50 Deepak Chopra Quotes in Hindi | दीपक चोपड़ा के अनमोल विचार वचन



Deepak Chopra Quotes in Hindi

दीपक चोपड़ा के अनमोल विचार वचन

दीपक चोपड़ा कोट्स इन हिंदी में

  1. ब्रह्माण्ड में कोई भी टुकड़ा अतिरिक्त नहीं है. हर कोई यहाँ इसलिए है क्योंकि उसे कोई जगह भरनी है, हर एक टुकड़े को बड़ी पहेली में फिट होना है.
  2. दिमाग और शरीर के बिच में कोई अंतर नही है, ये आपस में जुडे हुए है.
  3. हम सभी सच्चाई को अपनाने के इरादे से ही जीते है.
  4. अहंकार, दरअसल वास्तविकता में आप नहीं हैं. अहंकार आपकी अपनी छवि है, ये आपका सामजिक मुखौटा है ये वो पात्र है जो आप खेल रहे हैं. आपका सामजिक मुखौटा प्रशंशा पर जीता है. वो नियंत्रण चाहता है, सत्ता के दम पर पनपता है, क्योंकि वो भय में जीता है.
  5. जिस इंसान में अलग-अलग तरह से व्यवहार करने की आदत होती है वह इंसान ज्यादा सावधानी बरतने वाला होता है.
  6. हर इंसान गर्भ में भगवान ही होता है. और जन्म लेना ही उसकी एक इच्छा होती है.
  7. लोग सोचते है की ध्यान लगाना ही सबसे बडा कार्य है. आपको इन लोगो की तरह नही सोचना चाहिये.
  8. आपको अपने भीतर वो जगह खोजनी होगी जहाँ कुछ भी असंभव नहीं है.
  9. बुरी बातो को अच्छी बातो में बदलना आप पर ही निर्भर करता है.
  10. आप जिस तरह सोचते हैं, जिस तरह व्यवहार करते हैं, जिस तरह खाते हैं, वो आपके जीवन के 30 से 50 साल तक प्रभावित कर सकता है.
  11. हमारे विचार और हमारा व्यवहार हमारी प्रतिक्रिया का ही परिणाम है. कई बार ये हमारे डर पे भी निर्भर करते है.
  12. आध्यात्मिक लोग समृद्ध होने से नही शर्माते.
  13. एक अच्छा श्रोता बनने के लिये थोड़ी सावधानी और थोडा ध्यान रखने की जरुरत है, इससे आपके भीतर भावनात्मक ऊर्जा का संचार होगा.
  14. एक बार यदि समाज की संरचना तबाह हो गयी तो उसे दोबारा बनने में कई पीढ़िया लग जाती
  15. उत्कृष्टता के समय में जब समय खड़ा होता है तब आपकी जैविक घडी रुक जाती है. जोश हमेशा सावधानी वाले कार्यक्षेत्र में ही आता है जहा कोई समय नही होता है.
  16. आनंदित रहना बच्चों का स्वभाव ही होता है.
  17. ध से ऐसा पता चला है की खुश रहने का सबसे अच्छा तरीका अपने हर दिन को खुश बनाना है.
  18. यदि इस पल तुम्हारे और मेरे दोनों के मन में किसी के भी खिलाफ नफरत और अहिंसा का एक भी विचार आया तो समझ जाइये की हम दुनिया को चोट पहोचा रहे है.
  19. सूली पर चढाने की प्रतीकात्मक भाषा मतलब पुराने मिसालों की मृत्यु है, पुनर्जीवन से आप सोचने के नये रास्तो पर छलांग लगाते हो.
  20. इंसान की इच्छा उसके द्वारा जमा की हुई चीजो से भी आगे की होती है
  21. आपको हर सुबह कम से कम 2 घंटे तो भी ध्यान लगाना चाहिये. और यह मेरी दैनिक दिनचर्या का ही एक भाग है, मै रोज 4 AM बजे उठता हु और मुझे यह दिनचर्या बहोत पसंद है.
  22. तीन अलग दिशाओ में दौड़कर आप कोई भी हल नही निकाल सकते.
  23. विज्ञान अन्धविश्वास और अकारण के लिये तर्क-संगत विचार और विश्वास बनकर खडा होता है.
  24. ये दुनिया तेज़ी से बेहतरीन विकासक्रम, रचनात्मकता और संक्षेपण की तरफ बढ़ रही है.
  25. यदि आप जिंदगी में सही में कोई बड़ा और महत्वपूर्ण काम करना चाहते हो तो आप कुछ भी खुद के भरोसे नही कर सकते. और ऐसे काम को करने के लिये आपको अपने दोस्तों और सहयोगियों की आवश्यकता जरुर पड़ेगी.
  26. आपकी मौजूदगी का सबसे बड़ा रहस्य आपका अस्तित्व ही है.
  27. उथल-पुथल और अराजकता के बीच में अपने अंदर शांति बनाये रखे.
  28. एक अच्छा बदलाव हमें अपने जीवन में ही दिखाई देता है, क्योकि कोई भी इंसान जैसा बचपन में होता है वैसा बड़ा होने के बाद नही होता.
  29. हमारे शरीर को मिलाकर पूरी शारीरिक दुनिया एक पर्यवेक्षक की प्रतिक्रिया है. हम जैसे दुनिया के अनुभव का निर्माण करते है वैसे ही हम अपने शरीर का भी निर्माण करते है.
  30. सफलता तभी मिलती है जब लोग मिलकर काम करते है और असफलता तभी आती है जब अकेले काम करते है.
  31. जो कुछ भी होता है वह आपके एहसास की वजह से रहस्यमयी तरीके से होता है, यह वो रास्ता होता है जहा पुराने प्रतिमान अचानक ही मरने लगते है.
  32. स्व-जागरूकता केवल विश्राम या व्यायाम नही है. बल्कि इससे आपकी क्रिया और गतिशीलता दोनों को ही विश्राम मिलता है. तंत्रज्ञान इसमें सहायक हो सकता है.
  33. निर्धारित की हुई कोई भी शारीरिक सच्चाई नही है, दुनिया के बारे में कोई एक अवधारणा नही है, वो तो हम बस दुनिया के तंत्रिका तंत्र के हिसाब से बहोत सी अवधारणाएँ करते है और वातावरण के हिसाब से अपने जीवन का अनुमान लगाते है.
  34. वैश्वीकरण की शुरुवात मुक्त व्यापार, समृद्धि के बाटने और सीमाओ को खुला करने से ही होती है. ऐसा करना निश्चित ही अच्छा होंगा.
  35. हमें स्वयं को हम जो है उस हिसाब से शिक्षित करना चाहिये, और खुद ही असली पहचान को जानना चाहिये.
  36. दिमाग को कोई भी विचार रजिस्टर होने से पहले मस्तिष्क उसपर विचार करता है……हमारा द्वारा लिये गये हर एक कदम का असर दिमाग पर होता है…..और हम हमेशा से ही अपने दिमाग को ज्यादा गतिशील करने के बारे में सोचते है.
  37. आपके सोचने का तरीका ही आपके व्यवहार का तरीका है, आपके व्यवहार करने का तरीका ही आपके खाने का तरीका है, इसे अपनाने से ही आप अपने जीवन को 30 से 50 साल में प्रभावशाली बना सकते हो.
  38. हमें घमंड, तर्क और अनगिनत कारणों से दूर ले जाना चाहिये ताकि हम अपने भीतर शांति का निर्माण कर – आत्मा के राज्य को विकसित कर सके.
  39. हमें ऐसे वातावरण में रहना चाहिये जहा दिमाग जो चाहे उसे आसानी से पसंद कर सके न की गलत चीजो को चुनकर उनके साथ समझौता कर सके.
  40. आध्यात्मिकता मतलब अपने आप को बाहरी पहचान से आंतरिक जागरूकता में ले जाकर ब्रह्माण्ड की बातो को जानना है.
  41. आत्मजागरुकता का कोई महत्त्व नही होता. ये डरावना भी नही होता. इसे इससे कोई फर्क नही पड़ता की आप अपनेआप को बेवजह के दर्द में डुबो रहे हो.
  42. जब तक आप मानव शरीर में पानी, ग्लूकोस और इलेक्ट्रोलाइट नमक के मिलने या जागरूक होने के बिंदु को नही ढूंड लेते तब तक ये कोई मायने नही रखता की आपने उनके साथ कितनी बार प्रयोग किया है.
  43. आप और मैं अनंत विकल्पों का चुनाव कर सकते हैं. हमारे अस्तित्व के हर एक क्षण में हम उन सभी संभावनाओं के मध्य में होते हैं जहाँ हमारे पास अनंत विकल्प मौजूद होते हैं.
  44. जितनी हो सके उतनी लंबी जिंदगी जीना जरुरी नही की यही आपके दिमाग का सबसे अच्छा इरादा हो. क्योकि गुणवत्ता (क्वालिटी) और मात्रा (क्वांटिटी) कभी एक जैसी नही होती.
  45. यदि आप वर्तमान में जीते हो तो जो आप करना चाहते हो वो करने के जिंदगी आपको बहोत से मौके देती है.
  46. सकारात्मक वातावरण के बिना आप सकारात्मक विकल्पों का चुनाव नही कर सकते.
  47. आपके साथ हर समय बहोत सारी चीजे होगी लेकिन यदि आप उनमे हेरफेर करने की कोशिश करोगे तो इसका मतलब आप पूरी दुनिया के खिलाफ संघर्ष कर रहे हो और ये आपके लिये बहोत छोटी बात होगी.
  48. कर्म को आप जब सही तरीके से समझ लेते हो, तो फिर यह आपके लिये जानकारियों को स्पष्ट रूप से जानने की यंत्रणा का काम करती है.
  49. जिंदगीभर के लिये एक अच्छी सेहत पाने का रहस्य असल में उल्टा है – आपके शरीर को अपनी देखभाल करने दीजिये.


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