में अभिव्यक्त किया जा सकता है : सभी निजी संपत्ति को समाप्त
  43. मानसिक श्रम का उत्पाद – विज्ञान – हमेशा अपने मूल्य से कम आँका जाता है, क्योंकि इसे पुनः उत्पादित करने में लगने वाले श्रम-समय का इसके मूल उत्पादन में लगने वाले श्रम-समय से कोई सम्बन्ध नहीं होता.
  44. सामाजिक प्रगति समाज में महिलाओं को मिले स्थान से मापी जा सकती है.
शेयर करो
error: Content is protected !!